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DVT

मेरी चाय फिर से शुरू होना, और DVT के बारे में

बहुत मुश्किल से मेरी चाय छूटी थी, वह भी लगभग ३ वर्ष तक, ३ वर्ष तक मैंने दूध की चाय नहीं पी, दूध के बने उत्पादों को छोड़ दिया था, मतलब हालत यह थी कि घर में पनीर की सब्ज़ी बेटेलाल बनाते थे और हम केवल फ़ोटो खींचकर ही संतुष्ट हो लेते थे, फिर कोरोना आया तब भी हमने अपने ऊपर बहुत कंट्रोल रखा, चाय पीने की इच्छा होती थी, तो लेमन टी पी लेते थे, या गरम पानी ही पी लेते थे।

दूध के पदार्थ का सेवन करने से कोलोस्ट्रॉल में वृद्धि होती है, वैसे ही तेल वाली चीजें खाने से ट्राईग्लिसराईड बढ़ता है, तो सोचा कि ये जो ह्रदय में जाकर जमता है, जाता तो केवल एक ही जगह से वह है हमारा मुँह और स्वादग्रंथी जीभ, तो बहुत कोशिशों के बाद हम कामयाब हुए, हम यक़ीन रखते हैं कि केवल संभाषण ही नहीं करना है, उस पर अमल भी करना है, ऐसे ही दौड़ लगाने की बढ़िया से आदत लग गई थी, पर कुछ निजी समस्याओं के चलते धीरे धीरे वह भी छूट गई, बहुत ग़ुस्सा आता है अपने आप पर, जब अच्छी आदतें छूट जाती हैं।

अब हालत यह है कि लगभग सब चीजें वापिस से चालू हो गई हैं, हाँ चाय अब सुबह और शाम दो बार ही पी रहे हैं, परंतु बारबार चाय पीते याद यही आता है कि सीधे हम २ चम्मच शक्कर पी रहे हैं, कोलोस्ट्रॉल की इतनी मात्रा धमनियों में जा रही है, तेल का खाना खा रहे हैं तो ग्लानि खाते समय भी होती है, पर सच बताऊँ तो इस आमोद प्रमोद के चक्कर में मन की जीत हो रही है, जीभ पर बिल्कुल भी क़ाबू नहीं रहा। एक समय था जब कैरियर की शुरूआत की थी तब दिन में 8-10 चाय तो आराम से हो जाती थी, साथ ही चाय के बाद पान खाने की आदत भी बन गई थी।

इस बार यह चाय की आदत जनवरी २०२१ से फिर से लगी, पहले पापा अस्पताल में एडमिट थे, तो कोरोना के चक्कर में बाहर का खाना शुरू हुआ, चाय भी पी फिर एक सप्ताह के बाद घरवाली को एक सप्ताह के लिये एडमिट करवाया तो न न करते चाय, पका खाना, तेलीय खाना, नाश्ता सबकुछ की आदत लग गयी। पापा को कंजस्टिव हार्ड फेलियर हुआ था, ३ दिन सीसीयू में रहने के बाद अब ठीक हैं, घरवाली को DVT (Deep vein thrombosis) होने का पता चला, और दोनों ही खतरनाक सीरियस वाली बीमारियाँ हुईं, दिमाग का बिल्कुल दही हो गया। पापा अब बढ़िया से हैं।

घरवाली की तकलीफ़ देखते नहीं बनती, पहले एक महीना तो पूरे बिस्तर पर ही रहने को बोला था डॉक्टर ने, अब कहा है कि आराम के साथ साथ धीमे धीमे काम भी करो, अब इलाज २ वर्ष का है, DVT एकदम से नहीं होता, और पकड़ भी तभी आता है जब यह अपने पीक पर पहुँच जाता है, पहले पैरों में सूजन होती थी, फिर उतर जाती थी, कभी इस बारे में ध्यान ही नहीं दिया, फिर जब अक्टूबर से चलना भी मुश्किल हो गया तो डॉक्टर के चक्कर लगाये, डॉक्टर ने दर्द कम करने की दवाई दी, एक्स-रे भी करवाया, पर पता न चला, जब पैरों के लिंफ नोड्स में सूजन आई तब अल्ट्रासाउंड करवाने पर पता चला कि ये तो DVT है, याने कि अंदरूनी रक्तवाहिकाओं में रक्त का थक्का जम गया है, फिर डॉक्टर मित्र से सलाह की तो पता चला कि इस बीमारी के लिये हमारा प्राथमिक डॉक्टर कॉर्डियो वेस्कुलर सर्जन होना चाहिये, जिससे पता चल जाये कि यह रक्त का थक्का कहीं ह्रदय की ओर तो नहीं बढ़ रहा है।कॉर्डियो वेस्कुलर सर्जन ने इको कॉर्डियोग्राम करवाया तो वहाँ कोई समस्या नहीं मिली। और बताया कि आपके जो इंटर्नल सर्जन ने इलाज बताया है वही इलाज करना है, इलाज था कि पहले ४ दिन अस्पताल में भर्ती होकर खून के पतला होने के इंजेक्शन लगवाने थे, ओर फिर २ वर्ष तक ब्लड थिनर की टेबलेट चलेंगी।

DVT होने की कई वजहें होती है, एक मुख्य वजह यह समझ आई कि जिनका T3 एन्जाईम कम होता है, यह एन्जाईम शरीर में खून को पतला करने का काम करता है, वहीं विटामिन K जो कि खून गाढ़ा करता है, जैसे की हरे पत्तियों की सब्ज़ियाँ, बहुत ज़्यादा लेने पर यह समस्या पैदा हो जाती है, एक ही जगह ज़्यादा देर खड़े रहने से भी ये समस्याएँ होती हैं, जैसे कि सर्जन और शिक्षकों को ये बीमारियाँ बहुत आम हैं, तो उनको पैरों में Stocking पहनने चाहिये, जिससे रक्त का प्रवाह बना रहता है।

तो खैर यहीं से हमारा चाय, नमकीन, बिस्कुट, बाज़ार का नाश्ता सब कुछ चालू हो गया, अब फिर से कंट्रोल करने की शुरूआत करनी है। देखते हैं कि कितनी जल्दी सफल हो पाते हैं।