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सफलता और असफलता घबराना क्यों

सफलता और असफलता घबराना क्यों
इंसान असफलता से घबराता है, क्योंकि इस प्राणी का सफलता का प्रतिशत ज्यादा होता है। पर क्या आपको पता है शेर जो कि जंगल का राजा होता है, जिससे सब डरते हैं उसके शिकार की सफलता का प्रतिशत मात्र 25% होता है और 75% बार उसे असफलता मिलती है, मतलब उसे 4 बार शिकार करने पर मात्र 1 बार ही शिकार होने की संभावना होती है। पर शेर शिकार करना छोड़कर घास, फूल पत्ती नहीं खाने लगता, क्योंकि प्रकृति का अपना नियम है, सबके खानपान निश्चित हैं। असफलता से दुखी न होकर अपनी प्रकृति पहचानें व सफलता की ओर अग्रसर हों, शेर बनने की जरूरत नहीं पड़ेगी, उससे पहले ही सफलता मिलनी निश्चित है, पर आपको उतनी ही लगन से व एकाग्रचित्त होकर सफलता के लिये प्रयासरत होना होगा।
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एंटरप्रेन्योरशिप के लिये आइडिया

अपने आइडिया लिखने आने चाहिये, अच्छी तरह से उन्हें प्रस्तुत भी करना आना चाहिये, पर एंटरप्रेन्योरशिप में आइडिया अगर केवल 1 पेज का भी हो, तो भी बहुत कुछ हो जाता है। इसी को फॉलो करते हुए कल बेटेलाल ने एक आइडिया जनरेशन किया, शुरुआत है, आगे बात तो बननी ही है, किसी न किसी आइडिया को हिट तो होना ही है, बस उसके पहले बहुत सारे आइडिया सोचने होंगे, लिखने होंगे, तभी तो अनुभव आयेगा।


कोरोना से बचकर रहना होगा

लोगों को जो लगता है वह लगता रहे, मुझे लगता है कि वैक्सीन का हो हल्ला है, दूर दूर तक इसके अते पते नहीं हैं, आज की दुनिया स्वार्थी व महाबेईमानी है वे बस ऐसे ही सपने बेचते रहेंगे। लगता कि कम से कम अगले 5 से 6 वर्ष तो घर के अंदर ही गुजारने होंगे, नहीं तो बाहर राक्षस हवा में बैठा इंतजार कर ही रहा है। बाहर जाने से बचें, बस यही एकमात्र उपाय है।
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ज्यादा रिश्ते बनाने से ओर उनको निभाने से हम कमजोर व दुखी होते हैं। अंतरतम में झाँकें, व सुखी रहें, यही एक कुँजी है।

811 Kotak में अपने नाम से 5 मिनिट में नया एकाउंट खुलवाया

कल से बेटेलाल की इंडिपेंडेंट बैंकिंग शुरू हो गई, 811 Kotak में अपने नाम से 5 मिनिट में नया एकाउंट खुलवाया और कुछ पैसे ट्रांसफर किये, तो बेटेलाल खुश कि अब उनके पास ऑनलाइन बैंकिंग है, UPI ID, NEFT, IMPS सब कुछ है। वहीं से सीधे म्युचुअल फंड में भी निवेश कर सकते हैं।
बेटेलाल के नाम से खाता तब तक ऑनलाइन खुल नहीं सकता जब तक कि वे 18 वर्ष के न हो जायें, पर मनी मैनेजमेंट लेसन अभी से सीखना जरूरी है, जितना जल्दी सीखेंगे, उतना अच्छा रहेगा।
Kotak 811 में अमेजन का ₹250 का ऑफर चल रहा था तो हमने थोड़े ज्यादा पैसे जमा कर दिये, बेटेलाल कहने लगे अरे डैडी ये बहुत ज्यादा हैं, हमने कहा चिंता न करो सोमवार को वापिस ले लेंगे, बस जितने तुम्हारे हैं उतने ही इस खाते में रहेंगे। फिर भी कहते रहे कि डर लग रहा है।
फिर कहा कि कुछ ऑनलाइन खरीदना है, पर ऑनलाइन खरीदने का कॉन्फिडेंस नहीं है, जब भी ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करूँगा, आपके साथ बैठकर ही करूँगा, हमने कहा कि यह भी ठीक है।
#आत्मनिर्भर #भारत की ओर बढ़ते कदम
कुछ अन्य फेसबुक स्टेटस
अगर आपको समझ न आ रहा हो कि कौन सा पिज़्ज़ा ऑर्डर करें, मार्गरिटा आर्डर कर लीजिये।
मार्गरिटा पिज़्ज़ा वैसा ही है, जैसे म्युचुअल फंड में इंडेक्स फंड, जब कोई म्युचुअल फंड न समझ आये तो इंडेक्स फंड ले लेना चाहिये।
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आज सुबह मैं सपने में 10 वर्ष आगे पहुँच गया था, तो घूमता रहा भविष्य में, जब आँख खुली तो वर्तमान में,
बस कुछ शेयर्स की उस समय की कीमत याद रह गई, पर यहाँ पब्लिकली क्या किसी की प्राइवेटली भी नहीं बताऊँगा।
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आज फ़िल्म देखी “आपला मानूस”, मराठी फिल्म है, नाना पाटेकर ने पूरी फिल्म में समां बांध दिया, पारिवारिक परिस्थितियों में कैसे कैसे समीकरण बनते हैं, इस पर बहुत ही बारीकी से इस फ़िल्म की कहानी में काम किया गया है, कहानी में बेटे बहु व ससुर के संबंधों पर बहुत अच्छे से कार्य किया गया है, काश ऐसी फिल्में हिन्दी में भी बनती। एक बेहतरीन सस्पेंस थ्रिलर फिल्म जिसमें कहानी परिवार के रिश्तों के इर्दगिर्द घूमती है।

SIP से पैसा निकाला जाना चाहिये?

शेयर बाजार में उतार चढ़ाव आते रहते हैं, मेरे पास कुछ म्युचुअल फंड में SIP हैं जो कि लगभग 10 वर्षों से भी ज्यादा समय से चल रही हैं और लगभग सभी पर बेहतरीन रिटर्नस मिल रहे हैं, पर इसका मतलब यह तो नहीं कि मैं उनका प्रॉफिट बुक कर लूँ, जब जरूरत होगी, तो ही SIP से पैसा निकाला जाना चाहिये।
मैंने शेयर बाजार में कई गिरावट के दौर देखें हैं, पर कभी मन ही नहीं हुआ, उन्हें निकालने का।
जी हाँ मैं शेयर बाजार को भी समझता हूँ, और म्यूचुअल फंड को भी, और मुझे गणित भी आती है, और यह भी ध्यान रखें कि आप शेयर बाजार में पैसा लगाने से थोड़ा बहुत कमाने से बहुत अमीर नहीं बन जाओगे, बस आपके पास कुछ हिस्सा अपने निवेश का ऐसा भी होना चाहिये जो कि शेयर बाजार में निवेशित हो।
जिसने पेशेंस से काम लिया है, वही सिकंदर है। संयम रखिये, अपना निवेश लंबे समय के लिये निवेशित रहना सीखिये।
यह स्टेटस अपने फेसबुक पर लिखा था, इस पोस्ट पर आये कमेंट्स
Kajal Kumar
2 म्यूच्यूअल फंड में 36 महीने की एसआईपी थी, दोनों खत्म हो चुके हैं. समझ नहीं आता कि यह पैसा निकाल लिया जाए अभी रहने दिया जाए
Vivek Rastogi
Kajal Kumar

इसलिये हमेशा ही परपेचुअल करवानी चाहिये, फिर जब मर्जी हो बंद कर दो

Alpana Sharma
Make different baskets is my funda
Shailendra Kumar Jha
Post me likhi baten bhai log pi jate hain…au ant me diye gaye nirdesh pe dhyan hi nahi dete
Rounak Jain
मेने आपसे hi inspire होकर इन्वेस्टमेंट चालू किया और आज ज़ोरदार कंडिशन में हु 😃
Vivek Rastogi
Rounak Jain

वाह, ऐसे कमेंट बहुत खुशी देते हैं ❤️

Kamal Sharma
इस बाजार का गणित सरल है, जो इस गणित को समझ गया, वह अपने निवेश पर कमाई करेगा।
Rakesh Kumar
SIP me kaise investment kre
निवेश करने के बहुत से तरीके हैं, अब तो बहुत ही आसान हो चुका है, आप कोई भी म्यूचुअल फंड की एप्प या किसी एग्रीगेटर की एप्प इंस्टाल कर लीजिये और मजे में निवेश करिये।

आम पुराण, आम इतना स्वादिष्ट क्यों होता है?

धरती पर आम कैसे आया, क्यों आम फलों का राजा है, आम इतना स्वादिष्ट क्यों होता है?, इसके लिये यह आम पुराण हमारे मित्र देवेन्द्र कौशिक जी की अतिथि पोस्ट है।

💐💐ॐ हरि तत्सत 💐💐

द्वापरयुग और त्रेता युग के बाद धरती पर शुरू हुआ क्रेता युग…क्रेता युग में मनुष्य रस और स्वाद के लिए इतना ज्यादा ईर्ष्यालु हो गया कि स्वर्गलोक की सुख समृद्धि और ऐश्वर्य देख कर भी मनुष्य के मन में ईर्ष्या उठने लगी।
स्वर्गलोक के विरुद्ध मनुष्यों ने जगह जगह धरना प्रदर्शन शुरु कर दिया… देवताओं से ईर्ष्या के कारण धरती पर मनुष्यों द्वारा देवस्थानों के रास्ते रोकना, व्रत उपवास ना करना आदि का प्रचलन हो गया… यहाँ तक की पंडितों ने भी विधिवत पूजा के स्थान पर बिना धूप दीप की सांकेतिक पूजा करनी शुरू कर दी….

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लॉकडाउन में बेटेलाल

लॉकडाउन में बेटेलाल ने जमकर खाना बनाने का लुत्फ उठाया है, केवल वीडियो देखकर, थोड़ी अपनी अक्ल लगाकर जो पारंगत हुए हैं, काबिले तारीफ है।

खाना बनाना बहुत आसान नहीं है, इसमें सबसे मुश्किल है खाना बनाने के लिये अपने आप को तैयार करना। खाना बनाना दरअसल केवल महिलाओं का ही काम समझा जाता है, पर बेटेलाल कहते हैं कि जो स्वाद मेरे हाथ का होगा, वह किसी और के हाथ में नहीं, ध्यान रखना। वाकई स्वाद तो है।

आटा गूँथना भी रख स्किल है, रोटी, पराँठे, पूरी, बाटी, बाफले, मैदा सबको अलग अलग तरह से गूँथा जाता है। पर बेटेलाल अब इन सबमें परफेक्ट हो चुके हैं। उन्हें नान बहुत पसंद है, जिस दिन खाने की इच्छा होती है सबसे पूछ लेते हैं, फिर नान और पनीर की सब्जी बनाते हैं।

यही हाल इनका गेमिंग में है, पब्जी में पता नहीं कौन सी रैंकिंग हो गई है,चेस खेलने का शौक है तो पता नहीं कहाँ कहाँ के चेस के मैच देखते रहते हैं, फिर यूट्यूब के वीडियो, मूवीज और वेबसिरिज में लगे रहते हैं। पढाई जिस दिन मूड होता है किसी एक विषय का पूरा चेप्टर निपटा देते हैं। वीडियो में भी कुछ अलग ही देखते हैं, जैसे शार्क टैंक और भी कई एंटरप्रेन्योरशिप के कुछ अलग अलग।

रोको टोको मत बस, जो करना चाहते हैं करने दो, हम कहे, करो भई करो, इन सबका भी कुछ विधान ही होगा।

जब हमने दोस्त के साथ आम का डिनर किया

यह वाक़या हमें इसलिये याद आ गया जब हमने दोस्त के साथ आम का डिनर किया। पिछले वर्ष हम 1 सप्ताह के लिये मुंबई गये थे, यही समय था, खूब आम आ रहे थे। हम अपनी रॉ वेगन डाइट पर थे, घर से बाहर इस प्रकार की डाइट पर रहना थोड़ा मुश्किल होता है। परंतु हमने अच्छे से पालन किया।

सुबह ऑफिस जाते समय होटल के रेस्टोरेंट से जहाँ अपना ब्रेकफास्ट कॉम्प्लीमेंट्री था, पर हम ब्रेकफास्ट नहीं करते थे, तो हम अपनी 1 लीटर मिल्टन की बोतल में तरबूजे का ज्यूस ले जाते थे, और दोपहर में भूख लगती थी तो वहीं बीकेसी के बैंक की कैंटीन में मोसम्बी ज्यूस पी लेते थे।

शाम को होटल आते हुए, ककड़ी, गाजर, शिमला मिर्च, प्याज ले आते थे, 1 या 2 दिन हमने सब्जी का सलाद खाया, चाकू, बारीक सलाद काटने की मशीन, थाली सब साथ लेकर गये थे। फिर ठेलों ओर आम दिखने लगे, बढ़िया दशहरी, लँगड़ा।

बस फिर लँगड़े आम का ही शाम का भोज होता था, शाम को आम 2 दिन के हिसाब से लाते और होटल के कमरे में फ्रिज में डाल देते तो अगले दिन बढ़िया ठंडे आम मिलते थे।

हमारे मित्र होटल पर मिलने आने वाले थे, हमने उनसे पूछा कि डिनर साथ करेंगे, वो बोले हाँ करेंगे, वे आये मिलने, तो हमने कहा चलो आओ डिनर कर लो रेस्टोरेंट में, उन्होंने हमसे पूछा और तुम, हमने कहा पका तो खा नहीं रहे हम, हम तो डिनर में आम खाते हैं, मित्र बोले फिर आज हम भी डिनर में आम ही खायेंगे। हम दोनों ने छककर आम खाये।

आम के सीजन में डाइट का मजा है, सुबह 4-5 आम खाओ, फिर पूरी दोपहर तरबूजे का रस पियो और फिर शाम को वापिस से 5-6 आम खा लो। वजन मेंटेन रहेगा।

अंग्रेज opportunity को ओप्पोर्तुनीति कहते हैं

ये अंग्रेज opportunity को ओप्पोर्तुनीति कहते हैं और हम त की जगह च कहकर ओप्पोरचुनुटी कहते हैं। यह फेसबुक की बातचीत हुई, बढ़िया लगी तो ब्लॉग पोस्ट बनाकर सहेज ली।

Pawan Kumar बहुत शब्द हैं ऐसे, व्हाट को वाट बोलते हैं

हमने कहा – वात कहते हैं

नुतन नारायण भारतीय जलवायु के कारण……….. ठन्डे इलाकों में रहने वाले मुँह कम खोलकर शब्द उच्चारण करते है, इस कारण से कुछ ध्वनियों का लोप है उनकी भाषा मेंl

Vikas Porwal एक बार एक रशियन भाई से मुलाक़ात हुयी, aperture को अपरतूरे बोल रहा था

Mahfooz Ali इंडिया का फ़्यूट्युरे अब डार्क है…

Neeraj Rohilla भारत मे अधिकतर अपोर्चुनिटी कहते हैं, बाहर लगभग ऑपरचूनिटी; जैसे भारत मे अधिकतर इकोनोमिक कहते हैं और बाहर एक्नॉमिक ।
केवल भारत में ही इन सब बातों पर ध्यान देते हैं, अंग्रेजी बोलने वाले देश अंग्रेजी खराब होने पर ध्यान नहीं, अगला क्या कहना चाह रहा है इस पर ध्यान देते हैं, केवल भारत मे ही हमने देखा है कि लोग खराब अंग्रेजी या प्रोनांशियेशन पर लोगों को जाहिल डिक्लेयर कर देते हैं।

हमने कहा – यही हमने भी देखा, ग्रामर पर ध्यान दिलाकर नीचा दिखाने की कोशिश हमारे ही लोग करते हैं, पर अन्य देशों के लोगों का मैन फोकस होता है कि काम की बात आप तक पहुँचनी चाहिये।

Bs Pabla मतलब
ये हमारे ग्रंथों में बताई गई कोई नीति है? जो अंग्रेज चुराके ले गए थे 🤔

Kajal Kumar हमारा काम ‘इंडियन इंगलिश’ से ही काम चल जाता है क्योंकि वे हमसे यही expect भी कर रहे होते हैं

Vijender Masijeevi भाषा विज्ञान में इसे कंट्रास्टिंग एनालिसिस (व्यतिरेकी विश्लेषण) कहा जाता है। अपने जो भाषा पहले सीखी है उसकी ध्वनियां बाद में सीखी भाषा को प्रभावित करती ही हैं। हमारे यहां पूरा ट वर्ग और त वर्ग है इन ध्वनियों का उनके पास इस वर्ग की ध्वनियां कम हैं लिहाज हम इस वर्ग की ध्वनियों में बहुत फिजूलखर्ची करते हैं। रवींद्रनाथ ठाकोर का टैगोर होना तो सब जानते ही हैं, वो इसी वजह से है।

 

पर्सनल लोन मात्र 3% पर

कल एक मैडम का कॉल आया, हमसे बोला कि HDB फाइनेंसियल से बोल रहे हैं, और स्पेशल ऑफर चल रहा है, पर्सनल लोन मात्र 3% पर दे रहे हैं, हमारा दिमाग चकरघिन्नी कि कोई 3% पर पर्सनल लोन कैसे दे सके है। फिर हमने पूछा ये मंथली ब्याज है न तो 36% हो गया वो बोलीं नहीं सर 3% वार्षिक।

फिर हमने पूछा अच्छा अगर हम 1 लाख लोन लेंगे तो हमको ₹3000 ब्याज देना होगा न, वो बोलीं नहीं सर वर्ष का इतना देना होगा, इसी बीच हम HDB की वेबसाइट खोलकर पूरा गणित समझने की कोशिश कर रहे थे। पर कहीं भी 3% वार्षिक वाला स्पेशल ऑफर नहीं था, हमने बताया मैडम को, तो वे बोलीं यह ऑफर केवल हमारे पास उपलब्ध है 😂😂

फिर वो पूछीं कि आपको लोन लेना है, हमने कहा हम तो आज तक लोन ही नहीं लिये, हम लोन नहीं लेते, लोन ले लें तो नींद उड़ जाती है। बस यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि 3% पर आप कैसे लोन बाँट रहे हो? मैडम तुनक गईं हुँह लोन लेना नहीं है पर जानकारी पूरी चाहिये। हमने कहा मैडम बात यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि HDB इतने कम ब्याज पर लोन कैसे दे रहा है? बस फिर फोन काट दिया।

मुंबई से उज्जैन एक कूपे में 6 सीटों पर 14 लोगों की यात्रा

जब मुंबई में रहते थे, तो हम कुछ मित्र किराये का एक फ्लेट लेकर रहते थे, और अधिकतर उज्जैन या इंदौर के थे, और लगभग हर सप्ताह हम बोरिवली से उज्जैन की ट्रेन शाम 7.40 पर पकड़ते थे, ट्रेन का नाम है अवंतिका एक्सप्रेस, ट्रेन शनिवार सुबह 7 बजे उज्जैन पहुँच जाती थी और रविवार शाम को फिर से शाम 5.40 पर यह ट्रेन बोरिवली के लिये चलती थी, तो बोरिवली सोमवार सुबह 5 बजे पहुँच जाते थे। थोड़ी देर सोकर फिर तैयार होकर ऑफिस निकल जाते थे। यह बात है लगभग 2007 की, उस समय अवंतिका एक्सप्रेस में रिज़र्वेशन आसानी से तो नहीं मिलता था, पर ऑनलाइन रिज़र्वेशन के कारण आसानी थी। और जैसे ही 3 महीने बाद का रिज़र्वेशन खुलता था, हम लोग आने जाने का रिज़र्वेशन करवा लेते थे।
 
त्योहार के दिनों में हम लोग ज़्यादा लोग होते थे, तो मैं हमेशा ही एक टिकट पर मिलने वाली 6 सीटें रिज़र्व कर लेता था, क्योंकि हमारे एक मित्र हैं वे बहुत दयालु हैं, हमारे पास जब सीटें लिमिटेड होती थीं तो हम चुपचाप अपनी सीट पर बैठ जाते थे, और ये महाशय पूरी ट्रेन में प्लेटफ़ॉर्म पर घूमकर जिनके पास वेटिंग टिकट होता था, उनको अपनी सीट पर आमंत्रित कर आते थे, हमें खैर ग़ुस्सा तो बहुत आता था, पर उनकी दरियादिली देखकर अपनी मित्रता पर गर्व भी होता था। ऐन समय पर ऐसे बहुत से मित्र मिल जाते थे जिनके पास कन्फर्म टिकट नहीं होता था, पर हमारे पास ज़्यादा सीटें होने से हम 1 कूपे में हर सीट के हिसाब से 2 और बीच में बची जगह पर, जहाँ पैर रखते हैं, वहीं 2 लोग सो जाते थे, इस हिसाब से 14 लोग एक कूपे में आ जाते थे।
 
कई बार उन मित्र से बहुत ख़फ़ा भी रहा, वो चुपचाप रहते हमें मनाते रहते, खैर आज याद करता हूँ तो बहुत अच्छा लगता है।
 
ऐसे ही कई किस्से जो ट्रेन के हैं, याद आते रहते हैं, लिखता रहूँगा।

चीन से ही विश्वयुद्ध की शुरुआत है

यही विश्वयुद्ध की शुरुआत है, इस पर हमने फ़ेसबुक पर एक स्टेटस डाला था जिसमें बताया गया था कि जर्मनी ने चीन को 130 बिलियन पौंड का बिल कोरोना वायरस के लिये भेजा है, जिससे बीजिंग में सरसराहट शुरू हो गई है। ख़बर की लिंक यह रही –

इस पर फ़ेसबुक मित्रों के कमेंट जिनमें से अधिकतर पुरातनकालीन हिन्दी ब्लॉगर हैं –

Kajal Kumar I think this is the estimation done by some newspaper, and not that the Government of Germany has raised the invoice.
Vivek Rastogi Kajal Kumar हाँ है तो ऐसा ही कुछ, पर धुँआ तो तभी उठता है जब आग लगी हो।

Anshu Mali Rastogi हां, जिस तरह के हालात बन रहे हैं, उसे देखकर तो यही लग रहा है कि युद्ध की संभावना बन रही है। अमेरिका भी चीन के पीछे हाथ धोकर पड़ा है। चीन ने अपना नुकसान जो किया सो किया पर पूरी दुनिया का बड़ी मात्रा में नुकसान किया है।

Vivek Rastogi Anshu Mali Rastogi अपन कब बिल भेजेंगे, पता नहीं, भेजेंगे कि भी नहीं, यह भी पता नहीं

Anshu Mali Rastogi समय ही बताएगा कि आगे हम क्या करेंगे। करेंगे भी कि नहीं या भक्ति में ही तल्लीन रहेंगे।

Kajal Kumar Anshu Mali Rastogi अमेरिका, केवल छोटे-मोटे देशों पर ही हमला करता है बड़े देशों पर हमला करने की उसकी औकात नहीं है. वरना वह USSR के ख़िलाफ़ केवल cold War में ही न बना रहता. चीन-सागर पर कब्जा कर चुका है, अमेरिका कुछ ना कर सका. एक कृत्रिम टापू भी बना लिया अमेरिका वहां भी कुछ नहीं कर सका. केवल व्यापारिक प्रतिबंध की बात कर सकता है, लेकिन उस पर भी इसे डर है क्योंकि चीन के पास अमेरिका के इतने ट्रेजरी बांड है कि वह, किसी भी दिन चाहे तो अमरीका की अर्थव्यवस्था को गिरा सकता है

Vivek Rastogi Kajal Kumar चीन ने बहुत सशक्त रणनीति बनाई है, आसपास के गरीब देशों को लोन दे देकर, बढ़िया इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करवा दिया, चीन को पता था कि यर गरीब देश पैसा नहीं चुका पायेंगे, बिल्कुल पुराने लाला की तर्ज पर अब को सबको अपने हाथ की कठपुतली बनायेगा।

Anshu Mali Rastogi वैसे, काजल भाई मुझे ये सारा मामला अर्थव्यवस्था पर आधिपत्य या एकाधिकार का ही अधिक लगता है। आप देख रहे होंगे, चीन इस मामले में खुद को बड़ी आसानी से बचा ले जाना चाह रहा है। खुद बेचारा बन अमेरिका ही नहीं पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था के साथ खिलवाड़ कर रहा है। बेशक, कोरोना में उसकी ही भूमिका है पर बिल्ली के गले में घण्टी बांधे कौन।
रही बात भारत की तो यहां कोई उम्मीद करना बेईमानी ही होगा।
क्या बोलते हो।

Anshu Mali Rastogi आप सही कह रहे हो विवेक भाई।

Vivek Rastogi Anshu Mali Rastogi अब अमेरिका अकेला नहीं है, यह बात चीन को भी अच्छे से समझ में आ रही है, इसलिये अब चीन क्या करता है, वह देखना जरूरी है।

Anshu Mali Rastogi माना कि अमेरिका अकेला नहीं है पर मुझे लगता है अन्य देश अभी युद्ध को टालना ही बेहतर समझेंगे। क्योंकि अभी उनके लिए अपने नागरिकों की जान बचाना प्राथमिकता में होगा। बाद में देखा जाएगा कि क्या करना है। पर चीन को बहुत अधिक आर्थिक नुकसान झेलना होगा, ऐसी संभावना कम ही लगती है। चीन बड़ा निर्दयी मुल्क है।

Vivek Rastogi Anshu Mali Rastogi बात आपकी सही है, अभी प्राथमिकता अपने नागरिकों को बचाने की है, पर इसका बहुत बड़ा नुक्सान चीन को किसी न किसी रूप में भुगतना ही होगा, अभी ऐसा भी लगता है कि विश्व की चौधराहट अमेरिका के हाथ से निकल सकती है और उस चौधराहट को या तो चीन ही हथियायेगा या फिर यूरोप के कुछ देश मिलकर विश्व चलायेंगे, एशिया के किसी मुल्क में चौधराहट करने का दमखम है नहीं।

Anshu Mali Rastogi सही। वैसे, ये मौका अभी भारत के हाथ में भी है कि वो चीन और अमेरिका को मात दे दे। पर यहां समस्या वही है कि बातें ऊंची-ऊंची और जमीनी हकीकत भिन्न। अमेरिका की चौधराहट तो ध्वस्त होनी ही थी- बहाना कोरोना बन गया। रही बात यूरोप या एशिया के देशों की तो अभी वक्त लगेगा लंबा। अमेरिका के बाद चीन ही है। हम विरोध चाहे चीन का कितना ही कर लें किंतु उसके प्रति निर्भरता से मुंह न मोड़ पाएंगे। महामारी के निपटते ही हम अपने-अपने खोलों में वापस लौट आएंगे।

Vivek Rastogi Anshu Mali Rastogi हमारे यहाँ जितने भी वीर हैं वे फेसबुक और ट्विटर वीर हैं, कामधंधे में इन्नोवेशन करने की कह दो तो नानी मर जाती है, सब केवल शब्दों के महारथी हैं, कितने लोगों ने अपनी खुद की प्राइवेट लेब खोलकर कोविड वायरस की दवाई बनाने की शुरूआत की, अनपढ़ों गँवारों के बस की बात नहीं, बस ये लोग केवल गरिया सकते हैं। काम धाम इनको कुछ करना नहीं है, इनके बूते पर भारत क्या खाक चौधराहट करेगा, रात दिन मेहनत करना होगी, वो भी फेसबुक और ट्विटर पर नहीं, जमीनी हकीकत पर, अगर भारत की आधी जनता भी जी जान से जुट जाये और केंद्रीय नेतृत्व असरकारक हो, तो हम चौधराहट के लिये अग्रसर हो सकते हैं। पैसा कमाना वो भी बाहर के देशों से बच्चों का हँसी खेल नहीं है।

Anshu Mali Rastogi आपसे सहमत हूं।
हमारे यहां लोगों के साथ खुशफहमी यह है कि वे 24X7 किसी न किसी दल, नेता और संगठन की भक्ति में लीन रहते हैं। ऐसे में उनसे किसी ऊंचे या गंभीर काम की अपेक्षा करना बेमानी ही है।

Vijender Masijeevi चीन को दुनिया का तब्लीगी जमात बनाने की कोशिश है- इस्लामोफोबिया की तर्ज पर एक सिनो फोबिया भी चल रहा है। ऐसे किसी युद्ध, भले ही वह केवल आभासी, आर्थिक और वाक युद्ध भर हो, के दूरगामी बुरे प्रभाव होंगे।

Neeraj Rohilla Vijender Masijeevi चीन इतना भी मासूम नहीं है, इससे छोटी घटनाओ पर संग्राम हो चुके हैं। वैसे पूरी दुनिया सिवा चीन पर खिसिया जाने के अलावा फिलहाल तो कुछ और नहीं कर पायेगी लेकिन इसका लॉन्ग टर्म नुकसान चीन को जरूर होगा। हां, मैन्युफैक्चरिंग अभी भी चीन में ही रहेगी

Ashutosh Pandit Vijender Masijeevi चीन की और जमात की कोई तुलना नहीं है दोनों के एजेंडा बिलकुल भिन्न है

Ashwin Joshi Agar ye world War 3 nahi he to bhi.।।।।।। This is the base ground या फिर कहे तो भूमिका जरूर है।।।।

अगर आपके भी कुछ कमेंट हों तो बताइयेगा हम यहीं जोड़ देंगे।