कौन प्रवीण ताँबे फ़िल्म हम परिवार के साथ देख रहे थे, तो उसमें एक समय ऐसा बताया गया है कि प्रवीण रणजी की प्रेक्टिस दिन में करते थे और परिवार चलाने के लिेये रात में बार में वैटर का काम करते थे। एक दिन वहाँ वे पत्रकार आते हैं जो उसे बिल्कुल पसंद नहीं करते हैं, तो प्रवीण को अपने वैटर होने पर बहुत ही शर्म महसूस होती है और वह बाद में रोता हुआ भी दिखाया है।
इस पर बेटेलाल का कहना था कि इसमें शर्म की क्या बात है, प्रवीण कोई चोरी तो कर नहीं रहा और न ही कोई भीख माँग रहा है, प्रवीण तो शान से अपने परिवार के लिये पैसा कमा रहा है, और ये सब सेक्रिफाईज वो केवल अपने रणजी खेलने के लिये कर रहा है, जब प्रवीण को यह पता है तो उसे शर्म किस बात की करनी चाहिये, यह समझ नहीं आया। शर्म तो उन पत्रकारों को अपने बर्ताव पर आनी चाहिये और उन्हें प्रवीण की इज़्ज़त करनी चाहिये थी।
फ़िल्म में बहुत सी ऐसी बातें हैं जिन्हें गौर से समझने की ज़रूरत है, व्यक्ति जो सोचता है कि वह केवल इसी में comfortable है तो वह ग़लत हो जाता है और सफलता नहीं मिलती, क्योंकि वह अपनी ख़ुद की प्रतिभा को ही नहीं पहचानता, जैसा कि प्रवीण के साथ हुआ, वह ख़ुद को मीडियम पैसा बॉलर समझता था, पर कोच ने उसकी प्रतिभा को पहचाना और कहा कि तुम लैग स्पिनर अच्छी करोगे, अपनी बॉलिंग बदलो, पहले प्रवीण ने कोच की बात नहीं मानी, पर जब ठोकर लगी तो प्रवीण ने नये जुनून से स्पिनर बॉलर की कला सीखी। यह अपने आप में बहुत बड़ी बात है, क्योंकि अपने आप में किसी एक समय के बाद बदलाव लाना वो भी बिल्कुल ABCD से बहुत मुश्किल होता है।
फ़िल्म बहुत अच्छी है, अगर न देखी हो तो ज़रूर देखें, अपने अंदर की कुछ कर गुजरने की आग कैसी होनी चाहिये, जुनून क्या होता है, यह देखने को मिलेगा। श्रैयस तलपा़ड़े का अभिनय ज़बरदस्त है, कई बार मेरी आँखों में आँसू आये, और उसके लिये उनका अभिनय ही ज़िम्मेदार है।
जिस कंपनी को देखो वही मेरे को लोन देने को पीछे पड़ा है।बजाज फाइनेंस वालों ने खूब परेशान किया, फिर हमने खूब परेशान किया, और एक एक शर्त को ईमेल पर लिखवाकर समझा, बेचारों को उसका जबाब देते पसीने आ गये, अब फोन नहीं करते, वो कहते हैं सर डॉक्यूमेंट दे दो तो लोन प्रोसेस करवा दें।इतना डिस्कशन किया कि बजाज फाइनेंस वालों ने सारे चार्जेस वगैरह सब फ्री कर दिए, ईमेल पर भी लिखकर दे दिया, अब हम कह रहे हैं, कि हमें तुम पर भरोसा नहीं, इसलिये अब यह लोन लेना ही नहीं।फिर एक फोन आया आज, सर बजाज फाइनेंस से बोल रहे हैं, हमने कहा दिया ईमेल पर सब कुछ है, पढ़ लो। अब सामने से कहा जाता है कोई बात नहीं टाटा कैपिटल से ले लो हमने कहा चलो करो डिटेल ईमेल, फिर तुम्हारा भी प्रोडक्ट समझते हैं। (हमारा फ़ेसबुक स्टेटेस)
बजाज फ़ाइनेंस का यह Flexi OD Loan आपको आपके CIBIL Score के आधार पर मिलता है, मतलब कि यह एक प्रकार से Line of Credit होती है। परंतु यहाँ एक बहुत बड़ा कैच भी है कि बजाज फाईनेंस इस लोन के लिये आपसे लगभग 6,999 रूपये Flexi Charges, 4,999 Processing Charges, 5,000 Cibil Fitment Charges और एक इंश्योरेंस भी बेचते हैं। हमें बताया गया कि आपके लोन में केवल Flexi Charges ही लिया जायेगा, जो कि Cashback के रूप में return भी हो जायेगा। हमने कहा कि आप जब Cashback दे ही दोगे तो आप इस Flexi Charge को Exceptional Approval लेकर लगाईये ही मत। पर इसका कोई जबाब नहीं आया। खैर इसके बाद हर वर्ष आप इस Flexi OD Loan को उपयोग करें या न करें, आपको .25% AMC Charges के रूप में भी भरना होंगे। वैसे ब्याज दर 1.25% प्रति माह होता है, जो कि हमें बताया गया कि 1.12% होता है।
खैर हमने फिर Decide किया कि हम यह Flexi OD Loan नहीं लेंगे।फिर एक मित्र से बात हुई वे एक निजी बैंक के कोर बैंकिंग IT Team में हैं, तो बोले बिजनेस से पूछ कर बताते हैं, अब वे कह रहे हैं, यार ये किस प्रकार का लोन है बिजनेस ने हमारा फोन भी उठाना बंद कर दिया है। लो बताओ।
अगर आप भी कोई लोन ले रहे हैं, तो ठोक बजाकर सोच समझकर लोन लें।
कोई भी कंपनी हो, हम हमेशा केवल price देखते हैं, कि price ऊपर जा रहा है या नीचे जा रहा है। हम कंपनी के बारे में कुछ जानने की कोशिश नहीं करते हैं। किसी भी स्टॉक को देखने के लिये Monthly, Weekly & Daily टाईमफ्रेम में सपोर्ट रेसिस्टेंस, ट्रेंड देखते हैं।
The master has failed more times, than the beginner has even tried.
हम लोग (Traders) निर्णय लेने के व्यवसाय में हैं, मतलब कि हमें रोज ही Buy ही Sell के लिये decision लेना होते हैं। Decision हमेशा ही सही नहीं हो सकते, परंतु अगर हम descpline follow करते हैं, किसी एक टेक्नीक को फॉलो करते हैं तो हमारे decision सही होने के chance ज्यादा हो जाते हैं, और गलत होने की probability कम हो जाती है।
The movement of the MARKET is the movement MASS Psychology.
किसी भी स्टॉक का Support & Resistance होता ही है।
इस दुनिया में रहने वाले हर प्राणी का एक pattern जरूर होता है। Trader
Charts are maps of collective human behavior.
Nothing gets plotted on a chart until people take action.
The art of Technical Analysis, is to identify a trend reversal at a relatively early stage and ride that trend, until the weight of the evidence shows or proves that the trend has reversed.
The farther back you can look, the farther forward you are likely to see. – Winston Churchill
इसलिये हमेशा हम किसी भी स्टॉक के price action को देखने के लिये historical data देखते हैं, हर स्टॉक का अपना अपना moving average, pattern होता है। अगर उस स्टॉक में काम करना है तो हमें उसे समझना जरूरी है। पर कोई तो ऐसा moving average होता ही होगा, जो हर स्टॉक के लिये काम करता ही होगा।
The index has corrected in every 2 year from the top.
These corrections are categorized –
11-17%
25-35%
40-60%
Historically, these corrections 13 to 21 months duration.
पिछले 20 वर्षों का data बताता है –
अक्टूबर नवंबर दिसंबर बाजार के लिये बढ़िया रहते हैं।
जनवरी, फरवरी, मार्च हमेशा ही bearish रहता है।
जब भी बाजार correct होता है तब वह उतनी ही तेजी से अपना high बनाता है।
जैसे कि मार्च 2020 – अक्टूबर 2020 के दौरान 39.57% correction हुआ था, परंतु केवल 18 महीनों में ही निफ्टी 147.69% बढ़ चुका था।
Rule of the Game –
Buy the strength and Exit the weakness
The stronger stocks always lead the market and forms new highs.
अगर benchmark स्टॉक 1% बढ़ता है तो Index 3-5% बढ़ता है, यह नियम 70% स्टॉक follow करते हैं। वहीं अगर Index 5% गिरता है तो benchmark स्टॉक 10% तक गिर जाते हैं।
Identify the stock which never made a lower low (1 low is ok) on a monthly chart / weekly for short term.
Every time, buy a stock only at life time highs.
कभी बाजार में आप अपना पैसा नहीं loss करेंगे You never lost money in market.
Exit –
जब भी स्टॉक अपने पिछले weekly average से नीचे आये तो partially profit बुक कर लें।
पिछले monthly average से नीचे आये तो 100% exit कर लें।
अगर अपने top से 5-8% correct होता है तो exit कर लें।
Intraday or Short term Exit Rules
Exit is Stop loss – You are a professional trader
Trailing Stop loss (Small or Big profit)
Booking profit at Target – You are GOD.
You buy high sell higher, you will never loose the money in market.
Stage 2 – Markup (Where retailers get in) – Termination
Stage 3 – Distribution – Holding
Stage 4 – Mark Down – Break Out – Consolidation / Pull Back – Continuation
हमेशा कोशिश करना है कि हम Stage 2 में ऐसे स्टॉक में Entry करें।
Step one –
Identify 3 most popular patterns –
Flat Base
Cup with handle or without handle
Double Bottom
When a market is in sideways (At high) or in a Downtrend – (Where to buy)
Fall at least 60% from the top – If 70-80% then very good to invest.
Longer the Base sharper the move – If consolidating for 6-9 months then move very sharp for up side.
Low Volume
Oscillates around 40/30 week average, several months.
Price makes higher low
Before the breakout 40/30 WMA truns up.
Tata Motors as an example corrected till 90% then see the move in 20 weeks.
Deepak Niterate –
Step Two –
A Breakout
Look for volume confirmation
Above – Average Volume (40-50%)
Better Relative Strength (RS) 60
Ashok Leyland
Atul – Moving Higher & Higher
Aarti Drugs
Step Three –
Post Breakout
Failed Breakout / below the Breakout level
Breakout Retest / Run Up
Buy at 1-5% above the Breakout level
BalkrisInd
Step Four –
The Run up
Sharp Run Up – Longer the base / consolidation.
50DMA / 10WMA, below the price (Exit)
Stronger Stocks always above this line.
A dip below this line with lower volume ignore. (Some big distribution is happening)
NavineFlour
Step Five –
The Toping
Slicing the 50DMA / 10WMA
50DMA / 10WMA with volume / distribution day.
7-8% from the top
Partial exit @25% gains, if closes above then previous month then exit fully.
अगर 50 DMA से नीचे आ जाता है तो इसका मतलब होता है कि अब correction stage में हैं।
The Setup – (Interaday / Positional) Moving Average Ribbon
Use 3 same period averages
Use 34 EMA of close
Use 34 EMA of high
Use 34 EMA of LOW
On bottom – Apply MACD line only.
जब भी आपको अपने ऐसे स्टॉक में 25% का profit हो रहा हो तो, अपना profit निकाल लें और वह profit ऐसे किसी और स्टॉक में invest कर दें। इस प्रकार से long term का portfolio बना पायेंगे।
निफ्टी नीचे जा रहा है तो इसका मतलब यह नहीं कि सारे स्टॉक्स भी उसके साथ correct होंगे, 30% स्टॉक्स हमेशा benchmark के opposite काम करेंगे।
Target निकालने के लिये Fibonacci retracements का उपयोग करें।
नववर्ष पर पहली ब्लॉग पोस्ट है, सोचा तो था कि जल्दी पोस्ट करेंगे, परंतु लगातार व्यस्तता के चलते यह रह ही गया। नववर्ष पर किताबें पढ़ने का प्रण लिया है, तो अभी तक हम नववर्ष में १० किताबें पढ़ चुके हैं –
नाम हैं –
Trading Nifty and BankNifty Options
टोपी शुक्ला
राहुल सांकृत्यायन विविध प्रसंग
Mastering Options Short Strangles Trading
How to find a Jackpot call in Option
More profit from Nifty options
Nifty BankNifty Interaday Options Buying Single Successful Strategy
Trend Trading with Nifty & Bank Nifty
The Secret of Trading Bank Nifty Future
Secret No Loss BankNifty Options Strategy
कुछ पॉडकास्ट भी सुने जिसमें सबसे बेहतरीन लगे 2 जो कि पढ़ाकू नितिन पॉडकास्ट से हैं
किताबों के सैकडों पन्नों से अपने काम की चीज कैसे निकाली जाये – Episode 22
बादशाहों के दरबार से निकली ‘किस्सागोई’ की दिलचस्प कहानी – Episode 20
आप ये गूगल करके सुन सकते हैं, किताबें हमने अमेजन किंडल पर पढ़ी हैं, व हमारे पास किंडल अनलिमिटेड सब्सक्रिप्शन है, तो आप वहाँ पर भी पढ़ सकते हैं।
आजकल मैं वीकली स्ट्रेटेजी बना रहा हूँ, स्विंग ट्रेडिंग की, देख लीजिये अगर समझ आये तो, नहीं तो कमेंट करके पूछ लीजियेगा –
कई लोगों का मेरे INBOX में हमेशा यही मैसेज रहता है कि क्या टिप है, कुछ शेयर के नाम बता दीजीये, और कम ही लोग यह पूछते हैं कि शेयर बाज़ार को कैसे सीखें, समझें।
टिप पूछने वाले तो खैर अपने पैर पर ख़ुद ही कुल्हाड़ी मार रहे होते हैं, क्योंकि उनको ही नहीं पता है कि वे क्या ख़रीदने वाले हैं अपनी उस रक़म से जो कि उन्होंने दिन रात काम करके, परिवार के समय के साथ समझौता करके, किसी न किसी अपनी इच्छा को मारकर, किसी ऐसे व्यक्ति के कहने पर कहीं भी पैसा लगाने को तैयार रहते हैं जिन्हें वे मार्केट एक्सपर्ट समझते हैं। यहाँ शेयर बाज़ार में ऐसा कोई नहीं जो कि हमेशा ही लाभ में होता हो, सभी को घाटा होता है, यह भी एक व्यापार ही है।
बस हमें अपने लाभ को घाटे से ज़्यादा रखना होता है, तो हम शेयर बाज़ार में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। नहीं तो जो रक़म गाढ़ी कमाई की है उसे बाज़ार में आकर गँवा देंगे। बाज़ार में कोई भी एक्सपर्ट नहीं है, शेयर बाज़ार सर्वोपरि है, भगवान है, कब क्या हो जाये कोई भी प्रिडिक्ट नहीं कर सकता है।
मैं ख़ुद उतने वर्षों से बाज़ार में रहते हुए, सीखने के लिये लालायित रहता हूँ, जो तरकीबें आज से १० साल पहले काम करती थीं, वे अब काम नहीं करती, बाज़ार में काम करने का तरीक़ा, बाज़ार का ट्रेंड बदलता रहता है, और जब सीखेंगे तभी कुछ अच्छा कर पायेंगे।
बाज़ार को सीखने के लिये रोज़ समय देना होता है, मैं आज भी लगभग रोज़ २ घंटे बाज़ार को सीखने के विश्लेषण करने के देता हूँ, तभी आज थोड़ा बहुत सफल हो पाता हूँ। बाज़ार ऐसी जगह है जहाँ सभी तरह के लोग हैं कोई ट्रेडर है तो कोई निवेशक, सबकी अपनी अपनी ज़रूरत और सीखने की अपनी प्रक्रिया होती है। सीखना एक लंबी प्रक्रिया है, फिर उसे प्रेक्टिस करके, बैकटेस्ट करके ही कुछ सफलता हाथ लग सकती है।
अब तो यूट्यूब चैनल हैं सीखने के लिये, मैं अमूमन जब सीखता हूँ, तो मुझे १ घंटे के वीडियो को ख़त्म करने में ही ४ घंटे से ज़्यादा वक़्त लग जाता है, क्योंकि मैं साथ ही प्रैक्टिस भी करता जाता हूँ। शेयर बाज़ार जितना आसान है, उतना ही मुश्किल। बस एक बात अपनी जोखिम क्षमता को ज़रूर परख लें, और शेयर बाज़ार लत है, रोज़ ट्रेड नहीं करने की आदत भी डालनी चाहिये, मार्केट ट्रेंड के साथ कभी कभी ट्रेड करके अपने पैसे को मात्र ४-५ घंटे में १०-११ गुना भी बनाया जा सकता है, बस आपकी स्टडी अच्छी होनी चाहिये, और सबसे बड़ी बात कि अपनी स्टडी पर ख़ुद को ही कॉन्फ़िडेंस होना चाहिये।
बैंगलोर में सबसे ज़्यादा रोड टैक्स किसी भी वाहन पर भारत में भरना होता है।मतलब कई बार तो ऐसा लगता है कि इतना टैक्स लेने के बाद शायद यहाँ बेहतर सड़कें मिलेंगी पर ऐसा कुछ है नहीं, हाईवे पर लूट अलग है।जब तक कोई दमदार व्यक्ति किसी सड़के के लिये न कहे, तब तक यहाँ सड़कें नहीं बनतीं। हमें समुद्र बहुत ही पसंद है, पर उसके लिये हमें समुद्र किनारे नहीं जाना पड़ता, जब भी थोड़ी सी बारिश हो, तो बैंगलोर की सारी सड़कें ही समुद्र बन जाती हैं, और बिना पैसे खर्च किये ही मज़ा आ जाता है।
अब रही बात ज़बरदस्ती विकास की, तो जब सब ठीक चल रहा है तो आपका खर्चा नहीं होगा, जब समुद्र बनेगा तो आपकी गाड़ी फँसेगी, आपको गाड़ी निकलवानी पड़ेगी, गाड़ी ख़राब होगी तो मैकेनिक के पास ले जानी पड़ेगी, इस प्रकार से देखिये कितने लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोज़गार देने की महती योजना चल रही है।
अब बारिश ख़त्म हो गई तो बिल्कुल बारिश ख़त्म होने के पहले सड़कें दोनों तरफ़ से खोद दीं, चौराहों पर, मोड़ों पर भी सड़कें खोद दी गईं, अब सोचो मास्टर माईंड, लोग समझ ही न पाये, एक बारिश हुई और जो खोदने के बाद उसे दिखाने के लिये मिट्टी डाली थी, वह बड़ा गढ्ढा बन गया, कल कई दिनों बाद दीपावली पूजन सामग्री के लिये बाज़ार जाना हुआ, जैसे ही बाज़ार के लिये मुड़े, कार गढ्ढे में, फच्च की आवाज़ आई, एक्सीलरेटर मारने पर कार निकल गई, हमने मन में सोचा कि चलो बचे।
पर बात यहीं ख़त्म नहीं हुई, अब सड़क के दोनों और की खुदाई की परेशानी, बाज़ार है पर बाज़ार में पार्किंग नहीं, तो भई आप या तो सड़क पर गाड़ी खड़ी कर दो और शॉपिंग करो, या फिर चुपचाप गाड़ी घर ले जाओ, शॉपिंग अगले साल कर लेना। गाड़ी बीच सड़क पर खड़ी कर दो तो सफ़ेद वर्दीधारी आकर फट से स्लिप और चिपका के निकल जायेगा। और इसके बाद एक बात और कि सड़क पर ही बीचोंबीच नाले को साफ़ करने के लिये ढक्कन सड़के के ऊपर कम से कम एक फ़ीट ऊँचा करके लगा दिया है, अब अगर जगह न हो, और मजबूरी में गाड़ी उस पर से निकालनी पड़े, तो बस हो गया कार्यक्रम, याने कि ज़बरदस्ती दूसरों का विकास।
फिर गये पटाखे लेने, तो एक टंकी वाला मैदान है जहाँ तरह तरह के मेले लगते रहते हैं, वहाँ पर पटाखों की दुकानें लगी हैं। हमने सोचा चलो पटाखे ले लें, मैदान में जाने का रास्ता पहले समतल हुआ करता था, फिर लॉकडाऊन हुआ तो चढ्ढे वाले गिरोह के लोगों ने वहीं पर एक कमरा बनाकर, उस पर क़ब्ज़ा कर लिया और गेट भी लगा दिया, बीच में लगभग दो फ़ीट ऊँचा कर दिया, अब कल गये तो अंदाज़ा ही नहीं लगा, और बस गाड़ी चेसिस पर फँस ही गई थी, तो अंदर के लोगों ने कहा, मारो एक्सलेरेटर गाड़ी निकल जायेगी, आख़िर निकल गये। हमारी ही नहीं सबकी गाड़ियाँ फँस रही थीं।
जब डैमेज ही नहीं होगा तो आप क्यों ठीक करवाने जाओगे, इसलिये अब यह सब ज़बरदस्ती करवाया जा रहा है, आपको लगे कि गलती हमारी ही है, पर इसके पीछे की ज़बरदस्ती विकास की मंशा को समझना बेहद कठिन है। ऐसा ही कार्यक्रम कई अन्य क्षैत्रों में हो रही है।
कल कन्नड़ अभिनेता पुनीत राजकुमार की ह्रदयाघात से मृत्यु हो गई, उनकी उम्र केवल 46 वर्ष थी, मतलब कि बिल्कुल मेरी उम्र के थे। हालाँकि मैंने शायद उनकी एक ही फ़िल्म देखी थी, उनके भाई शिवा राजकुमार के साथ हमने बेटेलाल की एक फ़ोटो बैंगलोर एयरपोर्ट पर ली थी। कन्नड़ फ़िल्में न देखने के कारण हमें बहुत ज़्यादा कुछ पता नहीं हैं, परंतु एक बात देखी है कि दक्षिण भारत में अपने नेताओं के लिये ज़बरदस्त प्यार देखने को मिलता है, जिसकी मिसाल इसी बात से है कि कई अभिनेताओं व अभिनेत्रियों को राजगद्दी पर वर्षों तक बैठाये रखा।
कल जब बैंगलोर के फेसुबक पेज पर जहाँ कि पुनीत राजकुमार के बारे में जानकारी दी जा रही थी वहीँ कमेंट पढ़ रहा था, कई लोगों ने कमेंट में लिखा था कि वैक्सीन के बाद के साइड इफ़ेक्ट हैं, और वैक्सीन के बाद बहुत सी गंभीर बीमारियों का लोगों को सामना करना पड़ रहा है।वहीं मेरा मत भी यही है कि वैक्सीन लगने के बाद मेरे अपने ही कई परिचितों को मैंने खोया, इससे मैं कई दिनों तक टूटा रहा। वैक्सीन के इन साइड इफेक्टों की सरकार को या किसी स्वतंत्र एजेंसी को जाँच करनी चाहिये।
कल शाम को बाज़ार गये थे, तो वहाँ चौक पर पुनीत राजकुमार की फ़ोटो और कर्नाटक का झंडा शोक स्वरूप झुका रखा था। बैंगलोर में लगभग हर क्षैत्र में किसी एक चौक पर इवेंट के लिये जगह है, जहाँ लोकल लोग इकठ्ठे होकर कन्नड़ त्योहार मनाते हैं। वहीं आसपास अच्छे से सजाया भी जाता है। अब दो दिन बाद १ नवंबर को कर्नाटक राज्योत्सव है, जिसकी लगभग हर कंपनी में छुट्टी होती है उस दिन हर चौक पर सजाया जाता है, ऑटो टैक्सी पर फूलों की मालायें व उन पर कर्नाटक राज्य का झंडा लगाकर रैली भी निकालते हैं, साथ ही दिनभर ऐसे ही घूमते हैं। हमें भी अच्छा लगता है, क्योंकि इस तरह से त्योहारों को जब आनंददायक बनाया जायेगा, तब ही लोग इस तरह के इवेंट से जुड़ेंगे।
पुनीत राजकुमार की इस असामयिक मृत्यु पर हमें भी बहुत दुख हुआ, वे बहुत से ऐसे सामाजिक कार्यों में मदद करते थे, कई जगह चंदा देते थे, उनकी मदद से कई लोगों के जीवन चल रहे थे, वे अब अपने आपको अनाथ मान रहे हैं।
ज़िंदगी कितनी भी हो, छोटी या बड़ी बस उसका इंपेक्ट लोगों पर लंबे समय तक रहना चाहिये, वह भी अच्छे स्वरूप में, ऐसी कोशिश हर किसी को करनी चाहिये।
जैसा कि लग रहा है आज भारतीय बाज़ार कमजोरी के साथ खुलेंगे व और नीचे के स्तर हमें बाज़ार में देखने को मिल सकते हैं, हमारे भारतीय बाज़ार कई बार वैश्विक बाज़ारों के स्तरों को अनदेखा कर चुके हैं। Nifty और BankNifty दोनों ही बहुत कमजोर लग रहे हैं। आज यह देखना होगा कि क्या यह कमजोरी बरकरार रहेगी या फिर किसी कारण से sideways होकर यहाँ से बढ़त बनाते हैं।
आज SGX Nifty 136 points बढ़कर 17765 पर बंद हुए हैं और वहीं NASDAQ ने दिन के शुरूआत में जहाँ दिन का निम्नतम स्तर देखा फिर बाज़ार के बंद होते होते अपने लगभग दिन के उच्चतम स्तर पर बंद हुआ है। वहीं भारतीय ADR की जमकर पिटाई हुई है।
आज का दिन लगता है कि Auto, IT, Chemicals सेक्टरों में तेजी का दिन हो सकता है।
अभी Dollar/Rupee 74.98 चल रहा है, और Crudeoil 5822 चल रहा है।
कल जो शेयर तेज़ी के साथ बंद हुए थे, उन पर नज़र रखनी चाहिये, वहाँ मुनाफ़ा कमाने के बेहतर लेवल मिल सकते हैं।
पूर्वाग्रह होना अच्छा या बुरा कैसा होता है, यह सभी लोग सोचते हैं क्योंकि यह एक बहुत अच्छी आदत नहीं, बल्कि बुरी आदत है। पहले अगर यह समझ लें कि पूर्वाग्रह क्या होता है तो बेहतर होगा, हम किसी के बारे में पहले से ही उसके आचरण, व्यवहार या कार्य के प्रति कोई भावना बना लें, वह पूर्वाग्रह कहलाता है। कई बार हम बिना मिले ही किसी के बारे में पढ़कर उसके बारे में सोच समझ लेते हैं, परंतु जब हम बात करते हैं, या मिलते हैं तो पूर्वाग्रह से ग्रसित होते हैं और कई बार हमारा पूर्वाग्रह गलत साबित होता है।
पूर्वाग्रह को हम घर में ही देख सकते हैं, अगर घर में दो बच्चे हैं एक अगर जल्दी समझ जाता है और ढंग से काम भी कर लेता है तो हम उसे होशियार की उपाधि दे देते हैं वहीं दूसरा बच्चा अगर उसी कार्य को देरी से समझकर करता है तो हमें उसे बेवकूफ या देर से समझनेवाले की उपाधि दे देते हैं। अगली बार कोई भी कार्य हो तो हम पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर पहले बच्चे को ही कहेंगे, जबकि हर व्यक्ति की अपनी विशेषता होती है, हो सकता है कि वह दूसरा बच्चा किसी ओर चीज में अच्छा हो जहाँ पहला बच्चा अच्छा न कर पाये।
पूर्वाग्रह हम लगभग हर रिश्ते में देख सकते हैं अपनी प्रोफेशनल लाईफ़ में भी देख सकते हैं, कई बार पूर्वाग्रह हम किसी की एक बात को पकड़कर बैठ जाते हैं और उसके आधार पर हम किसी भी व्यक्ति के साथ एक अजीब तरह का व्यवहार करने लगते हैं। यह भी तो हो सकता है कि जो आपको पूर्वाग्रह हो वह सही न हो, और उस व्यक्ति ने कार्य सीख लिया हो या फिर अपना व्यवहार ठीक कर लिया हो। परंतु हम मौक़ा ही नहीं देते, और हमेशा इस तरह के संवाद सुनने को मिलते हैं –
“मैंने तो पहले ही कहा था कि इसके बस की बात नहीं”
“मैंने तो पहले ही कहा था कि ये कुछ कर ही नहीं सकता”
“मुझे लगा ही था कि ये कुछ गड़बड़ कर सकता है”
“सोच ही रहा था कि अगर यह कार्य उसको देता तो सही प्रकार से हो जाता”
“काम देने के पहले ही लग रहा था कि तुम बहुत ढीले हो”
“तुम तो बेवकूफ हो बेवकूफ ही रहोगे, पता नहीं कब काम करना सीखोगे”
और भी पता नहीं क्या क्या संवाद हम अपने दैनिक जीवन में सुनते ही रहते हैं, कुछ संवाद शायद आपको अपनी याददाश्त में भी आ जायें और आप अपनी यादों में खो जायें।
कहने का मतलब केवल इतना ही है कि पूर्वाग्रह से ग्रसित न होकर हम एक बार ग़लत करने पर, उन्हें समझायें कि कैसे इस कार्य को अच्छे से कर सकते थे, या क्या गलती कर दी। और हमेशा ही दूसरा, तीसरा, चौथा …. मौक़ा देते रहें। नहीं तो सभी लोग वह कार्य कर ही नहीं पायेंगे, भले यह निजी जीवन की बात हो या प्रोफेशनल जीवन की।
मन में हमेशा ही ऐसा कुछ चलता रहता है कि वैसे भी किसी के होने या न होने का बहुत ज़्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ता, बस जब तक कोई हमारे आसपास है, तब तक सब ठीक है, परंतु जब वह व्यक्ति हमारे जीवन में नहीं है तो हम उसके बिना रहना सीख लेते हैं। धीरे धीरे हमें आदत पड़ जाती है, और दरअसल होता भी इसलिये है कि जब तक वह व्यक्ति हमारे आसपास रहता है, हमें उसकी अहमियत पता नहीं होती, न ही उस व्यक्ति का महत्व पता लगता है। परंतु अचानक ही अगर वह व्यक्ति हमेशा के लिये हमारे से दूर हो जाये तो बहुत तकलीफ़ होती है, क्योंकि तब हमें अचानक ही लगता है, कि अब बहुत से कार्य जो बन जाते थे, वे अब बहुत मुश्किल होंगे। साथ रहने से हमारे मन में जुड़ाव तो रहता ही है।
कई बार सोचता हूँ कि अगर मान लो कि दुनिया ही ख़त्म हो गई तो क्या होगा, और ख़ासकर तब क्या होगा जब सब ख़त्म हो जायें और कोई 1-2 लोग ही इस पृथ्वी पर जीवित बचें, तो वे लोग कैसे अपना भरण पोषण करेंगे, क्योंकि इस धरती पर जो कुछ था, सब कुछ ख़त्म, याने कि बिजली, इंटरनेट, घर कुछ भी नहीं। जरा दो मिनिट सोचकर देखिये जहाँ आप अभी यह पोस्ट पढ़ रहे हैं, तो या तो आप सोफ़े पर हैं, या बिस्तर पर या कहीं बैठे हुए हैं, कुल मिलाकर मतलब आराम में हैं, वहीं एकदम से आप कहीं जंगल या पहाड़ या मैदान में अकेले हैं, दूर दूर तक दुनिया में कोई नहीं है। तब कैसे अपने महत्वपूर्ण कार्य भी कर पायेंगे।
आग कैसे लगायेंगे, खाना कैसे बनायेंगे, पॉटी कहाँ जायेंगे, कैसे नहायेंगे, न आपको पास गूगल होगा ढूँढने के लिये न यूट्यूब होगा वीडियो देखकर सीखने के लिये, न कोई कार होगी कहीं जाने के लिये, न कोई रेस्टोरेंट होगा। यह दुनिया अचानक ही भयावह लगने लगेगी, आपको बस ऐसा लगेगा कि यह दुःस्वप्न जितना जल्दी ख़त्म हो, उतना अच्छा है, बस सोचकर देखिये और बस अपने रोंगटे न खड़े होने दें।
जीवन बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिये हर चीज, हर व्यक्ति को सम्मान दें, भले आपको चीजें पसंद हो या नापसंद परंतु आपके कहना का ढंग सलीके भरा होना चाहिये। कई मुश्किल बातें केवल अपने व्यवहार के कारण बहुत ही आसान हो जाती हैं। यह सोचकर इस धरती पर न रहें, कि आप अहसान कर रहे हैं, बल्कि यह धरती आप पर अहसान कर रही है, ऐसा सोचेंगे तो यह आपके फ़ायदे के लिये ही होगा।