बैंक के आगे लंबी कतारें और एटीएम के शटर डाऊन

अभी एक मित्र बैंक से आ रहे हैं, बहुत लंबी लाईन थी और बैंक में एक समय में एक ही बन्दे को अन्दर जाने दे रहे थे। अंदर जाकर देखा कि 1 ही लाईन है, जमा और भुगतान दोनों की। उन्हें पुराने नोट जमा करने थे, उसमें उन्हें 2 घंटे लग गये, उन्होंने देखा कि कुछ वृद्ध लोग भी लाईन में लगे हैं, महिलायें भी लगी हैं, तो उनसे रहा नहीं गया। अपना पैसा जमा करने के बाद, वे बैंक मैनेजर के केबिन में गये और बोले कि बाहर इतनी लंबी लाईन लगी है और आपने केवल एक ही काऊँटर खोल रखा है, आखिर बात क्या है, आप के बैंक की समस्या क्या है

बैंक मैनेजर ने कहा – सर मुझे भी एक काऊँटर खोलने की शर्मिंदगी है, परंतु मैं भी क्या करूँ, मेरे पास स्टॉफ भी है, पर देने के लिये रूपये नहीं हैं। इसलिये केवल एक काऊँटर खोला है और काऊँटर पर जो बंदा बैठा है उसको कहा है कि आराम से काम करो, जल्दी करोगे, तो हमें बैंक के बाहर बोर्ड लगाना होगा कि बैंक में नगद नहीं है, आप समझिये कि हम बहुत ही डेंजरस सिचुएशन में बैठे हुए हैं, अगर नगद खत्म होने का बोर्ड लगाया तो हमारे बैंक की साख चली जायेगी, और हमारे पास रूपये उतनी मात्रा में आ नहीं रहे, जितनी डिमांड है। अगर मेरे पास नगद होता तो मैं सारे स्टॉफ को केवल नगद के ही काम में लगा देता, परंतु ऐसा नहीं है। मुझे पता है कि जनता गुस्सा हो रही है, उनको तकलीफ हो रही है, ऐसा नहीं है कि बैंक में ऊपर वालों को ये सब पता नहीं है, उनको भी सब पता है, और वो ही हमें अनाधिकारिक तौर पर मौखिक आदेश दे रहे हैं।

आज तो फिर भी ठीक है, कि आज शुक्रवार है, कल शनिवार है, पता नहीं कल क्या होगा, क्योंकि कल बैंक खुला है, और हमारे पास उतना नगद नहीं है, जितनी डिमांड है। मैंने तो अपने ऊपर वालों को कह दिया है कि हमें कल 11 बजे ही बैंक बंद करनी पड़ जायेगी, क्योंकि नगद की जितनी डिमांड है उतनी आपूर्ति नहीं है।

हमारे मित्र ने कहा – आप उन बंदों को रोकिये जो 24 हजार के चैक लेकर आ रहे हैं, तो बैंक ज्यादा लोगों को नगद दे पायेगा। तो बैंक मैनेजर ने कहा कि उनको भी नहीं रोक सकते, और कहा कि एक ही बंदा 4 बेयरर चेक 24 हजार के लेकर लगा है, तो उसको भी मना नहीं कर सकते हैं। उनको बोला कि कम निकाल लो, तो वे बोलते हैं कि सरकार ने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है, तो बैंक भी नहीं बना सकती है।

बता सही है, मैनेजर अपनी जगह ठीक है और ग्राहक अपनी जगह ठीक है। बस अब जनता का नगद से भरोसा ही उठने लगा है क्योंकि जब खाते में पैसा है पर खर्च करने के लिये निकाल नहीं सकते हैं। सारे एटीएम के शटर डाऊन हैं, कहीं भी आज मुझे कोई एटीएम काम करता नहीं दिखा और बैंकों के आगे लंबी कतारें लगी देखी जा सकती हैं।

हमारे पास भी अभी थोड़े से 100 रूपये के नोट हैं, उम्मीद हैं कि जब तक स्थिती सुधरेगी तब तक हमारा काम उनसे चल जायेगा, नहीं तो वाकई बहुत मुश्किल होने वाली है।

 

दौड़ना क्यों (अपने लिये) ?

दौड़ना क्यों (अपने लिये) ?

बहुत अहम सवाल है, आखिर दौड़ना क्यों, सवाल का ऊपर ही जबाब दिया है जी हाँ अपने लिये, और किसी के लिये नहीं केवल अपने लिये। कल रात को हाथ की कलाई और पैर के घुटनों में थोड़ा दर्द था, ये हड्डी वाला दर्द भी हो सकता है, परंतु हमने रात को हाथ पैरों की तेल से मालिश की और सुबह सब ठीक हो गया। रात को ही मन था कि सुबह दौड़ना है भले 4,5,6,7,8,9 या 10 किमी, पर दौड़ना है, लक्ष्य कम से कम 4 किमी का और अधिकतम 10 किमी दौड़ने का निर्धारित किया था ।

दौड़ना क्यों

दौड़ना क्यों

सुबह उठा तो दौड़ने की बिल्कुल इच्छा नहीं थी परंतु फेसबुक पर एक रनर के द्वारा शेयर किया गया फोटो ध्यान आ गया और उसको ध्यान में रखकर दौड़ने के लिये तैयार हो गया। उस फोटो में संदेश था कि क्यों घर में बैठकर बोर हो रहे हो, चलो थोड़ा प्रकृति में और दौड़कर आयें, जिससे शरीर भी ठीक रहे। दौड़ने के लिये बहुत सारे फेक्टर कार्य करते हैं, अगर आप सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं तो ट्विटर, फेसबुक, स्त्रावा पर रनर्स को अपना दोस्त बनायें, वे सभी अपने अनुभव साझा करते रहते हैं, जिससे आपको दौड़ने के बारे में बहुत कुछ पता चलता रहेगा और दौड़ने के लिये हमेशा ही तैयार रहेंगे।

अकेले दौड़ना वाकई बहुत मुश्किल कार्य होता है, इसके लिये या तो आप अपने साथ किसी और को भी दौड़ायें, परंतु थोड़े दिनों बाद ही ये युक्ति भी काम नहीं आयेगी, क्योंकि दोनों के दौड़ने की रफ्तार कम ज्यादा होगी तो साथ रहेगा जरूर, परंतु दौड़ नहीं पायेंगे। अपने स्मार्ट फोन का उपयोग करें और साथ में कुछ सुनते जायें, गाने सुनने का शौक है तो गाने सुनते जायें, पॉडकॉस्ट भी डाउनलोड करके सुन सकते हैं। मेरी आदत दौड़ते हुए पॉडकॉस्ट सुनने की है, मुझे लगता ही नहीं कि मैं दौड़ भी रहा हूँ, ऐसा लगता है कि कोई मुझसे बात कर रहा है, या मैं किसी और ही चीज में व्यस्त हूँ, और दौड़ना केवल एक प्रक्रियाभर है। गाने सुनते हुए दौड़ना मेरे लिये बहुत मुश्किल होता है, क्योंकि गाने बदलते रहते हैं और उनके स्वर दौड़ने की प्रक्रिया को बाधित करते हैं। पॉडकॉस्ट अपनी पसंद के डाउनलोड कर सकते हैं, मुझे फाईनेंस, लाईफ स्टाईल, फैक्ट्स, पर्सनलिटी इम्प्रूवमेंट इत्यादि के चैनल बहुत पसंद हैं। मेरा सबसे पसंदीदा चैनल है टैड रेडियो ऑवर।

अपने लिये दौड़ने से आप दिनभर खुश रहते हैं, आपको अपना वजन कम लगने लगता है। भूख खुलकर लगती है, अपने खुद के ऊपर गर्व होने लगता है कि जो अधिकतर जनता नहीं कर सकती वो आप कर सकते हैं। जब किसी कठिन चढ़ाई या घूमने के लिये जाते हैं तो आपका यह स्टेमिना आपके बहुत काम आता है। इस बार मैं घूमने गया तो 4-5 घंटों तक चलने और खड़े होने पर मुझे किसी भी प्रकार से थकान का अनुभव ही नहीं हुआ। रोज कम से कम 35 मिनिट तेज वॉक या दौड़ना चाहिये। चलने की जगह दौड़िये, दौड़ना बहुत आसान है, मेरी पिछली पोस्ट दौड़ना कैसे शुरू करें को पढ़कर समझ सकते हैं कि कैसे दौड़ा जाये। 35 मिनिट इसलिये कि रोज हमें हमारे दिल को जो कि धड़कता है उसकी रफ्तार 140 पल्स तक ले जानी चाहिये, हमारे दिल याने ह्रदय की धड़कने की सामान्य गति 60-100 पल्स प्रति मिनिट होती है। दौड़कर हम कॉर्डियो व्यायाम करते हैं, जिससे दिल अपने भरपूर रफ्तार से धड़कने को परख लेता है, और यह व्यायाम हमें रोज ही करना चाहिये।

दौड़ना शुरू करें, दौड़ना आपके जीवन में खुशियाँ भर देगा।

 

मरने के पहले और मरने के बाद क्या करना चाहते हो ?

मरने के पहले और मरने के बाद क्या करना चाहते हो ?

मरने के पहले –

है न अजीब सवाल, एक ऐसा सवाल जिसका उत्तर शायद किसी के पास भी तैयार नहीं, मृत्यु हमारे जीवन में कोई बीमारी नहीं है, यह भी जीवन की एक विशेषता है। अंग्रेजी में इसे ऐसे कहना ठीक होगा Death is not a Bug its feature of Life. Continue reading…

 

दौड़ना कैसे शुरू करें। (How to Start Running)

दौड़ना कैसे शुरू करें। (How to Start Running)

दौड़ना तो हर कोई चाहता है परन्तु सभी लोग लाज शर्म के कारण और कोई क्या कहेगा, इन सब बातों की परवाह करने के कारण दौड़ नहीं पाते हैं। दौड़ना चाहते भी हैं तो कुछ न कुछ बात उनको रोक ही देती है, और दौड़ने के पहले हम तेज चलने लगते हैं, कि ऐसे ही स्टेमिना बनेगा और दौड़ पायेंगे। कई बार हम दौड़ इसलिये नहीं पाते क्योंकि हमें झिझक होती है कि हमारे पास दौड़ने वाले जूते नहीं हैं, टीशर्ट और लोअर नहीं है, दौड़ने का समय नहीं है इत्यादि इत्यादि। यकीन मानिये ये सब बहाने हैं, और अगर आप दौड़ना चाहते हैं तो एक उत्साहवर्धन करने वाले व्यक्ति की और आपके अपने आत्मविश्वास, लगन और मेहनत की कमी है।

मैं लगभग पिछले 10 वर्षों से दौड़ने की कोशिश में लगा हुआ था, परन्तु बहुत सारी चीजों के कारण संभव नहीं हो पाता था, जैसे कि मैं थक जाता हूँ, मैं दौड़ नहीं सकता, मेरी साँस फूल जाती है, मेरे पैर दर्द करने लगते हैं, मेरे पैर सही नहीं पड़ते हैं।

दौड़ना बहुत आसान है, दौड़ने का मतलब यह नहीं है कि लगातार दौड़ना है, थक जायें तो थोड़ा पैदल चल लें या अपने दौड़ने की गति सुविधानुसार धीमी कर लें। लगभग सभी यही समझते हैं कि दौड़ना मतलब कि केवल दौड़ते ही रहना, तो यह गलत भ्रांति है। जो लोग 10,21 या 42 किमी भी दौड़ते हैं वे भी जब तक पूरी तरह से प्रेक्टिस न हो लगातार नहीं दौड़ सकते हैं।

दौड़ना कैसे शुरू करें –

सबसे पहले दौड़ने का मन बनायें और अपने आप को दौड़ने के लिये मानसिक तौर पर तैयार करें। सुबह का समय सबसे बेहतर है दौड़ने के लिये, इसलिये कोशिश करिये कि सुबह जल्दी उठिये और पाँच या साढ़े पाँच बजे तक घर से दौड़ने के लिये निकल जाये। सुबह पंछियों के कलरव को ध्यान से सुनें, जीवन का संगीत सुनाई देगा, सुबह की हवा आपको ताजगी का अहसास करवायेगी।

सौ कदम गिनकर चलें और फिर पचास कदम गिनकर ही दौड़ें, पचास कदम दौड़ने के बाद सौ कदम चलें, ऐसे करके सात दिनों तक यही दोहरायें। सात दिनों में आप पायेंगे कि आप पचास कदम आराम से दौड़ने लगे हैं। एक सप्ताह बाद से याने कि आठ से पंद्रह दिन तक सौ कदम पैदल चलें और सौ कदम दौड़ें याने कि केवल 50 कदम दौड़ने में बढ़ायें। और इसी तरह दौड़ने के कदम हर सप्ताह बढ़ाते जायें, बीच में जब भी आपको लगे कि आपको थकान लग रही हैं, आराम चाहिये, दौड़ते नहीं बन रहा है तो पैदल चलने लग जाइये।

सबसे पहले अपने दिमाग से यह निकाल दें कि दौड़ना मतलब कि दौड़ते ही रहना, जब भी आपको लगे कि आपका शरीर अब दौड़ नहीं पा रहा है तो आप पैदल चलना शुरू कर दें। यह भी ध्यान रखें कि दौड़ने में थकान मतलब कि मानसिक थकान होती है, शारीरिक थकान भी होती है, पर मानसिक थकान आपको थका देती है और कहती है कि बस बहुत हुआ, अब नहीं दौड़ो, जबकि शारीरिक थकान में आपको मानस को मजा आता है, आपका शरीर कहेगा कि बस अब मत दौड़ो पर आपको दौड़ के बाद की थकान से आपको मानस को मजा आयेगा।

जब आप दौड़ना शुरू करेंगे तो यह भी सोचेंगे कि बहुत ही कम लोग दौड़ते हैं, पर यह ध्यान रखें कि जो भी कार्य आप करते हैं या करने की शुरूआत करते हैं, उससे संबंधित गतिविधियाँ दिखाई देने लगती हैं, या लोग दिखने लगते हैं। पहले जब मैंने दौड़ना शुरू किया था, तब केवल मैं अकेला ही दौड़ता हुआ दिखाई देता था, पर मैंने देखा धीरे धीरे बहुत से लोग दौड़ रहे हैं। यह हो सकता है कि पहले मुझे ये लोग दिखाई नहीं देते थे, परंतु अब दिखाई देते हैं। पर अब यह देखकर खुशी होती है कि जो लोग पैदल चलते थे, वे हमें देखकर दौड़ने लगे हैं, यह संख्या एकदम से नहीं बढ़ी, धीरे धीरे बढ़ी, अब कम से कम रोज ही 10 लोगों को दौड़ते हुए देखना सुखद लगता है जो कि पहले पैदल चलते थे।

दौड़ने के पहले क्या करें-

दौड़ने के पहले कुछ हल्का फुल्का व्यायाम कर लें, जिससे शरीर गर्म हो जाये। सुबह उठने के बाद एक या दो केला खा लें, पानी पी लें। बहुत ज्यादा पानी भी न पियें। दौड़ने जाने के पहले ही निवृत्त हो लें। थोड़ा सा एनर्जी ड्रिंक पी लें।

दौड़ते समय क्या करें –

दौड़ते हुए बहुत पसीना निकलता है जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है, इसलिये दौड़ते समय पानी घूँट घूँट पीते रहें, जिससे शरीर में पानी की कमी न हो। अगर पाँच किमी से ज्यादा दौड़ रहे हैं तो एनर्जी ड्रिंक जरूर पी लें, पारले जी बिस्किट भी खा सकते हैं।

दौड़ने के बाद क्या करें –

दौड़ने के बाद एकदम से रूके नहीं, बैठे नहीं, थोड़ी दूर पैदल चलते रहें या फिर धीमी गति से दौड़कर शरीर को ठंडा होने दें। कूल डाऊन व्यायाम करें, जिससे आपके शरीर की माँसपेशियों को मजबूती मिलेगी और यह आपके शरीर के लिये बहुत अच्छा भी होगा क्योंकि दौड़ने के बाद आपका शरीर गरम होता है और शरीर का हर अंग अपने अधिकतम उपयोग की स्थिती में होता है। खूब पानी पियें और 10-15 मिनिट में ही नाश्ता कर लें। केला जरूर खा लें, इससे आपकी सोडियम की कमी पूरी हो जायेगी, जो कि दौड़ में पसीने के साथ आपके शरीर से निकल गया होता है। 35-40 मिनिट में ही नहा लें।

थकान कैसे दूर करें –

जब लंबी दूरी की दौड़ पूरी करते हैं तो अच्छी खासी थकान हो जाती है, उसके लिये शरीर को आराम की भी जरूरत होती है। आप पैरों की तेल से मालिश कर लें, पैरों को ठंडे पानी में डुबोकर रखें। पैरों को किसी से दबवा लें। जिस दिन सुबह दौड़कर आयें उस दिन दोपहर को 2-3 घंटों की नींद जरूर लें। जिससे पैरों के टूटे हुए टिश्यू को जुड़ने में मदद मिलेगी।

दौड़ने के लिये हमें कठिन व्यायाम भी करने चाहिये, जिससे हमारे हाथ, पैरों, कंधे और जाँघ की माँसपेशियाँ मजबूत हों और वे हमारे दौड़ने में सहायक हों। जब माँसपेशियाँ मजबूत होंगी तो आप तेजी से दौड़ पायेंगे या धीमे धीमे ज्यादा दूरी तक दौड़ पायेंगे।

अभी दौड़ने पर बहुत चर्चा बाकी है, तो आगे इसी विषय पर लिखने की कोशिश जारी रहेगी। अनुभवी लोग अपने सुझाव दें जिससे हम नये दौड़ने वालों के लिये कोई परेशानी न हो।

 

पेट पर मोटापे का टायर

आजकल हम हमारी दुनिया में आसपास देखेंगे तो पता चलेगा कि अधिकतर मोटे ही हैं, बहुत ही कम लोग होंगे जिनके पेट पर मोटापे का टायर न हों।
 
खान पान हमारा पिछले 50 वर्षों में बदला है, पहले आम आदमी मोटा नहीं होता था, सही बात तो यह है कि मोटे केवल वही होते थे जिनके पास पैसा होता था और खाने पीने का शौक होता था। याने कि राजा रानी वाला खाना, राजसी भोज।
 
और वैसे ही राजसी खाने वालों को ही हाई बीपी, डायबीटीज, कोलोस्ट्रॉल, हार्टअटैक इत्यादि बीमारियाँ होती थीं, इसीलिये इन बीमारियों को कभी अमीरों की बीमारी कहा जाता था।
 
उस समय आम आदमी क्या खाता था, आलू, चावल, शकरकंदी इत्यादि ही खाते थे, जिससे मोटापा नहीं बड़ता था, भाड़ के भुने आलू और शकरकंदी आज भी गाँव देहात में मिल जाते हैं, जो कि बिल्कुल सही भोज है।
 
पर धीरे धीरे इंड्स्ट्रीयलाईजेशन ने पूरे समाज की दिशा ही बदल दी, राजसी भोज वाली चीजें भी आम व्यक्ति अपने भोजन में लेने लग गया, और धीरे धीरे इन 50 वर्षों में राजसी बीमारियाँ आम बीमारियाँ हो गई हैं।
 
अगर हमको ये राजसी बीमारियाँ याने की अमीर लोगों की बीमारियों से बचना है या ठीक रहना है तो हमें पुरानी वाली खुराक पर लौटना चाहिये, वह आज भी उतनी ही कारागार है, जितनी पहले थी।
 
हमें हमारी पीढ़ी को आज से ही खानपान की सही आदतें सिखानी होंगी, नहीं तो वे इन अमीर लोगों की बीमारियों में जल्दी ही घिर जायेंगे।
 
जितनी जल्दी हो सके हमें सबसे पहले अपने मोटापे से मुक्ति पा लेनी चाहिये, उपाय बोलने सुनने में जितना सरल लगता है, व्यवहारिकता में उतना ही कठिन है। हमें प्राकृतिक वस्तुओं का उपभोग करना चाहिये याने कि फल एवं सब्जियों का, अच्छे से धोकर, जरूरत लगे तो उबालकर खाना चाहिये। उबालकर केवल वही सब्जियाँ खानी चाहिये जो लगे कि वे धोकर अच्छे से साफ नहीं होंगी। जैसे कि फूलगोभी, ब्रोकली।
 
कच्ची सब्जियों में मुझे सबसे ज्यादा पसंद है शिमला मिर्च, जी हाँ बहुत ही जबरदस्त स्वाद होता है। एक बार आदत लग गई तो आप कभी भी शिमला मिर्च को कच्चा खाने का मोह त्याग नहीं पायेंगे।
 
#OldisGold #StayHealthy #StarchFood

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चीनी समान का बहिष्कार

भारतियों पहले कामचोरी छोड़ो, काम करना सीखो और घर में अपने समान के लिये इतनी जगह बनाओ, सस्ती चीजों को उपलब्ध करवाओ, ये चीनी समान का बहिष्कार करने से कुछ नहीं होगा, चीन नहीं तो कोरिया या फिर कहीं और का समान खरीदोगे।

चाईना के समान का बहिष्कार करने वालों पहले यह सुनिश्चित करो कि भारत की तकनीक की रीढ़ चीन समान पर न हो, बताओ कि कौन सी चीज मैक इन इंडिया है –

  1. राऊटर
    2. मोडेम
    3. लेन केबल
    4. एडाप्टर
    5. डिश
    6. मोबाईल
    7. मोबाईल टॉवर में लगने वाला समान
    8. कैमरे
    9. द्रोन

और भी बहुत कुछ समान होगा। घर पर उपयोग किये जा रहे समान –

  1. टीवी
    2. फ्रिज
    3. वाशिंग मशीन
    4. लेपटॉप
    5. मोडेम
    6. मोबाईल
    7. गेम्स (सोनी, माइक्रोसॉफ्ट)
    8. कार में लगने वाले समान
    9. बाईक में लगने वाले समान
    10. किचन में बहुत से समान

महफूज भाई का कहना है कि –

ज़र्रे ज़र्रे में इंडिया के चाइना है…

काजल कुमार जी का कहना है –

मैं तो सभी पर Made in India लिख कर ही प्रयोग करता हूं जी

हमने लिखा –

हम use in india करते हैं जी

दिवांशु निगम लिखते हैं –

जिसके ऑप्शन इंडिया में उपलब्ध हैं, उसमें तो करना शुरू करें , बाकी भी होगा । धीरे धीरे ही होगा ।

दूसरी बात, आज के युग में कोई देश अकेले सब कुछ नहीं बना सकता । एक दुसरे पर निर्भरता रहती ही है । चीन की भी है पर उसे झटका लगना ज़रूरी है ।

यहाँ तो बड़ी मुश्किल से कुछ मिलता है जो मेड इन चीन ना हो , पर कोशिश कर रहे हैं । अगर हम थोड़ा भी कर पाए तो बहुत होगा ।

बाकी सब कुछ इंडिया में बनने का वेट करते रहे तो शायद अगले कई सदियों तक करेंगे ।

अपने अपने सोचने का तरीका है । बीते दिनों रविश कुमार मेरी जैसी सोच वालों को महामूरख कह दिए । शायद वो महात्मा गांधी को भी कह देते जब तक पूरे देश में पहनने के बराबर खादी ना बना पाओ तब तक विदेशी कपड़ों का बहिष्कार मत करो ।

मजेदार बात ये भी है कि बात बात पर पतंजलि प्रोडक्ट्स का विरोध करने वाले भी आजकल यही ज्ञान दे रहे हैं । सब माया है

और इस पर हमने प्रतिक्रिया दी –

कृप्या ऑप्शन बतायें, हम तो कोशिश हमेशा करते हैं कि भारतीय कंपनियों के ही उत्पाद खरीदें, पर धीरे धीरे लगभग सभी जगहों पर विदेशी कंपनियों का कब्जा होता जो रहा है, यहाँ तक कि मॉल में खरीदने की जगह हम सामान छोटी दुकान से खरीदने शुरू कर दिये, परंतु यह भी दीगर बात है कि हम अमेजन के डिस्काऊँट को इग्नोर तो नहीं कर सकते तो जो भी पैक आईटम हैं वो ग्रोसरी अमेजन से ही मँगाते हैं। हमारी देशी कंपनी फ्लिपकार्ट ग्रोसरी वाले मामले में फेल हो गई और उन्होंने ग्रोसरी स्टोर बंद ही कर दिया।

पतंजलि के उत्पाद ही सबसे पहले अमेजन पर खाली होते हैं, तो इससे भी पता चलता है कि पतंजलि के उत्पादों की माँग बहुत ही ज्यादा है।

पतंजलि के आऊटलेट्स पर उनके खुद के उत्पाद उपलब्ध नहीं हैं, बहुत मारामारी है, हम नवदर्शनम का आटा खाते हैं, सबसे बढ़िया आटा है, परंतु यहाँ उपलब्धता की बहुत मारा मारी है। केवल मेक इन इंडिया से कुछ नहीं होगा, उसकी सप्लाय भी अच्छी करना होगी और इसके लिये सरकार को ही कोई अच्छा इनिशियेटिव लेना चाहिये।

कमल शर्मा जी का कहना है –

चीन को झटका देने के लिए पहले देश में अच्‍छी क्‍वॉलिटी की चीजें बनाओ और वह भी सस्‍ते प्राइस पर। भारतीय कंपनियों ने सदैव लूटा। स्‍कूटर तक लड़की के जन्‍म लेने के समय बुक करवाना पडता था और शादी के समय मिल पाता था। तत्‍काल चाहिए तो कंपनियां ही लूटती थी। यह तो एक उदाहरण मात्र है। पी वी नरसिंहाराव ने अर्थव्‍यवस्‍था को खोला और विदेश से कंपनियां भारत आई तो क्‍या स्‍कूटर और क्‍या कार..सब कुछ धड़ाधड मिलने लगा और देसी कंपनियों एंटी डम्पिंग से लेकर विदेशी कंपनियों को भगाने की गुहार लगाती है। कामचोर कर्मचारी निजीकरण से डरते हैं और निजी वाले विदेशी से।

 

यारों का यार हमारा सरदार

दोस्त बहुत हैं पर गहरे दोस्त कम ही होते हैं, एक के बारे में लिखो तो दूसरे दोस्तों को बुरा लग सकता है, परंतु हम फिर भी अपने एक गहरे दोस्त के बारे में लिखते हैं, हमें पता है कि हमारे अन्य गहरे दोस्त हमारी बातों को ध्यान से पढ़ेंगे और हमें और ज्यादा प्यार करेंगे। अन्य दोस्तों की मैं कह नहीं सकता हूँ जिसमें से कुछ लोग तो बुरा भी मान जायेंगे और कुछ हौसलाफजाई करेंगे। Continue reading…

 

बस बड़ा हो जाऊँ

आज ऑफिस से आते आते कुछ ऐसे विचार मन में आये कि हमेशा ही हम बड़े होने की बात सोचते हैं, परंतु कभी भी कितने भी बड़े हो जायें पर हमें खुद पर यकीन ही नहीं होता है, कि अब भी हम कोई काम ठीक से कर पायेंगे, हमेशा ही असमंजस की स्थिती में रहते हैं। उसी से एक कविता लिखने का प्रयास किया है, मुझे लगता है कि और अच्छा लिखा जा सकता है, परंतु भविष्य में इसको कभी संपादित कर दिया जायेगा।

 

बस बड़ा हो जाऊँ

जब मैं दस का था

तब भी यही सोचता था

बारह का हुआ तो लगा

कि अभी भी छोटा हूँ

पंद्रह खत्म कर सोलह में लगा

तो सोचा अब बड़ा हो गया

पर मैं कोई काम

एक बार में ठीक से नहीं कर पाता

सोचा

अभी छोटा ही हूँ

खामखाँ में लग रहा है

कि बड़ा हो गया हूँ

इसी प्रक्रिया के तहत

जब इक्कीस का हुआ

तो भी चीजें ठीक नहीं हो पाती थीं

फिर लगा जैसे उमर बढ़ रही है

साथ ही कठिनाईयाँ भी बढ़ रही हैं

फिर तीस का हुआ

पैंतीस का भी हुआ

इकतालिस अभी गया है

तेजी से बयालिस भाग रहा है

बड़ा पता नहीं कब होऊँगा

जब छोटा था,

तब सोचा नहीं था

बड़ा भी होना पड़ेगा,

कैसी मजबूरी है हमारी

बिना किसी जतन के

हम बस बढ़ते ही जाते हैं

छोटा था तो बचपन था

बचपन में मैं खुद को

कितना जी लेता था

अब बड़ा हो गया हूँ

पर गलतियों में

नासमझी में, सबमें

अब भी खुद को

कठिनाई में ही पाता हूँ

अब न सोचूँगा

कि कब बढ़ा होऊँगा

अब सोचता हूँ

सारा जीवन गलतियों में ही निकाल दिया।

 

रिलायंस जिओ का टेलीकॉम युद्ध

आज सुबह रिलायंस जिओ के प्लॉन समाचार पत्र में पढ़े तो देखकर ही दिमाग चकरघिन्नी हो गया। अब लगा कि रिलायंस जिओ, आईडिया एयरटेल की दुकानों पर भारी पड़ने वाला है, और रिलायंस जिओ का टेलीकॉम युद्ध शुरू हो गया है जो बाकी के सभी ऑपरेटर्स को बहुत भारी पड़ने वाला है, क्योंकि जिओ का सारा इन्फ्रास्ट्रक्चर नया है और उनकी कॉस्ट कम है, और बाकी के लोग हाथी हो चुके हैं। यहाँ तक कि इनके प्लॉन से अब ब्रॉडबैंड कंपनियों तक की बैंड बजने की उम्मीद है।

परसों ही ऑफिस के केन्टीन में लाईन से बैठे मोबाईल ऑपरेटर्स के डेस्कों पर गया और पूछने लगा कि अभी जो प्लॉन है, उससे मेरा काम नहीं चल रहा है। ज्यादा वाला प्लॉन बता दो, जिसमें लोकल और एस.टी.डी. दोनों ज्यादा हों, डाटा जितना है उतना ही चलेगा।

पहली डेस्क वोदाफोन जो अभी मेरा नेटवर्क ऑपरेटर है –

उनके प्लॉन देखे, तो कोई प्लॉन जमा ही नहीं, कहीं न कहीं कोई न कोई ट्रिक, ज्यादा कॉल्स तो डाटा प्लॉन में कमी, और डाटा ज्यादा तो कॉल में कमी। हमने कहा यार तुम लोग तो लूटने में ही लगे हो, और कितना निचोड़ोगे जनता को, Continue reading…

 

बच्चों के शरीर के विकास के लिये न्यूट्रिशियन्स

लगभग सभी माता पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे हरेक चीज में आगे हैं फिर चाहे वह पढ़ाई लिखाई हो या खेल हो। यह बात मुझे अच्छी तरह से तब समझ में आई जब मैं पिता बना। बच्चों को अपनी उम्र के मुताबिक, बच्चों के शरीर के विकास के लिये न्यूट्रिशियन्स सही मात्रा में मिलें, हमें इसका ध्यान रखना जरूरी है। बच्चों का शारीरिक विकास ठीक तरीके से हो रहा है उसके लिये कुछ चीजें बहुत महत्वपूर्ण हैं, जैसे कि शारीरिक विकास के पड़ाव, इन्फेक्शन से लड़ने के लिये इम्यूनिटी (शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता) और उम्र के हिसाब से होने वाली सक्रियता। तो बच्चों को चाहिये एक सम्पूर्ण स्वस्थ आहार जो कि शारीरिक क्रियाकलापों की सक्रियता में मदद करे।

एक सम्पूर्ण स्वस्थ आहार जिससे बच्चे को सही मात्रा में कार्बोहाईड्रेट, प्रोटीन्स, फैट्स और विटामिन मिलते हैं। वैसे भी छोटे बच्चों के लिये घर में बना भोजन ही न्यूट्रीशियन्स का मुख्य स्रोत होता है। परंतु आजकल लगभग सभी माता पिता की यही शिकायत होती है कि बच्चा कुछ चुनी हुई चीजें ही खाता है, हमारी आधुनिक जीवन के जीने के तरीका भी बच्चों को चुनी हुई चीजों को खाना सिखलाता है जैसे कि आजकल की भागती दौड़ती जिंदगी में हम जंक फूट, रेडी टू ईट फूड खाते हैं, खाने की क्वालिटी के साथ समझौता करते हैं, मिलावटी खाना खाते हैं, वह सभी चीजें खाते हैं जो नहीं खाना चाहिये और इसी कारण बच्चों को सही मात्रा में न्यूट्रीशियन्स नहीं मिल पा रहे हैं।

बच्चों को सारी चीजें खाने की आदत डालनी चाहिये खासकर घर में बनी चीजों की चाहे जैसे कि रोटी दाल, दाल चावल, दाल खिचड़ी, हरी सब्जियाँ, बिरयानी, दाल बाटी, लिट्टी चोखा। साथ ही बच्चों को ज्यादा कैलोरी वाली चीजें भी खिलानी चाहिये जैसे कि पनीर, मिठाईयाँ, काजू करी, हरेक चीज में घी दीजिये, अंडा पीली बॉल के साथ खाना है। क्योंकि बच्चे ज्यादा खेलते हैं तो उनको ज्यादा कैलोरी की जरूरत भी होती है। आप देख सकते हैं अपने बच्चों को कि वो एक जगह तो बैठेंगे ही नहीं और हमेशा इधर से उधर घूमते ही रहेंगे।

अगर बच्चा खाने में मीनमेख निकालता है तो इसका मतलब भी यही है कि वह कुछ चीजें या तो खाना ही नहीं चाहता है या फिर उनको उस समय खाने से बचना चाहता है। इसके लिये बच्चों को अपने साथ बातों में लगाकर उनको खाना खिलायें, हो सके तो कभी कभार अपने हाथों से खिलायें, प्यार से बात करके खिलायें। हर बार डाँटने या मारने से काम नहीं चलेगा।

एक बात और ध्यान रखें कि केवल खाने से ही सब कुछ बच्चों को नहीं मिल जायेगा, उसके लिये उन्हें कुछ अतिरिक्त चीजें सीमित मात्रा में भी साथ में देनी होंगी, सप्लीमेंट जैसे कि हॉर्लिक्स ग्रोथ + जो कि बच्चों को शारीरिक विकास में न्यूट्रीशियन्स की कमी को पूरा कर भरपूर सहयोग करता है।

पर ध्यान रखें सप्लीमेंट केवल भोजन में न मिलने वाले न्यूट्रीशियन्स की कमियों को पूरा करता है। सप्लीमेंट को भोजन के रूप में नहीं खाया जा सकता है। हमें यह भी नहीं भूलना नहीं चाहिये कि सबसे ज्यादा न्यूट्रीशियन्स घर के खाने में ही मिलते हैं, बाजार के खाने में नहीं मिलते हैं। सप्लीमेंट को हमेंशा डॉक्टर की सलाह से ही लेना ठीक रहता है।