महाकाल में वीआईपी दर्शन VIP Darshan in Mahakal

वैसे मैं महाकाल की व्यवस्था पर लिखने से हमेशा ही बचता हूँ, क्योंकि लगता है कि इससे लोगों की आस्था कम होती है।

परंतु फिर भी इस पर आज लिख रहा हूँ, मैं हमेशा ही महाकाल में वीआईपी दर्शन करता हूँ, पहले इसका शुल्क 151 रूपये था और अब सुविधाओं के नाम पर इसे बढ़ाकर 250 रूपये कर दिया गया है। वीआईपी दर्शन इसलिये करता हूँ, कि इसमें दिया गया धन का दुरूपयोग नहीं हो सकता है, इसका हिसाब ऑडिट वगैराह में देखा जाता है, अगर दान पात्र में हम दान देते हैं तो हमें कोई सुविधा नहीं मिलती है एवं अगर पंडे पंडितों को सीधे देते हैं तो वह उनकी जेब में जाता है।

वीआईपी दर्शन का टिकट लेने के बाद वहीं पर जूते चप्पल स्टैंड पर हमने जूते उतारे, यहाँ पता चला कि अब ये जूता चप्पल स्टैंड केवल वीआईपी दर्शन के टिकट वालों के लिये ही है। दर्शन करने के बाद जब महाकाल से बाहर आने की बात आई तो पता चला कि बाहर जाने का एक ही रास्ता है, और वहाँ पर पैर न जलें इसके लिये कोई व्यवस्था नहीं है। हालत यह है कि मुझे और मेरे परिवार को अभी तक पैरों में जलन की तकलीफ सहन करना पड़ रही है।

जब वापिस जूते चप्पल लेने पहुँचे तो वहाँ पर सहायक प्रशासनिक अधिकारी का कार्यालय दिखा, हम पहुँचे वहाँ कि हमें शिकायत पुस्तिका दें, हमें शिकायत करनी है, तो हमें कहा गया कि यहाँ शिकायत पुस्तिका नहीं है, आपको 3 मंजिला महाकाल के प्रशासनिक भवन में जाना होगा। अधिकारी तो वहाँ थे नहीं, परंतु उनके बात करने के अंदाज से यह जरूर लगा कि बहुत से वीआईपी टिकट वाले लोग वहाँ आकर शिकायत करते हैं, परंतु शिकायत पुस्तिका के अभाव में बात सही जगह तक नहीं पहुँच पाती है। वहाँ बैठे सारे लोग अपने मोबाईल में सिर घुसाये मिले।

बाबा महाकाल के हम भक्त हैं, और महाकाल में प्रशासन के नाम पर लूटने वाले लोग और मानवीयता को शर्मसार करने वाले प्रशासनिक अधिकारी जो कि अपने अपने ए.सी. केबिन में बैठकर सुस्ताते रहते हैं, उम्मीद है कि वे भी महाकाल के भक्त होंगे और भक्तों की तकलीफ को समझेंगे। शिकायत पुस्तिका केवल महाकाल प्रशासनिक कार्यालय में ही क्यों उपलब्ध है, यह तो वीआईपी दर्शन के दरवाजे पर भी उपलब्ध होनी चाहिये, जहाँ टिकट मिलते हैं उस काऊँटर पर भी उपलब्ध होनी चाहिये।

वीआईपी काऊँटर पर लिखा हुआ है कि कार्ड से भी भुगतान स्वीकार किया जाता है, परंतु जिस समय हम पहुँचे तो काऊँटर क्लर्क किसी और को बैठाकर कहीं चला गया था और उन सज्जन को कार्ड की स्वाईप मशीन ही नहीं मिल रही थी, और हमें यह भी कहा कि उन्हें कार्ड की स्वाईप मशीन का उपयोग करना ही नहीं आता है। समझ नहीं आता कि महाकाल प्रशासन हर जगह महाकाल भक्तों से शुल्क वसूलने में लगा है, जैसे कि भस्मारती पर अब ऑनलाईन 100 रूपये और ऑफलाईन 10 रूपये का शुल्क वसूला जा रहा है। परंतु भक्तों को सुविधाओं के नाम पर केवल असुविधा ही मिल रही है।

महाकाल केवल अब वीआईपी लोगों के लिये ही सुविधाजनक है, सामान्य भक्त के लिये प्रशासन सारी मानवीय मूल्यों को भूल चुका है। उम्मीद है कि मेरी यह शिकायत महाकाल प्रशासक और उज्जैन कलेक्टर तक जरूर पहुँचेगी।

 

मेरे फ्लैट (Flat) का सपना जो सपना ही रह गया

अपने शहर उज्जैन के ऑनलाईन अखबार का एडीशन रोज ही पढ़ता हूँ, आज एक खबर देखी कि एक बिल्डर ने 198 फ्लैट (Flat) बेचे और लगभग पूरे पैसे भी ले लिये, पर अभी तक न मल्टी पूरी हुई और न ही किसी को मालिकाना हक दिया। इस पर कोर्ट ने बिल्डर को जेल भेज दिया है।

यह किस्सा है तकरीबन 4 वर्ष पहले का, जब इस कंपनी ने बड़े बड़े विज्ञापन अखबारों में दिये थे, और हमने भी एक फ्लैट यहाँ पर बुक करवाया था, हम बैंगलोर में थे और पापा को कहकर कि फ्लैट अच्छी जगह लग रहे हैं और ले लेना चाहिये, जो बुकिंग एजेन्ट था वह हमारे पारिवारिक परिचित ही थे, हमने बुकिंग एमाऊँट बिना सोचे समझे, उन पारिवारिक परिचित के कहने पर जमा भी करवा दिया।

जब हम छुट्टियों में घर पहुँचे तो एजेन्ट और बिल्डर दोनों से मिलकर आये, बात करने के बाद हमें मामला गड़बड़ लगा और हमने तत्काल ही अपने बुकिंग एमाऊँट को वापिस करने की माँग रखी, और कहा कि हाँ अपने से गलती हुई कि बिना जाँचे परखे बुकिंग करवाई, आप पैनल्टी काटकर हमारा बुकिंग एमाऊँट वापिस कर दो। पर वे लोग पैसा वापिस देने में आनाकानी करने लगे।

पहले हमने उन्हें सीधे सादे तरीके से कहा कि हमारे पैसे दे दो, तो वो हमारा मखौल उड़ाने लगे, कहने लगे कि जो करते बने कर लो, पैसा तो आपको नहीं मिलेगा, आप बेहतर है कि लोन लो और बाकी के पैसे भी चुकाकर फ्लैट जब बन जायेगा, तब ले लो। हमने उस समय LIC Housing में जाकर बात की, बिल्डर ने हमें वहाँ भेजा था, तो वे तत्काल ही लोन देने को तैयार हो गये। उसी समय हमारे मित्र इलाहाबाद बैंक में मैनेजर थे, हमने उनसे बात की कि आप अपने बैंक से लोन दो, उन्होंने हमें बहुत सारे बिल्डरों की कहानियाँ बताईँ और समझाया कि उज्जैन में मल्टी का फंडा नया है और बिल्डर का कोई भी पुराना रिकार्ड नहीं है, इसलिये कोई भी सरकारी बैंक लोन नहीं देगा। हमें समझ आ गया कि भई अपन फँस चुके हैं।

हम परेशान थे तो हमने महफूज भाई से बात की और उन्होंने जो कानूनन तरीका बताया, उस पर चले। हमने एक आवेदन लिखा कलेक्टर महोदय के नाम और पहुँच गये उनसे मिलने, वहाँ जाकर बात की तो उन्होंने कहा कि आप अपना आवेदन यहीँ छोड़ जाईये, आपका पैसा बिल्डर घर पर देने आ जायेगा। हमने कहा हमें आप पर पूर्ण विश्वास है, परंतु फिर भी आप हमें आवक नंबर दे दीजिये, जिससे हमें संतुष्टि हो जाये। इस पर कलेक्टर महोदय ने कहा कि अगर आपको कानूनन प्रक्रिया ही करनी है तो फिर आवेदन बाहर दीजिये, अपनी गति से कार्य होगा। हमने उन्हें बताया कि अगर कानूनन प्रक्रिया को नहीं अपनाया तो हम मुश्किल में फँस जायेंगे, क्योंकि हमें अगले दिन ही बैंगलोर के लिये वापिस निकलना था। हमारे एक बहुत ही घनिष्ठ मित्र हैं, उनसे इस बाबद बात की तो वे बोले कि बॉस इस तरीके से थोड़ा समय जरूर लगेगा, परंतु ये सब सुधर जायेंगे।

हमने आवक नंबर लिया और आवेदन की अपनी प्रति पर आवक के सील ठप्पे लगवाकर, कलेक्टरेट से निकल ही रहे थे, कि हमने एक नाम देखा डिप्टी कलेक्टर महोदय का, हमें लगा कि अरे ये तो अपने परिचित हैं, वे हमारे कॉलेज के अर्थशास्त्र विषय के प्रोफेसर थे, जो बाद में पीएससी करके डिप्टी कलेक्टर थे, हम पहुँचे तो वे एकदम से पहचान गये और उन्होंने कुशल पूछा और कहा कि बताओ इधर कैसे आना हुआ, हमने अपना सारा किस्सा उन्हें सुना दिया, तो वे बोले अभी माधवनगर कंट्रोल रूम जाओ और वहाँ पर एक एएसपी का नाम बताया और सामने ही फोन कर दिया, कहा कि चिंता मत करो बेटा, हम यही सब ठीक करने के लिये तो प्रोफेसर से प्रशासन में आये हैं।

हम कंट्रोल रूम गये, बड़े अच्छे से साहब पेश आये और हमारा आवेदन उन्होंने भी ले लिये, अभी तक जो एजेन्ट और बिल्डर अकड़ रहे थे, तो उनके ऊपर अब कानूनन हमने दो प्रकार से दबाब बना दिया था, पुलिस कंट्रोल रूम से भी अब दबाब बनाया जाने लगा और कलेक्टर महोदय ने हमारी अर्जी को तहसीलदार को सौंप दिया, तो तहसीलदार की तरफ से भी उनके पास समन जाने लगे, समन की तामील करने वे नहीं आये, तो कानून ने अपने तरीके से काम करना शुरू किया और वे लोग हमारे घर आये और बाहर ही सैटलमेंट की बाद करने लगे, हम अपने अभिभावकों को ज्यादा परेशान नहीं करना चाहते थे, सो बाहर ही सैटलमेंट कर लिया।

पर सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि हमने अपनी कमाई की पूँजी लुटने से बचा ली, और दुख इस बात का है कि बहुत से लोग उस एजेन्ट और बिल्डर के झाँसे में आकर अपने सपने को लुटते हुए देखते रहे और आखिर में वह सपना टूट ही गया।

 

CBSE ने OTBA को बंद करने की घोषणा कर दी है।

OTBA याने कि Open Text Based Assessment जो कि Central Board of Secondary Education (CBSE) ने दो वर्ष पूर्व शुरू किया था। अब इस सत्र से CBSE ने OTBA को बंद करने की घोषणा कर दी है।

OTBA को 9 व 11 वीं के छात्रों के लिये शुरू किया गया था, OTBA के बारे में जानकारी इस प्रकार है – Continue reading…

 

अवचेतन मस्तिष्क subconscious mind

शुक्रवार को सुबह मन अनमना था, कुछ न कुछ उधेड़बुन मन में लगी हुई थी। उठने के बाद से ही लग रहा था कि आज कुछ गड़बड़ होने वाली है, ऐसा मेरे साथ पहली बार नहीं हो रहा था, पहले भी कई बार हो चुका है। मुझे कई बार पूर्वाभास हो जाता है, मेरे अवचेतन मस्तिष्क में यह बात चौंकी भी थी कि आज बाईक फिसल सकती है और कुछ चोट लग सकती है। ऑफिस जाने से पहले मैंने कई बार सोचा कि आज कार से जाया जाये, परंतु बैंगलोर का यातायात ऐसा है कि जितना देर होते जाता है, उतना ही कठिन गाड़ी चलाना होता जाता है। हमें तैयार होते होते थोड़ी देर हो ही गई, बाईक से ही जाने का निश्चय किया। बारिश का भी मौसम था, सोचा था कि बारिश से भी थोड़ा बच लेंगे, परंतु भाग्य से पूरे रास्ते बारिश नहीं मिली। Continue reading…

 

रोजमर्रा की 5 चीजें जिनका उपयोग हमें तुरंत बंद कर देना चाहिये।

रोजमर्रा की 5 चीजें जिनका उपयोग हमें तुरंत बंद कर देना चाहिये।

ऐसी 5 चीजें जिनका उपयोग हम रोज करते हैं, हमें उनका उपयोग बंद कर देना चाहिये।

  1. प्लास्टिक स्ट्रॉ एवं चम्मच – अभी तक प्राप्त जानकारी से पता चलता है कि समुद्र में प्राप्त 80 प्रतिशत कबाड़ा प्लास्टिक का होता है, जिसमें प्लास्टिक स्ट्रॉ भी शामिल है। प्लास्टिक स्ट्रॉ की जगह काँच की स्ट्रॉ का उपयोग करें, काँच की स्ट्रॉ खरीदें, उपयोग करें, धोयें और वापिस से उपयोग करें, इससे आप कार्बन फुटप्रिट्स में को कम करने में मदद ही करेंगे। साथ ही अपने घर में बड़े लोगों को समझायें कि मसालदानी वगैराह में प्लास्टिक की चम्मच की जगह, लकड़ी की चम्मच का उपयोग करें, लकड़ी की चम्मच ज्यादा दिन भी चलेगी।

    प्लास्टिक स्ट्रॉ एवं चम्मच

    प्लास्टिक स्ट्रॉ एवं चम्मच

  2. माईक्रोबीड्स वाले टूथपेस्ट या त्वचा की रक्षा करने वाले उत्पाद – अधिकतर टूथपेस्ट वाली कंपनियाँ अपनी पैकिंग में माईक्रोबीड्स वाले ऐसे तत्वों का उपयोग करती हैं जिन्हें प्राकृतिक तरीके से नहीं सड़ाया जा सकता या नष्ट नहीं किया जा सकता है। इससे ही लगभग 8 टन कचरा समुद्र में पहुँचता है। इस तरह के उत्पाद को खरीदने के पहले उनकी सामग्री को पढ़ लें और पर्यावरण अनुकूल उत्पाद ही उपयोग करें।

    माईक्रोबीड्स वाले टूथपेस्ट

    माईक्रोबीड्स वाले टूथपेस्ट

  3. स्टीरोफोम उत्पाद – पॉलीस्टीरीन से बनने वाले ये उत्पाद, पेट्रोलियम आधारित प्लास्टिक जो का नॉन बॉयोडिग्रेडेबल है और उसके स्वास्थ्य पर नुक्सान ज्यादा हैं। स्टीरोफोम आधारित उत्पाद कटोरी, प्लेटों का उपयोग हम लोग अपनी पार्टियों में करते हैं। इसकी जगह हमें पर्यावरण अनुकूल उत्पादों याने कि बाँस, पेड़ की छाल या फिर पत्तों का उपयोग करना चाहिये।

    स्टीरोफोम

    स्टीरोफोम

  4. लकड़ी की चॉपस्टिक – खाना खाने के आनंद के लिये हम लोग लकड़ी की चॉपस्टिक का उपयोग करते हैं, परंतु हर साल लगभग 5.70 करोड़ (ग्रीनपीस के अनुसार आँकड़े) चॉप्स्टिक का उपयोग किया जाता है, सोचिये कि कितने सारे पेड़ इसके लिये काटने पड़ते हैं। इन चॉप्सिटकों का उपयोग न करें और इसकी जगह स्टील के काँटे या चम्मच का ही उपयोग करें।

    लकड़ी की चॉपस्टिक

    लकड़ी की चॉपस्टिक

  5. पॉलीथीन के थैले – प्लास्टिक के ये थैले नष्ट नहीं होते हैं, उनको ऐसे ही कचरे के साथ कचरा क्षैत्र में जमीन में दबा दिया जाता है और जब कचरे को नष्ट करने के लिये जलाया जाता है तो इससे जहरीली गैसें निकलती हैं और जो कि प्रदूषण भी बड़ाती हैं। कपड़े या जूट का थैला खरीदें जिसे कि बार बार उपयोग किया जा सके और प्लॉस्टिक थैले के लिये मना कर दें। इससे कम से कम थोड़ी बहुत तो हमारे फेफड़ों और धरती को राहत मिलेगी।

    पॉलीथीन के थैले

    पॉलीथीन के थैले

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पॉकीमोन गो Pokémon Go

Pokémon Go

Pokémon Go

पॉकीमोन गो Pokémon Go एक खेल है जो कि मोबाईल फोन पर खेला जाता है, पिछले कुछ समय से उस खेल में मोबाईल गेमिंग की दुनिया में तहलका मचा रखा है। आधिकारिक तौर पर भारत में भी अब गूगल प्ले स्टोर पर पॉकीमोन गो खेल उपलब्ध है। इस खेल को नियान्टिक इनकार्पोरेशन नाम की कंपनी ने बनाया है और इस खेल को ऑफिशियली 6 जुलाई 2016 को रिलीज किया गया था।

पॉकीमोन गो Pokémon Go को एन्ड्रॉयड और एप्पल दोनों पर खेला जा सकता है, यह खेल फ्री है आप इसे डाऊनलोड कर सकते हैं यह 84.4 एम.बी. का है। इस खेल को खेलने के लिये आपको जीपीएस और डाटा कनेक्शन दोनों ही चाहिये होता है और कई बार यह खेल आपका कैमरा भी उपयोग करता है। यह खेल लोकेशन बेस होने के कारण रियल फीलिंग देता है।

इस खेल को खेलने के पहले आपको अपने आपको रजिस्टर करना होता है, आप अपने जीमेल खाते से भी लॉगिन कर सकते हैं। उसके बाद आपको पॉकीमोन स्टॉप पर से बॉल और अंडे लेने होते हैं और जब भी आप पैदल घूमते हैं तो आपको मोबाईल पर पॉकीमोन दिखते हैं तो आपको उन पॉकीमोन को बॉल फेंककर पकड़ना होता है और कई जगहों पर इनके जिम भी होते हैं।

इसमें कई तरह के पॉकीमोन होते हैं जो कि आपको पकड़ने होते हैं और इस खेल में कई लेवल हैं, जो कि आपको पॉइंट्स और पॉकीमोन के आधार पर बढ़ते हैं। जितना आप पैदल चलेंगे उतने ज्यादा पॉइंट्स आपको मिलते जायेंगे और आपके पॉकीमोन शक्तिशाली होते जायेंगे।

Gameplay screenshots of Pokémon Go

Gameplay screenshots of Pokémon Go

तो यह तो आप समझ ही गये होंगे कि पॉकीमोन खेल में चलना बहुत पड़ता है, अगर आप वाहन पर हैं तो एकदम से आपको चेतावनी मिल जायेगी कि आप वाहन चलाते समय पॉकीमोन गो नहीं खेलें, और अपने आस पास का ध्यान रखें। बेहतर है कि जब भी आप इस खेल को खेलें अपने आसपास भी ध्यान रखें और सावधानी पूर्वक खेलें।

विदेश में कई तरह की दुर्घटनायें हो चुकी हैं कि पॉकीमोन गो खेलते खेलते ही हाईवे और सड़कों पर आ गये और भयानक दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं। कई लोग आपस में टकरा चुके हैं और कई लोगों की मौत भी हो चुकी है। ध्यान रखें कि खेल मनोरंजन के लिये बनाया गया है, परंतु मनोरंजन जान से ज्यादा कीमती नहीं है।

कई देश पॉकीमोन गो Pokémon Go को खेलने के लिये अपने नागरिकों के लिये चेतावनी जारी कर चुके हैं और कई शहरों में इस खेल को खेलने के लिये प्रतिबंध की भी बात की गई है। कई सार्वजनिक स्थानों पर पॉकीमोन गो खेलने के प्रतिबंध के बोर्ड लगाये गये हैं।

इस खेल के बारे में वर्ष 2014 में पहली बार सोचा गया था और 2016 में जब पॉकीमोन गो को रिलीज किया गया तो केवल कुछ ही देशों में इस खेल को डाऊनलोड के लिये दिया गया, धीरे धीरे जब कंपनी अपने सर्वरों को स्टेबल करने लगी तो उन्होंने अपना विस्तार बढ़ाना शुरू किया, 7 जुलाई 2016 को जब पॉकीमोन गो को बाजार में उतारा गया तो निन्टेन्डो कंपनी के शेयर 10 प्रतिशत बढ़ गये थे और 14 जुलाई तक तो शेयरों के भाव में 50 प्रतिशत का उछाल देखा गया, क्योंकि यह खेल रातोंरात प्रसिद्ध हो चुका था। इस तरह का कोई और खेल मोबाईल गेमिंग की दुनिया में पहली बार उतारा गया था।

 

काशी विश्वनाथ मंदिर बनारस

आज एक मित्र 7 दिन की बनारस यात्रा से आये हैं, वे दक्षिण भारतीय हैं और लगभग हर सप्ताह ही कहीं न कहीं किसी न किसी धार्मिक यात्रा पर रहते हैं। काशी की बहुत तारीफ कर रहे थे। बता रहे थे कि उनके समाज के लोगों ने लगभग 200 वर्ष पूर्व काशी में ट्रस्ट बनाया था और धर्मशाला की स्थापना की थी। धर्मशाला में रहने के कारण उनको वहाँ के सारे धार्मिक रीति रिवाज पता चले। उन्होंने वहाँ सुबह, दोपहर एवं रात्रि याने कि शयन आरती के दर्शन किये। काशी विश्वनाथ की 108 परिक्रमा की।

उन्होंने बताया कि काशी विश्वनाथ के दरवाजे के पास ही एक और दरवाजा है, अगर ध्यान न दो तो आप सीधे एक मस्जिद में पहुँच जाते हैं। खैर हमें उनकी यह बात समझ नहीं आई। काशी विश्वनाथ में दो नंदी जी हैं, जिसमें से एक नये हैं। तो वे हमें बता रहे थे कि हमें यह देखकर बहुत ही आश्चर्य हुआ। काशी विश्वनाथ मंदिर बनारस की स्वच्छता के बारे में बता रहे थे, कि बहुत ही स्वच्छ है। लेटे हनुमान मंदिर के बारे में भी बात हुई।

हरिशचंद्र घाट क्या किसी भी घाट को देख लो, सारे घाट बहुत ही साफ हैं और बिल्कुल अच्छे बने हुए हैं, गंगा का पानी भी बिल्कुल साफ है, कह रहे थे कि लोग तो कहते हैं कि हरिशचंद्र घाट पर तो आधे जले मुर्दे फेंक दिये जाते हैं, पर उन्हें वह सब वहाँ नहीं दिखा। वे काशी की तारीफ किये जा रहे थे और हमें बहुत अच्छा लग रहा था। हमने उनसे पूछा कि इलाहाबाद में कहाँ कहाँ घूमने गये तो वो बोले कि हम केवल त्रिवेणी संगम पर गये और वापिस काशी आ गये।

उनको सबसे अच्छी बात लगी कि मंदिर किसी ट्रस्ट का नहीं है, वहाँ वह मंदिर एक परिवार के पास है जिसने मुगलों के समय उस मंदिर की रक्षा की थी। और वे गंगा आरती की भी बहुत तारीफ कर रहे थे, इतनी सारी तारीफ की, कि हमें वहाँ जाने की इच्छा होने लगी है।

आज से अगले तीन महीने वे नंगे पैर ही रहने वाले हैं, हमने पूछ ही लिया कि इसका क्या है, तो वे बोले कि मार्च में वे 7 दिन की मुरूगन की एक यात्रा पर जाने वाले है, नाम तो खैर हमें सही तरीके से याद नहीं परंतु वे कह रहे थे कि उन सात दिनों में 350 किमी की यात्रा नंगे पैर करनी होती है, मतलब कि लगभग रोज 50 किमी रोज नंगे पैर चलना होता है, तो इसके लिये वे 2-3 महीने नंगे पैर ही रहते हैं और ज्यादा से ज्यादा चलने की कोशिश करते हैं, जिससे के नंगे पैर चलने में अभ्यस्त हो जायें।

वे कह रहे थे कि तमिलनाडू में एक से एक मंदिर हैं जिनकी सृजन शैली देखते ही बनती है, बस उनका अच्छे से रखरखाव और उनकी मार्केटिंग नहीं की गई है, लेकिन अब लगभग सभी मंदिरों में रखरखाव अच्छा हो रहा है और लोगों को उनके शिल्प के बारे में भी बताया जा रहा है। केवल एक ही समस्या है कि वे मंदिर शहरी क्षैत्र में नहीं हैं, तो आपको एक तमिल जानने वाला एक गाईड करना ही पड़ेगा।

उम्मीद है कि हमारे मंदिर के शिल्प और वैभव को हम देख पायेंगे, हमने उनसे कहा है कि वे हमें उनके अनुभव और जगह के नाम बताया करें तो हम उनके बारे में लिख दिया करेंगे। तो कम से कम कुछ लोगों तक तो जानकारी पहुँच ही जायेगी।

 

TATA Hexa टाटा हैक्सा भविष्य की एसयूवी

हमने बैंगलोर में टाटा हैक्सा Tata Hexa कार के एक्सपीरियंस सेंटर  #hexaexperience  पर जाकर कार का अनुभव लिया। कार पहली नजर में देखने पर ही भा गई। टाटा की यह कार एसयूवी कारों में बहुत ही जल्दी अपनी पैठ बना लेगी। कार के प्रारूप को देखकर ही हम कार की परिकल्पना करने वाले लोगों की दाद देने लगे। हमने सबसे पहले स्वागत के काऊँटर पर जाकर अपने को और अपने परिवार को पंजीकृत किया, उन्होंने सभी के हाथ में बैंड पहना दिये। हमसे फॉर्म भरवाया गया और ड्राईविंग लाईसेंस की कॉपी भी ली गई, क्योंकि हमने कार चलाने की इच्छा प्रकट की थी। Continue reading…

 

जब हाईवे पर एक सफेद वर्दी वाले ने हमें हाथ दिया

कल बैंगलोर में यातायात के सफेद वर्दीधारी कुछ ज्यादा ही मुस्तैद नजर आ रहे थे, पहले लगा कि कोई बड़ा अफसर या मंत्री आ रहा होगा। परंतु हर जगह दोपहिया वाहनों और टैक्सी वालों को रोककर उगाही करते देख समझ आ गया कि इनको दिसंबर का टार्गेट पूरा करना होगा, नोटबंदी के चलते इनको नवंबर में भारी नुक्सान हुआ है। भले ही चालान क्रेडिट कार्ड या ऑनलाईन भरने की सुविधा हो, परंतु हर चालान तो एक नंबर में न ये काटेंगे और न ही पकड़ाये जाने वाला कटवायेगा। जब 500 या 1000 की जगह 100 या 200 में ही काम चल जायेगा तो कौन इतनी माथापच्ची करेगा। आजकल तो हालत यह है कि इनके पास भी जो क्रेडिट कार्ड मशीन होती है, उसकी भी टांय टांय फिस्स हुई होती है, या तो नेटवर्क फैलियर का मैसेज आता है या फिर सर्वर लोड का मैसेज या टाईम आऊट। Continue reading…

 

हानिकारक बापू

हानिकारक बापू – यह गाना है आमिर खान की फिल्म दंगल का, जबसे हमारे बेटेलाल ने यह गाना सुना है, तब से वे इसे कई बार सुन चुके हैं और लगभग याद ही कर लिया है। अब आलम यह है कि जब भी हम या घरवाली कुछ कहने को होते हैं तो बस इस गाने को गाना शुरू कर देते हैं। हमें भी उत्सुकता हुई कि आखिर यह गाना बना ही क्यों ?

फिल्म की कहानी और ट्रेलर से इतना पता चला कि मुख्य अभिनेता आमिर खान जो कि एक पहलवान की भूमिका में हैं और घर में बेटे होने का इंतजार कर रहे होते हैं, परंतु उनके घर में केवल लड़कियाँ ही पैदा हो रही होती हैं, और ये स्वर्ण पदक जीतने में नाकामयाब रहे तो अपना यह सपना अपने बेटे से पूरा करवाना चाहते हैं। पर एक दिन उनकी दो लड़कियों नें दो गाँव के छोरों को धो दिया तो पहलवान पिता ने सोचा कि पदक तो बेटी भी ला सके है और बस पहलवान पिता दोनों बेटियों के पीछे लग गया कि अब तो ये छोरियाँ ही स्वर्ण पदक लायेंगी। Continue reading…