जितना खूबसूरत है प्यार, उतना ही गमगीन भी

    जीवन के तेड़े मेड़े रास्ते रतन को हमेशा से ही पसंद थे, हमेशा ही अपने जीवन में कुछ न कुछ रोमांचक करने की इच्छा इसके जीवन में नये रंग भर देती थी, एक बार कुछ ऐसा करते हुए ही रतन एक खूबसूरत आँखों के बीच फँस गया और जीवन के उस खूबसूरत मोड़ पर […]
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जीवन के प्रति नकारात्मक रुख

    थोड़ा बीमार था, और बहुत कुछ आलस भी था, आखिर रोज रोज शेव बनाना कौन चाहता है, उसकी दाढ़ी के बालों के मध्य कहीं कहीं सफेदी उसकी उम्र की चुगली कर रही थी, वह बहुत सारी बातों से अपने आप को कहीं अंधकार में विषाद से घिरा पाता। कहीं भी उसे न प्यार मिलता […]
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बेटी तू कितना भी विलाप कर ले, तुझे मरना ही होगा (नाटक)

माँ और उसकी कोख में पल रही बेटी के मध्य संवाद  पार्श्व में स्वरघोष के साथ ही बताया जाता है – ( जैसे ही बहु के माँ बनने की सूचना मिली परिवार खुशियों से सारोबार था, परिवार में उत्सव का माहौल था। उनके घर में वर्षों बाद नये सदस्य के परिवार में जुड़ने की सूचना जो मिली थी, परिवार रहता […]
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स्पर्श की संवेदनशीलता (BringBackTheTouch)

    पहले हम लोग एक साथ बड़ा परिवार होता था, पर अब आजकल किसी न किसी कारण से परिवार छोटे होने शुरू हो गये हैं, पहले परिवार में माता पिता का भी एक अहम रोल होता था, परंतु आजकल हम लोग अलग छोटे परिवार होते हैं, और अपनी छोटी छोटी बातों पर ही झगड़ पड़ते […]
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जंग .. मेरी कविता.. (विवेक रस्तोगी)

कठिनाईयाँ तो राह में बहुत हैं, बस चलता चल, राह के काँटों को देखकर हिम्मत हार दी, तो आने वाली कौम से कोई तो उस राह की कठिनाईयों पर चलेगा, तो पहले हम ही क्यों नहीं, आने वाली कौम के लिये और बड़ी उसी राह की आगे वाली कठिनाईयाँ छोड़ें, नहीं तो वे इन कठिनाईयों […]
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बस तुम्हें… अच्छा लगता है.. मेरी कविता

मुझे पता है तुम खुद को गाँधीवादी बताते हो, पूँजीवाद पर बहस करते हो, समाजवाद को सहलाते हो, तुम चाहते क्या हो, यह तुम्हें भी नहीं पता है, बस तुम्हें बहस करना अच्छा लगता है । जब तक हृदय में प्रेम, किंचित है तुम्हारे, लेशमात्र संदेह नहीं है, भावनाओं में तुम्हारे, प्रेम खादी का कपड़ा […]
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प्रेमपत्र.. मेरी कविता

वे प्रेमपत्र जो हमने एक दूसरे को लिखे थे कितना प्यार उमड़ता था उन पत्रों में तुम्हारा एक एक शब्द कान में लहरी जैसा गूँजता रहता था   पहला प्रेमपत्र तब तक पढ़ता था जब तक नये शब्द ना आ जायें तुम्हारे प्रेमपत्रों से ऊर्जा, संबल और शक्ति मिलते थे कई बातें और शब्द तो […]
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मैं झूठ क्यों बोलने लगा हूँ

मैं झूठ क्यों बोलने लगा हूँ कारण ढूँढ़ रहा हूँ, पर जीवन के इन रंगों से अंजान हूँ, बोझ हैं ये झूठ मेरे मन पर..   ऐसे गाढ़े विचलित रंग, जीवन की डोर भी विचलित, मन का आकाश भी, और तेरा मेरा रिश्ता भी..   तुमसे छिपाना मेरी मजबूरी, मेरी कमजोरी, मेरी लाचारी, हासिल क्या […]
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एक मुलाकात कल परसों में प्रसिद्ध हुए नेता और बरसों से प्रसिद्ध अभिनेता खाज साहब से

एक मुलाकात कल परसों में प्रसिद्ध हुए नेता और बरसों से प्रसिद्ध अभिनेता खाज साहब से – प्रश्न – खाज साहब आपके मुंबई में १२ रूपये वाली थाली के बयान ने आपको रातोंरात प्रसिद्धी दी है, आप क्या सोचते हैं ? उत्तर – अरे भई, हमने कोई गलत बयानबाजी थोड़े ही कर दी है, १२ […]
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चाँद पूर्ण रूप में

चाँद जब रोटी सा गोल होता है, पूर्ण श्वेत, अपने पूर्ण रूप में, उसकी आभा और निखर आती है, मिलते तो रोज हैं छत पर, पर देखना तुम्हें केवल इसी दिन होता है, काश की चाँद हर हफ़्ते पूर्ण हो, महीने में एक बार तुम्हें देखना, फ़िर दो पखवाड़े उसी सुरमई तस्वीर को, सीने से […]
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