कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – ३२

गाढोत्कण्ठाम़् – विरह वेदना से उत्पन्न प्रिय या प्रिया से मिलन की उत्कट इच्छा ही उत्कण्ठा कहलाती है। उत्कण्ठा का लक्षण इस प्रकार है – रागेष्वलब्धविषयेषु वेदना महती तु या। संशोषणी तु गात्राणां तामुत्कण्ठां विदुर्बुधा:॥ अर्थात जिससे प्रेम हो उसके न मिलने पर मन में ऐसी वेदना होने लगती है कि जिससे शरीर सूखता जाता […]
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कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – ३१

कलबतनुताम़् – यहाँ कलभ को उपमान बनाया गया है; क्योंकि कलभ और मेघ दोनों में ऊँचाई तथा वर्ण की समानता है तथा मेघ इच्छानुसार रुप धारण करने वाला है। यहाँ तनु का अर्थ शरीर न लेकर छोटा लिया गया है। बत्तीस साल की उम्र वाले हाथी के बच्चे को कलभ कहा जाता है। तन्वी – […]
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कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – ३०

रक्ताशोक: – अशोक दो प्रकार का होता है – (१) श्वेत पुष्पों वाला, (२) लाल पुष्पों वाला। रक्ताशोक का प्रयोग यहाँ साभिप्राय है; क्योंकि रक्ताशोक कामोद्दीपक होता है; अत: प्रेमी लोग अपने घरों में रक्ताशोक को लगाते हैं। कवि प्रसिद्धि के अनुसार किसी सुन्दर युवती के बायें पैर के प्रहार से अशोक वृक्ष में पुष्प […]
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कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – २९

दिनकरहयस्पर्धिन: – (सूर्य के घोड़ों से प्रतिस्पर्धा करने वाले) अलकापुरी के घोड़े पत्तों के समान हरे वर्ण वाले हैं। क्योंकि सूर्य के घोड़े भी हरे वर्ण के माने जाते हैं, अत: अलकापुरी के घोड़े रंग में भी तथा वेग में भी सूर्य के घोड़ों से स्पर्धा करते हैं। प्रत्यदिष्टाभरणरुचय: – आभूषणों की अभिलाषा छोड़े हुए […]
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कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – २८

गत्युत्कम्पात़् – कमिनियाँ अपने प्रियतमों के पास अभिसार के लिये शीघ्रतापूर्वक जाती हैं, क्योंकि एक तो रात्रि का भय दूसरे किसी को उनके जाने का पता न चल जाये। इसलिये शरीर के हिलने-डुलने से उनके केशपाश में लगे अलंकरण आदि मार्ग में गिर जाते हैं, जिससे यह सूचित हो जाता है कि अभिसारिकाएँ इस मार्ग […]
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कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – २७

नीवीबन्धोच्छ्वसितशिथिलम़् – अधोवस्त्र की गांठ के खुल जाने के कारण ढीला। नीवी का अर्थ स्त्रियों के नीचे के वस्त्र की गांठ होता है तथा नीवी अधोवस्त्र को भी कहते हैं। बिम्बाधराणाम़् – बिम्ब फ़ल के समान (लाल) ओष्ठ वाली स्त्री को बिम्बाधरा कहते हैं। अथवा प्रियतम के बार-बार चुम्बन करने से अथवा दशनक्षत करने के […]
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कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – २६

कुसुमशरजात़् – कामदेव के धनुष का दण्ड इक्षु से बना माना जाता है तथा प्रत्यञ्चा काले काले भौरों की श्रेणी से तथा उससे छोड़े जाने वाले वाण पाँच माने जाते हैं इष्टसंयोगसाध्यात़् – अलका निवासी ज्वरादि से पीड़ित नहीं होते थे और यदि वे किसी से पीड़ित होते थे तो काम जन्य सन्ताप से और […]
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कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – २५

उन्मत्तभ्रमरमुखरा: – अलकापुरी में वृक्षों पर सभी ऋतुओं में सदा पुष्प विकसित रहते हैं, इसीलिये भ्रमर भी नित्य उन पर गुञ्जारते रहते हैं। पादपा नित्यपुष्पा: – यद्यपि वृक्षों पर समय-समय पर पुष्प विकसित होते हैं परन्तु वहाँ अलकापुरी में वृक्ष सदा पुष्पों से युक्त रहते हैं। हंसश्रेणीरचितरशना – हंस कमलनाल खाते हैं, अलकापुरी में कमलनियों […]
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कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – २४

हलभृत इव – बलराम गौरवर्ण के थे और वे नीले वस्त्र धारण करते थे। जब वे कन्धे पर नीला दुपट्टा रखते थे तो और भी सुन्दर प्रतीत होते थे। इसी की कल्पना कवि ने की है कि कैलाश पर्वत श्वेत है और उस पर काला मेघ बलराम की शोभा को धारण कर लेगा। हेमाम्भोजप्रसवि – […]
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कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – २३

बलिनियमनाभ्युद्यतस्य विष्णो: – बलि प्रह्लाद का पौत्र तथा विरोचन का पुत्र था। वह असुरों का राजा था तथा दानशीलता के लिये प्रसिद्ध था। विष्णु वामन का अवतार लेकर ब्राह्मण के वेश में बलि के यहाँ पहुँचे और तीन पग पृथ्वी की याचना की और बलि के स्वीकार कर लेने पर पहले पग में पृथ्वी और […]
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