ऑपरेशन सफेद सागर नेटफ्लिक्स

ऑपरेशन सफेद सागर नेटफ्लिक्स पर देखा, हालांकि देखे हुए समय हो गया, पर दिमाग बहुत सी चीजों में व्यस्त रहा, पर एक बात दिमाग से बार बार टकरा रही थी तो सोचा जब तक लिखेंगे नहीं, यह पीछा नहीं छोड़ेगी।

जिस तरह से एयरफोर्स को केंद्र में रखकर यह सीरीज बनाई गई है, वह काबिलेतारीफ है। जिस खूबी से अनुशासन, आपसी सम्मान, जिद और बहादुरी दिखाई है, ऐसा अप्रतिम शौर्य कहीं और देखने को नहीं मिलेगा।

देखते देखते कई बार मन में यही सवाल आया कि 40 घंटे साप्ताहिक काम करने वाले कितने मौज में रहते हैं, जबकि जो सेना हमारी बॉर्डर की रक्षा कर रही है, वे हमारे लिए 24 घंटे मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी कर रही है, और वह भी अपनी जान हथेली पर लेकर, जबकि 40 घंटे वाले मजदूर जो भी काम करते हैं, वे भी जान हथेली पर लेकर केवल उतने ही समय घूमते हैं, जब वे घर से ऑफिस आना जाना करते हैं। क्योंकि अपने यहाँ सड़क और ट्रैफिक दोनों अविश्वसनीय रूप से बदतर हैं। बस यही लगता है कि जो वर्दी रक्षा के लिए मिली है, वे खुद ही इसे सम्माननीय बनाते हैं।

सेना के पास तो कच्ची सड़कों पर चलने के लिए बड़े suv वाहन रहते हैं, टैंक रहते हैं, वे फुल्ली इक्विप रहते हैं, क्योंकि उनको पता है, जहां उनको जाना है उधर सड़कें हैं ही नहीं।

खैर एक बात जो हमेशा परेशान करती है कि सैनिक के परिवार का हमेशा ही सब कुछ दाँव पर लगा होता है, पर वे फिर भी जिंदादिली से जीते हैं। और यही जज्बा उन्हें बाकी सारे लोगों से अलग बनाता है।

एक बात और मेरे जहन में अटक गई कि जब फाइटर प्लेन की पत्नी कहती है कि गुस्सा तो बहुत सी बातों पर हमें भी आता है, शिकायतें तो हमें भी बहुत रहती हैं, पर मैं उनको लिखकर एक डायरी में लिख देती हूँ, पर कभी भी सॉर्टी के दौरान कोई गुस्सा नहीं, क्योंकि जिस परिस्थिति में ये फ्लाई करते हैं, उसमें सेकंडों में निर्णय लेने होते हैं, और अगर घर पर की गई कोई शिकायत उनके दिमाग में रह गई तो उन्हें निर्णय लेने में परेशानी हो सकती है।

बस यही बात दुनिया में सभी को समझ लेनी चाहिये, कि बहुत से घर परिवार की शिकायतें इंतजार कर सकते हैं, पर काम करने वाले लोग भले वे स्त्री हों या पुरूष उन्हें शांत मन से काम करने का वातावरण बनाना घर पर हर एक सदस्य की जिम्मेदारी है।

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