बैंगलोर के अस्पतालों की एक बात अच्छी लगी कि बड़े अस्पतालों के लगभग सारे डॉक्टरों के प्रिस्क्रिप्शन कंप्यूटराइज होते हैं, जो कि उस डिपार्टमेंट के रिसेप्शन से प्रिंट करके दिए जाते हैं।
यह समस्या हो नहीं रही कि बीमारी क्या लिखी, डायग्नोस क्या लिखा है, और कौन सी दवाई लिखी। सब साफ साफ अंग्रेजी में समझ में आता है।
वरना पहले तो डॉक्टर की लिखाई घसीटामार है, यह सबको पता है। लगभग दो वर्ष पहले एक प्रसिद्ध हिमिटियोलॉजिस्ट से मिलने जाना हुआ था, उनके पास रखे लेपटॉप टैबलेट देखकर हैरान था, उस समय की जो भी एडवांस तकनीक थी, सब उपलब्ध थी, और तो और जो हम बातें कर रहे थे, वह भी ट्रांस्क्रिप्ट होकर स्क्रीन पर आ रही थी, जो गड़बड़ हो रही थी, तो डॉक्टर हाथ के डिजिटल पैन से ठीक भी कर रहे थे।
यह है पारदर्शिता, जिससे मरीज को सब समझ में आ जाये, और मरीज कहीं से भी अपनी दवाई खरीदने के लिए स्वतंत्र रहे। नहीं तो पास के मेडिकल से लेना मजबूरी होती थी कि वो घिसिपिटी राइटिंग उनको ही समझ आती थी। अभी हाल ही में एक अस्पताल में जाना हुआ, तो एक इंप्रूवमेंट और देखने को मिला वे ड्रग का नाम भी लिखकर दे रहे थे, यह बड़ी बात है।
और उनके एप्प पर लॉगिन करने पर मरीज अपने सारे बिल, प्रिस्क्रिप्शन, xray reports, लैब टेस्ट रिपोर्ट सब कभी भी देख सकता हैं। बताओ आपने कभी इतनी पारदर्शिता कहीं देखी।