समझ लिया। उन्होंने मुनि का अपमान किया। मुनि ने भी अपने तेज से उन सभी को भस्म कर दिया। जब वे नहीं लौटे तो अंशुमान ने उनकी भस्मी खोजी तथा मुनि से प्रार्थना की। तब मुनि ने कहा यदि गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर आ जाये तो इनका उद्धार हो सकता है। इस पर राजा भगीरथ घोर तपस्या करके गंगाजी को पृथ्वी पर लाये तथा अपने पितरों का उद्धार किया। इसलिये गंगा को सगर पुत्रों के लिये स्वर्ग की सीढ़ी कहा जाता है।
गौरीवक्त्रभ्रुकुटिरचनाम – पौराणिक कथा के अनुसार ब्रह्मा ने भगीरथ ने कहा कि तुम तपस्या करके शिव को प्रसन्न करो, जिससे कि वे स्वर्ग से गिरती हुई गंगा को सिर पर धारण कर लें। राजा भगीरथ ने वैसा ही किया। इससे यहाँ कवि ने कल्पना की है कि जब शिव ने गंगा को सिर पर धारण कर लिया, तब पार्वती का भी सौतिया डास से भृकुटि तान लेना स्वाभाविक था। इसे देखकर गंगा ने अपने झाग से पार्वती का उपहास किया, परन्तु गंगा ने प्रौढ़ा नायिका के समान पार्वती की उपेक्षा करके शिव के केश पकड़ लिये।
ऐरावत: पुण्डरीको वामन: कुमुदोऽञ्जन: ।पुष्पदन्त: सार्वभौम: सुप्रतीकश़्च दिग्गजा: ॥
