करने से अथवा दशनक्षत करने के काराण बिम्ब फ़ल के समान जिनके लाल ओष्टः हैं, वे बिम्बाऽधरा कहलाती हैं, अथवा शब्दार्णव के अनुसार स्त्री विशेष को बिम्बाऽधरा कहते हैं –
विशेषा: कामिनी कान्ता भीरुर्बिम्बाऽधराड़्गना।
विशेषा: कामिनी कान्ता भीरुर्बिम्बाऽधराड़्गना।
नमस्ते कल्पवृक्षाय चिन्तितान्न्प्रदाय च।विश्वम्भराय देवाय नमस्ते विश्वमूर्तये॥
पग में आकाश को नाप लिया। तीसरे पग के लिये जब कोई स्थान न रहा तब बलि ने अपना सिर विष्णु के समक्ष रख दिया। विष्णु ने तीसरे पग में उसे नापकर बलि को पाताल भेज दिया।
रोज शाम को गरबा की प्रेक्टिस करने वालों की और सीखने वालों की भीड़ लगी होती थी। चूँकि झाबुआ गुजरात से बिल्कुल लगा हुआ है इसलिये पारंपरिक गुजराती गरबा वहाँ देखने को मिलता है।
के कूप में उन्हें डाल दिया, इससे वे पुन: जीवन धारण करके उन देवताओं को पीड़ित करने लगे। तब फ़िर विष्णु और ब्रह्मा ने गाय और बछ्ड़ा बनकर त्रिपुर में प्रवेश करके उस रसकूपाऽमृत को पी लिया, तदन्तर शिव ने मध्याह्न में त्रिपुर-दहन किया।
के अ. १४० में आयी है कि एक बार हास परिहास में पार्वती जी ने शिव के दोनों नेत्र बन्द कर लिये, जिससे सम्पूर्ण संसार में अन्धकार व्याप्त हो गया। तब शिव ने ललाट में तृतीय नेत्र का आविर्भाव किया। शिव का यह नेत्र क्रोध के समय खुलता है; क्योंकि कामदेव भी तृतीय नेत्र की अग्नि से ही भस्म हुआ था।