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आधुनिक संचार क्रांति एवं संचार के नए आयाम, इंटरनेट, ई-मेल, डॉट कॉम (वेबसाइट) – निबंध
वीडियो चैटिंग ब्लैकबैरी प्लेबुक से (Video Chat for Blackberry Playbook via AIM & AOL)
कल से वीडियो चैटिंग के लिये लगे हुए थे, कैसे कम्प्य़ूटर और ब्लैकबैरी प्लेबुक के मध्य वीडियो चैटिंग हो, इसके लिये ऐसे सॉफ़्टवेयर उत्पाद की जरूरत महसूस हो रही थी जिसमें किसी भी डिवाइस पर सॉफ़्टवेयर संस्थापित न करना पड़े। इसमें आज हमें सफ़लता भी मिली ।
www.aim.com
इसमें बिना संस्थापन के भी सीधे वेबसाईट से वीडियो चैटिंग की जा सकती है, हालांकि हमें जो महसूस हुआ वह यह है कि इसमें थोड़ा आडियो का लफ़ड़ा है, पर वीडियो बिल्कुल साफ़ है। पर इसमें पंजीकरण जरूरी है, या तो आप AIM में पंजीकरण करें या फ़िर Facebook से भी लॉगिन कर सकते हैं।
इसके पहले हमने AOL की ही एक और सेवा है जिसमें वेबपेज से सीधे वीडियो कान्फ़्रेंसिंग की जा सकती है, उसका भी उपयोग किया था, पर हमें अब लगा कि AOL की ही सेवा है और उसमें भी हमने यही ऑडियो की समस्या का सामना किया था, पर उसमें भी वीडियो बढ़िया था।
www.aol.com/av की सबसे अच्छी बात यह लगी कि इसमें आपको वेबसाईट पर पंजीकरण करवाना जरूरी नहीं है, केवल एक बक्से पर टिक मारना है कि आप १३ वर्ष के ऊपर हैं और फ़िर अपने कैमरा और माईक की सैटिंग चुन लीजिये। सीधे वीडियो चैट शुरू हो जायेगा।
इस वीडियो चैट में AOL आपको एक जादुई लिंक देगा जिसे आपको उन लोगों को देनी होगी जिनसे आप वीडियो चैटिंग करनी होगी, यह पूर्णतया सुरक्षित है, और इसमें अधिकतम ३ लोग वीडियो चैट कर सकते हैं। आप यहाँ AIM और Facebook वालों को भी बुला सकते हैं।
वीडियो क्वालिटी जबरदस्त है, ऑडियो क्वालिटी हमें ठीक नहीं लगी।
अब चूँकि ब्लैकबैरी प्लैबुक में एक वीडियो चैट का सॉफ़्टवेयर उत्पाद जरूर दे रखा है, परंतु यह सॉफ़्टवेयर केवल ब्लैकबैरी से ब्लैकबैरी के मध्य ही वीडियो चैटिंग कर सकता है। हमने Skype भी ढूँढ़ा परंतु Skype कंपनी ने ब्लैकबैरी के लिये उत्पाद बनाना बंद कर दिया है और जो उपलब्ध था वह भी अपनी साईट से हटा दिया है, जबसे Skype ने Facebook के साथ वीडियो चैटिंग शुरू की है।
अभी वीडियो चैटिंग के लिये खोज जारी है, जब तक कि ब्लैकबैरी प्लेबुक के लिये कोई अच्छा सा वीडियो चैट नहीं मिल जाता है। नहीं तो आखिर में खुद ही बैठकर कोड लिखना पड़ेगा और वीडियो चैट बनाना पड़ेगा ![]()
नये प्रकार के वायरस से सावधान (Alert from new type of Virus)
माइक्रोसॉफ़्ट के डॉस को ३० वर्ष हो गये.. (MS-DOS is 30 Years old today)
आज एक मेल पढ़ रहा था तो उसमें एक लिंक थी – MS-DOS is 30 Years old today. हम तो डॉस वाले जमाने से ही कम्पयूटर सीखे हुए हैं, इसलिये इस खबर की ओर ध्यान आकर्षित हो गया।
आज से तीस वर्ष पहले २७ जुलाई, १९८१ को माइक्रोसॉफ़्ट ने QDOS के राईट्स २५,००० डॉलर में सिएटल कम्प्यूटर प्रोडक्ट्स से खरीदे थे। नहीं तो QDOS को 86-DOS के नाम से जाना जाता था, सिएटल कम्प्यूटर प्रोडक्ट्स ने इसका अभिकल्पन इन्टेल के 8086 प्रोसेसर के लिये किया था।
हमने MS-DOS के 5.0 वर्शन से सीखना शुरू किया था, फ़िर ६.२ वर्शन सीखा, जिसकी command.com 54,645 बाईट्स की होती थी, और अगर command.com फ़ाईल का साईज बदल गया तो इसका मतलब कि DOS की सीडी में वाईरस आ गया है। काली स्क्रीन का फ़ोटो देखकर पुराने लोगों को पुराने दिन याद आ जायेंगे।
उस समय जितने भी सॉफ़्टवेयर सीखे थे बहुतों को तो वर्षों से उपयोग नहीं किया परंतु अगर आज भी मिल जाते हैं तो देखकर बहुत खुशी होती है, और उनके कमांड तो ढूँढ़ने भी नहीं पड़ते वो तो ऐसे याद हैं जैसे कि हमारी साँसों में घुल गये हैं।
वर्डस्टॉर, लोटस १२३, डीबेस, फ़ॉक्स प्रो, अक्षर और भी बहुत सारे सॉफ़्टवेयर थे। खैर आज कम्प्यूटर चलाने के लिये कोई कमांड याद नहीं रखना पड़ता है, सब माऊस से मजे में हो जाता है। अगले तीस वर्षों में कम्प्यूटिंग का विकास देखने लायक होगा।
क्रोधित पक्षी याने के एंग्री बर्ड्स (Angry Birds..)
कुछ दिनों पहले प्रशांत की एक बज्ज या फ़ेसबुक स्टेटस से एंग्री बर्ड्स (Angry Birds) नामक खेल का पता चला। हमने इसकी खोजबीन की गूगल महाराज पर तो देखा यह तो क्रोम ब्राऊजर में ऑनलाईन उपलब्ध है, और तो और अगर एक बार खेल शुरू कर लिया जाये तो नेट कनेक्शन बंद भी कर सकते हैं, तो कुछ लेवल ऑफ़लाईन खेल ही सकते हैं।
खैर ब्लॉगर बांधव की सहायता से फ़ेसबुक के सहारे हमें एंग्री बर्ड्स को संस्थापित करने की लिंक मिल गई और हम खुश हो गये। मुझे याद है कि यह एंग्री बर्ड्स कुछ महीने पहले हमने नोकिया के N8 मोबाईल पर खेला था जब वह लांच हो रहा था।
एंग्री बर्ड्स खेल को खेलना किसी नशे से कम भी नहीं है, जब भी समय मिलता है तो हम पिल पड़ते हैं एंग्री बर्ड्स के साथ। यहाँ तक कि हमारे बेटॆ का तो सबसे प्रिय खेल यही है, इस चक्कर में महाराज की पढ़ाई लिखाई भी एक तरफ़ हो गई थी, तो हमने आखिरकार डेस्कटॉप से शार्टकट हटा दिया, प्रोग्राम फ़ाईल से भी प्रोग्राम हटा दिया, अब वे एंग्री बर्ड्स नहीं खोल पाते हैं, हाँ अगर उन्होंने पढ़ाई का कार्यक्रम पूरा कर लिया तो हम उन्हें खुद ही एंग्री बर्ड्स लगाकर दे देते हैं।
एंग्री बर्ड्स मूलत: एक वीडियो गेम पहेली है, जो कि फ़िनलैंड की रोवियो मोबाईल ने विकसित की है। यह खेल सर्वप्रथम एप्पल के लिये दिसंबर २००९ में विमोचित किया गया था और इसकी खूब बिक्री हुई तो कंपनी ने अन्य टच स्क्रीन उपकरणों के लिये भी इस खेल को विकसित किया ।
एंग्री बर्ड्स में मूलत: कुछ गुस्सा हुए पक्षी हैं जिन्हें गुलेल के द्वारा नियंत्रित कर सामने खड़े ढांचे को गिराकर उसमें बैठे हुए सूअरों को खत्म करना है। यह एक प्रकार से कूटनीतिक खेल है, जिसमें आपको पूरी योजना के साथ इन सूअरों को मारना होता है। यह खेल दिमाग को तो तेज करता ही है, परंतु इस खेल की लत भी लगाता है।
इस खेल का छठा एपीसोड हाल ही में बाजार में उतारा गया है “ माईन एन्ड डाईन”, जिसमें १५ लेवल हैं।
आज एंग्री बर्ड्स खेल शायद मोबाईल में खेलने वाला सार्वाधिक लोकप्रिय खेल है।
एंग्रीबर्ड्स को क्रोम ब्राऊजर में खेलने की लिंक –
तो देर किस बात की है, अब खेलिये एंग्री बर्ड्स और लत ना लग जाये तो कहना ।
प्रवीण पाण्डे जी के ब्लॉग पोस्ट का फ़ायदा और xBox काइनेक्ट
ब्लॉग से नुकसान तो शायद कम ही होंगे पर फ़ायदे बहुत हैं। प्रवीण पांडे जी ने अपने ब्लॉग में कुछ दिनों पहले xBox काइनेक्ट का विवरण लिखा था और मैं पिछले तीन वर्षों से लगभग इसी तरह की चीज ढूँढ़ रहा था, जब मुंबई में था तो Wii का गेमिंग कन्सोल देखा था परंतु उसमें खेलने के लिये एक रिमोट को पकड़ना होता था, जो कि मुझे पसंद नहीं था।
हाथ में रिमोट न चाहने का कारण था हमारे बेटेलाल, क्यूँकि अगर फ़ेंक दिया बज गया बैंडबाजा महँगे गेमिंग कन्सोल का, इसलिये कुछ ऐसी तकनीक वाला कन्सोल चाहिये था जिसमें बिना रिमोट पकड़े खेल सकें, इसी बीच माइक्रोसॉफ़्ट ने xBox के साथ काइनेक्ट बाजार में उतारा परंतु इसके बारे में हमने कहीं सुना नहीं था। सुना तो प्रवीण जी के ब्लॉग से, ब्लॉग का हमारे लिये एक फ़ायदा ।
प्रवीण जी से xBox के बारे में पूरी जानकारी ली और एक शोरूम में जाकर डेमो भी देख लिया, बस हमको भा गया, कीमत हालांकि कुछ ज्यादा थी परंतु जैसी चीज अपने को चाहिये हो मिल जाये तो कीमत मायने नहीं रखती है।
इसी बीच हमारे छोटे भाई का अमेरिका जाना हो गया, और हमने ऑनलाईन वहाँ का भाव देखा तो लगभग ४० प्रतिशत रुपयों की बचत हो रही थी तो हमने अपने भाई को बोला कि हमारे लिये एक xBox ले आओ, हमारा xBox मई के दूसरे सप्ताह में हमारे पास आ गया। पर अब समस्या यह थी कि xBox का पॉवर एडॉप्टर अमेरिका वाला था जो कि 110 – 130 वोल्ट होता है और यह भारत में नहीं चल सकता था।
अमेरिका का पॉवर एडॉप्टर भारत में कैसे चलेगा गूगल में बहुत ढूँढ़ा, कई प्रकार के समाधान मिले, कि अमेरिका से भारत का पॉवर कन्वर्टर ले लो जिसमें एक ट्रांसफ़ॉर्मर लगा होता है और चल जायेगा, हम लेकर भी आये परंतु काम नहीं बना, फ़िर गूगल पर ढूँढ़ा गया, तो पता चला कि इस समस्या से केवल हम ही दो-चार नहीं हो रहे हैं, इस समस्या से बहुत सारे लोग ग्रसित हैं।
इस बाबत हमने एक बड़े शोरूम पर भी पूछताछ की तो उन्होंने हमें एक मोबाईल नंबर दिया और कहा कि आपकी समस्या का समाधान यहाँ हो जायेगा, हमने फ़ोन किया तो पता चला कि ये किसी निजी दुकान का नंबर था जो कि चीन निर्मित थर्ड पार्टी पॉवर एडॉप्टर बेचते हैं और उसकी केवल टेस्टिंग वारंटी है, और उसकी कीमत हमें लगभग ३२०० रूपये बताई गई और बताया गया कि लगभग ३०० लोग उनसे खरीद चुके हैं।
ऐसे ही एक और समाधान मिला कि स्टेप अप / स्टेप डाऊन ट्रासफ़ॉर्मर का उपयोग करें, हमने अपने पास की इलेक्ट्रिक दुकान को इसे लाने के लिये बोल भी दिया।
जब xBox के अंतर्जाल पर घूम रहे थे तो भारत का उपभोक्ता सेवा का फ़ोन नंबर मिला और हमने माइक्रोसॉफ़्ट को फ़ोन किया तो उन्होंने xBox से संबंधित जानकारी ली और हमने पॉवर एडॉप्टर संबंधी समस्या माइक्रोसॉफ़्ट के सामने रखी तो उपभोक्ता सेवा अधिकारी ने हमसे कहा कि आप चिंता न करें हम आपकी समस्या का समाधान करेंगे। आपने अमेरिका से xBox खरीदा है तो क्या हुआ, हम आपको भारत का पॉवर एडॉप्टर कंपनी की गुड विल के लिये कॉम्लीमेंटरी देंगे, और आप अपना अमेरिका वाला पॉवर एडॉप्टर भी अपने पास रखें जब अमेरिका जायें तब उसका उपयोग करें, उनका इस बाबत ईमेल भी तुरंत ही मिल गया और ५ दिनों में ही हमें माइक्रोसॉफ़्ट से पॉवर एडॉप्टर भी मिल गया, हमने चलाकर भी देख लिया, और इस प्रकार माइक्रोसॉफ़्ट ने हमारी समस्या का समाधान कर दिया।
जय हो प्रवीण जी की और जय हो माइक्रोसॉफ़्ट वाले बिल्लू भैया की।
पासवर्ड को की-लोगर्स से कैसे बचायें… (How to safe your passwords from Key-Loggers)
पासवर्ड की कड़ी को पढ़ने के लिये यह लेख भी पढ़ें – आसानी से पासवर्ड कैसे बनायें, क्या रखें पासवर्ड (Simple Password!!, How to create Password)
की-लोगर्स शब्द शायद सबने पहले सुना होगा, की-लोगर्स एक छोटा सा गोपनीय प्रोग्राम होता है जो कि ओपरेटिंग सिस्टम शुरु होते ही अपने आप एक्टिव हो जाता है और वह ना तो ट्रे में दिखता है और ना ही टॉस्क मैनेजर में दिखता है।
लॉग देखने के लिये उसी प्रोग्राम में गोपनीय की-कॉम्बीनेशन बताना पड़ता है और उन्हीं की (keys) के संयोजन को दबाने पर की-लोगर्स अपने लॉग स्क्रीन दिखाता है। जैसे Ctrl+Shft+k, Shift+Alt+d
की-लोगर्स का उपयोग बहुत सारे लोगों द्वारा किया जाता है और अलग अलग तरीके से इसका उपयोग किया जाता है, जहाँ इसका उपयोग अच्छे कार्यों के लिये भी किया जाता है तो कहीं इसके द्वारा रिकार्ड की गई लॉग्स से दुरुपयोग भी किया जाता है।
जब भी किसी नये कंप्यूटर पर कुछ काम करें, तो सावधानी बरतें कि आप अपने ईमेल एकाऊँट में लॉगिन न करें, अपने बैंक एकाऊँट में लॉगिन न करें। जो भी पासवर्ड आप टाईप करेंगे वह की-लोगर्स में लॉग हो जायेगा और वह व्यक्ति आपकी गोपनीय जानकारियों के बारे में जान सकता है और नुकसान भी पहुँचा सकता है, फ़िर वह व्यक्तिगत तौर पर हो या वित्तीय तौर पर, पर नुक्सान तो नुक्सान ही होता है।
की-लॉगर्स से बचने के लिये बैंको के लॉगिन पेज पर वर्चुअल कीबोर्ड रहता है, उसका उपयोग करें। यहाँ पर आपको दो नये बटन (Keys) मिलेंगे होवरिंग और शफ़ल, इनका भी भरपूर उपयोग करें, कोई भले ही आपकी स्क्रीन पर नजर रखे हुए हो आपके पासवर्ड के लिये परंतु इस तकनीक का उपयोग करने से आप अपने बैंक एकाऊँट का पासवर्ड बचाने में सुरक्षित रहेंगे।
वैसे ही विन्डोज में ऑन-स्क्रीन कीबोर्ड का भी उपयोग कर सकते हैं, जो कि आपको Run में OSK (OnScreen Keyboard) कमांड से मिल जाता है।
माऊस के मूवमेंट्स को की-लोगर्स पकड़ नहीं पाते हैं, इसलिये ऊपर बताये गये दोनों की-बोर्ड सुरक्षित हैं।
की-लोगर्स का उपयोग अभिभावक कर सकते हैं, कि उनके बच्चे कौन सी वेबसाईट पर जा रहे हैं, अगर उनके ईमेल का पासवर्ड उन्हें नहीं बता रखा हो तो उन पर नजर रखने के लिये उनके पासवर्ड पाने के लिये भी इसका उपयोग किया जा सकता है।
आसानी से पासवर्ड कैसे बनायें, क्या रखें पासवर्ड (Simple Password!!, How to create Password)
पासवर्ड Password आज कंप्यूटर की दुनिया में सुरक्षा का पर्याय है और यह एक ऐसे अनदेखे ताले की चाबी है जो कि बिना शब्दों के जाल के नहीं खुल सकता है, अगर यह कूटशब्द किसी को पता चल जाये तो पता नहीं क्या क्या हो जाये। बैंकों में बड़ी बड़ी डकैतियाँ हो जायें, निजी डाटा चोरी हो जाये और भी बहुत कुछ हो सकता है। हमें पता होना चाहिये कि पासवर्ड कैसे बनायें।
सभी लोग कंप्यूटर का उपयोग करते हैं, और वर्षों से कर रहे हैं, परंतु कभी आपने अपने पासवर्ड पर ध्यान दिया है, यह पता होना जितना उपयोगी है उतना ही लोगों को आलस्य वाला कार्य लगता है। हम तो पासवर्ड बिल्कुल साधारण रखते हैं जिससे याद करने में भी आसानी हो और पासवर्ड अंकन करने में भी और वैसे भी कौन हमारे पासवर्ड को तोड़ना चाहेगा, हमारे पासवर्ड को तोड़ भी लिया तो क्या होगा वगैरह वगैरह।
अगर ऊपर कहीं गईं बातें, लगे कि यह तो हमारे लिये कहा जा रहा है तो आपको तुरंत पासवर्ड बदलने की जरुरत है।
साधारणतया: पासवर्ड क्या रखा जाता है, माता,पिता,पत्नी,पति,बच्चे का
नाम, घर के पालतू पशुओं के नाम, गाड़ी का ब्रांड या नंबर, मोबाईल नंबर फ़ोन नंबर, ईष्ट देवता देवी का नाम या पसंदीदा अभिनेता अभिनेत्री का नाम। यह सारे शब्द और नंबर ऐसे हैं जो कि हमें याद नहीं रखना पड़ते हैं, और यह हमारे जहन में हमेशा रहते हैं, तो मानव मन हमेशा ऐसे ही शब्दों से पासवर्ड बनाता है। ऐसे पासवर्डों को तोड़ना बहुत मुश्किल नहीं होता और उनके लिये तो बिल्कुल भी नहीं जो कि आपके करीबी हैं, और एक बात बता दूँ कि करीबी लोग ही सबसे ज्यादा पासवर्ड चुराने की कोशिश करते हैं, और आपकी निजी गोपनीय जानकारी को पढ़ना चाहते हैं, उसमें वे एक अलग ही तरह का आनंद महसूस करते हैं।
फ़िर पासवर्ड कैसे बनाया जाये ?
एक अच्छा पासवर्ड कम से कम आठ 8 अक्षरों का होना चाहिये जिसमें नंबर, कैपिटल लैटर और स्पेशल अक्षरों को शामिल करना चाहिये। अगर नाम पासवर्ड में हैं तो देखिये कि कौन से अक्षर को आप स्पेशल अक्षर में बदल सकते हैं या नंबर में बदल सकते हैं, अगर नहीं हो रहा है तो पासवर्ड के पहले या आखिरी में जन्मदिन की तारीख और शिफ़्ट के साथ उसी तारीख का स्पेशल अक्षर को भी पासवर्ड में इस्तेमाल कर सकते हैं।
पासवर्ड जितना जटिल होगा उतना ही सुरक्षित होगा।
उदाहरण देखिये –
| शब्द जिसका पासवर्ड बनाना है | पासवर्ड |
| Vivek | v!V9k |
| Praveen | Pr@v99n |
| Abhishek | @6h!sh9k |
| Om Namah Shivay | (Zero)0Mn@m@hsh!v@7 |
| Bangalore | b@n8@l0(Zero)r9 |
इस प्रकार साधारण शब्दों से भी जटिल पासवर्ड बना सकते हैं, और एक बार आप इस प्रकार के पासवर्ड का उपयोग करना शुरु करेंगे तो फ़िर यह धीरे धीरे आपको आसान लगने लगेगा।
पासवर्ड के बारे और जानकारी आगे की पोस्ट में पढ़ियेगा –
पासवर्ड को की-लोगर्स से कैसे बचायें… (How to safe your passwords from Key-Loggers)






