ओम भैया (ओम व्यास ओम) अब स्कूटर पर नहीं देखेंगे।

अक्सर ओम भैया (ओम व्यास ओम) फ़्रीगंज में सुबह अपने दफ़्तर जाते वक्त मामा पान पर मिल जाते थे अपनी सफ़ेद स्कूटर पर, पर अब ओम भाई कभी स्कूटर पर नहीं दिखेंगे यह उज्जैन के लिये अपूरणीय क्षति है, उनके छोटे भाई संजय व्यास मेरे अच्छे मित्रों में से हैं। भगवान शोकसंतप्त परिवार को इस गहन वेदना को सहन करने की शक्ति प्रदान करे।

नर्सरी और प्राइमरी स्कूल के बच्चों के लिए सबसे अच्छी पत्रिका “मेजिक पोट” (MagicPot)

यह बच्चों के लिये सबसे अच्छी पाक्षिक पत्रिका है। यह एक अद्भुत पत्रिका है जिससे मजे से ओर आसानी से विभिन्न प्रकार की गतिविधियों को सीख सकते हैं। विशेष रूप से नर्सरी और प्राइमरी स्कूल के बच्चों के लिए। इस पत्रिका में ऐसी बहुत सी गतिविधियाँ हैं जिससे बच्चे का दिमाग तेज होगा जैसे कि डॉट जोड़ना, रंग भरना, नैतिक कहानियाँ, महाकाव्य ओर भी बहुत कुछ। इसमें चित्र पहेलियाँ हैं जिसमें अंतर बताना है।


हर पहेली के नीचे मेजिकपोट में एक नोट दिया रहता है कि इस पहेली या अभ्यास से बच्चों को क्या लाभ है। यह पत्रिका रंगीन है ओर बच्चों के मन को जो जो भाता है वह सब कुछ इसमें हैं। पत्रिका में सबसे अच्छी चीज है, चित्रों के समूह में से एक अलग चित्र को बच्चों को चयन करने को देते हैं।


कुल मिलाकर बच्चों के लिये सबसे बेहतरीन पत्रिका, ज्यादा जानकारी के लिये यहाँ चटका लगाइये। यह हिन्दी में नहीं इंग्लिश में है अगर इसका हिन्दी वर्जन भी होता तो शायद इससे अच्छी कोई पत्रिका नहीं हो सकती थी।

तकनीकी छात्रों के जबाब ये कुछ भी कर सकते हैं… EXCLUSIVELY FOR ENGINEERING STUDENTS………

Ques: We know that 2/10=0.2

but

Prove that 2/10=2

Ans : Normal college students insist Question is “OUT of Syllabus”.

but

Engineering Students replied:

2=two,
10=ten.

therefore Two/Ten = Two/Ten = wo/en.

w=23,
o=15,
e=5,
n=14.

therefore

w+o=23+15=38
&
e+n=5+14=19

Therefore wo/en=38/19=2.

Hence Proved

FOR, Engineers “It doesn’t matter ans kya hai, they say ans kya lana he.”

आज पापाजी की बहुत याद आ रही है।

आज सुबह से पता नहीं क्यों अतीत में अपने जीवन को झांक रहा था और उस सबमें पापाजी ने क्या किया अपने परिवार और मेरे लिये पता नहीं क्यों यह सब विश्लेषण करने की कोशिश कर रहा था। पर मैं कोई बहुत बड़ा तत्वज्ञानी नहीं कि मैं उस विशाल ह्रदय पिता के कार्यों का विश्लेषण कर सकता, पर हाँ यह बात तो मैं बहुत ही अभिमान के साथ कह सकता हूँ कि आज जो कुछ भी मैं हूँ केवल अपने माता पिता के दिये गये संस्कारों के कारण हूँ। अगर संस्कार नहीं होते तो मैं शायद कहीं ओर होता जो मेरे करीबी ओर मेरे अपने बहुत अच्छे से जानते हैं, जब मैं अपनी राह भटक गया था। परंतु संस्कारों ने मुझे सही राह दिखाई और मुझे गर्त में जाने से बचा लिया।

बचपन की यादों में झांक रहा था तो देखा कि पापाजी सुबह जल्दी उठकर अपनी साईकिल लेकर बैंक के काम से दौरा करने चल दिये हैं उन दिनों में परिवहन की उतनी अच्छी व्यवस्था तो थी नहीं, तो उन्हें एक दिन में तकरीबन ३०-४० किलोमीटर साइकिल चलानी पड़ती थी, अगर कहीं दूर गाँव जाना होता था तो पहले बस के ऊपर साईकिल रखते और फ़िर जहां जिस गाँव में जाना होता वहां साईकिल लेकर चल देते थे। फ़िर देर रात थकेहारे कब में आते थे हमें तो पता ही नहीं चलता था क्योंकि उस समय कोई टी.वी. तो था नहीं, मैं तकरीबन शाम ७-८ बजे के आसपास सो जाता था। कभी कभी दौरा २-३ दिन का भी हो जाता था। बस बचपन का इतना ही मुझे याद है।

पापाजी अपने छह: भाई बहनों में सबसे बड़े हैं, और मैंने उनकी एक बात को और ध्यान से देखा कि जब भी चाचाजी, फ़ूफ़ाजी या कोई ओर घर पर आता वो उनके साथ थोड़ी ही देर समय बिताते और बाकी समय बाहर जाकर पेड़ पौधे के साथ या पानी की टंकी भरने में या कुछ ओर करने में अपने को व्यस्त रखते। वैसे तो सब समझदार हैं पर यह बात मेरे समझ में न आई, पर वक्त ने मुझे बता दिया कि पापाजी क्यों ऐसा करते हैं। बड़ों की इज्जत अपने हाथों में होती है, यही बात मैं उनकी इस बात से सीख पाया। ओर भी बहुत कुछ सीखने को बाकी है जो शायद ऐसे ही जिंदगी की पाठशाला में सीखने को मिलेगा।

यादें तो बहुत हैं पर कहने के लिये शब्द नहीं मिल रहे हैं जब भी शब्द मिलेंगे यादों को पिरोने के लिये वो यादें जरुर कलमबद्ध करुँगा। मुझे गर्व है मेरे पापाजी के ऊपर कि वो मेरे पापा हैं।

कम्प्यूटर पर पासवर्ड कैसे छुपाएँ, कीबोर्ड से लिखते समय । कोई देख नहीं पाये कि आप अपने मोनिटर पर क्या कर रहें और क्या सर्फ़िंग कर रहे हैं और ताऊ….

कम्प्यूटर पर पासवर्ड कैसे छुपाएँ, कीबोर्ड से लिखते समय ।

कोई देख नहीं पाये कि आप अपने मोनिटर पर क्या कर रहें और क्या सर्फ़िंग कर रहे हैं।

और ये सबसे उम्दा….

और ये सब ताऊ से देखते न बना और आँखें बंद कर लीं –

मेरा नया चिठ्ठा blog.co.in पर और मेरी परेशानी

मैंने अपना नया चिठ्ठा blog.co.in पर http://bankgyan.blog.co.in एड्रेस पर बनाया है क्योंकि यहां पर कमाई की कुछ उम्मीद है वह भी भारत की मुद्रा में, जैसा कि ब्लोग के शीर्ष पेज पर जानकारी दी गई है।

मेरे इस ब्लोग पर बैंकों के बारे में छोटी बड़ी जानकारियां होंगी। सभी को किसी न किसी तरह की परेशानी का सामना बैंक में करना पड़ता है, मेरा यह प्रयास है कि इससे वह कम से कम बैंको एवं उपभोक्ताओं के अधिकारों से परिचित हों।
मेरी परेशानी –
मैंने अपना नया चिठ्ठा चिठ्ठाजगत और ब्लोगवाणी पर लिंक के लिये भेजा था, जिसमें से चिठ्ठाजगत से तो ईमेल आ गया, पर ब्लोगवाणी के ईमेल का इंतजार है।
चिठ्ठाजगत से ईमेल में ३ तरह से अधिकृत करने की प्रक्रिया दी गई है, जिसमें पहली प्रक्रिया से में चिठ्ठे को चिठ्ठाजगर पर दिखा तो पाया पर html कोड मेरी पोस्ट के साथ दिख रहा है।
दूसरी प्रक्रिया में साईड बार में विजेड पर ये लिक लगाना है पर blog.co.in पर शायद यह सुविधा नहीं है अगर किसी ब्लोगर को पता हो तो कृप्या मार्गदर्शन करें।
तीसरी प्रक्रिया में चिठ्ठे के html में कोड पेस्ट करना है पर blog.co.in पर कैसे करेंगे, यह पता नहीं लग पाया, अगर किसी ब्लोगर को पता हो तो कृप्या मार्गदर्शन करें।
या फ़िर मैं इसे blogger.com पर ले आऊँ, बताएँ।

अगले सप्ताहों के लिये मार्केट टिप्स – सेनसेक्स एवं निफ़्टी के लिये

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कृपया अपने विवेक से निर्णय लें। हानि या लाभ की स्थिती में ब्लाग की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।