बस स्टॉप पर तीन लड़कियों की बातें

बस स्टॉप पर तीन लड़कियाँ बस के इंतजार में बैठी हुई थीं, सप्ताहांत की खुशी तो थी ही तीनों के चेहरे पर, साथ ही चुहलबाजी भी कर रही थीं।

तभी एक मोटर साईकिल स्टॉप के आगे आकर रुकी और वह लड़का किनारे जाकर रुक गया, हेलमेट उतारा और किसी का इंतजार करने लगा, बाईक भी कोई अच्छी सी ही लग रही थी, पर तभी उन तीनों लड़कियों की आवाज चहकने लगी, एक बोली “देख क्या बाईक है”, दूसरी बोली, “अरे नहीं मोडिफ़ाईड बाईक है, आजकल येइच्च फ़ैशन है, ओरिजिनल का जमाना नहीं है, जो पसंद आये लगा डालो”

सोचने लगा कि लड़कियाँ क्या क्या सोचती हैं, जिस बाईक की ओर लड़कों का ध्यान नहीं जाता वह बाईक लड़कियों की बातों का केन्द्र है।

तभी एक लड़की के मोबाईल पर फ़ोन आ गया, अब इधर की तरफ़ जो बातें सुनाई दे रही थीं, वे इस प्रकार थीं –

“किधर है तू”

“क्या बोलता है”

“अच्छा तू आरेला है मेरे कू लेने को”

तब समझ में आया कि लड़के का फ़ोन है।

“किधर मिलूँ, जिधर तू सिगरेट लेता है, पानी पुरी वाले खड़ेले हैं, अरे मैं उधरीच हूँ रे”

“तू आ न”

तभी एक लड़की की बस आ गई, वह तुरंत दौड़कर सड़क पर गई और बस स्टॉप तक आने का इंतजार करने लगी, जेब से कान कौवे (हैंड़्स फ़्री) निकाले और कान में ठूँस लिये, मुंबई की रफ़्तार में इन कानकौवों का बहुत महत्व है, आधी से ज्यादा मुंबई कानकौवे कान में ठूँसे हुए नजर आते हैं, केवल अपनी दुनिया में मस्त और व्यस्त”

फ़िर वो लड़की जिसका फ़ोन आया था, वह भी बॉय करके चल दी सड़क क्रॉस कर सिगरेट के ठिये पर, जहाँ उसका बॉय फ़्रेंड आने वाला है।

तीसरी लड़की वो भी शायद बस का ही इंतजार कर रही थी, परंतु जैसे ही ये दोनों लड़कियाँ गईं, वो वहाँ से उठकर पैदल ही चल दी, दूसरी तरफ़, समझ नहीं आया कि जब बस पकड़ने आये थे तो दो लड़कियाँ पैदल ही क्यों चली गईं।

वहीं ठिठोली करता हुआ एक समूह खड़ा था जिसमें दो लड़के और दो लड़कियाँ थे, लड़कियों के हाथ में सिगरेट थी और बिल्कुल नशा करने के अंदाज में मस्ती से सिगरेट के कश उड़ा रही थी.. हमारी आधुनिक संस्कृति..

आज घर आते आते बहुत सारी बसों पर एगॉन रेलिगेयर के जीवन बीमा वाले उत्पादों के विज्ञापन देखकर खुशी हुई कि चलो ये तो अच्छा काम हो रहा है।

आखिर इतना बड़ा सरकारी तंत्र रेल्वे कब सुधरेगा..

    गुस्सा होना स्वाभाविक है, जब आपको तत्काल कहीं जाना हो और टिकट न मिले, तो तत्काल का सहारा लेते हैं, रेल्वे ने यह सुविधा आईआरसीटीसी के द्वारा भी दे रखी है, परंतु ८ बजे सुबह जैसे ही तत्काल आरक्षण खुलता है वैसे ही इस वेबसाईट की बैंड बज जाती है, सर्विस अन- अवेलेबल का मैसेज इनकी वेबसाईट पर मुँह चिढ़ाने लगता है।

    कई बार तो बैंक से कई बार पैमेन्ट हो जाने के बाद भी टिकट नहीं मिल पाता है क्योंकि पैमेन्ट गेटवे से वापिस साईट पर आने पर ट्राफ़िक ही इतना होता है कि टिकट हो ही नहीं पाता है, वैसे अगर टिकट नहीं हुआ और बैंक से पैसे कट गये तो १-२ दिन में पैसे वापिस आ जाते हैं, परंतु समस्या यह है कि ऑनलाईन टिकट मिलना बहुत ही मुश्किल होता है।

    सुबह ८ बजे से ८.४५ – ९.०० बजे तक तो वेबसाईट पर इतना ट्राफ़िक होता है कि टिकट तभी हो सकता है जब आपकी किस्मत बुलंद हो। वैसे आज किस्मत हमारी भी बुलंद थी जो टिकट हो गया वरना तो हमेशा से खराब है, इसके लिये पहले भी जाने कितनी बार रेल्वे को कोस चुके हैं।

    करीबन २ महीने पहले से एजेन्टों के लिये व्यवस्था शुरु की गई कि वे लोग जिस दिन तत्काल खुलता है उस दिन ९ बजे से टिकट करवा सकेंगे याने कि सुबह ८ से ९ बजे तक केवल आमजनता ही करवा पायेगी, परंतु इनकी इतनी मिलीभगत है कि जब सीजन होता है तब इनके सर्वर ही डाऊन हो जाते हैं, न घर बैठे आप साईट से टिकट कर सकते हैं और न ही टिकट खिड़की से, पर जैसे ही ९ बजते हैं, स्थिती सुधर जाती है, ये सब धांधली नहीं तो और क्या है।

    टिकट खिडकी पर जाकर टिकट करवाना मतलब कि अपने ३-४ घंटे स्वाहा करना। सुबह ४ बजे से लाईन में लगो, तब भी गारंटी नहीं है कि टिकट कन्फ़र्म मिल ही जायेगा, लोग तो रात से ही अपना बिस्तर लेकर टिकट खिड़की पर नंबर के लिये लग जाते हैं, और टिकट खिड़की वाला बाबू अपने मनमर्जी से टिकट करेगा, उसका प्रिंटर बंद है तो परेशानी, उसके पास खुल्ले न हो तो और परेशानी, जब तक कि पहले वाले यात्री को रवाना नहीं करेगा, अगले यात्री की आरक्षण पर्ची नहीं लेगा, और जब तक कि ये सब नाटक होगा, बेचारा अगला यात्री उसको कोसता रहेगा क्योंकि तब तक उसे कन्फ़र्म टिकट नहीं वेटिंग का टिकट मिलेगा।

    क्या इतना बड़ा सरकारी तंत्र रेल्वे अपना आई.टी. इंफ़्रास्ट्रक्चर ठीक नहीं कर सकता है, या उसके जानकारों की कमी है रेल्वे के पास, तो रेल्वे आऊटसोर्स कर ले, कम से कम अच्छी सुविधा तो मिल पायेगी।

अब क्या चाहते हो तुम … मेरी कविता… विवेक रस्तोगी

अब

क्या चाहते हो तुम,

तुम्हारे लिये और क्या कर गुजरें

देखो तो सही

समझो तो सही,

क्या इतना कुछ काफ़ी नहीं है

अब बोलो भी,

आखिर क्या चाहते है तुम !!

मौन….?

(किसे कहना चाह रहे हैं, क्यों कहना चाह रहे हैं, उसकी ढूँढ़ जारी है, बाकी तो सबका अपना नजरिया है।)

एनईएफ़टी क्या है, क्या आप इसका उपयोग करते हैं..(What is NEFT.. are you using NEFT for Fund Transfer ?)

क्या आप एनईएफ़टी (NEFT) का उपयोग करते हैं या अभी भी चेक से ही भुगतान करते हैं। किसी को भी अगर धन अंतरण करना हो तो आप क्या अपनाते हैं, चेक या एनईएफ़टी (NEFT) ?

चेक अंग्रेजों के जमाने की बात हो गई, जो कि वाकई अंग्रेजों के द्वारा ..

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आईडीएफ़सी दीर्घकालीन इंफ़्रास्ट्रक्चर बॉन्ड २०१० (IDFC Long Term Infrastructure Bond 2010)

इस बार के बजट भाषण में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आयकर में लाभ की घोषणा की थी, धारा 80CCF के तहत २०,००० रुपयों तक का निवेश विशेष बुनियादी सुविधाओं वाले बॉन्ड में किया जा सकेगा।

इसकी आकर्षक बात यह है कि अभी तक की जाने वाली १,००,००० रुपयों की बचत के बाद ये बचत की जा सकती है।

कुछ समय पहले IFCI ने अपने बुनियादी सुविधाओं वाले बॉन्ड बाजार में उतारे थे। अब IDFC ने भी अपने बॉन्ड बाजार में लाने की घोषणा कर दी है। बॉन्ड बाजार में इस गुरुवार ३० सितम्बर २०१० से खुल रहे हैं जो कि सोमवार १८ अक्टूबर २०१० तक लिये जा सकेंगे। निवेशक को यह बॉन्ड खरीदने के लिये डीमैट एकाऊँट और पान (PAN)  होना जरुरी है।

आईडीएफ़सी इस सार्वजनिक निर्गम से लगभग ३,४०० करोड़ रुपये बाजार में बॉन्ड बेचेगी। इन बॉन्डों की परिपक्वता अवधि १० वर्ष की होगी और लॉक इन अवधि ५ वर्ष की होगी। निवेश करने के लिये चार विकल्प हैं –

१.  पहले वर्ग में ८% ब्याज प्रतिवर्ष, जिसे कि हर वर्ष निवेशक को दे दिया जायेगा।

२. दूसरे वर्ग में ८% ब्याज प्रतिवर्ष तो दिया जायेगा, पर ब्याज वापिस से निवेश हो जायेगा, याने कि चक्रवृद्धि ब्याज।

३. तीसरे वर्ग में ७.५% ब्याज प्रतिवर्ष देय  होगा जो कि बॉय बैक के विकल्प के साथ उपलब्ध होगा।

४. चौथे वर्ग में ७.५% ब्याज प्रतिवर्ष तो होगा पर ब्याज वापिस से निवेश हो जायेगा और यह बॉय बैक के विकल्प के साथ उपलब्ध होगा।

वास्तविक ब्याज की दर कितनी होगी ?

यह निवेशक के आयकर कटौती पर निर्भर करता है अगर निवेशक ३०% वाले आयकर खंड में आता है तो निवेशक को लगभग १५.७४% का ब्याज का लाभ मिलेगा।

३०.९% के आयकर दायरे में आने वाले निवेशक की आयकर बचत होगी ६,१८० रुपये, तो उसका वास्तविक निवेश हुआ १३,८२० रुपये (२०,००० रुपये – ६,२१८० रुपये)। और अगर पहला वर्ग ८% ब्याज वाला चुना गया है तो हर वर्ष १६०० रुपये ब्याज के मिलेंगे।

बॉन्ड के संबंध में:

  • 80 CCF धारा के तहत किसी भी इंफ़्रास्ट्रक्चर कंपनी के द्वारा पहला बांड सार्वजनिक निर्गम के द्वारा।
  • क्रेडिट रेटिंग एजेंसी आईसीआरए(ICRA) ने इस बॉन्ड को स्थिरता के  दृष्टिकोण से LAAA के तहत  से  अंकित  किया है रेटेड बांड के रूप में यह निर्गम प्रस्ताव, सुरक्षा के लिहाज से सबसे सुरक्षित श्रेणी में अंकित किया है।
  • इन बांडों  में केवल भारतीय निवासीयों और एचयूएफ  निवेश कर सकते हैं।
  • बॉन्ड को आकर्षक कूपन रेट ७.५% से ८% प्रतिवर्ष कर के लाभ के साथ २०,००० रुपये तक धारा 80 CCF के अंतर्गत जारी किया जा रहा है।
  • यहाँ निवेशक को चार निवेश विकल्प दिये गये हैं जो कि निवेशक अपनी जरुरत के अनुसार चुन सकता है।
  • किसी भी प्रकार के टीडीएस की कटौती नहीं की जाएगी।
  • बांड बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध किया जाएगा और 5 वर्ष तक लॉक इन रहेगा, इस अवधि के बाद बॉन्ड का ट्रेड किया जा सकता है।
  • निवेशक बॉन्ड को लॉक इन अवधि के बाद इस पर ऋण ले सकते हैं।
  • धारा 80 CCF के तहत निवेशक २०,००० रुपये बचा सकता है, जिसके ऊपने निवेशक को कर की छूट मिलेगी, जो कि धारा 80C, 80CCC एवं 80CCD (80CCE) के तहत मिलने वाली १,००,००० रुपये के छूट के अतिरिक्त होगी।

आईडीएफ़सी बांड

अर..रे आओ ना ! क्यों इतनी दूरी तुमने बना रखी है… मेरी कविता .. विवेक रस्तोगी

अर..रे

आओ ना ! क्यों इतनी दूरी तुमने बना रखी है.

 

हाँ तुम्हें पाने के लिये बहुत जतन करना पड़ेंगे

हाँ बहुत श्रम करना पड़ेंगे

करेंगे ना !

 

तुम्हें पाने के लिये दुनिया जहान से लड़ना पड़ेगा

शायद युद्ध भी करना पड़ेगा

करेंगे ना !

 

लड़ेंगे मरेंगे पर तुम्हें पाकर ही रहेंगे

तुम कितनी भी दूरी बनाओ, हम पास आकर ही रहेंगे..

ओह्ह.. तो तुम आ गये … मेरी कविता … विवेक रस्तोगी

इंतजार

ओह्ह..

तो तुम आ गये

कितना इंतजार करवाया

कहाँ छिपे थे,

बहता नीर भी रुक ही गया था

तुम्हारे लिये, पता है….

उड़ते हुए बदरा बौरा से गये थे

तुम्हारे लिये, पता है….

रुकी थी वो गौरैया भी चहचहाने से

तुम्हारे लिये, पता है….

हवा मंद मंद सी हुई थी,

तुम्हारे लिये…

अंधकार गहराने से डर रहा था

तुम्हारे लिये..

बस तुम आओ… तुम्हारे लिये

तुम्हें तुमसे मिलाने के लिये॥

ऊफ़्फ़ कितनी जोर से दरवाजा बंद कर रखा है…मेरी कविता…विवेक रस्तोगी

ऊफ़्फ़
कितनी जोर से दरवाजा बंद कर रखा है
जरा कुंडी ढ़ीली करो
जिससे हलके से धक्के से
ये किवाड़ खुल जाये,
कुंडी हटाना मत
नहीं तो हवाएँ बहुत जालिम हैं।

जाती है इज्जत तो जाने दो कम से कम भारत की इज्जत लुटने से तो बच जायेगी

    आज सुबह के अखबारों में मुख्य पृष्ठ पर खबर चस्पी हुई है, कि दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी के दौरान ही एक बन रहा पुल गिर गया, और २७ घायल हुए।

    इस भ्रष्टाचारी तंत्र ने भारत की इज्जत के साथ भी समझौता किया और भारत माता की इज्जत लुटने से का पूरा इंतजाम कर रखा है, ऐसे हादसे तो हमारे भारत में होते ही रहते हैं, परंतु अभी ये हादसे केंद्र में हैं, क्योंकि आयोजन अंतर्राष्ट्रीय है, अगर यही हादसा कहीं ओर हुआ होता तो कहीं खबर भी नहीं छपी होती और आम जनता को पता भी नहीं होता।

    हमारे यहाँ के अधिकारी बोल रहे हैं कि ये महज एक हादसा है और कुछ नहीं, बाकी सब ठीक है, पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम के आयोजन में इतनी बड़ी लापरवाही ! शर्मनाक है। हमारे अधिकारी तो भ्रष्ट हैं और ये गिरना गिराना उनके लिये आमबात है, पर उनके कैसे समझायें कि भैया ये अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नहीं चलता, एक तो बजट से २० गुना ज्यादा पैसा खर्चा कर दिया ओह माफ़ कीजियेगा मतलब कि खा गये, जो भी पैसा आया वो सब भ्रष्टाचारियों की जेब में चला गया। मतलब कि बजट १ रुपये का था, पर बाद में बजट २० रुपये कर दिया गया और १९.५० रुपये का भ्रष्टाचार किया गया है।

    अब तो स्कॉटलेंड, इंगलैंड, कनाडा, न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया ने भी आपत्ति दर्ज करवाना शुरु कर दी है, पर हमारे भारत के सरकारी अधिकारी और प्रशासन सब सोये पड़े हैं, किसी को भारत की इज्जत की फ़िक्र नहीं है, सब के सब अपनी जेब भरकर भारत माता की इज्जत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, अरे खुले आम आम आदमी के जेब से कर के रुप में निकाली गई रकम को भ्रष्टाचारी खा गये वह तो ठीक है, क्योंकि आम भारतीय के लिये यह कोई नई बात नहीं है, परंतु भारत माता की इज्जत को लुटवाने का जो इंतजाम भारत सरकार ने किया है, वह शोचनीय है, क्या हमारे यहाँ के नेताओं और उच्च अधिकारियों का जमीर बिल्कुल मर गया है।

    आस्ट्रेलिया के एक मीडिया चैनल ने तो एक स्टिंग आपरेशन कर यह तक कह दिया है कि किसी भी स्टेडियम में बड़ी मात्रा में विस्फ़ोटक सामग्री भी ले जाई जा सकती है, और ये उन्होंने कर के बता भी दिया है, विस्फ़ोटक सामग्री दिल्ली के बाजार से आराम से खरीदी जा सकती है और चोर बाजार से भी।

    अगर यह आयोजन हो भी गया तो कुछ न कुछ इसी तरह का होता रहेगा और हम भारत और अपनी इज्जत लुटते हुए देखते रहेंगे, और बाद में सरकार सभी अधिकारियों को तमगा लगवा देगी कि सफ़ल आयोजन के लिये अच्छा कार्य किया गया, और जो सरकार अभी कह रही है कि खेलों के आयोजन के बाद भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही करेगी, कुछ भी नहीं होगा। उससे अच्छा तो यह है कि कॉमनवेल्थ खेल संघ सारी तैयारियों का एक बार और जायजा ले और बारीकी से जाँच करे और सारे देशों की एजेंसियों से सहायता ले जो भी इस खेल में हिस्सा ले रहे हैं, अगर कमी पायी जाये तो यह अंतर्राष्ट्रीय आयोजन को रद्द कर दिया जाये।

    हम तो भारत सरकार से विनती ही कर सकते हैं कि क्यों भारत और भारतियों की इज्जत को लुटवाने का इंतजाम किया, अब भी वक्त है या तो खेल संघ से कुछ ओर वक्त ले लो या फ़िर आयोजन रद्द कर दो तो ज्यादा भद्द पिटने से बच जायेगी, घर की बात घर में ही रह जायेगी।