आज ऑफिस से आते आते कुछ ऐसे विचार मन में आये कि हमेशा ही हम बड़े होने की बात सोचते हैं, परंतु कभी भी कितने भी बड़े हो जायें पर हमें खुद पर यकीन ही नहीं होता है, कि अब भी हम कोई काम ठीक से कर पायेंगे, हमेशा ही असमंजस की स्थिती में रहते हैं। उसी से एक कविता लिखने का प्रयास किया है, मुझे लगता है कि और अच्छा लिखा जा सकता है, परंतु भविष्य में इसको कभी संपादित कर दिया जायेगा।
बस बड़ा हो जाऊँ
जब मैं दस का था
तब भी यही सोचता था
बारह का हुआ तो लगा
कि अभी भी छोटा हूँ
पंद्रह खत्म कर सोलह में लगा
तो सोचा अब बड़ा हो गया
पर मैं कोई काम
एक बार में ठीक से नहीं कर पाता
सोचा
अभी छोटा ही हूँ
खामखाँ में लग रहा है
कि बड़ा हो गया हूँ
इसी प्रक्रिया के तहत
जब इक्कीस का हुआ
तो भी चीजें ठीक नहीं हो पाती थीं
फिर लगा जैसे उमर बढ़ रही है
साथ ही कठिनाईयाँ भी बढ़ रही हैं
फिर तीस का हुआ
पैंतीस का भी हुआ
इकतालिस अभी गया है
तेजी से बयालिस भाग रहा है
बड़ा पता नहीं कब होऊँगा
जब छोटा था,
तब सोचा नहीं था
बड़ा भी होना पड़ेगा,
कैसी मजबूरी है हमारी
बिना किसी जतन के
हम बस बढ़ते ही जाते हैं
छोटा था तो बचपन था
बचपन में मैं खुद को
कितना जी लेता था
अब बड़ा हो गया हूँ
पर गलतियों में
नासमझी में, सबमें
अब भी खुद को
कठिनाई में ही पाता हूँ
अब न सोचूँगा
कि कब बढ़ा होऊँगा
अब सोचता हूँ
सारा जीवन गलतियों में ही निकाल दिया।
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कला, साहित्य और राजनीति
कला, साहित्य और राजनीति तीनों पृथक कलायें हैं परन्तु इसके घालमेल से व्यक्ति सफलता के चरम शिखर तक जा पहुँचता है। संघर्ष हर कोई करता है, योग्यता भी हर किसी में होती है। निसंदेह कुछ लोगों को छोड़कर जो कि अपवाद होते हैं। परन्तु जो केवल एक ही चीज पकड़कर आगे बढ़ता है वह हमेशा ही संघर्ष करता रहता है। यह विचार कुछ लोगों में गफलत जरूर पैदा कर सकता है।
वैसे ही जब मैं किसी एक और विचार को सुन रहा था, जब एक वरिष्ठ साहित्यकार जो कि किसी बड़े सम्मान से नवाजे जा चुके थे और उन्होंने अपना घर पर पार्टी का आयोजन किया, तो सबसे पहले उनके घर पर एक बड़ी साहित्यकारा नेत्री पहुँच गईं, और उन दोनों की गुफ्तगू चल रही थी, साहित्यकार महोदय मद्यपान और धूम्रपान कर रहे थे, और सामने के सोफे पर ही नेत्री बैठी थीं। एक बात हमें बहुत मुद्दे की लगी, जब नेत्री ने कहा कि यह मुकाम आपने बहुत संघर्ष से पाया है, तब साहित्यकार महोदय कहते हैं कि नहीं आप गलत हैं, असल में आज जिस मुकाम पर मैं हूँ केवल अपनी चालाकी के कारण, तो नेत्री जी उनकी बात से असहमत थीं, तो साहित्यकार महोदय ने उनको कहा कि आप क्या सभी लोग असहमत होंगे परंतु सच यही है कि मैं केवल अपनी चालाकी के कारण यहाँ तक पहुँचा। Continue reading कला, साहित्य और राजनीति
जख्म इतना भी गहरा न दिया करो
कुछ लाईनें जो ट्विटर पर लिख दी थीं, तो सोचा कि अपने ब्लॉग पर लिख दें ताकि सनद रहे कि हमने ही लिखी थीं –
ये भी मत सोचकर मतवाला होना कि,
हवा तुम्हारे कहने से ही चलेगी,
कभी हमारे बारे में भी सोचना,
कि तुम्हें पता न हो हम तूफानों में ही खेलते हैं।
जब से मैं जंगली जैसा रहने लगा हूँ,
मेरे नाखून ही मेरे हथियार हैं,
अब मुझपे झपट्टा मारने के पहले,
सौ बार सोच जरूर लेना।
तेरे हर सवाल का जबाब हम देंगे,
तेरे हर दर्द का जबाब हम देंगे,
जब हम तुझे दर्द देंगे तो निशां रह जायेंगे,
दर्द से सारी जिंदगी तड़पते रहोगे।
जख्म इतना भी गहरा न दिया करो कि,
हम खुद ही कुरेद के नासूर बना लें,
ताकि याद रख सकें कि,
एक दिन तुमसे बदला लेना है।
वक्त का क्या है,
वक्त की अपनी चाल है,
हमारा क्या है,
हमारी चाल वक्त बिगाड़ता है।
अभी मैं भले तुम्हें कोयला लगता हूँ पर,
ध्यान रखना हीरा कोयला ही बनता है।
कार से बैंगलोर से उज्जैन यात्रा
सिहंस्थ के दौरान हमें अपने गृहनगर उज्जैन जाना तय कर रखा था, परंतु आखिरी मौके पर पता चला कि कुछ ऐसी अड़चनें हैं कि हम सिंहस्थ के दौरान उज्जैन नहीं जा पायेंगे, तो हमने सिंहस्थ के पहले ही आने का निर्णय लिया। सबसे बड़ी अड़चन यह थी कि हमने अपने ट्रेन के आरक्षण सिंहस्थ की दिनांक के मद्देनजर उन दिनों में करवा रखे थे, और 4 महीने पहले ही जिस दिन आरक्षण खुले उसी दिन सुबह करवा लिये थे। नहीं तो एक भी घंटा अगर लेट करते तो वेटिंग के ही टिकट मिलते हैं। हमने मन बनाया कि इस बार 3 अप्रैल को उज्जैन में ही अपने माता पिता के साथ अपने जन्मदिन पर रहें। कार से बैंगलोर से उज्जैन सड़क मार्ग से जाने का मन तो पहले ही था।
31 मार्च को शाम को आखिरकार अचानक ही कार्यक्रम बना कि कल सुबह याने कि 1 अप्रैल को कार से ही बैंगलोर से पूना होते हुए उज्जैन जाया जाये। 31 मार्च को हमने सोचा था कि जल्दी सो जायेंगे परंतु उसी दिन टी 20 के विश्वकप में भारत और वेस्टैंडीज का सेमीफाईनल था Continue reading कार से बैंगलोर से उज्जैन यात्रा
मरना क्या होता है, अजीब सा प्रश्न है
मरना क्या होता है, अजीब सा प्रश्न है, परंतु बहुत खोज करने वाला विषय भी है क्योकि सबको केवल जीवन का अनुभव होता है, मरने का नहीं। सोचता हूँ कि काश मरने का अनुभव रखने वाले भी इस दुनिया में बहुत से लोग होते तो पता रहता कि क्या क्या तकलीफें होती हैं, जीवन से मरने के दौरान किन पायदानों से गुजरना पड़ता है। जैसे जीवन के दर्द होते हैं, शायद मरने के भी कई दर्द होते होंगे, जैसे हम कहते हैं कि वह तो अपनी किस्मत पैदा होने के साथ ही लिखवा कर लाया है, तो वैसे ही शायद मरने के बाद के भी कुछ वाक्य होते होंगे, कि मरने के समय ही अपनी किस्मत लिखवा कर लाया है।
अनजान
मैं पता नहीं कितनी बातों से अपनी जिंदगी में अनजान हूँ, यही सोचता रहता हूँ। अपनी कल्पनाओं में पता नहीं क्या क्या अनजाना से बुनता रहता हूँ, मैं हर घटना और हर वस्तु के बारे में अनजान हूँ और अनजान हूँ तभी तो मैं उनके प्रति जानने के लिये जिज्ञासु हूँ। मैं हर नकारात्मक और सकारात्मक पहलू से अनजान हूँ, मैं पक्षियों की बोली से भी अनजान हूँ, मुझे तो केवल कोयल की कूक और कौवे की कर्कश आवाज ही पता है, बाकी के पक्षियों की आवाजों को मैं नहीं पहचान पाता।
अनजान होना मतलब यह नहीं कि मैं जानना नहीं चाहता, पर मेरे दायरे ही उतने हैं, और मैं हमेशा अपने दायरे की चीजों को ही जान पाया। दायरा शायद सबके इर्द गिर्द होता है, जो किसी को दिखता है किसी को महसूस होता है और किसी को पता ही नहीं चलता। जैसा शायद मेरे साथ, पहले दायरा पता नहीं चलता था, पर अब मैं अपने दायरों को मूर्त रूप से देख पाता हूँ, इसलिये चुपचाप उन चीजों को ही जान लेना बेहतर समझता हूँ, जो उन दायरों को लिये फायदेमंद हों। Continue reading अनजान
QNET कंपनी से बचकर रहें
QNET कंपनी का टाईम्स ऑफ इंडिया में दो दिन पहले ही पूरे मुख्य पेज का एक विज्ञापन आया था, मैं तो उस विज्ञापन को देखकर ही हतप्रभ था, कि फिर एक बड़ी पैसे घुमाने वाली कंपनी, उत्पादों के सहारे कैसे भारत में एक बड़ी एन्ट्री कर रही है। यह सब पौंजी स्कीम कहलाती है, जिसमें कि आपको कुछ लोगों को अपने नीचे लोगों को जोड़ना होता है, जिसके बदले आपको उन पैसों से कमीशन दिया जाता है जिन पैसों से वे लोग आपके नीचे उस कंपनी के लिये आपसे जुड़ते हैं। अगर उस कंपनी के उत्पाद भी देखेंगे तो आपको पता चल जायेगा कि यह कंपनी उत्पाद के लिये नहीं बल्कि सीधे सीधे मनी रोटेटिंग का काम मल्टी लेवल मार्केटिंग के सहारे कर रही है। Continue reading QNET कंपनी से बचकर रहें
मोटापा कम करना और कमजोरी – समझिये
मोटापा कम करना इतना आसान भी नहीं है, जब आप मोटापा कम करेंगे तो मोटापा जायेगा और कमजोरी आयेगी। इसीलिये बहुत सारे तत्वों का समावेश मोटापा घटाने के घरेलू उपाय में किया गया है। हर दिन आपको यह उपाय शायद बहुत ही कठिन लगे, परंतु धीरे धीरे आप पायेंगे कि आपकी आदत बन चुकी है, और आप हर दिन अपना वजन कम पायेंगे जो कि बहुत ही जल्दी आपको विश्वास दिलाता है कि हाँ आप अपने मोटापे को घटाने की और अग्रसर हैं।

मोटापा कम करना के पहले के भाग – (आगे पढ़ने से पहले यह जरूर पढ़ें) –
मोटापा कम कैसे किया जाये – मेरा अनुभव 20 किलो कम करने का Continue reading मोटापा कम करना और कमजोरी – समझिये
मोटापा घटाने का घरेलू उपाय – मोटापा कम कैसे किया जाये
हमने अभी तक बात की कि मोटापा कैसे कम किया जाये, खाने का सही तरीका क्या हो और पानी कैसे पिया जाये। अब मैं आपको मोटापा घटाने का घरेलू उपाय के बारे में बताऊँगा, जिसका शायद सबको ही इंतजार है, इस पोस्ट के बाद इस डाईट क्या फायदे आपको होंगे और मेरे अपने अनुभव भी साझा करूँगा, जिससे आप सबको भी बहुत सी बातें पता चलेंगी और आपके लिये वे बातें मददगार साबित होंगी। इस डाईट को शुरू करने के 15 दिनों बाद ही आप अपने डॉक्टर से अपना अवश्य ही मिलें क्योंकि इस डाईट से आपका शरीर बिल्कुल प्राकृतिक तरीके से शुद्ध होने लगेगा और जो भी दवाईयाँ आप ले रहे हों खासकर कि कोलोस्ट्रॉल, उच्च रक्ताचाप और मधुमेह की तो शायद आपकी दवाईयों के डोज की मात्रा आपके डॉक्टर कम करें। Continue reading मोटापा घटाने का घरेलू उपाय – मोटापा कम कैसे किया जाये
मोटापा कम कैसे किया जाये – पानी कैसे पिया जाये
मोटापा कम कैसे किया जाये पर हमने अभी तक बात की कि मोटापा कम करने के प्रचलित तरीके क्या हैं और खाना कैसे खाना चाहिये, अब हम बात करेंगे कि पानी कैसे पिया जाये या पेय पदार्थों का सेवन कैसे किया जाये। जैसे हमारी पाचन क्रिया में भोजन को बत्तीस बार चबाना बहुत ही महत्वपूर्ण है वैसे ही पानी कैसे पिया जाये भी बहुत ही महत्वपूर्ण है।

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