फोन पर घंटी बज उठी, तो देखा घरवाली का वीडियो कॉल है, आस पास देखा और अपनी सिगरेट ऐशट्रे में रखकर दोस्तों को बोला कि बस अभी आया, जल्दी से अपने गिलास से आखिरीघूँट ख़त्म किया और फिर मोबाइल साइलेंट करके चुपके से अपनी टेबल से उठा और वाश रूम की ओर गया, तब तक बहुत सारी घंटिया बज चुकी थी और कॉल मिस कॉल हो गया| कॉल तो अब उसे करना ही था नहीं तो घर पर जाकर सुताई हो जाती कि ऑफिस में इतने व्यस्त थे वह भी रात के ९ बजे, घर पहुँच कर लाखो सवाल दाग दिए जायेंगे इससे अच्छा है कि अभी कॉल कर लिया जाये|
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अकिंचन मन .. न चैट, न बज्ज, न ब्लॉगिंग … मेरी कविता .. विवेक रस्तोगी
इंतजार तुम्हारे आने का … मेरी कविता … विवेक रस्तोगी
इंतजार
तुम्हारे आने का
तुम आओगे मुझे पक्का यकीं है
तुमने वादा जो किया है
अब कब आते हो
ये देखना है
तुम आने के पहले इस इंतजार में
कितना सताते हो
ये देखना है
तुम्हारी टोह में बैठे हैं
हर पल
तुम्हारा इंतजार लगा रहता है
बस इतना पक्का यकीं है
कि तुम आओगे
पर ये इंतजार
बहुत मुश्किल होता है।
कुछ नये चुटकले (Some new jokes)
टीचर : तुम क्लास में लेट क्यों आए, बाकी सारे तो पहले आ गए थे?
स्टूडेंट : सर झुंड में तो कुत्ते आते हैं, शेर तो हमेशा अकेला ही आता है..
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चिन्टू : वह कौन-सा मज़ाक है, जो विद्यार्थी पहले भी किया करते थे, आज भी करते हैं और क़यामत तक करते रहेंगे…?
मिन्टू : बहुत मस्ती हो गई, यौर… अब कल से सीरियस होकर पढ़ाई करेंगे
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Aalu was in LOVE wid Bhindi. when Aalu proposed Bhindi ( who was egoistic & very proud of her slim figure ) she rejected his proposal, u r such a fatty. AALU took it is as a challange & has so many girfriends,,,,, now Aalu- gobi …Aalu-gosht Aalu qeema Aalu -gajar Aalu -matar Aalu – shimlamirch MORAL (nevre be egoistic in life otherwise u will be left alone like BHINDI
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अध्यापक (चिंटू से) : सांप के ऊपर कोई कविता सुनाओ
चिंटू : इन्सान इन्सान को डस रहा है और सांप बगल में बैठकर हंस रहा है
कुछ और नये चुटकले (Some more new jokes)
कुछ और नये चुटकले (Some more new jokes)
भीड़ में काफी देर से खड़ा अभिनेता ऑटोग्राफ देते-देते जब थक गया तो उसने एक लड़की की नोटबुक में गधे की फोटो बना कर लड़की की ओर बढ़ा दी।
लडकी (मुस्कुराकर)- मुझे आपका फोटो नहीं, ऑटोग्राफ चाहिए
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रमन की अपनी बीवी से जबर्दस्त लड़ाई हो गई। बीवी ने आव देखा न ताव… कसकर बेलन फेंककर मारा, जो रमन के सिर, हाथ से गुजरते हुए घुटने पर लगा और हड्डी चटक गई।
अस्पताल में प्लास्टर कराने के बाद जब उसे वार्ड में ले जाया गया, तो उसने देखा कि साथ वाले बेड पर जो मरीज लेटा है उसकी दोनों टाँगों पर प्लास्टर चढ़ा है। उसने पड़ोसी मरीज से धीरे से पूछा, ‘भाईसाहब, आपकी क्या दो बीवियाँ है?’
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छुट्टी के दिन तीन बच्चे बातें कर रहे थे।
पहले बच्चे ने कहा : मेरे पापा सबसे तेज दौड़ते हैं। वह तीर चला कर दौड़ते हैं, तो तीर से पहले निशाने तक पहुंच जाते हैं।
दूसरे ने कहा : यह तो कुछ भी नहीं। मेरे पापा राइफल की गोली चलाते हैं और उससे पहले टारगेट तक पहुंच जाते हैं।
तीसरे ने कहा : अरे! तुम दोनों तो जानते ही नहीं कि स्पीड क्या होती है? मेरे पापा सरकारी कर्मचारी हैं। उनकी छुट्टी शाम 6 बजे होती है और वे 4 बजे ही घर पहुंच जाते हैं
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शरारती सार्थक को उसके तीन वकील दोस्तों के साथ पार्क में बैठकर जुआ खेलने के आरोप में गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया…
मजिस्ट्रेट ने पहले वकील से बयान देने के लिए कहा, तो वह बोला, “माई लॉर्ड, मैं उस दिन यहां था ही नहीं… मैं लखनऊ जाने वाली ट्रेन में था… सबूत के तौर पर यह देखिए मेरा रेल टिकट…”
दूसरे वकील की बारी आने पर वह बोला, “उस दिन मैं घर पर बुखार में पड़ा था… सबूत के तौर पर यह देखिए, डॉक्टर का सर्टिफिकेट…”
तीसरे वकील का जवाब था, “मैं तो उस वक्त चर्च में बैठा भगवान से बातें कर रहा था… गवाह के तौर पर मैं चर्च के पादरी को साथ लाया हूं…”
अंततः मजिस्ट्रेट ने सार्थक से पूछा, “अब तुम्हें क्या कहना है… क्या तुम भी जुआ नहीं खेल रहे थे…?”
शरारती सार्थक ने कुटिल मुस्कुराहट के साथ तपाक से कहा, “किसके साथ…?
मुंबई की बस के सफ़र के कुछ क्षण… बेस्ट के ड्राईवर का गुस्सा.. बाबा..
घर से आज ९.२५ पर निकल पाया तो लगा कि शायद अपनी बस आज छूट जायेगी, सोचा कि अब तो अगली बस ९.५० की ही मिलेगी, परंतु हाईवे पर पहुँचते ही अपनी तो बाँछें खिल गई, क्योंकि जबरदस्त ट्रॉफ़िक था, कोई गाड़ी अच्छे से किसी से टकरा गई थी। और तीन तीन बस ट्रॉफ़िक में फ़ँसी हुई थीं जिसमें सबसे पीछे वाली बस अपनी थी, फ़िर से ड्राईवर से मुस्कराहट का आदान प्रदान हुआ और उन्होंने आगे से ही चढ़ने का इशारा किया परंतु सभ्यता से हम बस के पीछे वाले दरवाजे से चढ़ लिये।
बस में आज भीड़ कुछ कम थी, और ठीक ठाक तरीके से खड़े होने की जगह मिल गयी थी, पर थोड़ी देर में ही भीड़ का दबाब बड़ने लगा और जाने पहचाने चेहरे नजर आने लगे, अपना मोबाईल निकाला और निम्बज्ज में लॉगिन किया कि ट्विटर पर नया क्या है, गूगल चैट, याहू चैट और स्कायपी पर कितने और कौन कौन ऑनलाईन हैं, कुछ चैटिंग पर काम की बातें भी कर ली गईं, कुछ देर बाद ही हमें एक सीट मिल गई और हम इत्मिनान से मोबाईल पर ही इकोनोमिक्स टाईम्स पढ़ने लगे।
बस में भीड़ का दबाब बड़ता ही जा रहा था, दो लाईन से तीन लाईन और एक चौथी लाईन आने जाने वालों की लगी थी, बिल्कुल पैक हो चुकी थी बस.. थोड़ी ही देर में स्टॉप आते जाते और बस यात्रियों को उतारकर और लेकर आगे बढ़ती रहती।
बस एक स्टॉप पर से निकली और सिग्नल पर खड़ी हो गई, तो कुछ दो लोग पीछे से दौड़ते हुए आये और आगे वाले दरवाजे से चढ़ लिये, तो ड्राईवर बहुत नाराज हुआ, और इन दोनों पर चिल्लाने लगा बोला कि पीछे दरवाजे से चढ़ो, तो दो लोगों में से एक तो उतर गया पर एक आदमी उतरने को तैयार ही नहीं था, और वह गाली गलौच पर उतर आया, तब तक बस थोड़ा आगे निकल चुकी थी, तो बस ड्राईवर ने बस उधर ही रोकी और बस का इंजिन बंद कर दिया और बोला कि जब तक ये आदमी नहीं उतरेगा तब तक बस आगे नहीं जायेगी, ऊफ़्फ़ ये तो उस आदमी ने हद्द ही कर दी बोला कि नहीं उतरुँगा, तब बस में से सभी लोग उस आदमी के लिये चिल्लाने लगे और कुछ टपोरियों वाली भाषा में ही शुरु हो गये। कुछ लोग कहने लगे “लेट हो रहा है”, “गर्मी बहुत हो रही है”, तो इतने में एक लड़की का कमेंट आया कि मुंबई में सारी बसें ए.सी. होनी चाहिये, यहाँ इतनी सड़ी गर्मी होती है। आखिरकार वह आदमी उतरा और बस ड्राईवर ने बस इंजिन चालू किया तब जाकर राहत महसूस हुई।
रोज ही ऐसा कोई न कोई वाकया हो जाता है। कि बस.. लिखना तो बहुत कुछ है पर बस अब ओर नहीं…
मेरी वो किताबें … मेरी कविता.. विवेक रस्तोगी
काश.. कि मेरे बुलाने पर … मेरी कविता … विवेक रस्तोगी
काश..
कि मेरे बुलाने पर
तुम आते
केवल मुझसे मिलने आते
मेरे लिये
मेरे पास आते
ओर मैं और तुम
कहीं बैठकर
गहराईयों
से बातें करते
काश !
बस स्टॉप पर तीन लड़कियों की बातें
बस स्टॉप पर तीन लड़कियाँ बस के इंतजार में बैठी हुई थीं, सप्ताहांत की खुशी तो थी ही तीनों के चेहरे पर, साथ ही चुहलबाजी भी कर रही थीं।
तभी एक मोटर साईकिल स्टॉप के आगे आकर रुकी और वह लड़का किनारे जाकर रुक गया, हेलमेट उतारा और किसी का इंतजार करने लगा, बाईक भी कोई अच्छी सी ही लग रही थी, पर तभी उन तीनों लड़कियों की आवाज चहकने लगी, एक बोली “देख क्या बाईक है”, दूसरी बोली, “अरे नहीं मोडिफ़ाईड बाईक है, आजकल येइच्च फ़ैशन है, ओरिजिनल का जमाना नहीं है, जो पसंद आये लगा डालो”
सोचने लगा कि लड़कियाँ क्या क्या सोचती हैं, जिस बाईक की ओर लड़कों का ध्यान नहीं जाता वह बाईक लड़कियों की बातों का केन्द्र है।
तभी एक लड़की के मोबाईल पर फ़ोन आ गया, अब इधर की तरफ़ जो बातें सुनाई दे रही थीं, वे इस प्रकार थीं –
“किधर है तू”
“क्या बोलता है”
“अच्छा तू आरेला है मेरे कू लेने को”
तब समझ में आया कि लड़के का फ़ोन है।
“किधर मिलूँ, जिधर तू सिगरेट लेता है, पानी पुरी वाले खड़ेले हैं, अरे मैं उधरीच हूँ रे”
“तू आ न”
तभी एक लड़की की बस आ गई, वह तुरंत दौड़कर सड़क पर गई और बस स्टॉप तक आने का इंतजार करने लगी, जेब से कान कौवे (हैंड़्स फ़्री) निकाले और कान में ठूँस लिये, मुंबई की रफ़्तार में इन कानकौवों का बहुत महत्व है, आधी से ज्यादा मुंबई कानकौवे कान में ठूँसे हुए नजर आते हैं, केवल अपनी दुनिया में मस्त और व्यस्त”
फ़िर वो लड़की जिसका फ़ोन आया था, वह भी बॉय करके चल दी सड़क क्रॉस कर सिगरेट के ठिये पर, जहाँ उसका बॉय फ़्रेंड आने वाला है।
तीसरी लड़की वो भी शायद बस का ही इंतजार कर रही थी, परंतु जैसे ही ये दोनों लड़कियाँ गईं, वो वहाँ से उठकर पैदल ही चल दी, दूसरी तरफ़, समझ नहीं आया कि जब बस पकड़ने आये थे तो दो लड़कियाँ पैदल ही क्यों चली गईं।
वहीं ठिठोली करता हुआ एक समूह खड़ा था जिसमें दो लड़के और दो लड़कियाँ थे, लड़कियों के हाथ में सिगरेट थी और बिल्कुल नशा करने के अंदाज में मस्ती से सिगरेट के कश उड़ा रही थी.. हमारी आधुनिक संस्कृति..
आज घर आते आते बहुत सारी बसों पर एगॉन रेलिगेयर के जीवन बीमा वाले उत्पादों के विज्ञापन देखकर खुशी हुई कि चलो ये तो अच्छा काम हो रहा है।
अब क्या चाहते हो तुम … मेरी कविता… विवेक रस्तोगी
अब
क्या चाहते हो तुम,
तुम्हारे लिये और क्या कर गुजरें
देखो तो सही
समझो तो सही,
क्या इतना कुछ काफ़ी नहीं है
अब बोलो भी,
आखिर क्या चाहते है तुम !!
मौन….?
(किसे कहना चाह रहे हैं, क्यों कहना चाह रहे हैं, उसकी ढूँढ़ जारी है, बाकी तो सबका अपना नजरिया है।)


