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About Vivek Rastogi

मैं २००६ से हिन्दी ब्लॉगिंग कर रहा हूँ, और वित्त प्रबंधन मेरा प्रिय विषय है। मेरा एक यूट्यूब चैनल भी है जिसे आप https://youtube.com/financialbakwas देख सकते हैं।

मुंबई की बस के सफ़र के कुछ क्षण… बेस्ट के ड्राईवर का गुस्सा.. बाबा..

     घर से आज ९.२५ पर निकल पाया तो लगा कि शायद अपनी बस आज छूट जायेगी, सोचा कि अब तो अगली बस ९.५० की ही मिलेगी, परंतु हाईवे पर पहुँचते ही अपनी तो बाँछें खिल गई, क्योंकि जबरदस्त ट्रॉफ़िक था, कोई गाड़ी अच्छे से किसी से टकरा गई थी। और तीन तीन बस ट्रॉफ़िक में फ़ँसी हुई थीं जिसमें सबसे पीछे वाली बस अपनी थी, फ़िर से ड्राईवर से मुस्कराहट का आदान प्रदान हुआ और उन्होंने आगे से ही चढ़ने का इशारा किया परंतु सभ्यता से हम बस के पीछे वाले दरवाजे से चढ़ लिये।

    बस में आज भीड़ कुछ कम थी, और ठीक ठाक तरीके से खड़े होने की जगह मिल गयी थी, पर थोड़ी देर में ही भीड़ का दबाब बड़ने लगा और जाने पहचाने चेहरे नजर आने लगे, अपना मोबाईल निकाला और निम्बज्ज में लॉगिन किया कि ट्विटर पर नया क्या है, गूगल चैट, याहू चैट और स्कायपी पर कितने और कौन कौन ऑनलाईन हैं, कुछ चैटिंग पर काम की बातें भी कर ली गईं, कुछ देर बाद ही हमें एक सीट मिल गई और हम इत्मिनान से मोबाईल पर ही इकोनोमिक्स टाईम्स पढ़ने लगे।

    बस में भीड़ का दबाब बड़ता ही जा रहा था, दो लाईन से तीन लाईन और एक चौथी लाईन आने जाने वालों की लगी थी, बिल्कुल पैक हो चुकी थी बस.. थोड़ी ही देर में स्टॉप आते जाते और बस यात्रियों को उतारकर और लेकर आगे बढ़ती रहती।

    बस एक स्टॉप पर से निकली और सिग्नल पर खड़ी हो गई, तो कुछ दो लोग पीछे से दौड़ते हुए आये और आगे वाले दरवाजे से चढ़ लिये, तो ड्राईवर बहुत नाराज हुआ, और इन दोनों पर चिल्लाने लगा बोला कि पीछे दरवाजे से चढ़ो, तो दो लोगों में से एक तो उतर गया पर एक आदमी उतरने को तैयार ही नहीं था, और वह गाली गलौच पर उतर आया, तब तक बस थोड़ा आगे निकल चुकी थी, तो बस ड्राईवर ने बस उधर ही रोकी और बस का इंजिन बंद कर दिया और बोला कि जब तक ये आदमी नहीं उतरेगा तब तक बस आगे नहीं जायेगी, ऊफ़्फ़ ये तो उस आदमी ने हद्द ही कर दी बोला कि नहीं उतरुँगा, तब बस में से सभी लोग उस आदमी के लिये चिल्लाने लगे और कुछ टपोरियों वाली भाषा में ही शुरु हो गये। कुछ लोग कहने लगे “लेट हो रहा है”, “गर्मी बहुत हो रही है”, तो इतने में एक लड़की का कमेंट आया कि मुंबई में सारी बसें ए.सी. होनी चाहिये, यहाँ इतनी सड़ी गर्मी होती है। आखिरकार वह आदमी उतरा और बस ड्राईवर ने बस इंजिन चालू किया तब जाकर राहत महसूस हुई।

    रोज ही ऐसा कोई न कोई वाकया हो जाता है। कि बस.. लिखना तो बहुत कुछ है पर बस अब ओर नहीं…

मेरी वो किताबें … मेरी कविता.. विवेक रस्तोगी

पुरानी किताब

मेरी वो किताबें

जिनकी धूल कभी मैंने झाड़ी थी

उनपर आज फ़िर

धूल की परतें जमीं है

उन परतों में अपनी अकर्मण्यता ढूँढ़ता हूँ

उन परतों में दबा हुआ समय देखता हूँ

जमे हुए रिश्ते पढ़ने की कोशिश करता हूँ

और मेरे छूने पर

उस परत के टूटे हुए कणों को देखते हुए

फ़िर नया करने में जुट जाता हूँ ।

काश.. कि मेरे बुलाने पर … मेरी कविता … विवेक रस्तोगी

काश..

कि मेरे बुलाने पर

तुम आते

केवल मुझसे मिलने आते

मेरे लिये

मेरे पास आते

ओर मैं और तुम

कहीं बैठकर

गहराईयों

से बातें करते

काश !

आईडीएफ़सी बॉन्ड के लिये फ़्री में डीमैट खाता १० वर्षों तक (Free Demat Account for 10 Years for IDFC Bonds)

    पिछले लेख आईडीएफ़सी दीर्घकालीन इंफ़्रास्ट्रक्चर बॉन्ड २०१० (IDFC Long Term Infrastructure Bond 2010) के बाद अब यह बॉन्ड बाजार में आ गया है।

    असित सी. मेहता के नितिन कुमावत ने बताया कि आईडीएफ़सी बॉन्ड के साथ उनकी कंपनी डीमैट अकाऊँट फ़्री में उपलब्ध करवा रही है, और अगले दस वर्षों तक कोई ए.एम.सी. शुल्क भी देय नहीं होंगे, बशर्ते उस डीमैट अकाऊँट में और कोई ट्रांजेक्शन न किया गया हो। वैसे यह डीमैट अकाऊँट साधारण ही होगा, एक बार खुलने के बाद आप इसमें अपने शेयर, ईटीएफ़ और म्यूच्यल फ़ंड के ट्रांजेक्शन भी कर सकते हैं, पर इस स्थिती में हर वर्ष लगने वाले ए.एम.सी. (AMC – Annual Maintenance Charges) देय होंगे, जो कि ब्रोंकिंग कंपनियों के नियमानुसार होंगे।

    पर अगर केवल आई.डी.एफ़.सी. बॉन्ड ही लेते हैं तो इस डीमैट अकाऊँट पर कोई शुल्क दस वर्षों के लिये देय नहीं होगा।

    ज्यादा जानकारी के लिये मुंबई के लोग असित सी. मेहता की ब्रांच में इन फ़ोन नंबरों (022 – 21730153, 21730540,2173041,2173042) पर बात करके यह बांड भी ले सकते हैं और डीमैट अकाऊँट भी खुलवा सकते हैं।

बस स्टॉप पर तीन लड़कियों की बातें

बस स्टॉप पर तीन लड़कियाँ बस के इंतजार में बैठी हुई थीं, सप्ताहांत की खुशी तो थी ही तीनों के चेहरे पर, साथ ही चुहलबाजी भी कर रही थीं।

तभी एक मोटर साईकिल स्टॉप के आगे आकर रुकी और वह लड़का किनारे जाकर रुक गया, हेलमेट उतारा और किसी का इंतजार करने लगा, बाईक भी कोई अच्छी सी ही लग रही थी, पर तभी उन तीनों लड़कियों की आवाज चहकने लगी, एक बोली “देख क्या बाईक है”, दूसरी बोली, “अरे नहीं मोडिफ़ाईड बाईक है, आजकल येइच्च फ़ैशन है, ओरिजिनल का जमाना नहीं है, जो पसंद आये लगा डालो”

सोचने लगा कि लड़कियाँ क्या क्या सोचती हैं, जिस बाईक की ओर लड़कों का ध्यान नहीं जाता वह बाईक लड़कियों की बातों का केन्द्र है।

तभी एक लड़की के मोबाईल पर फ़ोन आ गया, अब इधर की तरफ़ जो बातें सुनाई दे रही थीं, वे इस प्रकार थीं –

“किधर है तू”

“क्या बोलता है”

“अच्छा तू आरेला है मेरे कू लेने को”

तब समझ में आया कि लड़के का फ़ोन है।

“किधर मिलूँ, जिधर तू सिगरेट लेता है, पानी पुरी वाले खड़ेले हैं, अरे मैं उधरीच हूँ रे”

“तू आ न”

तभी एक लड़की की बस आ गई, वह तुरंत दौड़कर सड़क पर गई और बस स्टॉप तक आने का इंतजार करने लगी, जेब से कान कौवे (हैंड़्स फ़्री) निकाले और कान में ठूँस लिये, मुंबई की रफ़्तार में इन कानकौवों का बहुत महत्व है, आधी से ज्यादा मुंबई कानकौवे कान में ठूँसे हुए नजर आते हैं, केवल अपनी दुनिया में मस्त और व्यस्त”

फ़िर वो लड़की जिसका फ़ोन आया था, वह भी बॉय करके चल दी सड़क क्रॉस कर सिगरेट के ठिये पर, जहाँ उसका बॉय फ़्रेंड आने वाला है।

तीसरी लड़की वो भी शायद बस का ही इंतजार कर रही थी, परंतु जैसे ही ये दोनों लड़कियाँ गईं, वो वहाँ से उठकर पैदल ही चल दी, दूसरी तरफ़, समझ नहीं आया कि जब बस पकड़ने आये थे तो दो लड़कियाँ पैदल ही क्यों चली गईं।

वहीं ठिठोली करता हुआ एक समूह खड़ा था जिसमें दो लड़के और दो लड़कियाँ थे, लड़कियों के हाथ में सिगरेट थी और बिल्कुल नशा करने के अंदाज में मस्ती से सिगरेट के कश उड़ा रही थी.. हमारी आधुनिक संस्कृति..

आज घर आते आते बहुत सारी बसों पर एगॉन रेलिगेयर के जीवन बीमा वाले उत्पादों के विज्ञापन देखकर खुशी हुई कि चलो ये तो अच्छा काम हो रहा है।

आखिर इतना बड़ा सरकारी तंत्र रेल्वे कब सुधरेगा..

    गुस्सा होना स्वाभाविक है, जब आपको तत्काल कहीं जाना हो और टिकट न मिले, तो तत्काल का सहारा लेते हैं, रेल्वे ने यह सुविधा आईआरसीटीसी के द्वारा भी दे रखी है, परंतु ८ बजे सुबह जैसे ही तत्काल आरक्षण खुलता है वैसे ही इस वेबसाईट की बैंड बज जाती है, सर्विस अन- अवेलेबल का मैसेज इनकी वेबसाईट पर मुँह चिढ़ाने लगता है।

    कई बार तो बैंक से कई बार पैमेन्ट हो जाने के बाद भी टिकट नहीं मिल पाता है क्योंकि पैमेन्ट गेटवे से वापिस साईट पर आने पर ट्राफ़िक ही इतना होता है कि टिकट हो ही नहीं पाता है, वैसे अगर टिकट नहीं हुआ और बैंक से पैसे कट गये तो १-२ दिन में पैसे वापिस आ जाते हैं, परंतु समस्या यह है कि ऑनलाईन टिकट मिलना बहुत ही मुश्किल होता है।

    सुबह ८ बजे से ८.४५ – ९.०० बजे तक तो वेबसाईट पर इतना ट्राफ़िक होता है कि टिकट तभी हो सकता है जब आपकी किस्मत बुलंद हो। वैसे आज किस्मत हमारी भी बुलंद थी जो टिकट हो गया वरना तो हमेशा से खराब है, इसके लिये पहले भी जाने कितनी बार रेल्वे को कोस चुके हैं।

    करीबन २ महीने पहले से एजेन्टों के लिये व्यवस्था शुरु की गई कि वे लोग जिस दिन तत्काल खुलता है उस दिन ९ बजे से टिकट करवा सकेंगे याने कि सुबह ८ से ९ बजे तक केवल आमजनता ही करवा पायेगी, परंतु इनकी इतनी मिलीभगत है कि जब सीजन होता है तब इनके सर्वर ही डाऊन हो जाते हैं, न घर बैठे आप साईट से टिकट कर सकते हैं और न ही टिकट खिड़की से, पर जैसे ही ९ बजते हैं, स्थिती सुधर जाती है, ये सब धांधली नहीं तो और क्या है।

    टिकट खिडकी पर जाकर टिकट करवाना मतलब कि अपने ३-४ घंटे स्वाहा करना। सुबह ४ बजे से लाईन में लगो, तब भी गारंटी नहीं है कि टिकट कन्फ़र्म मिल ही जायेगा, लोग तो रात से ही अपना बिस्तर लेकर टिकट खिड़की पर नंबर के लिये लग जाते हैं, और टिकट खिड़की वाला बाबू अपने मनमर्जी से टिकट करेगा, उसका प्रिंटर बंद है तो परेशानी, उसके पास खुल्ले न हो तो और परेशानी, जब तक कि पहले वाले यात्री को रवाना नहीं करेगा, अगले यात्री की आरक्षण पर्ची नहीं लेगा, और जब तक कि ये सब नाटक होगा, बेचारा अगला यात्री उसको कोसता रहेगा क्योंकि तब तक उसे कन्फ़र्म टिकट नहीं वेटिंग का टिकट मिलेगा।

    क्या इतना बड़ा सरकारी तंत्र रेल्वे अपना आई.टी. इंफ़्रास्ट्रक्चर ठीक नहीं कर सकता है, या उसके जानकारों की कमी है रेल्वे के पास, तो रेल्वे आऊटसोर्स कर ले, कम से कम अच्छी सुविधा तो मिल पायेगी।

अब क्या चाहते हो तुम … मेरी कविता… विवेक रस्तोगी

अब

क्या चाहते हो तुम,

तुम्हारे लिये और क्या कर गुजरें

देखो तो सही

समझो तो सही,

क्या इतना कुछ काफ़ी नहीं है

अब बोलो भी,

आखिर क्या चाहते है तुम !!

मौन….?

(किसे कहना चाह रहे हैं, क्यों कहना चाह रहे हैं, उसकी ढूँढ़ जारी है, बाकी तो सबका अपना नजरिया है।)

एनईएफ़टी क्या है, क्या आप इसका उपयोग करते हैं..(What is NEFT.. are you using NEFT for Fund Transfer ?)

क्या आप एनईएफ़टी (NEFT) का उपयोग करते हैं या अभी भी चेक से ही भुगतान करते हैं। किसी को भी अगर धन अंतरण करना हो तो आप क्या अपनाते हैं, चेक या एनईएफ़टी (NEFT) ?

चेक अंग्रेजों के जमाने की बात हो गई, जो कि वाकई अंग्रेजों के द्वारा ..

आगे पढ़ने के लिये यहाँ चटका लगाईये

आईडीएफ़सी दीर्घकालीन इंफ़्रास्ट्रक्चर बॉन्ड २०१० (IDFC Long Term Infrastructure Bond 2010)

इस बार के बजट भाषण में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आयकर में लाभ की घोषणा की थी, धारा 80CCF के तहत २०,००० रुपयों तक का निवेश विशेष बुनियादी सुविधाओं वाले बॉन्ड में किया जा सकेगा।

इसकी आकर्षक बात यह है कि अभी तक की जाने वाली १,००,००० रुपयों की बचत के बाद ये बचत की जा सकती है।

कुछ समय पहले IFCI ने अपने बुनियादी सुविधाओं वाले बॉन्ड बाजार में उतारे थे। अब IDFC ने भी अपने बॉन्ड बाजार में लाने की घोषणा कर दी है। बॉन्ड बाजार में इस गुरुवार ३० सितम्बर २०१० से खुल रहे हैं जो कि सोमवार १८ अक्टूबर २०१० तक लिये जा सकेंगे। निवेशक को यह बॉन्ड खरीदने के लिये डीमैट एकाऊँट और पान (PAN)  होना जरुरी है।

आईडीएफ़सी इस सार्वजनिक निर्गम से लगभग ३,४०० करोड़ रुपये बाजार में बॉन्ड बेचेगी। इन बॉन्डों की परिपक्वता अवधि १० वर्ष की होगी और लॉक इन अवधि ५ वर्ष की होगी। निवेश करने के लिये चार विकल्प हैं –

१.  पहले वर्ग में ८% ब्याज प्रतिवर्ष, जिसे कि हर वर्ष निवेशक को दे दिया जायेगा।

२. दूसरे वर्ग में ८% ब्याज प्रतिवर्ष तो दिया जायेगा, पर ब्याज वापिस से निवेश हो जायेगा, याने कि चक्रवृद्धि ब्याज।

३. तीसरे वर्ग में ७.५% ब्याज प्रतिवर्ष देय  होगा जो कि बॉय बैक के विकल्प के साथ उपलब्ध होगा।

४. चौथे वर्ग में ७.५% ब्याज प्रतिवर्ष तो होगा पर ब्याज वापिस से निवेश हो जायेगा और यह बॉय बैक के विकल्प के साथ उपलब्ध होगा।

वास्तविक ब्याज की दर कितनी होगी ?

यह निवेशक के आयकर कटौती पर निर्भर करता है अगर निवेशक ३०% वाले आयकर खंड में आता है तो निवेशक को लगभग १५.७४% का ब्याज का लाभ मिलेगा।

३०.९% के आयकर दायरे में आने वाले निवेशक की आयकर बचत होगी ६,१८० रुपये, तो उसका वास्तविक निवेश हुआ १३,८२० रुपये (२०,००० रुपये – ६,२१८० रुपये)। और अगर पहला वर्ग ८% ब्याज वाला चुना गया है तो हर वर्ष १६०० रुपये ब्याज के मिलेंगे।

बॉन्ड के संबंध में:

  • 80 CCF धारा के तहत किसी भी इंफ़्रास्ट्रक्चर कंपनी के द्वारा पहला बांड सार्वजनिक निर्गम के द्वारा।
  • क्रेडिट रेटिंग एजेंसी आईसीआरए(ICRA) ने इस बॉन्ड को स्थिरता के  दृष्टिकोण से LAAA के तहत  से  अंकित  किया है रेटेड बांड के रूप में यह निर्गम प्रस्ताव, सुरक्षा के लिहाज से सबसे सुरक्षित श्रेणी में अंकित किया है।
  • इन बांडों  में केवल भारतीय निवासीयों और एचयूएफ  निवेश कर सकते हैं।
  • बॉन्ड को आकर्षक कूपन रेट ७.५% से ८% प्रतिवर्ष कर के लाभ के साथ २०,००० रुपये तक धारा 80 CCF के अंतर्गत जारी किया जा रहा है।
  • यहाँ निवेशक को चार निवेश विकल्प दिये गये हैं जो कि निवेशक अपनी जरुरत के अनुसार चुन सकता है।
  • किसी भी प्रकार के टीडीएस की कटौती नहीं की जाएगी।
  • बांड बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध किया जाएगा और 5 वर्ष तक लॉक इन रहेगा, इस अवधि के बाद बॉन्ड का ट्रेड किया जा सकता है।
  • निवेशक बॉन्ड को लॉक इन अवधि के बाद इस पर ऋण ले सकते हैं।
  • धारा 80 CCF के तहत निवेशक २०,००० रुपये बचा सकता है, जिसके ऊपने निवेशक को कर की छूट मिलेगी, जो कि धारा 80C, 80CCC एवं 80CCD (80CCE) के तहत मिलने वाली १,००,००० रुपये के छूट के अतिरिक्त होगी।

आईडीएफ़सी बांड