Category Archives: अध्ययन

अनलिमिटेड डाटा मोबाइल और ब्रॉडबैंड पर (Fair usages Policy)

आज इंटरनेट हमारे लिए जीवन की बहुत ही महत्वपूर्ण चीज हो गई है, और इंटरनेट का उपयोग करने के लिए मोबाइल डाटा या ब्रॉडबैंड महत्वपूर्ण है। इंटरनेट के इस युग में हमारे अधिकतर उपकरण इंटरनेट से जुड़ गए हैं, लेकिन केवल इंटरनेट से जुड़ना ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि साथ ही इंटरनेट की रफ्तार भी अच्छी होनी चाहिये। अगर आपका डाटा प्लान एक या 2 GB, 4जी डाटा 1 दिन का देता है, तब आप दिन के आखिर में अनुभव करेंगे कि आपके इंटरनेट की रफ्तार बहुत कम हो चुकी होगी । वह इसलिए नहीं कि आपके उपकरण थक गए हैं बल्कि इसलिए क्योंकि हर डाटा यूसेज के पिछले फेयर यूजर्स पॉलिसी (Fair Usages Policy) होती है।

फेयर यूजेस पॉलिसी (Fair Usages Policy) क्या होती है?

इंटरनेट सेवा प्रदाता या अगर मोबाइल इंटरनेट का उपयोग करते हैं तो फिर टेलीकॉम कंपनी, जो भी इंटरनेट डेटा आप उपयोग में ला रहे हैं, उसकी खपत को रिकॉर्ड करते हैं कि आपने कितना डाटा अभी तक उपयोग कर लिया है। कई बार आपको यह मैसेज भी आ जाता है कि आप अपनी यूजेस लिमिट को खत्म करने वाले हैं। अधिकतर प्रीपेड मोबाइल यूजर्स जब भी अपनी लिमिट को क्रॉस करने वाले होते हैं, तो या तो इंटरनेट सर्विसेज बंद हो जाती है या फिर अतिरिक्त शुल्क देना होते हैं।

Fair usages policy
Fair usages policy

फिर भी कई कंपनियाँ अपने डाटा प्लान में अनलिमिटेड इंटरनेट उपयोग का दावा करते हैं, लेकिन आपको पता होना चाहिए अनलिमिटेड डाटा में भी एक लिमिट होती है। केवल आप उतना ही डेटा उपयोग कर सकते हैं और यह लिमिट इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी कभी भी बताती नहीं है परंतु एक बार जब आप अपनी लिमिट की बैंडविड्थ को क्रॉस कर देते हैं तो इंटरनेट की रफ्तार बहुत धीमी हो जाती है। जैसे कि हमारे पास एक 5 एमबीपीएस बैंडविड्थ का एक प्लान है आज इसका की फेयर यूजर्स लिमिट 20 जीबी 1 महीने की है आपकी डाउनलोड कि डाटा स्पीड 1 एमबीपीएस हो जाएगी जब आप 20 GB डेटा का उपयोग कर लेंगे। यह 1 एमबीपीएस की रफ्तार और भी कम हो सकती है, यह आपके डाटा प्लान पर निर्भर करती है और यह इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी के फेयर यूजेस पॉलिसी पर निर्भर करती है। इसके पीछे इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी यह कारण भी देते हैं कि अगर आपको उतनी ही बैंडविड्थ दी जाती रही तो अन्य उपयोगकर्ताओं के अनुभव अच्छे नहीं होंगे क्योंकि उन्हें कम रफ्तार मिलेगी और आप अपना डाटा लिमिट खत्म कर चुके हैं।

क्या फर्क पड़ता है?

इंटरनेट का उपयोग और अधिक डेट डाटा की जरूरत भारत में एकदम से बढ़ गई है, मोबाइल ट्रॉफिक 2016 में 2015 की अपेक्षा 29 प्रतिशत बढ़ गया है। यह Nokia की भारत मोबाइल ब्रॉडबैंड इंडेक्स 2017 के आंकड़े हैं। यह रिपोर्ट यह भी बताती है कि पहले डाटा पर लोड 128 पेटा बाइट था वह अब 165 पेटा बाईट हो गया है। पेटा बाइट्स मतलब एक पेटाबाइट में 1024 टेराबाइट होते हैं और एक टेराबाइट में 1024 गीगाबाइट डाटा होता है यानी कि गीगा बाईट मतलब कि GB टेराबाइट मतलब कि TB और पेटाबाईट मतलब PB।

अगर आप ऑनलाइन कोई भी लाइव टेलीकास्ट देखना चाहते हैं वह भी हाई डेफिनेशन पर जैसे की YouTube या किसी और वीडियो ऑन डिमांड प्लेटफॉर्म पर तो आपको रोज का कम से कम एक जीबी डाटा अच्छी बैंडविड्थ के साथ चाहिए तो इस तरह के उपयोगकर्ता भारत में बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं।

आपको क्या करना चाहिए?

अगर आपका डेटा का उपयोग बहुत ज्यादा है तो आपको सबसे पहले अपने इंटरनेट सेवा प्रदाता की फेयर यूजेस पॉलिसी जान लेना चाहिए। अगर आपका उपयोग फेयर यूजेस पॉलिसी से ज्यादा होता है, तो आप को हर महीने अपने डेटा का उपयोग जो भी आप कर रहे हैं उसके ऊपर ध्यान रखना चाहिए। अपने डेटा के उपयोग की जानकारी अपने इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी के एप्लीकेशन से कर सकते हैं आजकल सभी कंपनियां अपने ऐप देती हैं जिसके ऊपर रियल टाइम डाटा यूजेस पता चलते रहते हैं अगर आप अपनी लिमिट से ज्यादा डेटा का उपयोग करते हैं तो आप अपने इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी से बार्गेन करिए और उनसे ज्यादा डाटा की मांग करिए वह भी कम पैसे में । अगर वह नहीं देते हैं तो फिर आप किसी ओर इंटरनेट सेवा सेवा प्रदाता कंपनी को ढूँढिए, क्योंकि बहुत सारे ब्रॉडबैंड प्लान ऐसे भी हैं जहां पर कोई लिमिट नहीं है।

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Petya ransomware attack पेटया रैनसमवेयर अटैक

केवल 6 हफ्ते पहले ही वानाक्राई रैनसमवेयर से पूरा विश्व लड़ रहा था और अब फिर से पूरा विश्व एक और रैनसमवेयर अटैक याने कि Petya ransomware attack  से थर्रा रहा है लोग अभी वानाक्राई के अटैक को भूल भी नहीं पाए थे की पेटया रैनसमवेयर आ गया।

Petya Ransomware Attack
Petya Ransomware Attack

यह साइबर आक्रमण सबसे पहले यूक्रेन में हुआ था, साथ ही Central Bank, अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, यहां तक की चरनेबल न्युक्लियर फैसिलिटी और बहुत सारी यूरोप, नॉर्थ अमेरिका और यहां तक कि आस्ट्रेलिया की भी संस्थाएं चपेट में है अभी रैनसमवेयर आक्रमण हुए कुछ ही समय बिता है और लगभग 2000 आक्रमण रिकॉर्ड किए जा चुके हैं अभी तक 64 देशों से रैनसमवेयर अटैक की सूचना आ चुकी है।

अभी तक प्राप्त सूचनाओं के अनुसार पेटया रैनसमवेयर वायरस मॉडिफाई वर्जन है जो की गोल्डन आई और वानाक्राई एलिमेंट्स को मिलाकर बनाया गया है।

इस वायरस में गोल्डन आई वायरस जो की पूरी हार्ड डिस्क को एंक्रिप्ट ही नहीं करता था बल्कि पूरे नेटवर्क को अनुपयोगी बना देता था, साथ में वही विंडोज की नीली स्क्रीन जो कि वानाक्राई का फीचर है दिखाता है जिससे अब तक तीन लाख कंप्यूटर पूरे विश्व में संक्रमित हैं।

इसके पहले की माइक्रोसॉफ्ट अपने सिक्योरिटी पेच रिलीज कर पाता नए रैनसमवेयर वायरस के अटैक ने बहुत सारे कंप्यूटरों को संक्रमित कर दिया है और जिन कंप्यूटरों पर नए पैचेस आ भी गए हैं उनपर भी पेटया रैनसमवेयर आक्रमण कर सकता है।

लॉ एनफोर्समेंट एजेंसी और सारे विश्व की साइबर सिक्योरिटी कंपनियां इस आक्रमण की तहकीकात में लगी हुई हैं। यहां तक कि कुछ शोधकर्ताओं ने अस्थायी तरीका इस वायरस से बचने का दिया है, पर सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि एक रैनसमवेयर अटैक के 6 हफ्ते के बाद ही एक और बड़ा रैनसमवेयर का हमला कैसे हो गया?

जो भी इस आक्रमण के पीछे हैं, उनके ईमेल एड्रेस से जो भी बिटकॉइन रेनसम के रूप में ट्रांसफर होने वाले थे, उन सबको होस्ट कंपनीयों ने डिसेबल कर दिया है। इसका मतलब यह है कि अगर रैनसमवेयर के आक्रमण के कारण अगर कोई फिरौती में बिटकॉइन देता है तो वह उसका उपयोग नहीं कर पाएंगे, मतलब नगद नहीं मिल पाएगा।

बहुत सारे सबूत इस बात के भी मिले हैं कि गोल्डन आई पेटया रैनसमवेयर जिन लोगों ने भी फैलाया है, उनका मकसद फिरौती की रकम उगाहना नहीं था बल्कि डाटा को खराब करना था । जिस तरीके से रैनसम मांगी जा रही थी, उससे यह बात पता चली है । लेकिन जिन लोगों ने रैनसम दे भी दी उनके डाटा सुरक्षित मिल ही गए इसकी भी कोई रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली है।

केवल 6 हफ्ते में इतना बड़ा रैनसमवेयर आक्रमण हुआ है जोकि वानाक्राई से भी ज्यादा तगड़ा था। अब इस बात की क्या गारंटी है कि आने वाले निकट भविष्य में कोई और रैनसमवेयर अटैक नहीं होगा और अगर रैनसमवेयर अटैक हुआ तो हम उसके लिए कितने तैयार हैं। इस बार रैनसमवेयर से और ज्यादा लोग संक्रमित होंगे।

रैनसमवेयर अटैक से बचने के लिए आपको क्या करना होगा –

आप अपने ऑपरेटिंग सिस्टम और सॉफ्टवेयर के सारे नई पैचेस डाउनलोड कर लें । अपने ऑपरेटिंग सिस्टम और सॉफ्टवेयर अप टू डेट रखें और ध्यान रखें कि किसी भी लिंक पर क्लिक करें तो सोच समझकर करें।कोई भी ईमेल का अटैचमेंट डाउनलोड ना करें। केवल यह दो तरीकों से आपके कंप्यूटर में रैनसमवेयर का आक्रमण हो सकता है। अगर आपने इतना एहतियात रखा तो आप रैनसमवेयर वायरस के आक्रमण से बच सकते हैं।

अच्छी नींद का कारोबार

कौन कितना दौलतमंद है, ताकतमंद है, इसे जानने के लिए उसकी नींद पर गौर करें। आजकल नींद का कारोबार प्रगति पर है और तरह तरह के शोध और प्रयोग हो रहे हैं।

क्या कभी ऐसा भी हो सकता है कोई आवाज़ लगाता हुआ आये, नींद ले लो नींद, इतने रुपए किलो नींद ले लो। तो क्या आप कभी नींद खरीद पाएंगे। या बाजार जाएं और बाजार से अपने लिए कुछ घंटों की आरामदायक नींद खरीद कर ला पाएं। हो सकता है कि तकनीक के कारण भविष्य में यह भी संभव हो।

इस बारे में बहुत शोध हुए हैं जिसमें नींद को केंद्र में रखा गया है, और पता लगाने की कोशिश की गई कि नींद गहरी आने के लिए या कितने समय सोना चाहिए, उसके लिए किन तत्वों का ध्यान रखना चाहिए। लेकिन शोध भी तभी काम आते हैं जब हम उनके बताए गए रास्तों को बहुत ही गंभीरता से अपने जीवन में उतारें।

नींद ना आने के कारण सबसे बड़ी समस्या होती है हमारा दिन, हमारी दिनचर्या पूरी तरह से हमारी नींद पर निर्भर करती है क्योंकि नींद ना आने से हम हमेशा ही कहीं ना कहीं नींद के नशे में कुछ प्रतिशत हमेशा रहते हैं। जिससे हम हमारे दिमाग को पूर्णतया अपने किसी काम में नहीं लगा पाते हैं, और हम कई बार कुछ चाहे-अनचाहे गलतियाँ कर ही देते हैं।

vividus mattress

केवल नींद लेना ही महत्वपूर्ण नहीं है। अच्छी नींद लेना महत्वपूर्ण है।अच्छी नींद के लिए अपने दिमाग को शांत रखना जरूरी है। नींद के लिए जो वातावरण चाहिए वह जरूरी है, जिसमें बिस्तर की गर्मी, सिर के नीचे लगाने वाला तकिया, ओढ़ने के लिए चादर और आप क्या पहन कर सो रहे हैं, इन सब की भी बहुत अहम भूमिका है। हमें समय से सोने के अलावा, हमारी नींद भी गहरी हो अच्छी हो, इस पर भी ध्यान देना चाहिए। अभी स्वीडिश ब्रांड होस्टन ने विविड्स नाम का 96 लाख रुपए का गद्दा बनाया है। जिसे वह कहते हैं कि यह सही तरह से नींद पूरी करने के लिए बनाया गया है, जिसके अंदर कोई भी गर्म करने वाली रबर या प्लास्टिक मटेरियल का उपयोग नहीं किया गया है और वह गद्दा केवल ऑर्डर पर बनाते हैं। कंपनी इस गद्दे को विश्व का सबसे बेहतरीन बिस्तर बता रही है।

 

Dreem Hedset
Dreem Hedset

आजकल ऐसी बहुत सी मशीनें आ रही हैं जो आपकी नींद को रिकॉर्ड करती है, जो बैंड आप हाथ में पहन लेते हैं या फिर कई ऐप है जो स्मार्टफोन में उपलब्ध हैं, जिससे पता चलता है कि आप किस प्रकार की नींद ले रहे हैं। लेकिन यह सारे गेजेट्स नींद अच्छी बनाने में सहायक नहीं हैं। अभी सिलिकॉन वैली में एक गैजेट डिजाइन हुआ है जो कि लगभग $400 में प्री ऑर्डर पर उपलब्ध है और उनका दावा है कि ड्रीम हेडसेट लगाने से आप बहुत गहरी नींद में सो पायेंगे। वैसे कई लोगों का मानना है कि सिल्क के तकिए के कवर हैं तो उससे नींद बहुत अच्छी आती है।

यह कहना वाकई बड़ा मुश्किल है कि नींद का गणित क्या है? नींद के कारोबार में हमें किस चीज का ध्यान रखना चाहिए? क्या हमें बराबर थकान होनी चाहिए या फिर हमें हमारे विचारों के ऊपर नियंत्रण करना चाहिए या जो हम पहनकर सोते हैं, ओढ़ते हैं बिछाते हैं, उनमें बदलाव किया जाना चाहिए। यह शायद बेहद निजी और गोपनीय अनुभव होते हैं और सब के लिए अलग अलग अनुभव होते हैं।

इंसान और अविष्कार

इंसान जबसे इस दुनिया में आया है तब से ही वह अपने अविष्कार का लोहा मनवाते आया है, पहले नग्न रहते थे, फूल पत्ती खाते थे, धीरे धीरे अपने को ढंकने के लिये फूल पत्तियों का उपयोग किया और जो जानवर उनको परेशान करते थे, इंसान ने जाना होगा कि जब जानवर जानवर को मारकर खा सकता है और इंसान को भी मारकर खा सकता है तो इंसान ने भी जानवर को मारा होगा और अपने आप को बचाया होगा। स्वाद के लिये जब मांस को पकाया होगा तो उसमें ज्यादा स्वाद आया होगा। उसी तरह से कंदमूल को भी जब आग पर पकाया तो उसका स्वाद बेहतर लगा होगा। तो ये सब पहले अविष्कार थे, धीरे धीरे इंसान ने अपनी जरूरत के लिये और भी चीजों को सोच समझकर बनाया, जैसे चाकू, चूल्हा, पहनावा और जानवरों को आवागमन का साधन बनाकर यात्रा करना।

इंसान और अविष्कार
इंसान और अविष्कार

यह बात हुई पुरातन काल की, तो उस समय इंसान के पास कुछ था ही नहीं तो इंसान ने सबसे पहले अपनी जरूरत की चीजों पर काम करना शुरू किया, जिससे उसे सुविधा हो और कम मेहनत में ज्यादा काम करे, जिन भी नई चीजों को बनाया गया उसे अविष्कार ही कहा जायेगा, क्योंकि वह दुनिया में पहले से उपलब्ध नहीं थी और उस अविष्कार के उपयोग से हर कोई लाभांवित हुआ।

जब अपनी जरूरत की चीजें पा ली गईं तब सबसे पहले बचने वाले समय के उपयोग के लिये खेलों, नाटक, गाने, नृत्य, चित्रकारी आदि का अविष्कार हुआ। इन सब विधाओं के आने से न केवल इंसान की क्षमताओं का पता चला बल्कि इंसान कितना कल्पनाशील हो सकता है, यह भी निखर कर सामने आया। कई चीजों में इंसान को बहादुरी दिखानी होती थी, इससे इंसान के साहस और बहादुरता को और निपुण किया गया।

हर अविष्कार के पीछे कोई न कोई तकलीफ हमेशा ही जुड़ी होती है, जब तक इंसान को तकलीफ नहीं होती है तब तक वह किसी अविष्कार के लिये उद्यत नहीं होता, इंसान में आलस्य की भावना शायद जरूरत के अविष्कारों के बाद से ही ज्यादा जोर देने लगी होगी। पहले शारीरिक श्रम होता था और इसके लिये शारीरिक क्षमताओं पर ध्यान दिया जाता था, शारीरिक क्षमताओं वाला श्रम और खेल दुनिया सामने देख सकती थी तो उससे किसी एक इंसान को बहादुर या साहसी मान लिया जाता था जो कार्य कोई अन्य नहीं कर सकता था या फिर दूसरों के लिये कठिन होता था। अब शारीरिक श्रम की मात्रा कम हो गई है ऐसा कह सकते हैं, क्योंकि अब तो बहुत सी मशीने इंसान ने बना ली हैं।

अब मानसिक श्रम ज्यादा है, जिसमें कोई आपके पास बैठा व्यक्ति भी आपकी क्षमताओं का आंकलन नहीं कर सकता है, क्योंकि इसमें कई बार तो किसी को पता ही नहीं होता है कि कौन ज्यादा मानसिक श्रम कर रहा होता है। अब तो खैर जैसे जैसे हम तकनीक जगत में उन्नत होते जा रहे हैं, वैसे वैसे मानसिक श्रम को भी विभिन्न श्रेणियों में बाँटा जा रहा है।

शारीरिक श्रम के कार्यों में अधिक लोगों का जुड़ाव नहीं होता था, मतलब कि पहले ही आंकलन कर लिया जाता था कि इस कार्य के लिये कितने लोगों को श्रम लगेगा, उसमें भी अगर कोई अपने श्रम को बचाने के लिये अविष्कार कर ले तो उसे बेहतर माना जाता होगा। वैसे ही मानसिक श्रम में अपना समय और अच्छे से कार्य करने के लिये थोड़ा साहस अपने भीतर भरना होता है और हम नित नये अविष्कार कर सकते हैं। किसी को उन अविष्कारों के बारे में बतायें या न बतायें यह हमारे ऊपर निर्भर करता है।

CBSE ने OTBA को बंद करने की घोषणा कर दी है।

OTBA याने कि Open Text Based Assessment जो कि Central Board of Secondary Education (CBSE) ने दो वर्ष पूर्व शुरू किया था। अब इस सत्र से CBSE ने OTBA को बंद करने की घोषणा कर दी है।

OTBA को 9 व 11 वीं के छात्रों के लिये शुरू किया गया था, OTBA के बारे में जानकारी इस प्रकार है – Continue reading CBSE ने OTBA को बंद करने की घोषणा कर दी है।

पॉकीमोन गो Pokémon Go

Pokémon Go
Pokémon Go

पॉकीमोन गो Pokémon Go एक खेल है जो कि मोबाईल फोन पर खेला जाता है, पिछले कुछ समय से उस खेल में मोबाईल गेमिंग की दुनिया में तहलका मचा रखा है। आधिकारिक तौर पर भारत में भी अब गूगल प्ले स्टोर पर पॉकीमोन गो खेल उपलब्ध है। इस खेल को नियान्टिक इनकार्पोरेशन नाम की कंपनी ने बनाया है और इस खेल को ऑफिशियली 6 जुलाई 2016 को रिलीज किया गया था।

पॉकीमोन गो Pokémon Go को एन्ड्रॉयड और एप्पल दोनों पर खेला जा सकता है, यह खेल फ्री है आप इसे डाऊनलोड कर सकते हैं यह 84.4 एम.बी. का है। इस खेल को खेलने के लिये आपको जीपीएस और डाटा कनेक्शन दोनों ही चाहिये होता है और कई बार यह खेल आपका कैमरा भी उपयोग करता है। यह खेल लोकेशन बेस होने के कारण रियल फीलिंग देता है।

इस खेल को खेलने के पहले आपको अपने आपको रजिस्टर करना होता है, आप अपने जीमेल खाते से भी लॉगिन कर सकते हैं। उसके बाद आपको पॉकीमोन स्टॉप पर से बॉल और अंडे लेने होते हैं और जब भी आप पैदल घूमते हैं तो आपको मोबाईल पर पॉकीमोन दिखते हैं तो आपको उन पॉकीमोन को बॉल फेंककर पकड़ना होता है और कई जगहों पर इनके जिम भी होते हैं।

इसमें कई तरह के पॉकीमोन होते हैं जो कि आपको पकड़ने होते हैं और इस खेल में कई लेवल हैं, जो कि आपको पॉइंट्स और पॉकीमोन के आधार पर बढ़ते हैं। जितना आप पैदल चलेंगे उतने ज्यादा पॉइंट्स आपको मिलते जायेंगे और आपके पॉकीमोन शक्तिशाली होते जायेंगे।

Gameplay screenshots of Pokémon Go
Gameplay screenshots of Pokémon Go

तो यह तो आप समझ ही गये होंगे कि पॉकीमोन खेल में चलना बहुत पड़ता है, अगर आप वाहन पर हैं तो एकदम से आपको चेतावनी मिल जायेगी कि आप वाहन चलाते समय पॉकीमोन गो नहीं खेलें, और अपने आस पास का ध्यान रखें। बेहतर है कि जब भी आप इस खेल को खेलें अपने आसपास भी ध्यान रखें और सावधानी पूर्वक खेलें।

विदेश में कई तरह की दुर्घटनायें हो चुकी हैं कि पॉकीमोन गो खेलते खेलते ही हाईवे और सड़कों पर आ गये और भयानक दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं। कई लोग आपस में टकरा चुके हैं और कई लोगों की मौत भी हो चुकी है। ध्यान रखें कि खेल मनोरंजन के लिये बनाया गया है, परंतु मनोरंजन जान से ज्यादा कीमती नहीं है।

कई देश पॉकीमोन गो Pokémon Go को खेलने के लिये अपने नागरिकों के लिये चेतावनी जारी कर चुके हैं और कई शहरों में इस खेल को खेलने के लिये प्रतिबंध की भी बात की गई है। कई सार्वजनिक स्थानों पर पॉकीमोन गो खेलने के प्रतिबंध के बोर्ड लगाये गये हैं।

इस खेल के बारे में वर्ष 2014 में पहली बार सोचा गया था और 2016 में जब पॉकीमोन गो को रिलीज किया गया तो केवल कुछ ही देशों में इस खेल को डाऊनलोड के लिये दिया गया, धीरे धीरे जब कंपनी अपने सर्वरों को स्टेबल करने लगी तो उन्होंने अपना विस्तार बढ़ाना शुरू किया, 7 जुलाई 2016 को जब पॉकीमोन गो को बाजार में उतारा गया तो निन्टेन्डो कंपनी के शेयर 10 प्रतिशत बढ़ गये थे और 14 जुलाई तक तो शेयरों के भाव में 50 प्रतिशत का उछाल देखा गया, क्योंकि यह खेल रातोंरात प्रसिद्ध हो चुका था। इस तरह का कोई और खेल मोबाईल गेमिंग की दुनिया में पहली बार उतारा गया था।

जबरदस्त किताब का नाम है “दिल्ली दरबार”

बहुत दिनों बाद कोई जबरदस्त किताब पढ़ने के मिली और उस जबरदस्त किताब का नाम है “दिल्ली दरबार” (Dilli Darbaar) लेखक हैं सत्य व्यास। जब कोई किताब अमूमन हम पढ़ते हैं तो हमारी घरवाली और बेटेलाल हमारे पास आकर बैठ जाते हैं और हमें उनको सुनानी पड़ती है। हमें पता नहीं कि ऐसा क्यों करते हैं ये लोग, लगता है कि पढ़ने में आलस करते हैं, जब हम कहते हैं कि तुम लोग पढ़ने लिखने के आसली, तो हमें कहते हैं मक्खन लगाते हुए कि नहीं वो आप पढ़ते अच्छा हो। खैर हम पहले दिन 60-61 पन्ने पढ़ के सुना दिये। Continue reading जबरदस्त किताब का नाम है “दिल्ली दरबार”

छोटी और बड़ी सोच के अंतर

जो लोग छोटे पदों पर होते हैं उन्हें ज्यादा क्यों नहीं दिखाई देता और जो लोग बड़े पदों पर होते हैं वे ज्यादा लंबी दूरी का क्यों देख पाते हैं। वो कहते हैं न कि सोच ही इंसान के जीवन का नजरिया बदल देती है। पर यहाँ समस्या सोच की नहीं है समस्या है पहुँच की, आप जितनी ऊँचाई पर होंगे उतना ज्यादा देख पाओगे, और धरातल पर केवल धरातल की चीजें ही दिखाई देंगी। पता नहीं कब सोचते सोचते यह विचार मेरे जहन में कौंध आया और मन ही मन इस बात पर शोध चलता रहा। समझ जब आया जब रोज की तरह ऑफिस जा रहा था। उस समझ में एक और समझ आ गई कि क्यों और किस तरह लोगों से बचकर चलना चाहिये, कैसे लोग आपको जगह देते हैं और कैसे आपकी जगह लेकर आपसे आगे बढ़ जाते हैं और हम केवल देखते ही रह जाते हैं।

हमारा जीवन और जीवन में होने वाली घटनाएँ बिल्कुल सामान्य यातायात की तरह हैं, जहाँ सड़क पर दूर दूर तक अवरोध हैं और हमें उन अवरोधों को एक एक करके पार करना है।

अगर हम पैदल होंगे तो हमें दिखाई देने वाले अवरोध और रास्ते पूर्णत धरातल पर होंगे, पर पैदल चलने वाले के लिये फुटपाथ बना है, और पैदल चलने वाला सड़क पर भी चल सकता है। जब पैदल चलने वाला फुटपाथ पर चलता है तो उसका अनुभव धरातल से जुड़ा होता है, वह आसपास की हर घटना या चीजों को बहुत ही करीब से देख रहा होता है या महसूस कर रहा होता है और यही जमीनी अनुभव कहलाता है, यही हम अगर व्यावसायिक भाषा में कहें तो जो लोग बुनियादी कार्य कर रहे हैं उन्हें पर तरह का अनुभव होता है।

अगर हम साईकिल या मोटर साईकिल पर होंगे तो हम फुटपाथ पर नहीं चल सकते हमें सड़क पर ही चलना होगा, अनावृत होने से कार, जीप, बस और ट्रक का भी सामना करना होगा। यहाँ भी बाईक सवार को उतना ही दिखाई देगा जितना कि वह बाईक से देख सकता है, अब ये निर्भर करता है कि किस रफ्तार की मशीन उसकी बाईक में लगी है, वह कितनी तेजी से दूरी तय कर सकती है, उसे कितने अच्छे से अपना वाहन चलाना आता है और कैसे अपने से बड़े वाहनों के बीच जगह बनाते हुए अपने गंतव्य तक पहुँचता है। बाईक वाले पैदल चलने का दर्द समझ सकते हैं क्योंकि वे भी कभी कभी पैदल चलते हैं या फिर वे अभी अभी बाईक सवार बने हों या फिर भूल भी सकते हैं अगर वे लंबे समय से बाईक सवार हैं।

कार जीप वाले लोग अपने आसपास के वाहनों का ध्यान जरूरी रखेंगे नहीं तो उनके साथ साथ ही दूसरे का भी ज्यादा नुक्सान हो सकता है, उन्हें दूसरे से ज्यादा अपने वाहन की ज्यादा चिंता होती है। जैसे कि लोग खुद के सम्मान की ज्यादा चिंता करते हैं, और दूसरे से थोड़ी दूरी हमेशा बनाये रखते हैं, क्योंकि टकराव हमेशा ही बुरा होता है, टकराव से हमेशा ही बुरा प्रभाव पड़ता है। कार सवार को जमीनी अनुभव से गुजरे हुए समय हो गया होता है और बाईक का अनुभव उसके लिये हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है।

तो कहने का मतलब इतना ही है कि जब तक जमीनी तौर पर जुड़कर काम करते हैं तो आप उन सब चीजों को बहुत अच्छे से समझ सकते हैं और हमेशा ही अपने से बड़े वाहनों या पदों पर बैठे हुए व्यक्ति से या तो डरेंगे या उनकी स्थिति को समझने की कोशिश करेंगे, परंतु जैसे ही जमीनी स्तर से ऊपर उठते हैं वैसे ही इंसान बदल जाता है और वैसे ही उसके देखने की दिशा बदल जाती है।

उम्मीद है बात जो कहना चाह रहा था, पहुँच गई होगी, नहीं तो हम टिप्पणियों में भी बात आगे बढ़ा सकते हैं।

मरने के पहले और मरने के बाद क्या करना चाहते हो ?

मरने के पहले और मरने के बाद क्या करना चाहते हो ?

मरने के पहले –

है न अजीब सवाल, एक ऐसा सवाल जिसका उत्तर शायद किसी के पास भी तैयार नहीं, मृत्यु हमारे जीवन में कोई बीमारी नहीं है, यह भी जीवन की एक विशेषता है। अंग्रेजी में इसे ऐसे कहना ठीक होगा Death is not a Bug its feature of Life. Continue reading मरने के पहले और मरने के बाद क्या करना चाहते हो ?

दौड़ना कैसे शुरू करें। (How to Start Running)

दौड़ना कैसे शुरू करें। (How to Start Running)

दौड़ना तो हर कोई चाहता है परन्तु सभी लोग लाज शर्म के कारण और कोई क्या कहेगा, इन सब बातों की परवाह करने के कारण दौड़ नहीं पाते हैं। दौड़ना चाहते भी हैं तो कुछ न कुछ बात उनको रोक ही देती है, और दौड़ने के पहले हम तेज चलने लगते हैं, कि ऐसे ही स्टेमिना बनेगा और दौड़ पायेंगे। कई बार हम दौड़ इसलिये नहीं पाते क्योंकि हमें झिझक होती है कि हमारे पास दौड़ने वाले जूते नहीं हैं, टीशर्ट और लोअर नहीं है, दौड़ने का समय नहीं है इत्यादि इत्यादि। यकीन मानिये ये सब बहाने हैं, और अगर आप दौड़ना चाहते हैं तो एक उत्साहवर्धन करने वाले व्यक्ति की और आपके अपने आत्मविश्वास, लगन और मेहनत की कमी है।

मैं लगभग पिछले 10 वर्षों से दौड़ने की कोशिश में लगा हुआ था, परन्तु बहुत सारी चीजों के कारण संभव नहीं हो पाता था, जैसे कि मैं थक जाता हूँ, मैं दौड़ नहीं सकता, मेरी साँस फूल जाती है, मेरे पैर दर्द करने लगते हैं, मेरे पैर सही नहीं पड़ते हैं।

दौड़ना बहुत आसान है, दौड़ने का मतलब यह नहीं है कि लगातार दौड़ना है, थक जायें तो थोड़ा पैदल चल लें या अपने दौड़ने की गति सुविधानुसार धीमी कर लें। लगभग सभी यही समझते हैं कि दौड़ना मतलब कि केवल दौड़ते ही रहना, तो यह गलत भ्रांति है। जो लोग 10,21 या 42 किमी भी दौड़ते हैं वे भी जब तक पूरी तरह से प्रेक्टिस न हो लगातार नहीं दौड़ सकते हैं।

दौड़ना कैसे शुरू करें –

सबसे पहले दौड़ने का मन बनायें और अपने आप को दौड़ने के लिये मानसिक तौर पर तैयार करें। सुबह का समय सबसे बेहतर है दौड़ने के लिये, इसलिये कोशिश करिये कि सुबह जल्दी उठिये और पाँच या साढ़े पाँच बजे तक घर से दौड़ने के लिये निकल जाये। सुबह पंछियों के कलरव को ध्यान से सुनें, जीवन का संगीत सुनाई देगा, सुबह की हवा आपको ताजगी का अहसास करवायेगी।

सौ कदम गिनकर चलें और फिर पचास कदम गिनकर ही दौड़ें, पचास कदम दौड़ने के बाद सौ कदम चलें, ऐसे करके सात दिनों तक यही दोहरायें। सात दिनों में आप पायेंगे कि आप पचास कदम आराम से दौड़ने लगे हैं। एक सप्ताह बाद से याने कि आठ से पंद्रह दिन तक सौ कदम पैदल चलें और सौ कदम दौड़ें याने कि केवल 50 कदम दौड़ने में बढ़ायें। और इसी तरह दौड़ने के कदम हर सप्ताह बढ़ाते जायें, बीच में जब भी आपको लगे कि आपको थकान लग रही हैं, आराम चाहिये, दौड़ते नहीं बन रहा है तो पैदल चलने लग जाइये।

सबसे पहले अपने दिमाग से यह निकाल दें कि दौड़ना मतलब कि दौड़ते ही रहना, जब भी आपको लगे कि आपका शरीर अब दौड़ नहीं पा रहा है तो आप पैदल चलना शुरू कर दें। यह भी ध्यान रखें कि दौड़ने में थकान मतलब कि मानसिक थकान होती है, शारीरिक थकान भी होती है, पर मानसिक थकान आपको थका देती है और कहती है कि बस बहुत हुआ, अब नहीं दौड़ो, जबकि शारीरिक थकान में आपको मानस को मजा आता है, आपका शरीर कहेगा कि बस अब मत दौड़ो पर आपको दौड़ के बाद की थकान से आपको मानस को मजा आयेगा।

जब आप दौड़ना शुरू करेंगे तो यह भी सोचेंगे कि बहुत ही कम लोग दौड़ते हैं, पर यह ध्यान रखें कि जो भी कार्य आप करते हैं या करने की शुरूआत करते हैं, उससे संबंधित गतिविधियाँ दिखाई देने लगती हैं, या लोग दिखने लगते हैं। पहले जब मैंने दौड़ना शुरू किया था, तब केवल मैं अकेला ही दौड़ता हुआ दिखाई देता था, पर मैंने देखा धीरे धीरे बहुत से लोग दौड़ रहे हैं। यह हो सकता है कि पहले मुझे ये लोग दिखाई नहीं देते थे, परंतु अब दिखाई देते हैं। पर अब यह देखकर खुशी होती है कि जो लोग पैदल चलते थे, वे हमें देखकर दौड़ने लगे हैं, यह संख्या एकदम से नहीं बढ़ी, धीरे धीरे बढ़ी, अब कम से कम रोज ही 10 लोगों को दौड़ते हुए देखना सुखद लगता है जो कि पहले पैदल चलते थे।

दौड़ने के पहले क्या करें-

दौड़ने के पहले कुछ हल्का फुल्का व्यायाम कर लें, जिससे शरीर गर्म हो जाये। सुबह उठने के बाद एक या दो केला खा लें, पानी पी लें। बहुत ज्यादा पानी भी न पियें। दौड़ने जाने के पहले ही निवृत्त हो लें। थोड़ा सा एनर्जी ड्रिंक पी लें।

दौड़ते समय क्या करें –

दौड़ते हुए बहुत पसीना निकलता है जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है, इसलिये दौड़ते समय पानी घूँट घूँट पीते रहें, जिससे शरीर में पानी की कमी न हो। अगर पाँच किमी से ज्यादा दौड़ रहे हैं तो एनर्जी ड्रिंक जरूर पी लें, पारले जी बिस्किट भी खा सकते हैं।

दौड़ने के बाद क्या करें –

दौड़ने के बाद एकदम से रूके नहीं, बैठे नहीं, थोड़ी दूर पैदल चलते रहें या फिर धीमी गति से दौड़कर शरीर को ठंडा होने दें। कूल डाऊन व्यायाम करें, जिससे आपके शरीर की माँसपेशियों को मजबूती मिलेगी और यह आपके शरीर के लिये बहुत अच्छा भी होगा क्योंकि दौड़ने के बाद आपका शरीर गरम होता है और शरीर का हर अंग अपने अधिकतम उपयोग की स्थिती में होता है। खूब पानी पियें और 10-15 मिनिट में ही नाश्ता कर लें। केला जरूर खा लें, इससे आपकी सोडियम की कमी पूरी हो जायेगी, जो कि दौड़ में पसीने के साथ आपके शरीर से निकल गया होता है। 35-40 मिनिट में ही नहा लें।

थकान कैसे दूर करें –

जब लंबी दूरी की दौड़ पूरी करते हैं तो अच्छी खासी थकान हो जाती है, उसके लिये शरीर को आराम की भी जरूरत होती है। आप पैरों की तेल से मालिश कर लें, पैरों को ठंडे पानी में डुबोकर रखें। पैरों को किसी से दबवा लें। जिस दिन सुबह दौड़कर आयें उस दिन दोपहर को 2-3 घंटों की नींद जरूर लें। जिससे पैरों के टूटे हुए टिश्यू को जुड़ने में मदद मिलेगी।

दौड़ने के लिये हमें कठिन व्यायाम भी करने चाहिये, जिससे हमारे हाथ, पैरों, कंधे और जाँघ की माँसपेशियाँ मजबूत हों और वे हमारे दौड़ने में सहायक हों। जब माँसपेशियाँ मजबूत होंगी तो आप तेजी से दौड़ पायेंगे या धीमे धीमे ज्यादा दूरी तक दौड़ पायेंगे।

अभी दौड़ने पर बहुत चर्चा बाकी है, तो आगे इसी विषय पर लिखने की कोशिश जारी रहेगी। अनुभवी लोग अपने सुझाव दें जिससे हम नये दौड़ने वालों के लिये कोई परेशानी न हो।