Category Archives: अर्थ प्रबंधन

अक्षय तृतिया सोना चाँदी कैसे खरीद रहे हैं, डीमैट में या ईंट ? (Purchasing Gold Silver in which form dMat or Physical on Akshay Tritiya)

    अक्षय तृतिया आ रही है, और यह सोना खरीदने के लिये जानी जाती है, इसी दिन बड़ी संख्या में विवाह भी होते हैं, इस दिन कोई भी शुभ काम बिना मुहुर्त के शूरु किया जा सकता है।

    अक्षय तृतिया आते ही सोने चांदी के व्यापारियों ने अपने विज्ञापन बड़े बड़े होर्डिंग पर लगाने शुरु कर दिये हैं, कोई नकद पर ५% वापसी का लालच दे रहा है तो कोई कार ईनाम में दे रहा है। सोना चांदी खरीदने के लिये  तरह तरह के लुभावने ऑफ़र बाजार में दिये जा रहे हैं। अब क्या खरीदना है वह तो जरूरत पर निर्भर करता है।

    वैसे तो अक्षय तृतिया पर सोना ही खरीदा जाता है, परंतु इस एक वर्ष में चाँदी ने इतनी तेजी दिखाई कि एक वर्ष में १३५ प्रतिशत बढ़ गई और सोना १०-२० प्रतिशत तक ही बढ़ा। जानकारों का कहना है कि अगले वर्ष के लिये सोना खरीदने पर १५-२० प्रतिशत और चाँदी खरीदने पर ३०-४० प्रतिशत तक मुनाफ़ा हो सकता है।

    अगर जरुरत गहने पहनने की है तो कुछ कहने की जरूरत ही नहीं, परंतु अगर गहने की जरूरत नहीं है तो फ़िर इसे डीमैट में खरीदें, इससे गहने बनने की लागत भी बचेगी और बेचने पर सुनार द्वारा काटे जाने वाला प्रतिशत भी बचेगा।

    एन.एस.ई. पर ईसिल्वर और ईगोल्ड दोनों ही मौजूद हैं, ईसिल्वर १०० ग्राम के और ईगोल्ड १ ग्राम के मूल्य वर्ग में उपलब्ध हैं, बस खरीदते और बेचते समय ब्रोकरेज लगेगा।

गोल्ड लोन – चमक असली या नकली

    आजकल टीवी और रेडियो पर कितने ही लुभावने विज्ञापन आते हैं कि जब भी आपको रुपयों की जरुरत हो तो गोल्ड लोन लेना कितना साधारण है और एकदम और कभी भी ले सकते हैं। उतना ही महत्वपूर्ण है कि गोल्ड लोन के पीछे की सच्चाई जानना, क्या वाकई गोल्ड लोन लेना बहुत अच्छा है और सुरक्षित है ?

    “जब घर में पड़ा है सोना तो काहे का रोना” आजकल अक्षय कुमार टीवी और रेडियो के विज्ञापनों में मन्नपुरम फ़ाईनेंस के गोल्ड लोन के लिये कहते हुए नजर आते हैं। जितना साधारण गोल्ड लोन दिखता है कि बस गोल्ड को गिरवी रखा और उसके बदले में आनुपातिक रुप में फ़ाईनेंस कंपनी लोन दे देती है, उतना साधारण भी नहीं है, इसमें बहुत सारे जोखिम और कमियाँ हैं।

    पहले तो गोल्ड लोन केवल सुनारों और साहूकारों की बपौती थी, जो कि लोन का दोगुना तक वसूलते थे। पर अब सरकारी बैंक, निजी बैंक और बहुत सारी निजी फ़ाईनेंस कंपनियाँ गोल्ड दे रही हैं।

    गोल्ड लोन आपके सोने के गहने या शुद्ध सोना जैसे कि ईंट को गिरवी रखकर दिया जाता है। और यह जरुरी नहीं कि जो सोना आप गिरवी रखकर लोन लेने जा रहे हैं वह आपने घोषित किया हो, परंतु अगर सोना ज्यादा मूल्य का हो और लोन भी तो टैक्स विभाग बैंकों और फ़ाईनेंस कंपनियों से जानकारी लेकर आपके पीछे पड़ सकता है।

    गोल्ड लोन एक ऐसा उत्पाद है जो कि बहुत ही जल्दी आपको मिल जाता है। जल्दी से लोन मिलने का एकमात्र कारण है कि लोन आपको सोने को गिरवी रखकर मिलता है। लोन की रकम सोने की मात्रा और शुद्धता के ऊपर निर्धारित किया जाता है। पर यहाँ पर सबसे बड़ी बात यह है कि गोल्ड लोन देने वाली संस्थाएँ इस बात का ध्यान नहीं रखती हैं कि ऋणी ऋण चुका भी पायेगा या नहीं ?

    सोने का मूल्यांकन के पैमाने सभी कंपनियों के अलग अलग होते हैं, अगर आपका सोना हालमार्क है तो आपके सोने की कीमत अच्छी आंकी जायेगी और ज्यादा लोन मिल पायेगा। परंतु अगर सोना हालमार्क नहीं है तो आपको बहुत सतर्क रहने की जरुरत है क्योंकि आपके ज्यादा कीमत वाले सोने का मूल्यांकन बहुत ही कम किया जा सकता है और आपका सोना जो कि कीमत में बहुत ज्यादा है वह संस्था गिरवी रख लेगी। गोल्ड लोन केवल सोने के गहने के बदले ही मिल सकता है। अगर गहने में कोई महँगा पत्थर जड़ा है तो उसकी कीमत नहीं आंकी जाती है, और भार में पत्थर का भार कम कर दिया जाता है। मूल्यांकन केवल सोने का ही किया जाता है।

    लोन में कितनी रकम मिल सकती है यह सोने की मात्रा और शुद्धता पर निर्भर करता है, जो कि गिरवी रखा जाना है। जो कि  सोने के मूल्यांकन का ६० प्रतिशत से १०० प्रतिशत तक हो सकता है। यह सब तो ठीक है, परंतु यहाँ सोने के मूल्य के अनुपात जिस पर लोन दिया जा रहा है उसके लिये बाजार का अपना एक स्वाभाविक जोखिम है। जैसा कि बाजार में पिछले कुछ दिनों में देखने को मिला है कि सोना कभी बहुत ज्यादा ऊपर और फ़िर कम भाव हो जाते हैं। सोने के भाव में कमी होने पर ऋणकर्ता और ऋणदाता दोनों जोखिम में आ जाते हैं। बाजार में आजकल यही सोचा जाता है कि सोने का भाव केवल ऊपर ही जायेगा जो कि बाजार और ऐसी संस्थाओं के लिये बहुत ही बड़ा जोखिम है।

    गोल्ड लोन की अवधि साधारणतया: १ माह से लेकर २ वर्ष तक की होती है, और अगर लोन की अवधि बढ़ानी है तो बढ़ा भी सकते हैं, परंत उसके लिये ये संस्थाएँ कुछ अतिरिक्त शुल्क लेती हैं।

    गोल्ड लोन पर ब्याज दर ११ प्रतिशत से २८ प्रतिशत प्रतिवर्ष तक हैं। ब्याज दर गोल्ड लोन की रकम पर निर्भर करती है, जितना सोना आपने गिरवी रखा है और उसके बदले में मिलने वाली रकम अगर ज्यादा होगी तो ज्यादा ब्याज और कम रकम पर कम ब्याज। साथ ही यह निर्भर करता है गोल्ड लोन के अनुपात पर अगर अनुपात ज्यादा है तो ब्याज ज्यादा होगा और कम अनुपात होगा तो लगभग १२ प्रतिशत ब्याज होगा। ज्यादा समय के लिये ज्यादा ब्याज देय होता है और कम समय के लिये कम ब्याज देय होता है।

   ऋण देने वाली संस्थाओं और बैंकों को सुनिश्चित करना होता है कि सोना शुद्ध है और नकली नहीं है, नहीं तो उनके लिये तो पूरा ऋण ही घाटा है।

  ब्याज दर के अलावा अतिरिक्त शुल्क क्या हैं यह भी पहले पता लगा लेना चाहिये जैसे कि प्रोसेसिंग चार्जेस, समय के पहले ऋण अदा करने पर शुल्क जो कि गोल्ड लोन के ०.५ से १ प्रतिशत तक कुछ भी हो सकता है। फ़िर अगर लोन को रिनिवल करवाना है तो लोन की अवधिक के अनुसार उसका भी अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है। और अगर इसी दौरान ऋणकर्ता को कुछ हो जाये तो ऋणदाता उसके लिये बीमा करवाते हैं, जिससे लोन की रकम भरी जा सके और सोना ऋणकर्ता के परिवार को लौटा दिये जाते हैं, बीमा का शुल्क भी अतिरिक्त होता है।

    गोल्ड लोन अधिकतर ईएमआई आधारित नहीं होता है। लोन की अवधि में कभी भी भुगतान किया जा सकता है। जैसे कि अगर एक वर्ष के लिये लोन लिया है तो आप एक वर्ष में  उस लोन का कभी भी भुगतान कर सकते हैं।

     गोल्ड लोन में चूककर्ता बहुत ही कम होते हैं, ३० प्रतिशत ॠणकर्ता तो उसी माह में लोन चुकता कर देते हैं और बाजार में २ प्रतिशत से भी कम ॠणकर्ता गोल्ड लोन में चूककर्ता होते हैं। अगर चूक होती भी है तो ऋणदाता गिरवी में रखा गया सोना या गहना बेचकर अपनी रकम वसूल कर लेते हैं।  पर गिरवी  रखे गये सोने की नीलामी की भी लंबी प्रक्रिया है पहले चूककर्ता को रजिस्टर्ड पत्र भेजा जाता है, साथ ही उनसे बात करके मामले को सुलझाने की कोशिश की जाती है, उन्हें कहा जाता है कि कम से कम ब्याज तो चुकायें तो फ़िर उन्हें और ॠण चुकाने के लिये समय देने की कवायद शुरु की जाती है।

    गोल्ड लोन सस्ता लोन नहीं है, और गोल्ड लोन तभी लेना चाहिये जब आप निश्चित हों कि निश्चित समय के बाद आप रकम वापिस भरकर गोल्ड लोन चुका सकते हैं। हाँ और किसी लोन से यह लोन लेना बहुत ही सरल है और लोन जल्दी भी मिल जाता है। और अगर समय पर लोन नहीं चुकाया जाता है तो आप अपने महँगे सोने के गहनों को कम रकम के लोन के चक्कर में गँवा सकते हैं।

आम व्यक्ति के लिये निवेश के कुछ नुस्खे (Some tips for Investment for All)

    आज सबसे बड़ी समस्या है कि कैसे बेहतर तरीके से अपने धन का निवेश करें, और मेहनत से कमाये गये धन का उपयोग करें। धन अर्जन तो सभी करते हैं, परंतु उस धन को अपने भविष्य के लिये निवेशित करना भी अपने आप में चुनौती है। साथ ही अपने लक्ष्य को कैसे निर्धारित करें, परिवार को आर्थिक रुप से कैसे सुरक्षित रखें, यह सब भी बहुत जरूरी है।

    धन को निवेश करने के कुछ नुस्खे जो दिखने में छोटे हैं परंतु भविष्य की योजनाओं के लिये उतने ही कारागार भी हैं –

१. ८० सी आयकर अधिनियम के तहत पूरी बचत करें।

२. ८० डी आयकर अधिनियम के तहत बचत करें (मेडिक्लेम अगर उपयोक्ता ने ना दिया हो या फ़िर कम राशि का हो)

३. २०,००० रुपयों का इन्फ़्रास्ट्रक्चर बांड निवेश जो कि पिछले वित्तीय वर्ष से ही शुरु हुआ है।

४. अपनी बचत को अपनी जोखिम के अनुसार निवेश करें, अगर ज्यादा जोखिम ले सकते हैं तो शेयर बाजार में और कम जोखिम के लिये म्यूचुअल फ़ंड एस.आई.पी. में निवेश करें, बिल्कुल जोखिम न लेना चाहें तो फ़िर बैंक में सावधि जमा का उपयोग कर सकते हैं, साथ ही एम.आई.पी. डेब्ट फ़ंड भी बहुत सुरक्षित है, बस यहाँ ब्याज दर निश्चित नहीं होती।

५. ८० सी के तहत आयकर बचाने के लिये परंपरागत बीमा में निवेश करने से बचें, टर्म इन्श्योरेन्स लें (अपनी सालाना आय का २० गुना तक ले सकते हैं), परिवार को आर्थिक सुरक्षा दें, और बाकी का बचा हुआ धन ई.एल.एस.एस. म्यूचयल फ़ंड एस.आई.पी. के जरिये निवेश करें।

६. जब भी एस.आई.पी. म्यूचयल फ़ंड शुरु करें चाहें वह ई.एल.एस.एस. हो या किसी ओर स्कीम का जिस पर आयकर की छूट नहीं मिलती हो, आपकी निवेश समय सीमा कम से कम १० वर्ष के लिये होना चाहिये, तभी अच्छे रिटर्न की उम्मीद करें।

७. व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा लें, जो कि आपको और आपके परिवार को अतिरिक्त आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है।

८. आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने के लिये अपने मासिक खर्च का कम से कम तीन गुना धन ऐसे निवेश करें जहाँ से आप एकदम से आहरण कर पायें, जैसे कि सावधि जमा जो कि बचत बैंक खातों से लिंक होती है, जिससे किसी भी आकस्मिक स्थिती में आप धन को ए.टी.एम. से आहरित कर सकते हैं।

९. अपने मासिक खर्च के बराबर का धन ही केवल अपने बचत खाते में रखें बाकी धन सावधि जमा में रखें या फ़िर कहीं और निवेश करें, जैसे कि म्यूचुअल फ़ंड, शेयर बाजार इत्यादि।

१०. क्रेडिट कार्ड का उपयोग करें, सबसे बड़ा फ़ायदा कि आपको महीने भर की खरीदारी का भुगतान एकमुश्त करना होता है, और जब क्रेडिट कार्ड का बिल आता है तब आप देख सकते हैं कि कौन सी गैर जरूरी चीज में आप खर्च कर रहे हैं। परंतु क्रेडिट कार्ड का उपयोग करते समय ध्यान रखें कि अभी भले ही आपको भुगतान न करना पड़ रहा हो, परंतु एक दिन तो आपको इसका भुगतान करना ही होगा, इसलिये संयम से खरीदारी करें।

११. भविष्य के आर्थिक लक्ष्य निर्धारित करें जैसे कि बच्चों की पढ़ाई, विवाह, कार, घर इत्यादि। और आर्थिक लक्ष्यों के अनुसार अपने निवेश की शुरुआत करें।

१२. निवेश करना जितनी जल्दी शुरु करेंगे उतनी जल्दी आप अपने भविष्य के आर्थिक लक्ष्यों समयबद्ध तरीके से प्राप्त कर पायेंगे।

बचत में हमेशा व्यक्ति को अनुशासित होना चाहिये, तभी आप बचत कर पायेंगे।

बीमा आर्थिक सुरक्षा के लिये होता है ना कि निवेश के लिये, अपनी सोच बदलें और व्यक्तिगत वित्त विषयों के बारे में पढ़कर अपना धन बेहतर तरीके से निवेशित करें।

शंकर शर्मा की बजट चर्चा और बाजार पर रुख… (Shankar Sharma on Budget and Market)

    ऐसे ही समाचारों के चैनल बदल कर देख रहे थे कि किसी एक चैनल पर शंकर शर्मा दिखे जो कि न्यूज ऐंकर बात कर रहे थे बस अपना रिमोट वहीं रुक गया । यह बजट के पहले का विशेष साक्षात्कार था। शंकर शर्मा जो कि फ़र्स्ट ग्लोबल के प्रमुख हैं और हम वर्षों से उनके बहुत बड़े पंखे हैं। बाजार के गुरु हैं, जो कहते हैं हमने हमेशा होते हुए देखा है। और भारत सरकार के खराब अनुभव और सेबी के भी उन्हें हैं, उनके अनुभव पढ़ने के लिये तहलका.कॉम पर जायें। जब बंगारु लक्ष्मण वाला मुद्दा तहलका कांड के रुप में उछला था, तब तहलका.कॉम में थोड़ी सी हिस्सेदारी शंकर शर्मा की भी थी, और उन्हें जो परिणाम इसके लिये भुगतना पड़े थे, वह सरकार की कार्यनीति पर सवाल हैं। पर हाँ एक बात तो है कि सरकार चाहे तो कुछ भी कर सकती है फ़िर भले ही तरीका संवैधानिक हो या असंवैधानिक ।

    शंकर शर्मा ने बाजार की नब्ज पकड़ते हुए कहा कि बाजार निफ़्टी ४५०० का स्तर छू सकता है और आज के स्तर से १५% तक का करेक्शन अभी भी वे बाजार में देखते हैं।

शंकर शर्मा ने कहा कि आज के स्तर पर सोने को बेचना चाहिये, और प्राफ़िट बुक करना चाहिये।

    एग्री कमोडिटिज पर भी शंकर शर्मा बुलिश हैं और खासकर शक्कर पर, जिसमें उन्होंने श्री रेनुका शुगर का नाम दिया है।

    घोटालों पर शंकर शर्मा ने मीडिया को आड़े हाथों लिया कि हम खुद ही अपने राष्ट्र की छबि धूमिल कर रहे हैं, ठीक है कि मीडिया स्टिंग ऑपरेशन करे और फ़िर जाँच एजेंसियों को काम करने दें परंतु मीडिया जाँच एजेंसीयों का काम न करें। उन्होंने इसके लिये अमेरिका का उदाहरण दिया कि कैसे घोटालों से वहाँ निपटा जाता है।

    २ जी घोटाले पर भी उन्होंने सभी सरकारों को आड़े हाथों लिया, केवल तत्कालीन केन्द्र सरकार ही नहीं उसके पहले वाली केन्द्र सरकार के मंत्री (प्रमोद महाजन) भी उतने ही जिम्मेदार हैं। और २ जी घोटाले पर साफ़ साफ़ कहा कि यह तो व्यापार है, और मेरी नजर में तो यह घोटाला नहीं है, और अगर है तो जाँच एजेंसियाँ काम कर ही रही हैं।

    पर ऐसे घोटालों से विदेशी निवेशकों का विश्वास देश में निवेश करने से डगमगाने लगता है, तो घोटालों पर होने वाली कार्यप्रणाली पर ही प्रश्नचिह्न है। सरकार को अपनी कार्यप्रणाली पर भी ध्यान देना चाहिये।

    टेलीकॉम सेक्टर पर शंकर शर्मा बेरिश हैं और दूर रहने की सलाह है। वैसे वे हमेशा ही टेलीकॉम और इन्फ़्रास्ट्रक्चर और कमोडिटिज वाले शेयरों से दूर रहने की सलाह देते हैं। इस बार जब एग्रो कमोडिटिज पर वे बुलिश दिखाई दिये तो बहुत आश्चर्य हुआ।

    जब शंकर शर्मा से पूछा गया कि बाजार की आज की परिस्थितियों को देखते हुए कहाँ निवेश करना चाहिये, जबकि आज अंतर्राष्ट्रीय जगत में राजनीति में तेज हलचल हो रही है। शंकर शर्मा ने कहा कि आज बैंकों के सावधि जमा के जो ब्याज दर हैं वे बहुत ही अच्छे हैं और जितना बैंक ब्याज दर (१०.५०%) आज दे रहे हैं, निश्चित तौर पर इतना रिटर्न बाजार तो नहीं दे सकते हैं।

बाजार में निवेशकों को रुकना चाहिये, अभी बाजार में जाने का सहीं समय नहीं है।

आओ पैसा कमायें “शेयर बाजार में निवेश” – भाग १

    जब आप निवेश करते हैं, तो उसे सरल ही रखें। वही करें जो बिल्कुल सरल और स्पष्ट है, बफ़ेट सलाह देते हैं – जटिल प्रश्नों के लिये जटिल उत्तर देने की कोशिश मत करिये।

    अधिकतर लोगों की यह धारणा है कि शेयर बाजार में निवेश करना बहुत जटिल, रहस्यों से भरा और जोखिम भरा होता है इसलिये इसे इसके पेशेवरों को ही करना चाहिये। यह हम सबकी मानसिकता और एक आम धारणा है कि आम आदमी सफ़ल निवेशक नहीं बन सकता क्योंकि निवेश में सफ़लता के लिये उन्नत व्यावसायिक डिग्री, कठिन गणितीय सूत्रों में महारत, जटिल कम्पयूटर प्रोग्राम का आपके पास होना जो कि शेयर बाजार का हाल बतायें और इतना सारा समय कि आप शेयर बाजार, चार्ट, मात्रा, आर्थिक रूझान आदि पर ध्यान दे पायें।

    वारेन बफ़ेट ने बता दिया कि यह सब मात्र मिथक है।

    बफ़ेट ने शेयर बाजार में सफ़लता के लिये जो राह खोजी वह बहुत जटिल नहीं है। कोई भी व्यक्ति जो सामान्य बुद्धि रखता हो वह सफ़ल निवेशक बनने की काबिलियत रखता है, किसी भी पेशेवर की सहायता के बिना, क्योंकि निवेश के सिद्धांत समझने के लिये बहुत ही आसान हैं।

    बफ़ेट केवल ऐसे व्यापारों के शेयरों में निवेश करते हैं, जो आसानी से समझा जा सके, मजबूत, ईमानदार और टिकाऊ व्यापार हो, जिसकी सफ़लता की व्याख्या बहुत सरल हो, और वे कभी भी ऐसे व्यापार में निवेश नहीं करते हैं जिसे वे नहीं समझते हैं।

    बफ़ेट के निवेश सिद्धांतों का सार और अच्छी बात केवल सरलता ही है।  इसके लिये आपको जटिल गणित, वित्तीय पृष्ठभूमि, अर्थव्यवस्था के बारे में जानकारी और शेयर बाजार भविष्य में कैसे होंगे, इनकी जानकारी होना आवश्यक नहीं है। यह सामान्य बुद्धि से आदर्श, धीरज और साधारण मूल्यों पर आधारित है, जो कि कोई भी निवेशक आसानी से समझ कर अपना सकता है। जबकि बफ़ेट की धारणा है कि निवेशक गणितीय सूत्रों, शार्टटर्म बाजार के भविष्य और चाल, बाजार और वोल्यूम पर आधारित चार्ट्स को देख कर अपने को ही मुश्किल में डालते हैं।

    वस्तुत:  बफ़ेट कहते हैं कि जटिलता आपको सफ़लता से दूर करती है। खुद को निवेश के नये सिद्धांतो में उलझाने की कोशिश न करें, जैसे कि ऑप्शन्स प्राईसिंग या बीटा। बहुत सारे मामलों में आप नयी तकनीकी में खुद को बेहतर स्थिती में नहीं पायेंगे। बफ़ेट ने अपने गुरु से एक बात सीखी कि “आपको असाधारण नतीजों के लिये असाधारण साहस की जरुरत नहीं होती है”।

    हमेशा खुद को साधारण रखें। लक्ष्य कैसे चुनें –  अच्छी कंपनी के शेयर खरीदें, जो कि ईमानदार और काबिल लोगों द्वारा चलायी जा रही हो। आप अपने शेयर के लिये कम भुगतान कीजिये, भविष्य में उसकी अर्जन क्षमता को पहचानें। फ़िर उस शेयर को लंबे समय तक अपने पास रखें और बाजार को आपके द्वारा किये गये निर्णय पर मुहर लगाने दीजिये।

    बफ़ेट के निवेश सिद्धांत में सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत “सरलता” है। जो बफ़ेट की अविश्वसनीय उपलब्धियों के बारे में बताती है। इसी से पता चलता है कि कैसे बफ़ेट ने वाशिंगटन पोस्ट शेयर के निवेश में १.६ करोड़ से १ अरब बनाये, कैसे कोका-कोला में १ अरब के निवेश से ८ अरब बनाये, और उन्होंने ४.५ करोड़ के गीको बीमा कंपनी के शेयर खरीदे और आज उसकी कीमत १ अरब से ज्यादा है।

जिस व्यापार को आप समझते नहीं है, उसमें कभी भी निवेश न करें।

बफ़ेट ने अपने साधारण नियम्र और सिद्धांतों से बार्कशायर हाथवे को १०० करोड़ से ज्यादा की कंपनी बना दिया। जब भी शेयर बाजार में निवेश करना होता, तो वे अपना धन ऐसे व्यापार में लगाते जो कि समझना आसान हो, ठोस और मजबूत व्यापार, स्थायी और नीतिपरक प्रबंधन हो। वे बहुत सारे शेयर लॉट में खरीद लेते हैं, जब बाजार में लोग सस्ते दामों में बेच रहे होते हैं। संक्षेप में कहें तो यही उनकी सफ़लता का राज है।

    शेयर का भविष्य बताने वाले सॉफ़्टवेयरों के बारे में भूल जायें जो कि शेयर की कीमतों का इतिहास, अस्थिरता और बाजार की चाल बताते हैं। बफ़ेट कम्प्यूटर का उपयोग करते हैं, परंतु ब्रिज खेलने के लिये न कि शेयर का उतार चढ़ाव देखने के लिये। आपके निवेश का लक्ष्य भी बफ़ेट के जैसा ही होना चाहिये, उन्हीं व्यापार में निवेश करना चाहिये जो कि आपको समझने में आसान हो, जिस व्यापार को आप समझते हैं, और आपको लगता हो कि भविष्य में यह कंपनी बहुत अच्छा करेगी, तो मुनसिब समय का इंतजार करें और यथोचित भाव आने पर खरीदें।

हमेशा अपने निवेश पर फ़ैसलों के लिये तीन सिद्धांतों पर चलें –

१. हमेशा निवेश सरल रखें – कभी भी अपने निवेश को जटिल न बनायें, और हमेशा अपनी जानकारी के अनुसार खरीदे गये व्यापार को ही खरीदें और उस पर अड़िग रहें। जिस निवेश में जटिलता हो, उसमें निवेश करने से बचें।

२. अपने निवेश के फ़ैसले खुद लें – अपने निवेश के सलाहकार खुद बनें। उन ब्रोकर्स और बेचने वाले लोगों से बचें जो कि किसी एक शेयर या म्यूच्यल फ़ंड को तरजीह देकर खरीदने के लिये प्रेरित करते हैं, क्योंकि उस पर उन्हें मोटी कमाई होती है। स्पष्टत: ये लोग दिल से आपको अच्छे निवेश नहीं दिलवाते हैं।

३. उसे पढ़ो जिसने बफ़ेट को पढ़ाया – वह आदमी जिसका जबरदस्त प्रभाव बफ़ेट पर है उनके पिता के अतिरिक्त, वह हैं हार्वर्ड के बेंजामिन ग्राहम, जिन्हें नीति निवेश का पितामह भी कहा जाता है। जिन्होंने वर्षों पहले बफ़ेट को पढ़ाया कि निवेश में सफ़लता सरलता में है जटिलता में नहीं। और वाकई ग्राहम को पढ़ना बहुत अच्छा है।

बफ़ेट के साधारण कूटनीतियों को मत भूलिये जो कि उन्हें असाधारण नतीजों की ओर ले गया।

बफ़ेट के दस निवेश सिद्धांत (10 Basic Fundamentals of Buffett)

    हम में से अधिकतर लोगों के लिये शेयर बाजार भूलभुलैया ही है। ७००० से भी ज्यादा शेयरों में से कौन से शेयर में निवेश करें जो कि फ़ायदा दें… और कैसे शेयर बाजार में निवेश करके पैसा कमाया जाये ? कौन सा शेयर खरीदें ? किसकी राय मानें ? कौन सी कूटनीति का अनुसरण करें ?

    अगर आप ऐसे निवेशक हैं जो कि शेयर ब्रोकर, सेन्सेक्स क्रेश, म्यूचयल फ़ंड्स, डे ट्रेडिंग, बाजार की टाइमिंग, मरे हुए शॆयर (Penny Stocks), ऑप्शन्स, हाईटेक, तेजी से बड़्ने वाली कंपनियों के कारण अपना धन गँवा चुके हैं, तो आपको वारेन बफ़ेट के निवेश सिद्धांत और पद्धति के बारे में जरुर जानना चाहिये।

    बफ़ेट ने निवेश में अपने सिद्धांतो पर अड़िग रहकर बीज से विशाल पेड़ बनाया। आप भी एक अच्छे निवेशक बन सकते हैं और लंबी अवधि में शेयर बाजार से धन कमा सकते हैं, लेकिन केवल तभी जब आप उनके मूल सिद्धांतों और उनके अनुशासन, धैर्य और मानसिक अवस्था को अपनायें।

    वारेन बफ़ेट को एक सेंट भी अपने परिवार से नहीं मिली। आज केवल अपने खुद के निवेश के दम पर वे अरबों डालरों के मालिक हैं। पर कभी भी किसी भी बिजनेस स्कूल में बफ़ेट के बारे में, उनके निवेश सिद्धांतो के बारे में न ही पढ़ाया गया और न ही इस बारे में बताया गया है। या यह भी कह सकते हैं कि महानतम निवेशक को शैक्षणिक विश्व ने उपेक्षित किया है।

    मुझे उम्मीद है कि आप बफ़ेट के निवेश के उदाहरणों की उपेक्षा नहीं करेंगे। मुझे लगता है कि आप लोग उनके सिद्धातों और पद्धति के बारे में सोचेंगे और अपनाने का प्रयत्न करेंगे। खासकर कि जब आपका निवेश में पुराना अनुभव अच्छा नहीं रहा हो।

    बफ़ेट के निवेश सिद्धांत में सबसे महत्वपूर्ण है कि निवेश में लंबे समय तक बने रहें। इन सिद्धांतो में हैं –

  1. जटिलता से ज्यादा सरलता को प्राथमिकता देना।
  2. धैर्य
  3. उचित मानसिक अवस्था
  4. स्वतंत्र सोच
  5. बड़ी घटनाएँ जो व्याकुल करती हैं उन पर ध्यान न देना।
  6. गैर विविधीकरण की सहजज्ञान युक्त रणनीति
  7. निष्क्रियता, ज्यादा सक्रिय नहीं
  8. शेयरों को खरीदना, और फ़िर जिंदगीभर के लिये अपने पास रखना
  9. व्यापार के परिणाम और मूल्य पर ध्यान केंद्रित करना, ना कि शॆयर के दाम पर
  10. आक्रामक अवसरवाद, हमेशा ऐसे अवसरों का फ़ायदा उठाना जो कि शेयर बाजार के मूर्खों द्वारा प्रदान की जाती हैं।

    इन सिद्धांतो के साथ ही कुछ और भी सिद्धांत हैं जो कि  आपको एक अच्छा निवेशक बना सकते हैं। आखिर अच्छे परिणाम की उपज अच्छे निवेश सिद्धांत ही होते हैं।

    बफ़ेट कहते हैं – एक अच्छे व्यापार को खोजो जिसका प्रबंधन भी अच्छा हो, और उस कंपनी के शेयर उचित दाम पर खरीदें, फ़िर उसको जीवन भर के लिये अपने पास रखें।

क्या ५० वर्ष की उम्र के बाद जीवन बीमा करवाना चाहिये..? (Life Insurance required after 50 …?)

क्या ५० वर्ष की उम्र के बाद जीवन बीमा करवाना चाहिये..?

यह एक आम प्रश्न नहीं है, अक्सर प्रश्न होता है “५० वर्ष के बाद मुझे कौन सा जीवन बीमा करवाना चाहिये”, पर उसके पहले हमें यह समझना होगा कि क्या ५० वर्ष की उम्र के बाद जीवन बीमा करवाना चाहिये और अगर करवाना चाहिये तो कितना करवाना चाहिये ?

इस प्रश्न का उत्तर समझने के लिये पहले जीवन बीमा क्यों करवाना चाहिये यह समझना होगा।

जीवन बीमा लिया जाता है आश्रितों की आर्थिक सुरक्षा के लिये, जिससे अगर बीमित व्यक्ति जो कि घर चलाने वाला भी होता है वह परिवार का साथ बीम में ही छोड़ जाये, साधारण शब्दों में उसकी मृत्यु हो जाये, तो आश्रित परिवार उसके बीमित धन से अपनी आगामी जिंदगी उसी प्रकार के जीवन स्तर पर जी सके।

अब एक उदाहरण लेते हैं, रमेश की उम्र है २१ वर्ष और अभी अभी उसकी अच्छी नौकरी लगी है, अब आयकर में बचत के लिये वह जीवनबीमा लेना चाहता है, उसने मुझसे पूछा कि कौन सा जीवनबीमा लेना चाहिये, तो सबसे पहला मेरा प्रश्न था कि तुम पर कितने आश्रित लोग हैं, वह ठगा सा मेरा मुँह देखता रहा, और बोला कि “कोई नहीं”।

फ़िर मैंने कहा तुम्हें जीवन बीमा लेने की जरुरत ही क्या है, जीवन बीमा केवल और केवल उनके लिये होता है जिनके ऊपर परिवार आश्रित होता है।

तो उसका अगला प्रश्न था  “मुझे बीमा कब लेना चाहिये ?”

मेरा जबाब था “जब शादी हो जाये तब, जब तुम्हारे बच्चे हो जायें तो उस बीमे का वापिस से मूल्यांकन करके जीवन बीमित राशि और ज्यादा करनी चाहिये”

जीवन बीमा में आपकी बीमा राशि कितनी हो यह उम्र के पड़ाव पर निर्भर करता है, बीमित राशि ज्यादा होना चाहिये जवान होने पर और जैसे जैसे आपके जीवन में स्थिरता आती जाती है, आप अपने वित्तीय लक्ष्य पूरे करते जाते हैं, आपको अपने बीमित राशि को कम करते जाना चाहिये।

किरण की उम्र २५ वर्ष है और अभी नई नई शादी हुई है, उसकी नववधु के लिये अब किरण जिम्मेदार हो गया है, उसको आर्थिक सुरक्षा के लिये अब तुरंत ही जीवन बीमा लेना चाहिये, और इतनी राशि का लेना चाहिये कि अगर आज उसकी मृत्यु भी हो जाये तो उसकी पत्नी उस बीमित धन से अपना पूर्ण जीवन निकाल सके।

जब बच्चे हो जायें तो जीवन बीमा का वापिस से मूल्यांकन करना चाहिये। और फ़िर जैसे जैसे आप जीवन में अपने वित्तीय लक्ष्य प्राप्त करते जायें वैसे वैसे बीमित राशि कम करते जायें। बीमित राशि २५ वर्ष के नौजवान की और ५० वर्ष के व्यक्ति की एक समान नहीं हो सकती। क्योंकि २५ वर्ष की उम्र में व्यक्ति अपना जीवन शुरु करता है, उसके पास कोई बचत नहीं होती और यहाँ वह अपना वित्तीय लक्ष्य निर्धारित करता है। जबकि ५० वर्ष की उम्र में व्यक्ति अपने कई वित्तीय लक्ष्य प्राप्त कर चुका होता है, जैसे कि कार, घर और अच्छी बचत अपनी सेवानिवृत्ति के लिये, ५० वर्ष की उम्र के बाद व्यक्ति बहुत ही अच्छी वित्तीय अवस्था में होता है, उसका जितना वित्तीय लक्ष्य पूर्ण नहीं हुआ है और जितनी जिम्मेदारी बाकी है, केवल उतना ही जीवन बीमा करवाना चाहिये। और यह हर व्यक्ति का अलग अलग हो सकता है।

आईडीएफ़सी बॉन्ड के लिये फ़्री में डीमैट खाता १० वर्षों तक (Free Demat Account for 10 Years for IDFC Bonds)

    पिछले लेख आईडीएफ़सी दीर्घकालीन इंफ़्रास्ट्रक्चर बॉन्ड २०१० (IDFC Long Term Infrastructure Bond 2010) के बाद अब यह बॉन्ड बाजार में आ गया है।

    असित सी. मेहता के नितिन कुमावत ने बताया कि आईडीएफ़सी बॉन्ड के साथ उनकी कंपनी डीमैट अकाऊँट फ़्री में उपलब्ध करवा रही है, और अगले दस वर्षों तक कोई ए.एम.सी. शुल्क भी देय नहीं होंगे, बशर्ते उस डीमैट अकाऊँट में और कोई ट्रांजेक्शन न किया गया हो। वैसे यह डीमैट अकाऊँट साधारण ही होगा, एक बार खुलने के बाद आप इसमें अपने शेयर, ईटीएफ़ और म्यूच्यल फ़ंड के ट्रांजेक्शन भी कर सकते हैं, पर इस स्थिती में हर वर्ष लगने वाले ए.एम.सी. (AMC – Annual Maintenance Charges) देय होंगे, जो कि ब्रोंकिंग कंपनियों के नियमानुसार होंगे।

    पर अगर केवल आई.डी.एफ़.सी. बॉन्ड ही लेते हैं तो इस डीमैट अकाऊँट पर कोई शुल्क दस वर्षों के लिये देय नहीं होगा।

    ज्यादा जानकारी के लिये मुंबई के लोग असित सी. मेहता की ब्रांच में इन फ़ोन नंबरों (022 – 21730153, 21730540,2173041,2173042) पर बात करके यह बांड भी ले सकते हैं और डीमैट अकाऊँट भी खुलवा सकते हैं।

एनईएफ़टी क्या है, क्या आप इसका उपयोग करते हैं..(What is NEFT.. are you using NEFT for Fund Transfer ?)

क्या आप एनईएफ़टी (NEFT) का उपयोग करते हैं या अभी भी चेक से ही भुगतान करते हैं। किसी को भी अगर धन अंतरण करना हो तो आप क्या अपनाते हैं, चेक या एनईएफ़टी (NEFT) ?

चेक अंग्रेजों के जमाने की बात हो गई, जो कि वाकई अंग्रेजों के द्वारा ..

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आईडीएफ़सी दीर्घकालीन इंफ़्रास्ट्रक्चर बॉन्ड २०१० (IDFC Long Term Infrastructure Bond 2010)

इस बार के बजट भाषण में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आयकर में लाभ की घोषणा की थी, धारा 80CCF के तहत २०,००० रुपयों तक का निवेश विशेष बुनियादी सुविधाओं वाले बॉन्ड में किया जा सकेगा।

इसकी आकर्षक बात यह है कि अभी तक की जाने वाली १,००,००० रुपयों की बचत के बाद ये बचत की जा सकती है।

कुछ समय पहले IFCI ने अपने बुनियादी सुविधाओं वाले बॉन्ड बाजार में उतारे थे। अब IDFC ने भी अपने बॉन्ड बाजार में लाने की घोषणा कर दी है। बॉन्ड बाजार में इस गुरुवार ३० सितम्बर २०१० से खुल रहे हैं जो कि सोमवार १८ अक्टूबर २०१० तक लिये जा सकेंगे। निवेशक को यह बॉन्ड खरीदने के लिये डीमैट एकाऊँट और पान (PAN)  होना जरुरी है।

आईडीएफ़सी इस सार्वजनिक निर्गम से लगभग ३,४०० करोड़ रुपये बाजार में बॉन्ड बेचेगी। इन बॉन्डों की परिपक्वता अवधि १० वर्ष की होगी और लॉक इन अवधि ५ वर्ष की होगी। निवेश करने के लिये चार विकल्प हैं –

१.  पहले वर्ग में ८% ब्याज प्रतिवर्ष, जिसे कि हर वर्ष निवेशक को दे दिया जायेगा।

२. दूसरे वर्ग में ८% ब्याज प्रतिवर्ष तो दिया जायेगा, पर ब्याज वापिस से निवेश हो जायेगा, याने कि चक्रवृद्धि ब्याज।

३. तीसरे वर्ग में ७.५% ब्याज प्रतिवर्ष देय  होगा जो कि बॉय बैक के विकल्प के साथ उपलब्ध होगा।

४. चौथे वर्ग में ७.५% ब्याज प्रतिवर्ष तो होगा पर ब्याज वापिस से निवेश हो जायेगा और यह बॉय बैक के विकल्प के साथ उपलब्ध होगा।

वास्तविक ब्याज की दर कितनी होगी ?

यह निवेशक के आयकर कटौती पर निर्भर करता है अगर निवेशक ३०% वाले आयकर खंड में आता है तो निवेशक को लगभग १५.७४% का ब्याज का लाभ मिलेगा।

३०.९% के आयकर दायरे में आने वाले निवेशक की आयकर बचत होगी ६,१८० रुपये, तो उसका वास्तविक निवेश हुआ १३,८२० रुपये (२०,००० रुपये – ६,२१८० रुपये)। और अगर पहला वर्ग ८% ब्याज वाला चुना गया है तो हर वर्ष १६०० रुपये ब्याज के मिलेंगे।

बॉन्ड के संबंध में:

  • 80 CCF धारा के तहत किसी भी इंफ़्रास्ट्रक्चर कंपनी के द्वारा पहला बांड सार्वजनिक निर्गम के द्वारा।
  • क्रेडिट रेटिंग एजेंसी आईसीआरए(ICRA) ने इस बॉन्ड को स्थिरता के  दृष्टिकोण से LAAA के तहत  से  अंकित  किया है रेटेड बांड के रूप में यह निर्गम प्रस्ताव, सुरक्षा के लिहाज से सबसे सुरक्षित श्रेणी में अंकित किया है।
  • इन बांडों  में केवल भारतीय निवासीयों और एचयूएफ  निवेश कर सकते हैं।
  • बॉन्ड को आकर्षक कूपन रेट ७.५% से ८% प्रतिवर्ष कर के लाभ के साथ २०,००० रुपये तक धारा 80 CCF के अंतर्गत जारी किया जा रहा है।
  • यहाँ निवेशक को चार निवेश विकल्प दिये गये हैं जो कि निवेशक अपनी जरुरत के अनुसार चुन सकता है।
  • किसी भी प्रकार के टीडीएस की कटौती नहीं की जाएगी।
  • बांड बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध किया जाएगा और 5 वर्ष तक लॉक इन रहेगा, इस अवधि के बाद बॉन्ड का ट्रेड किया जा सकता है।
  • निवेशक बॉन्ड को लॉक इन अवधि के बाद इस पर ऋण ले सकते हैं।
  • धारा 80 CCF के तहत निवेशक २०,००० रुपये बचा सकता है, जिसके ऊपने निवेशक को कर की छूट मिलेगी, जो कि धारा 80C, 80CCC एवं 80CCD (80CCE) के तहत मिलने वाली १,००,००० रुपये के छूट के अतिरिक्त होगी।

आईडीएफ़सी बांड