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टीपीए कौन सा हो, यह जानना भी जरुरी है मेडिक्लेम लेते समय, बीमा नियामक की लगाम भी जरुरी है टीपीए पर (Choose right TPA for Claim Settelment)
रमेश ने मेडिक्लेम ले लिया और खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित महसूस करने लगा, टीपीए क्या होता है, कौन सा टीपीए होना चाहिये, यह सब न उनको उनके बीमा एजेन्ट ने बताया न उन्होंने जानने की कोशिश की, उन्हें लगा व्यक्तिगत मेडिक्लेम से अच्छा फ़ैमिली फ़्लोटर मेडिक्लेम पॉलिसी अच्छी है।
रमेश का सोचना बिल्कुल सही है कि फ़ैमिली फ़्लोटर मेडिक्लेम पॉलिसी अच्छी है, क्योंकि उस बीमा राशि का उपयोग परिवार का कोई भी व्यक्ति कर सकता है। और फ़ैमिली फ़्लोटर में कैशलेस स्कीम ली जिसके लिये उन्होंने कुछ ज्यादा प्रीमियम भी दिया, कि जब भी आपात स्थिती आयेगी तो कम से कम उन्हें अपनी जेब से भुगतान नहीं करना होगा।
एक दिन रमेश को कुछ समस्या हुई, और उन्हें आपात स्थिती मॆं अस्पताल में भर्ती करना पड़ा, रमेश ने अपने टीपीए को २४ घंटे के अंदर ही खबर कर दी परंतु उनके टीपीए ने कैशलेस का फ़ायदा देने से इंकार कर दिया, वह भी बिना कारण बताये। रमेश को कहा गया कि आप अभी अपने खर्चे पर इलाज करवाईये और बाद में क्लेम करिये, तब भुगतान कर दिया जायेगा। रमेश विकट परिस्थिती में फ़ँस चुका था, क्योंकि ये टीपीए वाला झंझट उसे पता ही नहीं था, और उसके पास उतना नगद भी नहीं था, पर जैसे तैसे करके उसने इलाज के लिये नकद जुटा लिया और इलाज करवा लिया।
पॉलिसी के नियमानुसार उन्होंने निर्धारित समय में सारे कागजात उन्होंने टीपीए को भेज दिये और अपने क्लेम के भुगतान का इंतजार करने लगे, पर उनकी राह शायद उतनी आसान नहीं थी। टीपीए से क्लेम का भुगतान १५ से ४५ दिन में हो जाना चाहिये जो कि आई.आर.डी.ए. का नियम है, परंतु बहुत ही कम क्लेम में ऐसा होता है। साधारणतया: टीपीए द्वारा बहुत परेशान किया जाता है या फ़िर क्लेम का भूगतान देने से मना कर दिया जाता है या फ़िर क्लेम भुगतान में बहुत सारी चीजों का भुगतान रोक दिया जाता है।
रमेश को कागजात जमा करवाये लगभग डेढ़ महीना गुजर गया परंतु क्लेम का भुगतान नहीं आया और न ही टीपीए की तरफ़ से कोई जानकारी का पत्र कि उन्हें कोई जानकारी चाहिये या देरी होने की वजह । रमेश ने अपने एजेन्ट से बात की तो उसने भी हाथ खड़े कर दिये, क्योंकि एजेन्ट के हाथ में भी कुछ नहीं था, क्लेम तो टीपीए को पास करना था। रमेश ने टीपीए के फ़ोन नंबर हासिल किये और संपर्क साधा, तो पता चला कि फ़ाईल अभी डॉक्टर के पास से ही नहीं आयी है, उन्हें एक सप्ताह का इंतजार करने को कहा गया, और बताया गया कि अगर उन्हें किसी कागजात की जरुरत होगी तो बता दिया जायेगा।
टी.पी.ए. से ४५ दिन बाद रमेश को यह जबाब मिला है, उनकी मुश्किलों का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है, परंतु उन्होंने इस विषय में बीमा कंपनी के प्रबंधक से बात की, तो प्रबंधक ने उन्हें बताया कि व्यक्तिगत मेडिक्लेम में इनहाऊस टीपीए होता है तो क्लेम का भुगतान १५-३० दिन में ही हो जाता है और चूँकि यह लोकल होता है तो बीमाधारक बीमा कंपनी में जाकर पूछताछ कर सकता है और प्रगति की जानकारी ले सकता है।
आईआरडीए ने बहुत सारी कंपनियों को टीपीए का लाईसेंस दिये हैं और आप अपना बीमा करवाने से पहले यह जान लें कि कौन सी टीपीए अच्छा है जो कि क्लेम का भुगतान समय पर करता है, तो आप अपना टीपीए खुद भी चुन सकते हैं, पर अच्छा यही होगा कि बीमा कंपनी और बीमा प्लॉन चुनते समय देख लें अगर इनहाऊस टीपीए है तो बहुत ही अच्छा है, इनहाऊस टीपीए वाली कुछ कंपनियाँ आईसीआईसीआई लोम्बार्ड, स्टार हेल्थकेयर इत्यादि। जिससे आप मेडिक्लेम से सुरक्षित भी रहें और क्लेम का भुगतान भी समय पर मिले।
अब अगली बार जब भी मेडिक्लेम का नवीनीकरण करवायें तब इस संदर्भ में पूरी जानकारी प्राप्त करें और उचित बीमा कंपनी से उचित बीमा लें, कौन सा बीमा लेना है यह सबकी अपनी अपनी परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
वैसे सरकारी बीमा कंपनियाँ टीपीए का विरोध कर रही हैं, क्योंकि बीमा कंपनियाँ केवल बीमा जारी करने तक की प्रक्रिया में ही शामिल होती हैं, कब क्लेम किया गया और कब उसका भुगतान कर दिया गया यह उनको पता बाद में चलता है जब टीपीए से क्लेम भुगतान का पत्र बीमा कंपनियों के पास पहुँचता है। ये टीपीए कंपनियाँ, इसके पीछे बहुत बड़ा खेल चला रही हैं, और बीमा कंपनियों को करोड़ों का चूना भी लगा रही हैं, मेडिक्लेम बीमा के क्षेत्र में बीमा कंपनियाँ इसी कारण से ३००% की हानि में हैं, बीमा नियामकों को इस तरफ़ ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है, नहीं तो जल्दी ही बीमा कंपनियाँ मेडिक्लेम करने से कतराने लगेंगी।
व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना (यूनाईटेड इंडिया इंश्योरेन्स) का विश्लेषण (Personal Accidental policies review of United India)
पिछले लेख व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, क्या आपके साथ दुर्घटना नहीं हो सकती [Personal Accident Insurance Policy]
के बाद विचार आया कि कुछ व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजनाओं का विश्लेषण भी दिया जाये तो पाठकों को व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना के बारे में ज्यादा जानकारी मिलेगी और वे अच्छी योजना का चयन भी कर पायेंगे।
यूनाईटेड इंडिया इंशयोरन्स कंपनी की व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना ( PA Policy)
किसी व्यक्ति को शारीरिक हानि के लिये आकस्मित घातक परिस्थितियों के लिये (दुर्घटना और चोट के कारण) सुरक्षा प्रदान करते हैं।
१२ वर्ष से ७० वर्ष तक की उम्र तक सुरक्षा प्रदान करते हैं, ७० वर्ष की उम्र में स्वास्थ्य परीक्षण होता है, वैसे ८० वर्ष तक भी सुरक्षा प्रदान करते हैं।
बीमा अवधि के दौरान घातक दुर्घटना होने पर इस प्रकार निर्देश हैं –
| मृत्यु | बीमित राशि का १००% |
| स्थायी संपूर्ण विकलांगता | बीमित राशि का १००% |
| दो अंगों की हानि / दोनों आँखें या कोई एक अंग और एक आँख | बीमित राशि का १००% |
| किसी एक अंग / एक आँख की हानि | बीमित राशि का ५०% |
| स्थायी आंशिक विकलांगता | निर्भर करता है % बीमित राशि और योजना के अनुसार |
| अस्थायी संपूर्ण विकलांगता | १% हर सप्ताह बीमित राशि का, अधिकतम ३००० रुपयों तक, अधिकतम १०० सप्ताह के लिये |
अतिरिक्त बीमा शुल्क देकर, बीमित दावा राशि का २५% तक का चिकित्सा व्यय, या १०% बीमित राशि तक योजना में सम्मिलित की जा सकती है।
बीमित व्यक्ति के लिये योजना में अधिकतम दो आश्रित बच्चों के लिये शिक्षा राशि का भी प्रबंध है। दुर्घटना के बाद शव को दुर्घटना के स्थान से लाने के लिये किया गया खर्च भी सम्मिलित होता है (योजना के नियम और शर्तों के अनुसार)
योजना के नवीनीकरण पर ५% बीमित राशि का आकर्षक संचयी लाभ दिया जाता है, बीमित राशि हर वर्ष ५% अधिक हो जाती है हर वर्ष अगर बीमा दावा न किया गया हो, (अधिकतम बीमित राशि के ५०% तक), बिना अतिरिक्त बीमा शुल्क दिये।
योजना में क्या सुरक्षा सम्मिलित नहीं है –
क्षतिपूर्ति राशि विकलांगता के लिये एक ही अवधि में एक ख्ंड से ज्यादा का फ़ायदा नहीं दिया जाता है, जो कि अधिकतम बीमित राशि हो सकती है।
कोई ओर भुगतान, बीमित राशि का ५०%/१००% बीमा दावा करने के बाद ।
कोई ओर दावा, समान अवधि में जो कि बीमित राशि से जयादा होता हो।
आत्महत्या, अपराध में मृत्यु, शराब/ड्रग्स से प्रभावित दुर्घटना मृत्यु / चोट।
गर्भावस्था से संबंधित कोई भी दावा।
युद्ध और परमाणु खतरों से।
बीमा शुल्क राशि
दस लाख रुपये के दुर्घटना बीमा के लिये लगभग १००० रुपये सालाना है।
व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, क्या आपके साथ दुर्घटना नहीं हो सकती [Personal Accident Insurance Policy]
शर्मा साहब ३४ वर्ष के हैं, हँसता खेलता परिवार है उनका, प्यारी सी पत्नी और प्यारे प्यारे दो बच्चे हैं। भविष्य की सारी योजनाओं के लिये शर्मा साहब ने बराबर वित्तीय प्रबंधन कर रखा है। और सभी चीजों का ध्यान रखा हुआ था, बीमा से लेकर बाकी सभी सही वित्तीय उत्पादों में उन्होंने निवेश किया हुआ है। शर्मा साहब पेशेवर सॉफ़्टवेयर इंजीनियर हैं, और बाकी लोगों की तरह अपने ऑफ़िस रोज आते जाते हैं। वे मुंबई के बाहरी उपनगर में रहते हैं, जहाँ परिवार के लिये सभी तरह की सुविधाएँ उपलब्ध हैं। पर रोज अपने ऑफ़िस जाना उनके लिये सबसे बड़ा सरदर्द है। उनको रोज लोकल ट्रेन से अपने ऑफ़िस आना जाना होता, और भीड़ इतनी होती कि कई बार तो लोकल ट्रेन के पायदान पर खड़े होकर यात्रा करना होती। एक दिन रोज की यात्रा के दौरान शर्मा साहब चलती लोकल ट्रेन से गिर पड़े, अब शर्मा साहब शारीरिक और मानसिक रुप से स्वस्थ्य नहीं थे, उन्होंने अपने दोनों पैर इस दुर्घटना में गँवा दिये, और अपने ऑफ़िस जाने की स्थिती में भी नहीं थे, स्वास्थ्य के खर्चे इतने बढ़ गये कि वे होमलोन में डिफ़ाल्टर हो गये। और जितना पैसा उन्होंने बचाया था वह बहुत तेजी से खर्च होने लगा।
शर्मा साहब का जीवन बहुत ही बुरी स्थिती में पहुँच गया। तो आपको क्या लगता है ? कि इस स्थिती से निपटने के लिये वे क्या कर सकते थे ? खैर अगर वे मात्र ५०० से १००० रुपये की कोई दुर्घटना बीमा योजना अपने लिये ले लेते तो इस तरह से उन्हें वित्तीय प्रबंधन में असफ़लता नहीं होती।
शर्मा साहब की कहानी केवल एक उनकी ही नहीं है, हम लोग रोज यात्राएँ करते हैं इतने जोखिम हमेशा आसपास रहते हैं, पर यह सोचते हैं कि हमारे साथ दुर्घटनाएँ हो ही नहीं सकती हैं। असल में जिंदगी जीने का एक तरीका वह है। अगर कुछ हो जाये……. तो उसके लिये एक अच्छी रणनीति बनायें अपने लिये व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना लें।
जोखिम क्यों लेना ?
थोड़ा सा ऐसे समझें कि अपने परिवार के सुरक्षा के लिये आपने मृत्यु के जोखिम से बचाने के लिये जीवन बीमा लिया है। यह समान तर्क अपने लिये दें तो, कि अगर आपकी आय बंद हो जाये, आपके साथ घटी भयानक दुर्घटना के कारण अगर आप अपने कार्य पर जाने में सक्षम नहीं हैं तो ….? आपकी आय बंद हो जायेगी। इस तरह के स्थिती से बचने के लिये व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना लिया जाना चाहिये। अगर आप अस्थायी या स्थायी विकलांग होने की स्थिती में अपने वित्तीय जोखिम को हस्तांतरित कर सकते हैं, तो आप क्यों नहीं करते ?
किन लोगों को इसकी जरुरत है ?
व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना से आप किसी अनचाही दुर्घटना से अस्थायी या स्थायी विकलांग होने की स्थिती में हो सकने वाले वित्तीय जोखिम से सुरक्षित रह सकते हैं। तो हर उस व्यक्ति को यह दुर्घटना बीमा योजना लेना चाहिये जो अपने आपको और अपने परिवार को ऐसी किसी भी स्थिती से होने वाले वित्तीय जोखिम से बचाना चाहता है। और अगर केवल आप ही अपने परिवार में कमाने वाले हैं तब तो यह बहुत ही जरुरी है। व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना १८ से ७० वर्ष के किसी भी व्यक्ति द्वारा ली जा सकती है।
क्या सुरक्षा मिलती है ?
व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना से आपको सुरक्षा मिलती है, नॉमिनी को दुर्घटना से होने वाली आकस्मिक मौत की स्थिती में बीमा धन, संपूर्ण या आंशिक विकलांगता या अस्थायी विकलांगता की स्थिती में कुछ निश्चित बीमा धन की सुरक्षा मिलती है। बीमित राशि का भुगतान आंशिक हो सकता है या पूर्ण भी हो सकता है यह दुर्घटना की गंभीरता पर निर्भर करता है।
उदाहरण के लिये – यूनाईटेड इंडिया इंश्योरेन्स की व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना में आकस्मिक मृत्यु या स्थायी पूर्ण अशक्तता या कोई दो अंग (या दोनों आँखें) न रहने की स्थिती में बीमित राशि का १००% भुगतान होगा। पर आंशिक विकलांगता की स्थिती में याने कि किसी भी एक अंग या एक आँख के नुक्सान होने पर बीमित राशी के ५०% का भुगतान किया जाता है। अस्थायी पूर्ण अशक्तता की स्थिती में बीमा कंपनी बीमित रकम का १% का भुगतान हर सप्ताह करती है जो कि अधिकतम ३००० रुपये और अधिकतम ५२ सप्ताह के लिये दिया जाता है। स्थायी आंशिक विकलांगता के मामले में भुगतान बीमित रकम का कुछ भाग होगा जो कि योजना के नियम और शर्तों के मुताबिक होगा। प्रीमियम की राशि आपके बीमित रकम की राशी पर निर्भर करती है। अतिरिक्त प्रीमियम भुगतान करने पर स्वास्थ्य व्यय के जोखिम से भी सुरक्षा पा सकते हैं। लगभग सभी कंपनियों की योजनाओं के मानक समान ही होते हैं पर सभी कंपनियों की बीमा शर्तें अलग हो सकती हैं। हालांकि व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना एक करार जैसा होता है, आप अगर किसी अंग का ज्यादा रकम का बीमा करवाना चाहते हैं तो करवा सकते हैं। योजना में शर्तें बिल्कुल साफ़ शब्दों में लिखी होती हैं।
फ़िर भी आपको योजना के नियम और शर्तें पूरी तरह से पढ़ लेना चाहिये कि उसमें किस अंग की कितनी बीमा धन से सुरक्षा है।
स्वास्थय, जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा में क्या संबंध है ?
आपमें से कुछ लोगों ने स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा, अपने वाहन का बीमा तो ले रखा है और आप सोचते हैं कि मुझे व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना की कोई जरुरत नहीं हैं। आपके बीमा एजेन्ट ने जीवन बीमा बेचते समय आपको बताया था कि इसमें दुर्घटना बीमा से भी सुरक्षा है, बीमा एजेन्ट की कही गई बातों पर आँख बंद करके विश्वास मत कीजिये और जीवन बीमा योजना के दस्तावेजों को ध्यान से पढ़िये। शायद ही कोई जीवन बीमा योजना दुर्घटना के जोखिम से सुरक्षा देती है, आमतौर पर ऐसा नहीं होता है और जोखिम से पर्याप्त सुरक्षा भी नहीं होती है। तो इसलिये यह मेरी सलाह है कि अलग से व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना जरुर लें जो कि आपके जीवन में होने वाली आकस्मिक स्थिती में वित्तीय जोखिम से सुरक्षा प्रदान करे। भारत में दुर्घटना बीमा योजना के लिये प्रीमियम की राशि पूरे विश्व में सबसे कम है। जो कि १५०-१८० रुपये प्रति लाख रुपये के लिये होती है। अब सोच क्या रहे हैं जल्दी से व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना लीजिये और अपने को और अपने परिवार को सुरक्षित कीजिये या इंतजार कर रहे हैं किसी आकस्मिक दुर्घटना का ….।
सुरक्षित निवेश मासिक आय योजना (म्यूचयल फ़ंड) के संग (Secured Investment through MIPs [MF])
मासिक आय योजना (म्यूचयल फ़ंड) मुख्यत: डेब्ट उत्पादों पर आधारित योजना है, जिसमें आमतौर पर कोष का ८०% तक डेब्ट उत्पादों में और बाकी का इक्विटी उत्पादों में निवेश किया जाता है।
मासिक आय योजना (म्यूचयल फ़ंड) का मुख्य उद्देश्य निवेशकों को नियमित रुप से लाभांश के रुप में भुगतान करना होता है, हालांकि यह अनिवार्य नहीं होता है, लाभांश का वितरण फ़ंड हाउस के विवेक और वितरण योग्य धन होने पर निर्भर करता है।
निवेश के उद्देश्य –
मासिक आय योजना (म्यूचयल फ़ंड) का मुख्य उद्देश्य निवेशकों को नियमित रुप से लाभांश प्रदान करना है जो कि ज्यादातर डेब्ट उत्पादों और एक छोटा हिस्सा इक्विटी में निवेश किया जाता है। ये मुख्यत: यील्ड ब्याज दर के डेब्ट उत्पादों (कमर्शियल पेपर्स, सर्टिफ़िकेट ऑफ़ डिपोजिट, गोवरमेंट सिक्योरिटिज और ट्रेजरी बिल्स) में निवेश करते हैं। डेब्ट उत्पाद पोर्टफ़ोलियो को स्थिरता और निरंतर वापसी की सुनिश्चितता प्रदान करते हैं, जबकि इक्विटी उत्पाद ज्यादा वापसी के लिये सहायक होता है। मासिक आय योजना (म्यूचयल फ़ंड) बाजार से जुड़े रहते हैं (केवल उतने हिस्से के लिये जितने कि इक्विटी में निवेश है)।
जोखिम –
पोर्टफ़ोलियो में डेब्ट उत्पादों के होने से, मासिक आय योजना (म्यूचयल फ़ंड) अर्थव्यवस्था में होने वाले ब्याज दर परिवर्तन प्रभावी होते हैं (क्योंकि अधिकतर उत्पाद डेब्ट उत्पाद होते हैं) ।
जब अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों में कमी आती है तब मासिक आय योजना (म्यूचयल फ़ंड) की एन.ए.वी. बड़ जाती है (बॉन्ड की कीमतों में वृद्धि के कारण)।
और अगर ब्याज दर बढ़ती है तो मासिक आय योजना (म्यूचयल फ़ंड) की एन.ए.वी. कम हो जाती है, इस समय तब अच्छी वापसी के लिये इस उत्पाद को इक्विटी पर निर्भर रहना पड़ता है।
पोर्टफ़ोलियो में इक्विटी उत्पाद शामिल से : चूँकि मासिक आय योजना (म्यूचयल फ़ंड) बाजार से जुड़े हैं (जो कि आमतौर पर १५-२०% तक रहता है) । ये बैलेन्सड फ़ंड से कम जोखिम वाले होते हैं (इसमें ६०-७०% तक इक्विटी में निवेश होता है) लेकिन शुद्ध डेब्ट फ़ंडों से थोड़ा जोखिम वाले होते हैं (शुद्ध डेब्ट फ़ंड केवल डेब्ट प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं)।
कोई भी सही सही भविष्यवाणी तो कर नहीं सकता कि कब शेयर बाजार और डेब्ट बाजार अपने उतार चढ़ाव पर होंगे। यह निवेशको के लिये पूँजी कटाव और लाभांश का भुगतान न होने का जोखिम पैदा करता है। अधिकांश मासिक आय योजना (म्यूचयल फ़ंड) के फ़ंड मैनेजर अतीत में कुख्यात रह चुके हैं, डेब्ट निवेश में से ३०% तक का निवेश इक्विटी बाजार में निवेश करने के बाद और बाजार का पूरा मजा लेते हैं जब बाजार अपने पूरे जलवे पर होता है, जिससे इस शेयर बाजार के चढ़ाव का फ़ायदा निवेशक को होता है और एन.ए.वी. काफ़ी बड़ जाता है, पर इसके उलट अगर उतार हो एन.ए.वी. कम हो जाता है यानि के निवेशक को नुकसान।
निवेशक को इक्विटी पोर्टफ़ोलियो का मूल्यांकन कर लेना चाहिये और जोखिम स्वीकार्य होने के बाद ही निवेश करना चाहिये।
रिटर्न – मासिक आय योजना (म्यूचयल फ़ंड) सीमित अस्थिरता के साथ स्थिर रिटर्न देता है, पिछले तीन वर्षों में, अधिकतर मासिक आय योजना (म्यूचयल फ़ंड) ने १२-१३% का औसत रिटर्न दिया है।
अवधि – मासिक आय योजना (म्यूचयल फ़ंड) को कम से कम ३-५ वर्ष के लिये निवेश करना चाहिये।
कर कितना लगेगा – मासिक आय योजना (म्यूचयल फ़ंड) डेब्ट फ़ंड है, पर लाभांश पर लाभांश वितरण कर (१२.८६७%) है।
अगर एक वर्ष के पहले फ़ंड की यूनिट बेचते हैं और उस पर अगर कुछ लाभ है तो उस पर शार्ट टर्म कैपिटल गैन कर लागू होता है, शुद्ध लाभ को आपकी करयोग्य आय में जोड़ दिया जायेगा और जो भी व्यक्तिगत आयकर की स्लैब लागू होगी। और अगर एक वर्ष के बाद बेचते हैं, और लाभ होता है तो लांग टर्म कैपिटल गैन कर लगेगा जो कि १०% होता है (इंडेक्सेशन के बिना) और २०% इंडेक्सेशन लाभ के साथ, जो भी कम हो।
निवेश किसे करना चाहिये –
ज्यादा जोखिम न उठाने वाले निवेशक जो कि बैंक सावधि जमा से ज्यादा अच्छे और सुरक्षित रिटर्न चाहते हैं, उनके लिये मासिक आय योजना (म्यूचयल फ़ंड) अच्छा विकल्प है। हालांकि मासिक रिटर्न की गारंटी नहीं है, स्थिर आय के लिये बैंक के जैसे नहीं है।
| स्कीम नाम | एन.ए.वी. | १ वर्ष के रिटर्न | ५ वर्ष के रिटर्न |
| HDFC MIP Long Term | 21.997 | 14.6 | 13 |
| Reliance MIP | 20.947 | 14.6 | 12.9 |
| Canara Robeco | 28.43 | 10.4 | 13.7 |
NAV as on 22 July 2010
मासिक आय योजना (म्यूचयल फ़ंड) के विकल्प –
मासिक आय योजना (म्यूचयल फ़ंड) के विकल्प हैं बैंक की सावधि जमा योजना, पोस्ट ऑफ़िस एम.आई.पी., फ़िक्स्ड मैच्योरिटी प्लान्स।
निष्कर्ष –
मासिक आय योजना (म्यूचयल फ़ंड) आपको हर माह निश्चित राशि नहीं मिलती है। हर मासिक लाभांश ब्याज दर के उतार चढ़ाव और बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर रहता है। लेकिन मासिक आय योजना (म्यूचयल फ़ंड) “नियमित आय उत्पाद” की श्रेणी में सबसे ज्यादा रिटर्न देने के कारण सबसे अच्छॆ हैं और कर में भी।
नियमित आय के लिए म्युचुअल फंड की एमआइपी पर या किसी एक ही उत्पाद पर ही निर्भर नहीं होना चाहिये । अपने निवेशों को हमेशा अलग अलग जगह करना चाहिये जिससे हानि कम से कम हो।
स्विप या सिप में क्या सारा पैसा एक ही फ़ंड में लगाना उचित है ? (Investment should be in 1 fund ?? in SIP or SWP)
पिछली पोस्ट [स्विप (SWP) क्या है, और ये कैसे सेवानिवृत्ति के बाद के लिये अच्छा उत्पाद है ? (What is Systematic Withdraw Plan)] पर डॉ. महेश सिन्हा जी ने सवाल किया था, क्या सारा पैसा एक ही फ़ंड में लगाना उचित है।
मेरा जबाब है नहीं, अगर सारा पैसा एक ही फ़ंड में लगा दिया और वो अपना प्रदर्शन नहीं कर पाया फ़िर आपके भविष्य का क्या ?
आपका पैसा कम से कम ५ म्यूचुयल फ़ंडों में निवेशित होना चाहिये, जिसमें लार्जकैप डाईवर्सिफ़ाईड फ़ंड, बैलेन्स्ड फ़ंड,स्माल एवं मिडकैप फ़ंड सबमें आपका निवेश होना चाहिये। हाँ आज से ५ वर्ष पहले तक ज्यादा तरीके के म्यूच्यल फ़ंड उपलब्ध नहीं थे, परंतु अब तो जैसा म्यूच्यल फ़ंड चाहिये वैसा मिलता है।
हम पिछले १ वर्ष के रिटर्न की गणना करें स्विप की तो पायेंगे – निवेश तिथि ९ जुलाई २००९ निवेशित रकम १,००,००० रुपये, जिसमें आप अपनी निवेशित रकम में से १२,००० रुपये १२ महीने में निकाल भी चुके हैं, और आज मूल रकम ८८ हजार रुपये है।
कुछ लार्जकैप म्यूचयल फ़ंड –
| फ़ंड का नाम | वर्तमान रकम | वापसी |
| रिलायंस ग्रोथ – ग्रोथ | 1,33,234.41 | 51.4% |
| रिलायंस विजन – ग्रोथ | 1,26,728.40 | 44.1% |
| एच.डी.एफ़.सी. टॉप २०० | 1,25,214.84 | 42.29% |
| डी.एस.पी. ब्लेकरॉक टॉप १०० | 1,18,900.61 | 35.11% |
कुछ बैलेन्स्ड म्यूचयल फ़ंड –
| फ़ंड का नाम | वर्तमान रकम | वापसी |
| डी.एस.पी. ब्लेकरॉक बेलेन्स्ड फ़ंड – ग्रोथ | 1,21,010.33 | 37.51% |
| बड़ौदा पायोनियर बैलेन्स्ड | 1,06,911.12 | 21.49% |
| केनरा रोबेको बेलेन्स | 1,20,934.93 | 37.43% |
| एच.डी.एफ़.सी.बेलेन्स्ड फ़ंड | 1,30,369.77 | 48.15% |
कुछ स्मॉल मिडकैप फ़ंड –
| फ़ंड का नाम | वर्तमान रकम | वापसी |
| डी.एस.पी. ब्लेकरॉक | 1,58,195.10 | 79.77% |
| एच.एस.बी.सी. मिडकैप | 1,34,062.97 | 52.34% |
| आई.डी.एफ़.सी. | 1,40,779.75% | 59.98% |
| डी.एस.पी. ब्लेकरॉक माइक्रो कैप फ़ंड | 1,77,672.85 | 101.9% |
जो म्यूचयल फ़ंड आज अच्छा प्रदर्शन कर रहा है इसका मतलब यह नहीं है कि भविष्य में भी अच्छा प्रदर्शन करेगा, इसके लिये बाजार का ज्ञान होना भी बहुत जरुरी है।
म्यूच्यल फ़ंड हमेशा अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह करके ही खरीदें, आप ऊपर दी गई तालिका में देख सकते हैं, एक गलत निर्णय और आपके निवेश का सत्यानाश, बहुत सारे फ़ंड ऐसे भी हैं जो प्रदर्शन नहीं कर पाये, इससे बेहतर है कि अपने वित्तीय सलाहकार को शुल्क देकर सलाह लेना, तो आप अपने निवेश का बेहतर प्रदर्शन पा सकते हैं।
स्विप (SWP) क्या है, और ये कैसे सेवानिवृत्ति के बाद के लिये अच्छा उत्पाद है ? (What is Systematic Withdraw Plan)
स्विप (SWP – Systematic Withdraw Plan) ऐसी योजना है जो कि निवेशक अपने म्यूचयल फ़ंड में से कुछ पैसा नियमित अंतराल से निवेश में से निकालने देती है। निकाला गया पैसा किसी ओर योजना में निवेश किया जा सकता है या फ़िर कुछ ओर खर्चों के लिये इसका उपयोग कर सकते हैं। साधारणतया: स्विप को सेवानिवृत्ति के बाद होने वाले नियमित खर्चों को पूरा करने के लिये अच्छे से उपयोग किया जा सकता है।
स्विप से नियमित अंतराल के बाद कुछ नियत राशि या फ़िर variable राशि निकाल सकते हैं। निकासी स्विप से मासिक, तिमाही, छ:माही या वार्षिक कर सकते हैं। इस योजना में समय अंतराल निवेशक को अपनी जरुरत और प्रतिबद्धताओं के अनुसार चुनना चाहिये।
साधारणतया: स्विप में कई लाभ हैं, यह आपके निवेश से एक नियमित समय अंतराल के बाद आपको आपकी चाही गई रकम तो देते ही हैं, साथ में आपकी मूल निवेश की गई रकम सीधे बाजार में निवेश रहती है, तो निवेश पर वापसी बहुत अच्छी होने की उम्मीद होती है, आपका मूल निवेश मुद्रास्फ़ीति से भी दो-दो हाथ करता रहता है और स्विप आपका भविष्य सुरक्षित करने में मददगार साबित होता है।
स्विप में आप शेयर बाजार के उतार चढ़ाव को भी झेल सकते हैं। नियमित अंतराल के बाद रकम निकासी से औसत मूल्य अच्छा मिलता है और निवेशक बाजार के उतार चढ़ाव का आनंद ले सकता है।
स्विप कैसे कार्य करती है – (How SWP working ?)
स्विप म्यूचयल फ़ंड में ही एक योजना है, जिसमें नियमित अंतराल के बाद यह आपको अपने निवेश में से कुछ रकम निकासी की सुविधा देती है।
अब म्यूचयल फ़ंड खरीदते हैं, तो उसे स्विप में ले सकते हैं, जिसमें आपको बताना होता है कि कितना रुपया हर महीने/तिमाही में कौन सी तारीख को चाहिये। जिस दिन म्यूचयल फ़ंड खरीदा जाता है, उस दिन की एन.ए.वी. से आपको आपके निवेश की यूनिट मिल जाती हैं। और फ़िर अगले महीने से आपकी चाही गई रकम उन यूनिटों में से बेचकर आपको दे दी जाती हैं। इससे फ़ायदा यह है कि अगर लंबी अवधि में देखें तो हम बाजार के उतार चढ़ाव बहुत ज्यादा पायेंगे और ये उनसे लड़ने में सक्षम हैं।
एक उदाहरण देखते हैं – एक व्यक्ति वर्ष २००२ में सेवानिवृत्त हुए, उन्होंने वित्तीय विशेषज्ञ की सेवाएँ ली और अपनी सेवानिवृत्ति राशि का २० लाख रुपया स्विप में लगाने का निर्णय लिया। और उन्होंने ९ जुलाई २००२ को रिलायंस ग्रोथ ग्रोथ म्यूचयल फ़ंड लिया। ९ जुलाई २००२ की एन.ए.वी. ३१.१८५ रुपये थी, और उन्हें ६४,१३३.३९७५ यूनिट मिलीं।
अब हर माह उन्हें शुरु की २ तारीख को ही २०,००० रुपये मिल जाते थे, और उन्होंने उसे आज तक जारी रखा है, जैसा कि आप सभी ने देखा है कि इन पिछले आठ वर्षों में बाजार ने अपने कई उतार चढ़ाव देखें हैं और कई बने हैं और कई बर्बाद हुए हैं, आज अगर उनके फ़ंड की उन्नति को देखा जाये तो आप पायेंगे कि पिछले आठ वर्षों में उन्होंने स्विप से १९.२० लाख रुपये तो निकाले ही हैं और आज उनके पास ४५,५७७.८७९२ यूनिट उपलब्ध हैं जिसकी एन.ए.वी. ४५९.८४६८ है, और कुल निवेश की राशि आज हो गई है २ करोड़ से भी ज्यादा जी हाँ बिल्कुल सही पढ़ा आपने उनकी आज की रकम है २,०५,६९,६०२.२५ रुपये। जी २५,६१२% की वापसी।
दूसरा उदाहरण देखिये – एक और व्यक्ति थे उन्होंने अपने राशि बैंक में मासिक आय योजना में रखी थी, और उन्हें ब्याज उस समय मिला लगभग १२% पर आज उनकी मूल राशि तो २० लाख रुपये ही है, जो कि आज की मुद्रास्फ़ीति से लड़ने में असक्षम है।
इस तालिका में देखिये –
| निवेश योजना | दिनांक | रकम | आहरित रकम | वर्तमान राशि |
| रिलायंस ग्रोथ – ग्रोथ म्यूचयल फ़ंड स्विप योजना | ९ जुलाई २००२ | २०,००,००० | १९,२०,००० | २,०५,६९,६०२.२५ ग्रोथ – २५,६१२% |
| बैंक में सावधि जमा मासिक आय योजना | ९ जुलाई २००२ | २०,००,००० | १९,२०,०० | २०,००,००० ग्रोथ – ० % |
तो अब आप ही समझ सकते हैं कि निवेश में किसका निर्णय सही था।
कर कितना देना पड़ता है – (Income Tax !!!)
अभी तक कर का प्रावधान इस प्रकार था –
पहले वर्ष शार्ट टर्म कैपिटल गैन टैक्स देना होता था, जितनी यूनिट आपकी बाजार में बिकी हैं, उस हर यूनिट पर होने वाले फ़ायदे पर और एक वर्ष के बाद लांग टर्म कैपिटल गैन टैक्स से मुक्त था, पर इंडेक्सेशन से कर लगता था।
अब नये कर प्रस्ताव में लांग टर्म कैपिटल गैन टैक्स की फ़िर से बहाली की गई है, जिसमें निवेशक को अब हर यूनिट पर होने वाले फ़ायदे पर अब एक वर्ष की अवधि के बाद भी कर देना होगा और इंडेक्सेशन के ऊपर भी कर देय होगा।
इतने कर देने के बाबजूद भी यह योजना बहुत ही अच्छी है, जोखिमपूर्ण भी है। पर इसकी वापसी की तुलना किसी और वित्तीय उत्पाद से करना बहुत ही मुश्किल है।
वित्तीय विशेषज्ञ की सेवाएँ – ( Services of Financial Planner !!!)
मेरी राय है कि जब आप बाजार आधारित कोई भी उत्पाद खरीदते हैं, और अगर खुद विशेषज्ञ नहीं हैं तो वित्तीय विशेषज्ञ की समय समय पर सेवाएँ जरुर लें जो आपके धन को सुरक्षित रखने में आपकी मदद करेगा।
जैसे पहले उदाहरण में वित्तीय विशेषज्ञ की सेवाएँ केवल निवेश के समय ही ली गईं, अगर नियमित रुप से लेते, तो यही रकम लगभग ४ करोड़ हो गई होती। वित्तीय विशेषज्ञ अपनी सेवाओं के लिये कुछ मामुली सा शुल्क लेते हैं परंतु हमें वह शुल्क ज्यादा लगता है, अगर थोड़ा सा शुल्क देकर आपको अपने निवेश से ज्यादा बेहतर वापसी मिल रही है तो हर्ज ही क्या है।
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बैंकें काटापिटी वाले चेक नहीं लेंगी
यह समाचार शायद सब ने हाल ही में अखबारों में पढ़ा होगा कि बैंकें काटापिटी वाले चेक नहीं लेंगी, पर क्या आपको पता है यह केवल दिल्ली के लिये है, जहाँ कि क्लियरिंग के लिये चेक ट्रंकेशन सिस्टम (CTS) लागू किया गया है, और अभी यह केवल दिल्ली में ही लागू है अब आगामी दिनों में CTS चैन्नई में शुरु होने वाला है, फ़िर यह नियम चैन्नई के लिये भी लागू होगा।
और किसी शहर में अगर आपको कोई परेशान करे फ़िर वह वित्तीय संस्थान ही क्यों न हो, आप बैंकिग ओम्बड्समैन से शिकायत कर सकते हैं, क्योंकि यह नियम अभी केवल और केवल दिल्ली के लिये है, और जल्दी ही केवल चैन्नई के लिये।
बैंकों के बारे में ज्यादा जानकारी के लिये मेरे ब्लॉग पर जाने के लिये यहाँ चटका लगाईये।
आई.आर.डी.ए. ने यूलिप के लिये नये नियम बनाये
आई.आर.डी.ए. ने यूलिप का बंधक समय ३ वर्ष से बड़ाकर ५ वर्ष कर दिया है। सभी यूलिप में मृत्यु और स्वास्थ्य का बीमा होगा, पेंशन स्कीम को छोड़कर। नये नियम १ सितंबर से प्रभावी होंगे।
अलग से उपलब्ध टॉप अप के अलावा, मूल बीमा किश्त में ही जीवन बीमा भी बीमित होना चाहिये।
पेंशन या वार्षिक उत्पादों में किसी भी तरह की आंशिक निकासी नहीं होगी। यूलिप पेंशन उत्पादों को वार्षिक उत्पादों में परिवर्तित किया जाना चाहिये।
यूलिप पेंशन और वार्षिक उत्पाद ४.५% की वापसी की गारंटी दे सकेंगे।
बीमित से लिये जाने वाले बीमा शुल्क बंधक अवधि में समान रुप से लिये जाने चाहिये।
एन.ए.वी. की ४०% तक का ॠण उपलब्ध होगा।
१० वर्ष से कम के बीमा पर ३% प्रतिवर्ष तक प्रभार लिया जा सकता है।
१० वर्ष से ज्यादा के बीमा पर २.२५% प्रतिवर्ष तक प्रभार लिया जा सकता है।
फ़्रंट लोडिंग शुल्कों को पहले चार वर्ष में ही लिया जा सकता है।
बीमा पॉलिसी के लिये केवल नामांकन ही नहीं वसीयत भी जरूरी है [Will is equally important with Nomination for Insurance Policy]
क्या आपने कभी सोचा है कि बीमा दावा राशि का कानूनी रुप से लाभार्थी कौन है ? या उस राशि पर कौन कौन दावा कर सकता है ?
बीमा पॉलिसी के लिये केवल नामांकन ही नहीं वसीयत भी जरूरी है
अधिकांश लोगों को लगता है कि बीमा दावा का पैसा उनके पति/पत्नी या बच्चे को मिल जायेगा और वे जीवन में आने वाली काठिनाईयों से बच पायेंगे । बहरहाल, यह थोड़ा सा सच है, या कहें आंशिक रुप से सही है । कानून के अनुसार हर संबंधित व्यक्ति जो कि आर्थिक रुप से बीमित व्यक्ति पर आश्रित है, बीमा दावा से मिलने वाले धन पर पर दावा कर सकता है।
लगभग सभी लोग बीमा लेते समय पति/पत्नि को बीमा दावा के लिये नामित करते हैं, और यही समझते हैं कि अगर दुर्भाग्य से मृत्यु हो भी गई तो बीमाधन उनके पति/पत्नि को मिल जायेगा। यह भी आंशिक रुप से सही है, नामांकन का मतलब होता है कि वह नामित व्यक्ति बीमा धन का दावा कर सकता है, पर उसका उपयोग नहीं कर सकता । वह बीमा धन कानूनीतौर पर सभी आश्रितों में बांटी जानी चाहिये।
तो अगर आप चाहते हैं कि बीमा धन किसी एक व्यक्ति विशेष के पास ही जाना चाहिये तो बीमा कागजातों पर नामांकन काफ़ी नहीं है। आपको एक वसीयत तैयार करवाना चाहिये जिस पर साफ़ शब्दों में लिखा हो कि बीमा धन से प्राप्त होने वाला धन नामित व्यक्ति/विशिष्ट व्यक्ति को ही दिया जाये, और कोई इस धन का अधिकारी नहीं है। कानूनी रुप से मान्य होने के लिये यह वसीयत पंजीकृत होनी चाहिये।
इसलिये अगर आप ने अभी तक यह नहीं किया है, तो जल्दी से पहले अपने वकील के पास जाईये और सलाह लीजिये और वसीयत तैयार कीजिये।
क्योंकि इसका सबसे बड़ा एक कारण तो ये है कि आप जिंदगी की परेशानियों से अपने परिवार को बचाने के लिये जैसे तैसे अपनी बीमा किश्त का भुगतान कर रहे हैं, कि जब अगर आप न हों उनके साथ, तो वे आर्थिक रुप से सक्षम हों, दुखी न हों। वसीयत करिये यह बहुत जरुरी है।