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वित्तीय स्वतंत्रता पाने के लिये ७ महत्वपूर्ण विशेष बातें [Important things to get financial freedom…]

क्या आपने कभी सोचा है कि “अगर मैं वित्तीय स्वतंत्र हो जाऊँ तो ?” अगर ऐसा हो जाये तो कितना अच्छा हो…

१) बुनियादी जरुरतों के लिये काम ना करना पड़े, केवल अपने मासिक बिलों और ऋण के  भुगतान के लिये कमाना पड़े, बाकी के अपने बचे हुए कैरियर में… नहीं !!

२) और् नहीं !! वो अंतहीन काम करने का समय !! केवल अपने आपको इस अंतहीन चूहा दौड़ में श्रेष्ठ साबित करने के लिये, क्योंकि अगर आप जीत् भी गये तब भी आप है तो चूहे ही ना ….

३) जीवन को भरपूर आन्ंद से जीने की इच्छा और् क्षमता, अपने परिवार के साथ और ज्यादा वक्त गुजारना, अपने परिवार को छुट्टियों पर ले जाना या फ़िर किसी अच्छे रेस्त्रां में कभी भी ले जाना जब आपकी इच्छा हो …

४) आप जो भी अपने मन का नहीं कर पा रहे थे, उसे अपने पूरे मन से कर पायें ..

अच्छे विचार, लेकिन आप शायद सोच रहे होंगे कि मैं दिन् मैं भी सपने देखता हूँ ?  तो कह सकते हैं हाँ भी और ना भी …

हाँ – क्योंकि दिन के सपने मुझे अच्छे विचारों की और् प्रेरित करते हैं, कि मैं कैसे और अच्छे से अपनी जिंदगी में र्ंग भरूँ । आखिरकार हमें एक बार ही जीवन मिला है, तो हम् इसे और सार्थक बनाते हैं।

नहीं – क्योंकि नय विचारों के साथ, हम नये मिलने वाले अवसरों का विश्लेषण कर सकते हैं, और् सबसे प्रभावी दृष्टिकोण को अपना सकते हैं। विचारों के साथ ही अवसर आते हैं, अवसर के साथ कार्य और कार्य के होने से परिणाम आता है !!

तो मैं आपको जो कुछ आगे बताने वाला हूँ उससे आपको अपने वित्तीय स्वतंत्रता को पाने के लिये आप अभी जहाँ अभी खड़े हैं उससे एक् कदम आगे होंगे।

७ जरुरी वित्तीय बातें, जो कि सभी लोगों को पता होना चाहिये –
१) धन का महत्व् समझना
२) धन पर् नियंत्रण रखना
३) धन को बचाना
४) धन को निवेश करना
५) धन कमाना
६) धन को बचाना
७) धन को बांटना सीखना

१) धन का महत्व् समझना – क्या आप धन का महत्व् समझते हैं और् उसकी इज्जत करते हैं ? अगर आज आपको वित्तीय हानि होती है तो क्या आप उसका बर्तमान और भविष्य में होने वाले परिणाम को जानते हैं।

क्या आप अपनी पूरी मासिक आय खर्च कर देते हैं, और् कुछ भी बचा नहीं पा रहे हैं, शर्मिन्दा होने की क्या बात् है, केवल आप अकेले ही ऐसे नहीं हैं, ऐसे बहुत् से लोग् हैं ।

जब तक हम धन का महत्व समझना शुरू नहीं करेंगे, तब तक हम अपने कार्य के महत्व को, बचत की जरुरतों को, और अपनी जबाबदेही को भी नहीं समझ पायेंगे ।

आप कितना खर्चा कर रहे हैं, कितना कमा रहे हैं, अपना धन कहाँ और् कैसे रख रहे हैं, यह सबसे जरूरी है, तो इससे आपको पता चल जायेगा कि केवल अपनी जीवन की आवश्यकताओं को ही पूरा कर रहे हैं या फ़िर् कुछ अपने  लिये अतिरिक्त धन बचा भी सकते हैं।

२) धन पर् नियंत्रण रखना – मुझे लगता है कि अधिकतर लोगों की कमाई का केवल एक ही जरिया होता है नौकरी । इसी से आपके और आपके परिवार के जरुरी खर्चे चलते हैं, और यहीं इसी एक कमाई के सधन के लिये आप दिनरात काम करते हैं, । अगर आप ल्ंबे समय के लिये बीमार पड़् जायेंगे तो ??  घरखर्चा कैसे चलेगा ।

इस परेशानी से बचने का एकमात्र उपाय है कि आपकी नौकरी के साथ साथ आपकी विविध तरह से  दूसरी कमाई भी हो, केवल जब आप ये लक्ष्य प्राप्त कर लेंगे तभी आप अपने आप को वित्तीय स्वत्ंत्र बना सकते हैं, और मस्ती में जिंदगी निकाल सकते हैं।

३) धन को बचाना – अगर आपके पास बहुत सारा धन है, और आप उसे बचाते नहीं हैं, आपके पास उससे ज्यादा धन नही आयेगा, आप और धन नहीं जोड़् पायेंगे। इसे “नकदी प्रवाह प्रब्ंधन” कहा जाता है। आपको अपनी आमदनी बढ़ाकर् खर्चों में कटौटी करना होगी, यही धन वृद्धि का मूल म्ंत्र है। अगर आपके पास अतिरिक्त धन होगा, तो बाजार में बहुत सारे नये वित्तीय उत्पाद हैं निवेश करने के लिये, जिनसे आपके धन में अच्छी वृद्धि हो सकती है।

४) धन का निवेश करना – कुछ आम उत्पाद जो कि आजकल बाजार में उपलब्ध हैं, शेयर, म्यूचयल फ़्ंड्, बांडस, मकान इत्यादि। इतनी सारे विकल्पों के होने के कारण, किसी अनुभवी वित्तीय प्रब्ंधक के साथ सलाह करके उस वित्तीय उत्पाद का विवरण प्राप्त करके निवेश करना उचित होगा, और आप अपने धन को समझदारी से अच्छी जगह निवेश कर पायेंगे। ऐसे वित्तीय उत्पाद बेचने वालों से बच कर रहें जो कि ज्यादा कमीशन वाले उत्पाद बेचने के लिये उत्साहित करते हैं, जो कि आपके ल्ंबी अवधि के योजना के लिये अच्छे न हों ।

५) धन कमाना – एक् बार आपने अपने धन को निवेशित करने के लिये अच्छा रास्ता चुन लिया, फ़िर स्ंयम के साथ अपने धन को बढ़्ते हुए देखें।  “धन स्ंयम के पेड़ पर बड़ा होता है”।

६) धन को बचाना – जब आपके पास धन होता है, तो आपको पता होता है कि धन आसानी से नही आया है, तो अगला कदम है मेहनत से कमाये हुए धन को बचाना। बुरे समय से निपटने के लिये अपने धन को सुरक्षित रखें या फ़िर् वापिस निवेश कर दें। आपको हमेशा अपने पास किसी भी आपात स्थिती से निपटने के लिये कम से कम ६ महीने का खर्चा नकद (बैंक् एकाऊँट) में रखना चहिये।

७) धन को बांटना सीखना – ज्यादा धन आपके पास होने पर्, आप वो सब कर सकते हैं जो करना चहते हैं, जिन सबका मैंने शूरु में उल्लेख किया है। अपने परिवार को सुख सुविधाओं के साथ ज्यादा समय दे सकते हैं, परिवार को छुट्टियों पर घुमाने ले जा सकते हैं, या जब भी आप चाहें किसी अच्छे रेस्त्रां में ले जा सकते हैं। आप अपने परिवार को ज्यादा लाड़ प्यार, सम्मान, समय दे सकते हैं जो पहले नहीं दे पा रहे थे। आप अपनी नौकरी छोड़कर कुछ अपने मन का, जो आपको पसंद है, कर सकते हैं। सही नहीं है क्या ये कि मैं और शायद आप भी हमेशा यही सोचते हैं कि कब अपना मनपसंदीदा काम करने को मिलेगा।

मुझे विश्वास है कि आप भी मेरी तरह वित्तीय स्वतंत्रता पाने के लिये रास्ता खोज रहे होंगे। “समय और ज्वार-भाटा किसी का इंतजार नहीं करते हैं” इसलिये यह बहुत जरुरी और महत्वपूर्ण है कि वित्तीय योजना आज से ही बनायी जाये और उस पर अमल भी किया जाये। और इन ७ महत्वपूर्ण विशेष बातों को रोज ध्यान में रखें।

शिक्षा में निवेश और धन के महत्व को शामिल होना ही चाहिये ? [ Investment and importance of money should be part of our education system]

    लगभग सभी लोग अपने जीवन के महत्वपूर्ण १६-२० वर्ष शिक्षा ग्रहण करते हैं, परंतु उस शिक्षा में कहीं भी यह नहीं सिखाया जाता है कि धन कैसे कमाया जाता है, धन कितना महत्वपूर्ण है, धन को सही तरीके से कैसे निवेश किया जाये इत्यादि।

    शिक्षा में हम ग्रहण करते हैं, विषयगत ज्ञान, जो कि इतिहास, भौतिक विज्ञान, वनपस्पति विज्ञान, हिन्दी इत्यादि होते हैं। जिनसे हम उन विषयों में पारंगत तो हो जाते हैं, पर धन की महत्वपूर्णता को समझ नहीं पाते हैं, और न ही ये सीख पाते हैं कि अगर निवेश किया जाये तो कहाँ।

जब कमाने लगते हैं तो रिश्तेदारों के, दोस्तों के या माता पिता के कहने पर उनके अनुभव से धन को निवेश करने लगते हैं। परंतु क्या कभी आपने सोचा है कि जब २० वर्ष शिक्षा ग्रहण अपने बलबूते पर की, उन विषयों में पारंगत हुए तो फ़िर धन के निवेश में क्यों नहीं, जबकि हमने शिक्षा ग्रहण इसलिये की है कि हम अपना भविष्य सामाजिक और आर्थिक रुप से सुदृढ़ रख पायें।

जब नौकरी लगती है और निवेश की बारी आती है तो अच्छे अच्छे लोगों के दिमाग हिल जाते हैं, भले ही वे अपने विषयों में पारंगत हो, परंतु निवेश में कतई नहीं। निवेश में पारंगत होना केवल और केवल व्यक्तिगत रुचि है। निवेश भी अपने आप में एक बहुत बड़ा विषय है और इसमें पारंगत होना सभी के लिये अनिवार्य होना चाहिये परंतु हमारी शिक्षा में निवेश विषय नहीं है।

नौकरी के बाद पहली बार आयकर रिटर्न भरना होता है तो पसीने छूटने लगते हैं, जबकि आयकर विभाग ने अपने रिटर्न बहुत ही आसान कर दिये हैं, हम जब से नौकरी कर रहे हैं, तब से हम खुद ही अपना रिटर्न भर रहे हैं, आप बताईये क्या आप भी खुद ही आयकर रिटर्न भरते हैं या फ़िर इसे भरना बहुत बड़ा सरदर्द मानकर कुछ फ़ीस देकर बाजार से भरवा लेते हैं।

तो बताईये शिक्षा में निवेश और धन के महत्व को शामिल होना चाहिये या नहीं ?

शीघ्र सेवानिवृत्ति की उम्र क्या होनी चाहिये ?आपको कितने चाहिये १५ लाख या १५ करोड़ [Early Retirement !! When ?]

शीघ्र सेवानिवृत्ति कब ? [Early Retirement !! When ?]

    आज के युग में पढ़ाई कम से कम २० वर्ष की हो गई है, और जब तक युवापीढ़ी बाजार में आती है, उसकी उम्र २३-२४ वर्ष हो गई होती है, बाजार में आते ही उसकी नौकरी शुरु हो जाती है, और वह अपने घर के बुजुर्ग के बराबर ही कमाने लगता है और खर्च उनके मुकाबले लगभग बिल्कुल भी नहीं होता है। तो वह अपने शौक पूरे करता है और जो भविष्य की योजना निर्धारित करके चलता है वह अच्छे से निवेशित भी करता है। इस प्रकार वह आराम से सैटल भी हो जाता है और १२-१७ वर्ष में ही अपने सारी योजनाओं को मूर्त रुप दे सकता है, तो उसे ३० वर्ष तक नौकरी करने की आवश्यकता नहीं होती है।

    शीघ्र सेवानिवृत्ति की उम्र को निर्धारित नहीं किया जा सकता है, जब भी हमारे वित्तीय लक्ष्य पूर्ण हो जायें, तभी शीघ्र सेवानिवृत्ति की सही उम्र होती है। फ़िर भले ही वह ३० वर्ष ही क्यों न हो।

    जरुरी नहीं है कि जो कार्य आप कर रहे हैं वह अपनी इच्छा से कर रहे हों, हो सकता है कि अपनी इच्छा के विरुद्ध कर रहे हों, परंतु भविष्य की चिंता करते हुए और ज्यादा पैसा देखते हुए सोचते हैं कि अब तो यही करना होगा, अगर मन की करी तो लक्ष्य पूर्ण नहीं हो पायेगा।

    शीघ्र सेवानिवृत्ति के लिये वित्तीय लक्ष्यों का पता होना चाहिये और उन वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के बाद कैसे सही तरीके से निवेशित किया जाये यह भी पता होना चाहिये। जिससे खर्चे अच्छे से चलते रहें और आप अपने मनपसंदीदा कार्य में सही तरीके से ध्यान लगा पायें।

    वित्तीय लक्ष्य एक ऐसी विषय वस्तु है जो कि सबके लिये अलग अलग हो सकती है, किसी के लिये १५ लाख भी शीघ्र सेवानिवृत्ति के लिये बहुत होगा और किसी के लिये १५  करोड़ भी कम होगा । तो शीघ्र सेवानिवृत्ति की उम्र तो वित्तीय लक्ष्य साफ़ होने पर ही निर्धारित की जा सकती है।

बताइये क्या आप मेरे नजरिये से सहमत हैं।

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शीघ्र सेवानिवृत्ति [क्यों ?] [Early Retirement Why ?]

शीघ्र सेवानिवृत्ति क्यों ? [Early Retirement Why ?]

    जब कार्य स्थल पर कठिनाईयाँ आने लगती हैं, तो बहुत से लोग इस स्थिती से पलायन करने के लिये शीघ्र सेवानिवृत्ति के लिये सोचने लगते हैं, परिवार का यह मानना होता है। परंतु आजकल की बदली हुई कार्य की परिस्थितियों को हमारे परिवार नहीं समझ पा रहे हैं , कि कितने दबाब में कार्य करना होता है, जब निजी कंपनियाँ ज्यादा रुपया देती हैं तो हरेक रुपये के एवज में निचोड़ कर काम भी लेती हैं। परिवार को लगता है कि हमारा पुत्र ज्यादा रुपया कमाकर वैभवशाली जीवन निर्वाह कर सकता है, परंतु अगर हम उस पुत्र की मनोस्थिती समझें तो शायद उसकी कार्य करने की परिस्थितियों को समझने में असमर्थ होंगे। क्योंकि जो कार्य आजकल की पीढ़ी कर रही है, जैसे कर रही है वह परिवार के बुजुर्ग समझ ही नहीं सकते, क्योंकि उन्होंने वैश्विक तौर तरीकों से कभी कार्य ही नहीं किया है और न ही उतनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी क्षमताओं में कोई कमी थी, परंतु उन्हें उन कार्य परिस्थितियों का अंदाजा ही नहीं है।

    शीघ्र सेवानिवृत्ति एक ऐसा विषयवस्तु और जीवनचर्या है जो कि आज के युवा को बहुत पसंद आ रहा है। शीघ्र सेवानिवृत्ति क्यों लिया जाये ? और इसके बाद करें क्या ? ये सब सवाल होते हैं, हमारे परिवार के बड़े बुजुर्गों के, जिनकी सोच को रुढिवादी बोला जा सकता है, परंतु बेकार नहीं, क्योंकि उन्हें जिंदगी का अनुभव होता है और सोच परिपक्व होती है। हाँ वो हमारे इस शीघ्र सेवानिवृत्ति के निर्णय से एकदम सहमत तो नहीं होंगे, परंतु उन्हें बदली हुई परिस्थितियों को समझाया जा सकता है।

    कितने लोग नौकरी या व्यापार अपनी खुशी से करते हैं और कितने लोग इसे मजबूरी से करते हैं, करना कुछ चाहते हैं परंतु कुछ ओर ही कर रहे होते हैं। जैसे किसी की इच्छा तो वैज्ञानिक बनने की होती है परंतु बन जाते हैं पत्रकार, या बैंकर या कुछ ओर । बस इस प्रकार से केवल अपने जीवन यापन के लिये जिस भी क्षैत्र में मौका मिल जाता है उसी में कार्य करने लगते हैं, फ़िर भले ही मन मारकर कार्य कर रहे होते हैं।

नौकरी या व्यापार क्यों करते हैं ?

    नौकरी या व्यापार करने का मुख्य उद्देश्य होता है, “पैसा कमाना”। और भी उद्देश्य होते हैं जो कि इस प्रकार हो सकते हैं – समाज में अपनी पहचान बनाना, अपनी प्रतिभा से सबको कायल करना, वैभवशाली जीवन शैली को जीना, अपने को संतुष्ट करना, और भी बहुत कुछ।

आखिर कब तक करें –

    जैसी जीवनशैली से आप संतुष्ट हों और उस जीवनशैली में ही मजे में जीवन जी सकें और अपने बच्चों और निर्भर सदस्यों का भविष्य निखार सकें।

    परंपरागत तौर पर ५५ से ६५ वर्ष तक की उम्र सेवानिवृत्ति की मानी जाती है, क्योंकि उस समय आय का एकमात्र साधन घर का मुखिया ही होता था, या फ़िर आय कम होती थी। परंतु अब बदली हुई परिस्थितियों में आय भी बड़ी है, जीवन स्तर भी बड़ा है। पहले सेवानिवृत्ति पर जितना धन सेवानिवृत्त को मिलता था उससे कहीं ज्यादा धन तो आज की पीढ़ी ३५ वर्ष की उम्र में जमा कर लेती है। तो उस धन को निवेश कर आराम से शीघ्र सेवानिवृत्ति का मजा ले सकते हैं, परंतु कोई इस विषय पर नहीं सोचता है, और मशीनी तरीके से पूरी जिंदगी निकाल देते हैं।

    अगर जीवन यापन के लिये जरुरी रकम हमें मिलती रहे तो अपने रहन सहन और घर खर्च की चिंता के बगैर हम अपने मन पसंदीदा कार्य को कर सकते हैं।

    परंतु भविष्य के प्रति अनिंश्चिंत होकर बिना योजना के  वह कार्य करता रहता है। योजना बनाने से सुदृढ़ भविष्य का निर्माण कर सकते हैं, और अपने परिवार और समाज को सही दिशा में बड़ा सकते हैं। जितना समय हम ज्यादा रुपया कमाने में देंगे, उससे कहीं ज्यादा हम अपने परिवार और समाज के लिये समय देने की प्रतिबद्धता कर दे सकते हैं। और अपने राष्ट्र का एक उज्जवल भविष्य निर्माण कर सकते हैं।

पाठकों की राय अपेक्षित है —

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