पॉवर-पैक जींस जिसकी जेब में 220 वोल्ट बिजली दौडती है

सोचिये अगर कोई जेबकतरा आपकी जींस की जेब में आपका पर्स निकालने के लिये हाथ डालता है तो उसे 22o वोल्ट का बिजली का झटका लगता है, जी हाँ यह विशेष जींस तैयार की है वाराणसी के हाईस्कूल फ़ेल नौजवान ने, जो कि विज्ञान के सामान्य सिद्धांत पर आधारित है।

जींस को तैयार किया है श्याम चौरसिया ने जो कि वाराणसी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। यही नहीं वे कहते हैं कि अगर उनके अनुसार थोड़े से सुधार और किये जायें तो आपके सारे कपड़े ही “पॉवर-पैक” हो जायेंगे।

जिस भी कपड़े को “पॉवर-पैक” करना हो उसमें एक छोटी सी बैटरी से चलने वाली किट लगानी होगी।

श्याम चौरसिया का कहना है कि “जब मैंने यह तैयार की थी तो केवल जेबकतरों को ही ध्यान में रखा था, पर अगर इसे लड़्कियों की टी शर्ट और कपड़ों में भी लगा दें तो छेड़खानी के मामले रुक सकते हैं।”

अब अगर आपको लगता हो कि ये बैटरी से चलने वाला अविष्कार महँगा होगा, तो नहीं बिल्कुल नहीं केवल तीन सौ रुपये खर्च करने होंगे और अगर और उन्नत तकनीक चाहिये तो १०० रुपये ज्यादा खर्च करना होंगे।

ज्यादा जानकारी यहाँ पढ़ सकते हैं।

मेरे स्वप्न में, वही नदी क्यों आती है…. मेरी कविता …. विवेक रस्तोगी

बारबार मेरे स्वप्न में

वही नदी क्यों आती है

जो मुझे बुलाती है

कहती है कि आओ जैसे तुम पहले

मेरे पास आकर बैठते थे

वैसे ही पाँव डालकर बैठो,

अब तो तुम

समुंदर के पास हो

है बहुत विशाल

पर मुझे बताओ

कि कितनी बार उसने तुम्हें

अपने पास बैठने दिया

जैसे मैंने ??

क्योंकि शब्दों से मेरा जीवन जीवन्त है …. मेरी कविता … विवेक रस्तोगी

शब्दों से मेरा जीवन जीवन्त है

नहीं तो सुनसान रात्रि के

शमशान की सन्नाटे की गूँज है

सन्नाटे की सांय सांय में

जीवन भी कहीं सो चुका है

शमशान जाने को समय है

पूरी जिंदगी मौत से डरते हैं

शमशान जाने से डरते हैं

पर एक दिन मौत के बाद

सबको वहीं उसी सन्नाटे में

जाना होता है,

जहाँ रात को सांय सांय

हवा अपना रुख बदलती है

जहाँ रात को उल्लू भी

डरते हैं,

जहाँ पेड़ों पर भी

नीरवता रहती है

मैं जाता हूँ तो मुझे

मेरे शब्द जीवित कर देते हैं

क्योंकि शब्दों से मेरा जीवन जीवन्त है।

फ़िर भी मेरी सुबह और दिन भागते हुए शुरु होते हैं…..मेरी कविता … विवेक रस्तोगी

रोज सुबह भागते हुए

दिन शुरु होता है,

पर सुबह तटस्थ रहती है,

सुबह अपनी ठंडी हवा,

पंछियों की चहचहाट,

मंदिर की घंटियाँ,

मेरे खिड़्की के जंगले से आती भीनी भीनी

फ़ूलों की खुश्बु,

सब कुछ तो ताजा होता है

फ़िर भी मेरी सुबह और दिन

भागते हुए शुरु होते हैं।

तुम इतने भयानक क्यों थे..! … मेरी कविता … विवेक रस्तोगी

सिसकती खिड़्कियाँ

चिल्लाते दरवाजे

विलाप करते रोशनदान

चीखते हुए परदे

सब तुम्हारी याद दिलाते हैं

मेरे अतीत

तुम इतने भयानक क्यों थे !

कुछ है क्या मेरे लिये ? मेरे आने से पहले …… मेरी कविता ….. विवेक रस्तोगी

कुछ है क्या मेरे लिये ?

या सब पहले ही खर्च हो चुका है

मेरे आने से पहले,

कुछ है क्या करने के लिये ?

या सब पहले ही हो चुका है

मेरे आने से पहले,

कुछ है क्या कहने के लिये ?

या सब पहले ही कह चुके हैं

मेरे आने से पहले,

कुछ है क्या सुनने के लिये ?

या सब पहले ही सुन चुके हैं

मेरे आने से से पहले,

हमेशा जिंदगी में सब कुछ,

मेरे आने से पहले ही क्यों हो जाता है,

और जो मैं करता हूँ, वह

बाद मैं सोचता हूँ क्या मैं इसे ऐसा कर सकता था ?

बस सोचता हूँ कि सब पहले ही क्यों हो चुका होता है

मेरे आने से पहले ?

क्या आपको हिन्दी वर्णमाला आती है ? [ Do you know Hindi Alphabets]

जब से मेरा बेटा पढ़ना सीख रहा है, मुझे भी वापस पूरी हिन्दी वर्णमाला याद हो गई है।अ आ इ ई उ ऊ ऋ ए ऐ ओ औ अं अ:
क ख ग घ ङ
च छ ज झ ञ
ट ठ ड़ ढ ण
त थ द ध न
प फ़ ब भ म
य र ल व स श ष ह
क्ष त्र ज्ञ

हमने याद किया कि हमें आखिरी बार वर्णमाला कब याद थी, तो याद आया कि स्नातकोत्तर संस्कृत में हमने यह पढ़ा था, पर किसी कारणवश हम उपाधि नहीं ले पाये थे। फ़िर अपने मोबाईल पर वर्णमाला मिली, पर उस समय हमें वर्ग याद रहता था, फ़िर बाद में वर्ग भी भूल जाते थे।

और सुधिजन विद्वान बतायें कि क्या यह हिन्दी वर्णमाला पूर्ण है, क्योंकि आजकल कुछ नये शब्द इसमें जोड़े जा रहे हैं, जो कि मुझे पच नहीं रहे हैं।
जैसे कि – ड़, ढ़, श्र

आप बताईये क्या आपको हिन्दी वर्णमाला आती है ?

स्विप या सिप में क्या सारा पैसा एक ही फ़ंड में लगाना उचित है ? (Investment should be in 1 fund ?? in SIP or SWP)

    पिछली पोस्ट [स्विप (SWP) क्या है, और ये कैसे सेवानिवृत्ति के बाद के लिये अच्छा उत्पाद है ? (What is Systematic Withdraw Plan)] पर डॉ. महेश सिन्हा जी ने सवाल किया था, क्या सारा पैसा एक ही फ़ंड में लगाना उचित है।

    मेरा जबाब है नहीं, अगर सारा पैसा एक ही फ़ंड में लगा दिया और वो अपना प्रदर्शन नहीं कर पाया फ़िर आपके भविष्य का क्या ?

    आपका पैसा कम से कम ५ म्यूचुयल फ़ंडों में निवेशित होना चाहिये, जिसमें लार्जकैप डाईवर्सिफ़ाईड फ़ंड, बैलेन्स्ड फ़ंड,स्माल एवं मिडकैप फ़ंड सबमें आपका निवेश होना चाहिये। हाँ आज से ५ वर्ष पहले तक ज्यादा तरीके के म्यूच्यल फ़ंड उपलब्ध नहीं थे, परंतु अब तो जैसा म्यूच्यल फ़ंड चाहिये वैसा मिलता है।

    हम पिछले १ वर्ष के रिटर्न की गणना करें स्विप की तो पायेंगे – निवेश तिथि ९ जुलाई २००९ निवेशित रकम १,००,००० रुपये, जिसमें आप अपनी निवेशित रकम में से १२,००० रुपये १२ महीने में निकाल भी चुके हैं, और आज मूल रकम ८८ हजार रुपये है।

कुछ लार्जकैप म्यूचयल फ़ंड –

फ़ंड का नाम वर्तमान रकम वापसी
रिलायंस ग्रोथ – ग्रोथ 1,33,234.41 51.4%
रिलायंस विजन – ग्रोथ 1,26,728.40 44.1%
एच.डी.एफ़.सी. टॉप २०० 1,25,214.84 42.29%
डी.एस.पी. ब्लेकरॉक टॉप १०० 1,18,900.61 35.11%

कुछ बैलेन्स्ड म्यूचयल फ़ंड –

फ़ंड का नाम वर्तमान रकम वापसी
डी.एस.पी. ब्लेकरॉक बेलेन्स्ड फ़ंड – ग्रोथ 1,21,010.33 37.51%
बड़ौदा पायोनियर बैलेन्स्ड 1,06,911.12 21.49%
केनरा रोबेको बेलेन्स 1,20,934.93 37.43%
एच.डी.एफ़.सी.बेलेन्स्ड फ़ंड 1,30,369.77 48.15%

कुछ स्मॉल मिडकैप फ़ंड –

फ़ंड का नाम वर्तमान रकम वापसी
डी.एस.पी. ब्लेकरॉक 1,58,195.10 79.77%
एच.एस.बी.सी. मिडकैप 1,34,062.97 52.34%
आई.डी.एफ़.सी. 1,40,779.75% 59.98%
डी.एस.पी. ब्लेकरॉक माइक्रो कैप फ़ंड 1,77,672.85 101.9%

    जो म्यूचयल फ़ंड आज अच्छा प्रदर्शन कर रहा है इसका मतलब यह नहीं है कि भविष्य में भी अच्छा प्रदर्शन करेगा, इसके लिये बाजार का ज्ञान होना भी बहुत जरुरी है।

    म्यूच्यल फ़ंड हमेशा अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह करके ही खरीदें, आप ऊपर दी गई तालिका में देख सकते हैं, एक गलत निर्णय और आपके निवेश का सत्यानाश, बहुत सारे फ़ंड ऐसे भी हैं जो प्रदर्शन नहीं कर पाये, इससे बेहतर है कि अपने वित्तीय सलाहकार को शुल्क देकर सलाह लेना, तो आप अपने निवेश का बेहतर प्रदर्शन पा सकते हैं।

स्विप (SWP) क्या है, और ये कैसे सेवानिवृत्ति के बाद के लिये अच्छा उत्पाद है ? (What is Systematic Withdraw Plan)

    स्विप (SWP – Systematic Withdraw Plan) ऐसी योजना है जो कि निवेशक अपने म्यूचयल फ़ंड में से कुछ पैसा नियमित अंतराल से निवेश में से निकालने देती है। निकाला गया पैसा किसी ओर योजना में निवेश किया जा सकता है या फ़िर कुछ ओर खर्चों के लिये इसका उपयोग कर सकते हैं। साधारणतया: स्विप को सेवानिवृत्ति के बाद होने वाले नियमित खर्चों को पूरा करने के लिये अच्छे से उपयोग किया जा सकता है।

    स्विप से नियमित अंतराल के बाद कुछ नियत राशि या फ़िर variable राशि निकाल सकते हैं। निकासी स्विप से मासिक, तिमाही, छ:माही या वार्षिक कर सकते हैं। इस योजना में समय अंतराल निवेशक को अपनी जरुरत और प्रतिबद्धताओं के अनुसार चुनना चाहिये।

    साधारणतया: स्विप में कई लाभ हैं, यह आपके निवेश से एक नियमित समय अंतराल के बाद आपको आपकी चाही गई रकम तो देते ही हैं, साथ में आपकी मूल निवेश की गई रकम सीधे बाजार में निवेश रहती है, तो निवेश पर वापसी बहुत अच्छी होने की उम्मीद होती है, आपका मूल निवेश मुद्रास्फ़ीति से भी दो-दो हाथ करता रहता है और स्विप आपका भविष्य सुरक्षित करने में मददगार साबित होता है।

    स्विप में आप शेयर बाजार के उतार चढ़ाव को भी झेल सकते हैं। नियमित अंतराल के बाद रकम निकासी से औसत मूल्य अच्छा मिलता है और निवेशक बाजार के उतार चढ़ाव का आनंद ले सकता है।

स्विप कैसे कार्य करती है – (How SWP working ?)

    स्विप म्यूचयल फ़ंड में ही एक योजना है, जिसमें नियमित अंतराल के बाद यह आपको अपने निवेश में से कुछ रकम निकासी की सुविधा देती है।

    अब म्यूचयल फ़ंड खरीदते हैं, तो उसे स्विप में ले सकते हैं, जिसमें आपको बताना होता है कि कितना रुपया हर महीने/तिमाही में कौन सी तारीख को चाहिये। जिस दिन म्यूचयल फ़ंड खरीदा जाता है, उस दिन की एन.ए.वी. से आपको आपके निवेश की यूनिट मिल जाती हैं। और फ़िर अगले महीने से आपकी चाही गई रकम उन यूनिटों में से बेचकर आपको दे दी जाती हैं। इससे फ़ायदा यह है कि अगर लंबी अवधि में देखें तो हम बाजार के उतार चढ़ाव बहुत ज्यादा पायेंगे और ये उनसे लड़ने में सक्षम हैं।

    एक उदाहरण देखते हैं – एक व्यक्ति वर्ष २००२ में सेवानिवृत्त हुए, उन्होंने वित्तीय विशेषज्ञ की सेवाएँ ली और अपनी सेवानिवृत्ति राशि का २० लाख रुपया स्विप में लगाने का निर्णय लिया। और उन्होंने ९ जुलाई २००२ को रिलायंस ग्रोथ ग्रोथ म्यूचयल फ़ंड लिया। ९ जुलाई २००२ की एन.ए.वी. ३१.१८५ रुपये थी, और उन्हें ६४,१३३.३९७५ यूनिट मिलीं।

    अब हर माह उन्हें शुरु की २ तारीख को ही २०,००० रुपये मिल जाते थे, और उन्होंने उसे आज तक जारी रखा है, जैसा कि आप सभी ने देखा है कि इन पिछले आठ वर्षों में बाजार ने अपने कई उतार चढ़ाव देखें हैं और कई बने हैं और कई बर्बाद हुए हैं, आज अगर उनके फ़ंड की उन्नति को देखा जाये तो आप पायेंगे कि पिछले आठ वर्षों में उन्होंने स्विप से १९.२० लाख रुपये तो निकाले ही हैं और आज उनके पास ४५,५७७.८७९२ यूनिट उपलब्ध हैं जिसकी एन.ए.वी.  ४५९.८४६८ है, और कुल निवेश की राशि आज हो गई है २ करोड़ से भी ज्यादा जी हाँ बिल्कुल सही पढ़ा आपने उनकी आज की रकम है २,०५,६९,६०२.२५ रुपये। जी २५,६१२% की वापसी।

    दूसरा उदाहरण देखिये – एक और व्यक्ति थे उन्होंने अपने राशि बैंक में मासिक आय योजना में रखी थी, और उन्हें ब्याज उस समय मिला लगभग १२% पर आज उनकी मूल राशि तो २० लाख रुपये ही है, जो कि आज की मुद्रास्फ़ीति से लड़ने में असक्षम है।

इस तालिका में देखिये –

निवेश योजना दिनांक रकम आहरित रकम वर्तमान राशि
रिलायंस ग्रोथ – ग्रोथ म्यूचयल फ़ंड स्विप योजना ९ जुलाई २००२ २०,००,००० १९,२०,००० २,०५,६९,६०२.२५
ग्रोथ – २५,६१२%
बैंक में सावधि जमा मासिक आय योजना ९ जुलाई २००२ २०,००,००० १९,२०,०० २०,००,०००
ग्रोथ – ० %

तो अब आप ही समझ सकते हैं कि निवेश में किसका निर्णय सही था।

    कर कितना देना पड़ता है – (Income Tax !!!)

    अभी तक कर का प्रावधान इस प्रकार था –

    पहले वर्ष शार्ट टर्म कैपिटल गैन टैक्स देना होता था, जितनी यूनिट आपकी बाजार में बिकी हैं, उस हर यूनिट पर होने वाले फ़ायदे पर और एक वर्ष के बाद लांग टर्म कैपिटल गैन टैक्स से मुक्त था, पर इंडेक्सेशन से कर लगता था।

    अब नये कर प्रस्ताव में लांग टर्म कैपिटल गैन टैक्स की फ़िर से बहाली की गई है, जिसमें निवेशक को अब हर यूनिट पर होने वाले फ़ायदे पर अब एक वर्ष की अवधि के बाद भी कर देना होगा और इंडेक्सेशन के ऊपर भी कर देय होगा।

    इतने कर देने के बाबजूद भी यह योजना बहुत ही अच्छी है, जोखिमपूर्ण भी है। पर इसकी वापसी की तुलना किसी और वित्तीय उत्पाद से करना बहुत ही मुश्किल है।

वित्तीय विशेषज्ञ की सेवाएँ – ( Services of Financial Planner !!!)

    मेरी राय है कि जब आप बाजार आधारित कोई भी उत्पाद खरीदते हैं, और अगर खुद विशेषज्ञ नहीं हैं तो वित्तीय विशेषज्ञ की समय समय पर सेवाएँ जरुर लें जो आपके धन को सुरक्षित रखने में आपकी मदद करेगा।

    जैसे पहले उदाहरण में वित्तीय विशेषज्ञ की सेवाएँ केवल निवेश के समय ही ली गईं, अगर नियमित रुप से लेते, तो यही रकम लगभग ४ करोड़ हो गई होती। वित्तीय विशेषज्ञ अपनी सेवाओं के लिये कुछ मामुली सा शुल्क लेते हैं परंतु हमें वह शुल्क ज्यादा लगता है, अगर थोड़ा सा शुल्क देकर आपको अपने निवेश से ज्यादा बेहतर वापसी मिल रही है तो हर्ज ही क्या है।

ये भी पढ़ें –

सेवानिवृत्त हो रहे हैं ? सेवानिवृत्ति का धन, कैसे और कहाँ निवेश करें …. जिससे भविष्य अनिश्चिंत न हो.. ? (Getting Retired, Where to Invest the amount for good returns after retirement)

निवेश के लिये ज्यादा जानकारी पढें

मुंबई में हवस, हो सकता है कि गलती लड़्की की ही हो।

सीन १ – ऑफ़िस से निकलते हुए

    ऑफ़िस से निकले, गलियारे से होते हुए पैसेज में आये, वहाँ चार लिफ़्ट हैं बड़ी बड़ी, २५ लोग तो आराम से आ जायें इतनी बड़ी, पर हम साधारणतया: आते जाते समय सीढ़ियों का ही इस्तेमाल करते हैं, जिससे मन को शांति रहती है कि चलो कुछ तो व्यायाम हो गया। जैसे ही पैसेज में पहुँचे तो एक लिफ़्ट का इंडिकेटर नीचे जाने का इशारा कर रहा था, और हम लिफ़्ट के लोभ में उसमें सवार हो लिये।

    लिफ़्ट से नीचे जाते समय एक सुविधा होती है कि कोई न कोई पहले से रहता है तो ग्राऊँड फ़्लोर का बटन नहीं दबाना पड़ता है, जबकि इसके उलट ऊपर जाना हो तो बटन दबा है या नहीं अपने फ़्लोर का ध्यान रखना पड़ता है।

    जैसे ही लिफ़्ट में पहुँचे तो देखा कि एक लड़की पहले से थी, मोबाईल हाथ में और मोबाईल का हेंड्स फ़्री कान में लगा हुआ, किसी गाने का आनंद उठा रही थी, हमने एक नजर देखा और लिफ़्ट के कांच में अपने को निहारने लगे कि कितने मोटे हो गये हैं, बाल बराबर हैं या नहीं, तो ध्यान दिया कि वो लड़की टकाटक हमारी ओर देखे जा रही थी, बस हमें शरम आ गई, वैसे ये कोई विशेष बात नहीं है, विपरीत लिंगी आकर्षण में सब देखते हैं।

    पर मुंबई में लोगों की नजरें बहुत खराब होती हैं, आप नजर से पहचान सकते हैं कि साधारण तरीके से देख रहा है या हवस की नजर से, कोई भी कैसा भी हो बस हवस का शिकार होता है, फ़िर भले ही वो नजर की हवस हो या मन को तृप्त करने की।

सीन २ – बस को पकड़ने की जद्दोजहद

    हम सबकुछ भूलकर ऑटो लेने निकल पड़े, तो बस स्टॉप से होकर गुजरे थोड़ा आगे सिग्नल है लिंक रोड का, जिस पर शाम के समय लम्बा ट्राफ़िक रहता है, बसें एक के पीछे एक लगी रहती हैं, एक बस स्टॉप पर नहीं रुकी और एक लड़का और एक लड़की उस बस के पीछे दौड़ने लगे, क्योंकि आगे सिग्नल था और बस की गति कम थी और जैसे तैसे बस में सवार हो लिये, लड़के और लड़की ने जमकर सुनाई कंडक्टर को, इतने मॆं उसके पीछे वाली बस से एक लड़की उतरी और आगे वाली बस में चढ़ने की कोशिश में दौड़ने लगी, परंतु जब तक चढ़ पाती सिग्नल हरा हो गया और बस की गति तेज हो गई और इस चक्कर में वह चढ़ नहीं पाई।

    उसके बाद उसने बस न पकड़ पाने और अपनी नादानी में पहले तो अपना पैर पटका और फ़िर एक हाथ की हथेली पर दूसरे हाथ से मुक्का बनाकर बस न पकड़ पाने की असफ़लता प्रदर्शित की, जब उसे ध्यान आया कि वह सड़क पर यह कर रही है तो सकपकाकर आसपास देखा तो पाया कि हम उसकी गतिविधियों को देख रहे हैं, तो मुस्करा उठी और हम भी।

सीन ३ – हो सकता है कि गलती लड़्की की ही हो।

    ऑटो में घर जा रहे थे कि एस.वी.रोड मलाड पर एक नजारा देखा, मोटर साइकिल पर एक लड़का बैठा था और एक लड़की उसके पास में खड़ी थी, लड़के ने लड़की की सूट की कॉलर पकड़ रखी थी और दूसरे हाथ से घूँसा दिखा रखा था।

    तो ऑटो वाला बोला कि इस लड़के को लोग अभी जम कर पिटेंगे तभी इसको समझ में आयेगा। तो मैं बोला कि तुम ये क्यों सोचते हो कि लड़के की गलती होगी हो सकता है कि लड़की सड़क पर बीच में चल रही होगी और लड़का बाईक से गिरते हुए या उसकी दुर्घटना होने से बच गया होगा, इसलिये गुस्सा हो रहा होगा। ऑटो वाला बोला परंतु ऐसा थोड़े ही होता है।

    मैंने उसको बोला कि स्कूटर और ट्रक की टक्कर में लोग बेचारे ट्रक वाले को ही मारते हैं, क्यों क्योंकि स्कूटर छोटी गाड़ी है, पर गलती तो स्कूटर की भी हो सकती है ना !! तो बोलता है कि हाँ साहब बराबर बोलते हैं। हो सकता है कि गलती लड़्की की ही हो।