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रीयल एक्टिव फ़ाईबर प्लस (Real Activ Fiber +)

    रीयल एक्टिव फ़ाईबर प्लस (Real Activ Fiber +) डाबर इंडिया लिमिटेड का उत्पाद है जो कि पूरी तरह से देशी है। दावा किया गया है कि यह १०० प्रतिशत फ़लों का रस है, अलग से शक्कर नहीं डाली गई है और न ही किसी प्रिजर्वेटिव का उपयोग किया गया है।

    dabur_active_fiber यह गुणकारी है इसका एक ग्लास जूस पीने से जो कि लगभग २०० मि.ली. होता है से एक फ़ल की आपूर्ती करता है, और ४०% तक कम कैलोरी आपको मिलती हैं जो कि आपके मनपसंदीदा नाश्ते में होती हैं। नाश्ता – एक समोसा, या पिज्जा की स्लाईस या फ़िर बटर सैडविच।

    इसमें फ़लों का गूदा मिलाया गया है जिससे यह गाढ़ा और अच्छे स्वाद का होता है। यह आपको तरोताजा कर देगा।

    आज फ़ाईबर की जरूरत क्यों है ? क्योंकि हो सकता है कि आपको खाने मॆं भरपूर फ़ाईबर नहीं मिल रहा हो तो आहार को संतुलित रखने के लिये यह जरूरी है। रोज आहार में कितना फ़ाईबर लेना चाहिये ? रोज खाने में २५ ग्राम फ़ाईबर लेना चाहिये और इसके एक गिलास से ३ ग्राम फ़ाईबर की आपूर्ती शरीर को होती है।

इसके चार गुण बताये गये हैं –

Manage weight & Stay fit

Keep digestive system healthy

Maintain heart health

Enhance fullness

एक लीटर के पैक में लगभग ५३० कैलोरी होती हैं।

    इस पैक को रिसायकल्ड डब्बे में पैक किया गया है वैसे इसकी एम.आर.पी. ९० रुपये है, परंतु अभी ट्रायल ऑफ़र में ७० रुपये में उपलब्ध है। एक्स्पायरी छ: महीने की है।

    हमने इसके दो भिन्न स्वादों को चखा है पहला है मल्टी फ़्रूट और दूसरा है ओरेंज सिट्रस पंच।

    मल्टी फ़्रूट का स्वाद हमें बहुत भाया और ओरेंज सिट्रस पंच थोड़ा खट्टा है ऐसा लगता है कि जैसे संतरा ही मुंह में रख लिया है।

कुल मिलाकर अच्छा है और नये स्वादों को चखने की इच्छा है।

मोबाईल नंबर पोर्टेबिलिटी याने कि अच्छे ग्राहकों के लिये झंझट (Mobile Number Portability)

    जब भी किसी नये शहर में जाओ और अगर राज्य भी बदल जाये तो फ़िर सबसे बड़ी समस्या आजकल आती है, मोबाईल नंबर की, क्योंकि रोमिंग पर नंबर महँगा पड़ता है और लोकल में कम से कम आने वाले फ़ोन के लिये तो पैसे नहीं खर्च करना पड़ते हैं।

    समस्या नयी जगह जाकर होती है कि कौन सी कंपनी की सेवाएँ अच्छी हैं और किसके टैरिफ़ प्लान अच्छॆ हैं, यहाँ आकर टाटा डोकोमो (Tata docomo) लिया क्योंकि टैरिफ़ प्लान बहुत अच्छा था, ३४९ रुपये में ७५० मिनिट लोकल और एस.टी.डी. फ़्री, २०० एस.एम.एस. फ़्री, २०० एम.बी. जी.पी.आर.एस. डाटा फ़्री और ऊपर से ३जी, जो कि ३जी में सबसे सस्ता प्लान था। जब डोकोमो के शोरूम पर पहुँचे तो पता चला कि एक रीबोक की घड़ी उपहार में है, हालांकि हमें घड़ी की जरूरत नहीं थी, फ़िर भी ले ली, अब मुफ़्त में जो मिले वो अच्छा है यह हम भारतियों की मानसिकता है और मैं तो कट्टर भारतीय हूँ 🙂 ।

    समस्या शुरु हुई नेटवर्क को लेकर जब ऑफ़िस में हमें नई जगह मिली तो वहाँ कभी सिग्नल ऐसे आते थे कि जैसे मोबाईल फ़ोड़्कर निकल जायेंगे और कभी ऐसे गायब जैसे गधे के सिर से सींग, फ़िर घर आते आते बीच में कहीं कहीं तो ये हालत है कि २ कि.मी. तक के क्षैत्र में सिग्नल ही नहीं मिलते हैं, हमने १२१ पर उपभोक्ता सेवा पर फ़ोन किया तो हमें कहा गया कि हम क्षमा चाहते हैं, हम जल्दी ही नेटवर्क कवरेज ठीक करते हैं, वैसे अभी भी बहुत अच्छा है, सबसे बड़ी खासियत यह है कि कोई भी कंपनी कभी अपनी गलती मानती ही नहीं। हमें कहा गया कि आप जिस हैंडसेट का उपयोग कर रहे हैं, उसमें समस्या है तो हमने उनसे कहा भई हमारे पास एक बी.एस.एन.एल. की सिम है और उसी हैंडसेट में बराबार सिग्नल आते हैं, कोई समस्या नहीं फ़िर आपकी कंपनी की सिम क्या हैंडसेट पहचान लेता है या हमारे हैंडसेट से आपकी कंपनी की कोई दुश्मनी है, तो कोई जबाब नहीं मिला।

    और तो और फ़ोन पर अगर पूरे सिग्नल आ रहे हैं और किसी और फ़ोन से प्रयास करेंगे तो भी आपको सुनाई देगा कि फ़ोन बंद है या नेटवर्क कवरेज के बाहर है। हमने डोकोमो से कहा कि अगर आप को इतना ही अपने नेटवर्क पर विश्वास है तो आईये अपने हैंडसेट के साथ और जहाँ जहाँ हम कह रहे हैं वहाँ चलिये हमारे साथ और बताईये हमें कि आपका नेटवर्क बहुत अच्छा है, तो हमें कहा गया कि नहीं हमारे यहाँ यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।

    आखिरकार परेशान होकर हमने फ़ैसला लिया कि अब दूसरी कंपनी की सेवाएँ ली जायें, हालांकि सब कंपनियों का हाल एक जैसा है, चोर चोर मौसेरे भाई बिल्कुल सटीक कहावत है इनके लिये। जब हमने नंबर पोर्टेबिलिटी के लिये आवेदन दिया तो हमारे पास फ़िर उपभोक्ता सेवा डोकोमो से फ़ोन आये कि क्या समस्या है तो फ़िर वही राग आलापा गया खैर अब १९०१ से संदेश आ गया है कि आपका नंबर एयरटेल (AirTel) में हो जायेगा।

    नंबर पोर्टेबिलिटी में जिस कंपनी का सिम अभी उपयोग किया जा रहा है वह कंपनी बहुत आसानी से एन.ओ.सी. नहीं देती है और मोबाईल नंबर पोर्टॆबिलिटी का आवेदन का जो नया नंबर होता है वह केवल १५ दिन वैध रहता है। सरकार ने अच्छी सुविधा तो दी है, परंतु अभी भी इसमें बहुत जटिलता है, इसे और सुगम बनाना होगा।

    खैर अब देखते हैं कि एयरटेल की मोबाईल सुविधा आनंदमय होती है या फ़िर ९० दिन बाद नई कंपनी के लिये जाना होगा ।

स्पीक एशिया ऑनलाईन संभावित बड़ा घोटाला तो नहीं (Probable Scam SpeakAsiaOnline.com !!)

कुछ दिनों पहले इंदौर से भाई का फ़ोन आया कि क्या आपने स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com का नाम सुना है, हमने कहा कि नहीं भई बताओ हमें भी क्या है यह ?

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जैसा हमारा भाई स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के सेमिनार में सुनकर आया था, वह यह था –

स्पीक एशिया ऑनलाईन  SpeakAsiaOnline.com के बारे में –

  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कंपनी पिछले ५-६ वर्ष से सर्वे में है।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कंपनी पहले मानविक सर्वे करवाती थी।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कंपनी मानविक सर्वे से अच्छे परिणाम न आने के कारण ऑनलाईन सर्वे करवाने बाजार में आयी है।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com मानविक सर्वे में पहले अपने अधिकारी को प्रति सर्वे फ़ॉर्म ५०० रुपये तक देती थी, परंतु आम आदमी अपनी जानकारी नहीं देता था, तो जो कंपनी स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.comको सर्वे के लिये अनुबंधित करती थी, वह बाजार से सही जानकारी नहीं ले पाती थी, क्योंकि अधिकारी अपने मनमर्जी से किसी की भी जानकारी दे देता था।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com अधिकारी को पहले महीने में ६-८ फ़ॉर्म देती थी जिससे केवल वह अधिकारी कड़ी धूप में कड़ी मेहनत करके ही ४,००० रुपये तक कमा पाता था।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com ने बाद में फ़ैसला किया कि अब अधिकारियों को फ़ॉर्म देने की जगह अब सीधे उपभोक्ता से जुड़कर सीधे उनसे ही सर्वे करवाया जाये।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com ने लगभग ११ महीने पहले ऑनलाईने सर्वे की शुरुआत की जिसका अंतर्जाल पता है www.speakasiaonline.com
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com अपना नया सर्वर लगा रही है जो कि फ़ेसबुक और गूगल से भी बड़ा होगा।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com एक नया टीवी चैनल शूरु करने जा रही है।

स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के रजिस्ट्रेशन के बारे में –

स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के विज्ञापन के बारे में –

स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com संभावित घोटाला क्यों हो सकता है –

  •  स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कंपनी सिंगापुर में व्यापार करने के लिये सिंगापुर सरकार द्वारा क्यों प्रतिबंधित है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com जब से घटित की गई है, तब से ३ बार अपना नाम क्यों बदला ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कंपनी का नाम सर्वे कंपनियों में क्यों नहीं आता है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के बारे में कुछ लोग कहते हैं कि यह पिछले १५ वर्षों से बाजार में है, पर वेबसाईट पर स्पीक एशिया ऑनलाईन के रजिस्ट्रेशन के बारे में यह क्यों बताया गया है कि यह २००६ में रजिस्टर्ड है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com ने अपने किसी भी ग्राहक के बारे में क्यों जानकारी नहीं दी है जो कि उनके सर्वे का उपयोग करते हैं ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com अपने कमाई का जरिया क्यों नहीं बताता है, वह क्यों छिपाकर रखा है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com क्यों अभी तक डॉलर में पैसा दे रही है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com पैनल को देने वाली रकम जो कि कमाई है भारत सरकार को कर क्यों नहीं दे रही है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com सर्वे से क्या पैसे कमाना क्या इतना आसान है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com केवल बुधवार को मात्र एक घंटे काम करने पर कैसे १,००० रुपये पैनल को देती है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com सर्वे जैसी और भी ऑनलाईन सर्वे कंपनियाँ बाजार में क्यों नहीं हैं ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com सर्वे कंपनी से अगर वाकई पैसे कमाना इतना आसान है तो केवल एक ही सर्वे कंपनी बाजार में क्यों है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कह रही है कि उनकी कमाई इस वर्ष में ११५ मिलियन डॉलर से ज्यादा हो जायेगी तो हरेन्द्र कौर (सीईओ) और तारक बाजपेयी (भारत प्रमुख) के नाम शीर्ष प्रमुखों की सूची में कहीं भी क्यों नहीं हैं।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com का नाम कहीं भी बिजनैस टाइकून्स में क्यों नहीं है, जबकि वैश्विक स्तर पर इतनी तेजी से बड़ती हुई कंपनी है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com का अभी तक भारत में कोई कार्यालय क्यों नहीं है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के वेबसाईट पर कोई भी वैधानिक दस्तावेज प्रदर्शित क्यों नहीं है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कंपनी अगर बंद हो जाती है तो भारत में कोई भी अधिकृत व्यक्ति नहीं है क्यों ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कमाई से टीडीएस क्यों नहीं काटती है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com पर सीईओ और एम.डी. के संदेश क्यों नहीं हैं ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com क्यों एक जैसे सर्वे प्रति बुधवार दे रही है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com एक जैसे सर्वे देने से क्या इनको वाकई कमाई हो रही है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com एक डॉलर के ५० रुपये कैसे दे रहा है जबकि इसका असली बाजार मूल्य ४६ रुपये के आसपास है ?

स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के जैसे घोटाले पहले भी भारत में हो चुके हैं –

स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के बारे में क्या ज्यादा जानकारी के लिये भारत सरकार कुछ कर रही है ? अभी तक लगभग ९ लाख लोगों से ये लोग पैसे ऐंठ चुके हैं और लगातार भोले भाले लोगों को फ़ँसा रहे हैं, क्या साईबर क्राईम पुलिस इस बारे में संज्ञान लेकर इसकी तह तक जाने की कोशिश करेगी ? क्या रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया इतने बड़े फ़ोरेक्स ट्रांजेक्शनों से अनभिज्ञ है ?

आज जब मैंने कंपनी की वेबसाईट पर जाकर डेमो सर्वे करने की कोशिश की तो एरर मैसेज आ गया –

speakasiaonline

अपनी प्रतिक्रिया बतायें – वैसे मुझे तो लगता है कि कंपनी अगस्त २०११ में सब माल असबाब लपेटकर गायब होने वाली है। बाकी तो समय ही बतायेगा कि क्या सही है और क्या गलत !!

ये अन्ना की जीत है, आम भारतीय की जीत अभी दूर है, क्या रिश्वत माँगते हुए उनकी रूह इस लोकापाल बिल से कांपेगी ?

    जो भी घटनाक्रम जंतर मंतर पर घटित हो रहा है, वह केवल और केवल अन्ना की जीत है, आम भारतीय की जीत तो अभी बहुत दूर है। अन्ना ने तो केवल आगाज किया है भ्रष्टाचार के विरूद्ध लड़ाई का, शंखनाद किया है। लोकापाल बिल पर सरकार के द्वारा माँग मान भी ली गई हैं, परंतु अभी कुछ भी साफ़ नहीं है।

    क्या इस लोकापाल बिल से भ्रष्टाचारी डरेंगे ? क्या रिश्वत माँगते हुए उनकी रूह इस लोकापाल बिल से कांपेगी ?

    आम भारतीय चाहता है कि उसे रिश्वत न देनी पड़े और और ईमानदारी से कार्य हो जाये, परंतु कुछ सुविधाएँ तब भी ऐसी हैं जहाँ जनता खुद ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है, जिससे उन्हें आराम हो, या उनका काम जल्दी हो जाये।

   पहले आम भारतीय को तहेदिल से अपने को ईमानदार बनना होगा, तभी हम भारत को भ्रष्टाचार मुक्त देश बना सकते हैं।

    पर क्या आम भारतीय सुधरेगा ? हाँ मैं आज से प्रण करता हूँ कि मैं भ्रष्टाचार को बढ़ावा नहीं दूँगा।

जय हिन्द !

भ्रष्टाचार के विरुद्ध बिल पास होने के बाद सबसे पहले भ्रष्टों को हटाना होगा (Corruption and Corrupted ppls)

    अन्ना हजारे अनशन पर बैठे हैं, और पूरा भारत उनके समर्थन में उतर आया है। सरकार दबाब में हैं और शायद सरकार को अंदेशा भी है कि जनता जागरूक है और अब कुछ भी हो सकता है। यह अच्छी बात है कि भ्रष्टाचार के विरूद्ध बिल पास हो जायेगा और हमें कुछ खामियों से युक्त ही सही पर एक सख्त कानून मिल जायेगा।

    कानून लागू करने वाले और कानून को मान्यता दिलाने वाले भी भ्रष्टाचार से मुक्त होने चाहिये, और इसके लिये पहले भ्रष्टों को उनकी गद्दियों से उतारना होगा।

    भ्रष्टाचार केवल सरकारी तंत्र में ही नहीं, यह हर जगह पाया जाता है और इस कानून की जद केवल सरकारी तंत्र तक ही रहने वाली है। कुछ भ्रष्टाचार ऐसे हैं जो कि किसी कानून के जरिये खात्मा नहीं किये जा सकते हैं, ऐसे भ्रष्टाचार केवल आमजन के जागरूकता से ही लगाम लगाई जा सकती है।

    अगले चुनाव पास ही हैं और हर शहर में भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चे खोले जा रहे हैं, उन्हीं में से एक अपना नेता चुनें जो कि ईमानदार हो या उसकी गारंटी देता है, क्योंकि जब सत्ता हाथ में आती है तो सब ईमानदारी गायब हो जाती है। और अपने नेता को अपने शहर से जिताने का संकल्प लें और उसके ऊपर अपना कंट्रोल भी रखें।

    अगर सरकारी तंत्र से ही भ्रष्टाचार गायब हो जाये तो हर गाँव और शहर का कायाकल्प ही बदल जायेगा, लोग गरीबी से बाहर निकलेंगे। बच्चों को स्कूल में शिक्षा दिलाने के लिये भारी भरकम दान नहीं देना पड़ेगा और हमारे बच्चे भ्रष्टमुक्त देश में सांस ले सकेंगे।

अन्ना हजारे के समर्थन में मैं ( I am supporting Anna Hazare.)

     भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लोकापाल बिल लाने के लिये सरकार पर दबाब बनाने के लिये अन्ना हजारे के अनशन को मैं पूरा समर्थन करता हूँ।

    अन्ना आज आम मध्यमवर्ग की आवाज हैं, अन्ना उन सबकी आवाज हैं जो कि भ्रष्टाचार से त्रस्त हैं। आखिर कब तक हम भ्रष्टाचार सहते रहेंगे और रिश्वत देते रहेंगे। सरकार की निर्दयता और निडरता देखिये कि अभी तक सरकार पर कोई असर नहीं हुआ।

    लगता है कि सरकार को जनता की ताकत का अंदाजा नहीं है और सरकार को लग रहा है कि समर्थन में खुलकर बहुत कम लोग हैं, तो ऐसा नहीं है समर्थन में भारत का हर व्यक्ति है बस वक्त की बात है, नींद खुलने की बात है।

    हिन्दी के ३०,००० ब्लॉगरों का समर्थन अन्ना के साथ होना चाहिये। और रोज ही भ्रष्टाचार के विरोध में और अन्ना के अनशन के समर्थन में लिखना चाहिये। यह जनता का अधिकार है और हम जनता हैं, इसे हमें लेना ही होगा।

    भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से राजनैतिक लोगों को और राजनैतिक पार्टियों को दूर ही रखना होगा, क्योंकि सभी राजनैतिक लोग और राजनैतिक पार्टियाँ गले गले तक भ्रष्टाचार तक डूबी हुई हैं।

    आईये भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन जो कि अन्ना हजारे ने शुरु किया है, उसका हिस्सा बनें, अपने अपने तरीकों से आंदोलन का हिस्सा बनें।

स्वर्ग में किसको जाने को मिलेगा ब्राह्मण, डॉक्टर या आईटी (IT) पेशेवर को… [Who will get entry in Swarg..]

स्वर्ग के द्वार पर तीन लोग खड़े थे।

भगवान

सिर्फ़ एक ही अंदर जा सकता है।पहला

मैं ब्राह्मण हूँ, सारी उम्र आपकी सेवा की है। स्वर्ग पर मेरा हक है।दूसरा

मैं डॉक्टर हूँ, सारी उम्र लोगों की सेवा की है। स्वर्ग पर मेरा हक है।तीसरा

मैंने आईटी (IT) में नौकरी की है|

भगवान

बस.. आगे कुछ मत बोल.. रुलायेगा क्या पगले ? अंदर आजातेरे फ़ोर्वर्डेड मेल्स, फ़ोलोअप्स, बेंच पर २ साल, नाईटशिफ़्टस, प्रोजेक्ट मैनेजर से पंगा, सीटीसी (CTC) से ज्यादा डिडक्शन्स, पिकअप ड्रॉप का लफ़ड़ा, लड़की ना मिलने की फ़्रस्ट्रेशन, क्लाईंट मीटिंग्स, डिलिवरी डेट्स, वीकेंड्स में काम, कम उम्र में बालों का झड़नासफ़ेद होना, मोटापे का प्रोब्लम, मेरे को सेन्टी कर दिया यार। आजा जल्दी अंदर आजा।

[एक मित्र का चैट पर मैसेज था, आईटी वालों का दर्द समझाने के लिये अच्छा मैसेज है]

भारत का गणतंत्र सिसक सिसक कर रो रहा है… और मैं अंदर बैठकर उसके बारे में लिख रहा हूँ (Republic India !)

आदतन आज सुबह नित्यकर्म के पहले घर का दरवाजा खोला, अखबार के लिये और जैसा कि रोज होता है अखबार नहीं आया। आदत है तब भी रोज देखने की आत्मसंतुष्टि के लिये, तो छज्जे पर थोड़ा सा बाहर निकल कर देख लिया, वहाँ किसी के सिसक सिसक कर रोने की आवाज आ रही थी, थोड़ा ध्यान से देखा तो वहीं बिजली के खंभे के पास तिरंगे में लिपटा गणतंत्र था जो कि शायद कोहरा घना होने का इंतजार कर रहा था।

मैं चुपचाप अंदर अपने घर में आ गया, कि कहीं गणतंत्र मेरे पास आकर मेरे पास आकर रोना ना सुनाना शुरु कर दे, मेरी घिग्घी बँधी हुई है, और गणतंत्र के सिसक सिसक कर रोने के कारणों के बारे में सोच रहा हूँ, अगर आप को पता चले कि भारत का बूढ़ा गणतंत्र क्यों सिसक सिसक कर रो रहा है.. तो मुझे अवश्य बताईये।

भ्रष्टाचारी रुपी रावण कब हमारे भारत देश से विदा होगा, कब हम इस रावण को जलायेंगे …

पिछली पोस्ट आज भ्रष्टाचार की नदी में नहाकर आये हैं.. आप ने कभी डुबकी लगाई .. से आगे…

    रोज के ६० पंजीयन करवाये जाते हैं इस भूपंजीयन कार्यालय द्वारा और बताया गया कि हर पंजीयन पर लगभग १५०० रुपयों की रिश्वत होती है। और जो दलाल होता है उसकी कमाई रोज की १० हजार से १५ हजार तक होती है, भूपंजीयन (सहदुय्यम अधिकारी) की कुर्सी ५०-६० लाख रुपये में बिकती है क्योंकि हर माह यहाँ लाखों की कमाई होती है, यह १५०० रुपये की रिश्वत तो केवल मकान मालिक और किरायेदार के करारनामे पर है, अगर कोई नये फ़्लेट या पुराने फ़्लेट के लिये जा रहा है तो उसकी रिश्वत की राशि बहुत ज्यादा होती है।

    उस कार्यालय में जाकर इतनी घिन आ रही थी कि कहाँ हम इस भ्रष्टाचार की नदी में आकर सन गये हैं, और नहाकर तरबतर हो चुके हैं। अपने आप पर गुस्सा भी था कि इस भ्रष्टाचार को हम धता भी नहीं बता पा रहे थे, मजबूरी में भ्रष्टाचार का साथ दे रहे थे, पर इस भ्रष्टाचार के बिना हमारा काम बिल्कुल नहीं होता यह तो हमें हमारे दलाल ने पहले ही बता दिया था, “खुद जियो और दूसरे को भी जीने दो” याने कि “खुद खाओ और दूसरे को भी खाने दो”

    क्या सरकार हमारी अंधी है या जो भ्रष्टाचार निरोधक अमले बना रखे हैं वो केवल औपचारिकताएँ पूरी करने के लिये बनाये गये हैं। हमारी कोर्ट भी संज्ञान नहीं लेती हैं, क्या इतनी मिलीभगत है, क्या हमारा पूरा तंत्र ही भ्रष्टाचार में लिप्त है, कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक भ्रष्टाचार के मामले को संज्ञान में लेते हुए कहा था कि सरकार को भ्रष्टाचार को कानूनन लागू कर देना चाहिये और किस काम का कितना पैसा खर्च होगा उसका भाव तय कर देना चाहिये। पर हमारे सरकारी कुंभकर्ण और रावण कभी नहीं जाग सकते।

    अब बताईये जिन लोगों को यहाँ जनता की सेवा के लिये बैठाया गया है वही लोग अपना काम करने की जनता से रिश्वत लेते हैं, और जनता भी दे देती है, क्या करे जनता भी, सब मिलीभगत है।

    भ्रष्टाचारी रुपी रावण कब हमारे भारत देश से विदा होगा, कब हम इस रावण को जलायेंगे, कब रावण को हर वर्ष जलाना छोड़ देंगे, इस रावण को जड़ से ही मिटा देंगे। कब….. बहुत बड़ा यक्ष प्रश्न है… पता नहीं हमारे भारतवासी कब हराम की कमाई छोड़ेंगे… जिस दिन यह संकल्प हर भारतवासी ने ले लिया उस दिन भारत में रामराज्य स्थापित हो जायेगा। दशहरे पर असत्य पर सत्य की विजय के साथ सभी को विजयादशमी की शुभकामनाएँ।

जाती है इज्जत तो जाने दो कम से कम भारत की इज्जत लुटने से तो बच जायेगी

    आज सुबह के अखबारों में मुख्य पृष्ठ पर खबर चस्पी हुई है, कि दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी के दौरान ही एक बन रहा पुल गिर गया, और २७ घायल हुए।

    इस भ्रष्टाचारी तंत्र ने भारत की इज्जत के साथ भी समझौता किया और भारत माता की इज्जत लुटने से का पूरा इंतजाम कर रखा है, ऐसे हादसे तो हमारे भारत में होते ही रहते हैं, परंतु अभी ये हादसे केंद्र में हैं, क्योंकि आयोजन अंतर्राष्ट्रीय है, अगर यही हादसा कहीं ओर हुआ होता तो कहीं खबर भी नहीं छपी होती और आम जनता को पता भी नहीं होता।

    हमारे यहाँ के अधिकारी बोल रहे हैं कि ये महज एक हादसा है और कुछ नहीं, बाकी सब ठीक है, पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम के आयोजन में इतनी बड़ी लापरवाही ! शर्मनाक है। हमारे अधिकारी तो भ्रष्ट हैं और ये गिरना गिराना उनके लिये आमबात है, पर उनके कैसे समझायें कि भैया ये अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नहीं चलता, एक तो बजट से २० गुना ज्यादा पैसा खर्चा कर दिया ओह माफ़ कीजियेगा मतलब कि खा गये, जो भी पैसा आया वो सब भ्रष्टाचारियों की जेब में चला गया। मतलब कि बजट १ रुपये का था, पर बाद में बजट २० रुपये कर दिया गया और १९.५० रुपये का भ्रष्टाचार किया गया है।

    अब तो स्कॉटलेंड, इंगलैंड, कनाडा, न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया ने भी आपत्ति दर्ज करवाना शुरु कर दी है, पर हमारे भारत के सरकारी अधिकारी और प्रशासन सब सोये पड़े हैं, किसी को भारत की इज्जत की फ़िक्र नहीं है, सब के सब अपनी जेब भरकर भारत माता की इज्जत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, अरे खुले आम आम आदमी के जेब से कर के रुप में निकाली गई रकम को भ्रष्टाचारी खा गये वह तो ठीक है, क्योंकि आम भारतीय के लिये यह कोई नई बात नहीं है, परंतु भारत माता की इज्जत को लुटवाने का जो इंतजाम भारत सरकार ने किया है, वह शोचनीय है, क्या हमारे यहाँ के नेताओं और उच्च अधिकारियों का जमीर बिल्कुल मर गया है।

    आस्ट्रेलिया के एक मीडिया चैनल ने तो एक स्टिंग आपरेशन कर यह तक कह दिया है कि किसी भी स्टेडियम में बड़ी मात्रा में विस्फ़ोटक सामग्री भी ले जाई जा सकती है, और ये उन्होंने कर के बता भी दिया है, विस्फ़ोटक सामग्री दिल्ली के बाजार से आराम से खरीदी जा सकती है और चोर बाजार से भी।

    अगर यह आयोजन हो भी गया तो कुछ न कुछ इसी तरह का होता रहेगा और हम भारत और अपनी इज्जत लुटते हुए देखते रहेंगे, और बाद में सरकार सभी अधिकारियों को तमगा लगवा देगी कि सफ़ल आयोजन के लिये अच्छा कार्य किया गया, और जो सरकार अभी कह रही है कि खेलों के आयोजन के बाद भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही करेगी, कुछ भी नहीं होगा। उससे अच्छा तो यह है कि कॉमनवेल्थ खेल संघ सारी तैयारियों का एक बार और जायजा ले और बारीकी से जाँच करे और सारे देशों की एजेंसियों से सहायता ले जो भी इस खेल में हिस्सा ले रहे हैं, अगर कमी पायी जाये तो यह अंतर्राष्ट्रीय आयोजन को रद्द कर दिया जाये।

    हम तो भारत सरकार से विनती ही कर सकते हैं कि क्यों भारत और भारतियों की इज्जत को लुटवाने का इंतजाम किया, अब भी वक्त है या तो खेल संघ से कुछ ओर वक्त ले लो या फ़िर आयोजन रद्द कर दो तो ज्यादा भद्द पिटने से बच जायेगी, घर की बात घर में ही रह जायेगी।