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About Vivek Rastogi

मैं २००६ से हिन्दी ब्लॉगिंग कर रहा हूँ, और वित्त प्रबंधन मेरा प्रिय विषय है। मेरा एक यूट्यूब चैनल भी है जिसे आप https://youtube.com/financialbakwas देख सकते हैं।

छोटा सा इंटरनेशनल मुंबई ब्लॉगर मिलन, हिन्दी भाषा के विकास पर चिन्तन

    मेरा पन्ना ब्लॉग के जितेन्द्र चौधरी जी कुवैत से मुंबई निजी यात्रा पर आये हुए हैं, तो उनसे थोड़ा सा समय लेकर आज १३ जून २०१० को  एक छोटा सा इंटरनेशनल मुंबई ब्लॉगर मिलन आयोजित किया गया । आयोजन का स्थान था, गोरेगांव पूर्व में फ़िल्म सिटी के सामने जावा ग्राईंड कैफ़े शॉप।

    ब्लॉगर मीट में आमंत्रण तो सभी ब्लॉगर्स को भेजा गया था परंतु अपने निजी कार्यों के चलते और मिलन अलसुबह ९.३० बजे रखने से कुछ ही ब्लॉगर्स आ पाये।

    सबसे पहले देवकुमार झा जी, फ़िर हम विवेक रस्तोगी, फ़िर शशि सिंह जी, फ़िर जीतू भाई (जितेन्द्र चौधरी), अनिल रघुराज जी और अभय तिवारी जी पहुंचे।

फ़ोटो एलबम देखने के लिये फ़ोटो पर क्लिक करें ।  

शशि सिंह जी और जीतू भाई की बहुत पहले की दोस्ती है, ये दोनों हिन्दी ब्लॉग जगत के शुरुआती योद्धा हैं। देवाशीष को भी याद किया गया जो कि उनके उसी दौर के मित्र थे, जब कि हिन्दी चिठ्ठा लिखने वाले कुछ ५० ब्लॉगर्स ही होंगे।

    जीतू भाई ने अपने अनुभव साझा किये, हिन्दी ब्लॉगजगत के शुरुआती दिनों के, जब तकनीकी रुप से किसी को भी ज्यादा महारत हासिल नहीं थी और लोगों को चैटिंग कर करके उनकी समस्याएँ हल करके हिन्दी ब्लॉगिंग के लिये उत्साहित किया जाता था, आज तो फ़िर भी ब्लॉगर्स तकनीकी रुप से काफ़ी सक्षम हैं और हिन्दी के लिये बहुत ही ज्यादा तकनीकी समर्थन उपलब्ध है।

बीच में अलबेला खत्री जी का फ़ोन आया, वे मुंबई आये हुए हैं और हमसे मिलने की इच्छा जाहिर की तो हमने बताया कि अभी एक छोटी सी हिन्दी ब्लॉगर मीट हो रही है, और अगर हमें पहले से पता होता तो हम आपको भी सूचित कर देते। जल्दी ही अलबेला खत्री जी से भी मुलाकात होगी।

हिन्दी भाषा और उसके अवरोधों पर विशेष चर्चा की गई, कि हिन्दी भाषा का विकास कैसे हो ?

    हिन्दी के विकास के लिये क्षैत्रिय भाषाओं का विकास होना बहुत जरुरी है, अगर क्षैत्रिय भाषाओं का विकास होता है तो हिन्दी का विकास तो अपने आप ही हो जायेगा। नये शब्दों के लिये जो बोझ हिन्दी के कन्धे पर है वह भी बँट जायेगा, और विकास तीव्र गति से होगा।

    क्षैत्रिय भाषाएँ हिन्दी रुपी वृक्ष की टहनियाँ हैं। बोलियों और भाषाओं की बात की गई। अगर आजादी के समय प्रशासन की भाषा संस्कृत होती तो शायद आज हमारी सर्वमान्य भाषा अंग्रेजी की जगह संस्कृत होती। अंग्रेजी बोलना हमारा मजबूरी हो गया है। हिन्दी का सत्यानाश हिन्दी बोलने वालों ने ही किया है। अब जैसे फ़्रेंच लोगों को देखें तो उन्हें अंग्रेजी आती है परंतु वे फ़्रेंच में ही बात करते हैं, क्योंकि वे अपनी भाषा से प्यार करते हैं, भाषा का सम्मान करते हैं।

    आज अंग्रेजी के मामले में हम हिन्दुस्तानी अंग्रेजों को टक्कर दे रहे हैं, उनसे आगे निकल रहे हैं।

    जीतू भाई ने भाषा के संदर्भ में ही अपना एक यूरोप का मजेदार किस्सा सुनाया, वे अपने दोस्त के साथ ब्रिटिश म्यूजियम घूमने गये थे और एक स्टेच्यू के सामने खड़े होकर मजाक कर रहे थे और कुछ टिप्पणियाँ कर रहे थे, वहीं पास में एक वृद्ध अंग्रेज खड़ा हुआ था उसने अवधी में जबाब दिया, और अवधी के ऐसे शब्दों का उपयोग किया कि हम लोग भी चकरा गये कि अरे अवधी के ये शब्द कैसे बोल पा रहा है, जिन्हें हम भी अच्छॆ से नहीं जानते हैं। तो फ़िर उसने बताया कि मैं भारत में ही पैदा हुआ था और हिन्दी बहुत ही अच्छी भाषा है, हिन्दी बहुत ही मीठी भाषा है और मैं हिन्दी भाषा से बहुत प्रेम करता हूँ वह इतनी अच्छी तरह से हमारी भाषा में बात कर रहा था कि हम चकित थे क्योंकि इतनी अच्छी तरह से तो हमें भी अपनी भाषा पर अधिकार नहीं है। फ़िर तो उसे अंग्रेज से बहुत बातें हुईं।

    जीतू भाई ने एक और किस्सा बताया कि वे जर्मनी में थे और उनके एक मित्र फ़्रेंच और जर्मनी में ही बात करते थे, उन्हें अंग्रेजी भी अच्छी आती थी, पर वे हर जगह फ़्रेंच या जर्मनी में ही बात करते थे, उनसे पूछा तुम अंग्रेजी में बात क्यों नहीं करते हो, तो उसका जबाब सुनकर सन्न रह गया, कि यार ये मेरी भाषा है अगर मैं अपनी मातृभाषा की इज्जत नहीं करुँगा तो कौन करेगा।

    हमें यह महसूस हुआ कि हम लोग अपनी भाषा छोड़कर दूसरी भाषाएँ बोलना शुरु कर देते हैं, तो क्या हम लोग अपनी भाषा की इज्जत नहीं करते हैं। अगर विकल्प न हो तो ठीक है परंतु अगर विकल्प है तो हमें अपनी भाषा में ही बात करनी चाहिये।

    ज्यादा दूर जाने की जरुरत नहीं है, अगर चैन्नई में लोगों को देख लो वे अपनी तमिल भाषा में ही बात करते हैं, अगर आप हिन्दी या अंग्रेजी में बात करेंगे तो बोलेंगे नहीं आती है, परंतु अगर हिन्दी में गाली दे दो तो फ़िर जितनी अच्छी हिन्दी उन्हें आती है, उतनी हमें भी नहीं आती है। वे अपनी भाषा का सम्मान करते हैं।

   जीतू भाई ने मदुरै का अपना एक और किस्सा सुनाया, कि वहाँ ऑटो वाले सब रजनीकांत स्टाईल में गले में रुमाल बांधकर रहते हैं, और हिन्दी नहीं आती है ऐसा बताते हैं, उनकी बात कुछ पैसे को लेकर हुई, और झगड़ा बड़ता गया, पर जैसे ही इनके एक मित्र ने तैश में आकर गाली दी, तो उस ऑटो वाले की धाराप्रवाह हिन्दी सुनकर पसीने आ गये। बोला कि गाली दिया इसलिये हिन्दी में अब बोल रहे हैं, गाली क्यों दिया…।

    हिन्दीभाषी इलाका न होने पर भी इतनी अच्छी तरह से हिन्दी बोलना और समझना कैसे संभव है ? इसका सबसे बड़ा योगदान है, बॉलिवुड का, बॉलिवुड की हिन्दी फ़िल्मों के कारण सभी को हिन्दी अच्छॆ से आती है।

    दुबई में ही देख लीजिये वहाँ अरबी अल्पसंख्यक हैं, वहाँ का ट्रैफ़िक पुलिस वाला अगर गाड़ी को रोकेगा और अगर काला आदमी मिलेगा तो सीधे मलयाली में बात करना शुरु कर देगा, और अगर बोलो नहीं मलयाली नहीं तो हिन्दी में शुरु हो जायेगा, हिन्दी भी नहीं तो अंग्रेजी में बोलने लगेगा।

    हिन्दी भाषा बोलने के तरीके से ही पता चल जाता है कि उस व्यक्ति को कितनी हिन्दी बोलनी आती है, जैसे कोई “भाईसाहब” बोलेगा तो सबके बोलने का तरीका अलग अलग होगा, उससे ही पता चल जायेगा कि हिन्दी कितनी गहराई से आती है।

    सब अपनी मातृभाषा से प्रेम करते हैं और वही बोलना चाहते हैं, पर जहाँ पेट की बात आती है, मजबूरी में दूसरी भाषा सीखनी पड़ती है, केरल में ही देख लीजिये सबको हिन्दी बहुत अच्छे से समझ में आती है। पेट के लिये दूसरी भाषा सीखनी ही पढ़ती है क्योंकि वह मजबूरी है। अंग्रेजी भी हम यहाँ पेट भरने के लिये ही सीखते हैं, न कि अपने शौक से।

    जीतू भाई ने कुवैत का एक उदाहरण बताया कि एक डिपार्टमेंटल स्टोर में गये तो अरबी सबको आती है किसी को नहीं भी आती है, वहाँ पर दुकानदार होगा अरबी, खरीदने वाला होगा हिन्दी,  बीच में सेल्समैन होगा फ़िलिपिनो, तीनों बोलेंगे अपनी अपनी भाषा पर समझा देंगे। शारीरिक भाषा, अगर आप कुछ बोलना चाहो कुछ चाहिये तो आप आराम से समझा सकते हैं, और वो भी समझेगा क्योंकि पेट का सवाल है। और कई बार नहीं भी समझ में आता है तो वहाँ पर सफ़ाई करने वाले होते हैं, अधिकतर बंगाली होते हैं, और उनको अधिकतर सारी भाषाएँ आती हैं, वे समझा देते हैं। लेकिन जहाँ तक की शारीरिक भाषा का सवाल है, सब समझा सकते हैं।

    भाषा से कहीं भी अवरोध नहीं होता है, शारीरिक भाषा से भी इसकी पूर्ती की जा सकती है। हम हमारी भाषा का कितना सम्मान करते हैं, ये हम पर और हमारे समाज पर निर्भर करते हैं।

पुरानी मुंबई ब्लॉगर मिलन की रिपोर्टिंग के लिये यहाँ चटका लगायें।

शीघ्र सेवानिवृत्ति कैसे ? भाग १ [Early Retirement How ? Part 1]

    शीघ्र सेवानिवृत्ति के लिये वित्तीय लक्ष्यों को निर्धारित करना आवश्यक होता है, दो महत्वपूर्ण तत्व हैं शीघ्र सेवानिवृत्ति की योजना बनाने के लिये – भविष्य के वित्तीय लक्ष्य और जरुरी मासिक खर्चों का आकलन ।

भविष्य के लिये वित्तीय लक्ष्य कैसे निर्धारित करें –

१. घर – रहने के लिये घर, जो कि आपकी जरुरतों के अनुसार हो सकता है।

२. कार – आपकी जरुरतों के अनुसार।

३. बच्चे की शिक्षा – बच्चे की उच्च शिक्षा में लगभग आज ८-१० लाख रुपये लगते हैं, तो मुद्रास्फ़ीति को ध्यान में रखते हुए, अपने बच्चे की उम्र के हिसाब से कितना धन होगा, निर्धारित करें।

४. बच्चे की शादी – शादी में आज लगभग १० लाख रुपये खर्चे होते हैं, कम या ज्यादा हो सकते हैं। बच्चों की शादी साधारण तरीके से भी हो सकती है।

५. सेवानिवृत्ति धन – यह इतना होना चाहिये कि कम से कम आपके मासिक खर्चे आराम से हो जायें और वर्तमान स्तर का जीवन यापन कर पायें।

कौन से वित्तीय लक्ष्य जरुरी हैं ?

१. बच्चे की शिक्षा

२. सेवानिवृत्ति धन

ये दो लक्ष्य बहुत जरुरी हैं अगर अपना घर नहीं है तो घर भी बहुत जरुरी है। अगर पैतृक घर है तो इस लक्ष्य को हटाया जा सकता है।

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शीघ्र सेवानिवृत्ति की उम्र क्या होनी चाहिये ?आपको कितने चाहिये १५ लाख या १५ करोड़ [Early Retirement !! When ?]

शीघ्र सेवानिवृत्ति कब ? [Early Retirement !! When ?]

    आज के युग में पढ़ाई कम से कम २० वर्ष की हो गई है, और जब तक युवापीढ़ी बाजार में आती है, उसकी उम्र २३-२४ वर्ष हो गई होती है, बाजार में आते ही उसकी नौकरी शुरु हो जाती है, और वह अपने घर के बुजुर्ग के बराबर ही कमाने लगता है और खर्च उनके मुकाबले लगभग बिल्कुल भी नहीं होता है। तो वह अपने शौक पूरे करता है और जो भविष्य की योजना निर्धारित करके चलता है वह अच्छे से निवेशित भी करता है। इस प्रकार वह आराम से सैटल भी हो जाता है और १२-१७ वर्ष में ही अपने सारी योजनाओं को मूर्त रुप दे सकता है, तो उसे ३० वर्ष तक नौकरी करने की आवश्यकता नहीं होती है।

    शीघ्र सेवानिवृत्ति की उम्र को निर्धारित नहीं किया जा सकता है, जब भी हमारे वित्तीय लक्ष्य पूर्ण हो जायें, तभी शीघ्र सेवानिवृत्ति की सही उम्र होती है। फ़िर भले ही वह ३० वर्ष ही क्यों न हो।

    जरुरी नहीं है कि जो कार्य आप कर रहे हैं वह अपनी इच्छा से कर रहे हों, हो सकता है कि अपनी इच्छा के विरुद्ध कर रहे हों, परंतु भविष्य की चिंता करते हुए और ज्यादा पैसा देखते हुए सोचते हैं कि अब तो यही करना होगा, अगर मन की करी तो लक्ष्य पूर्ण नहीं हो पायेगा।

    शीघ्र सेवानिवृत्ति के लिये वित्तीय लक्ष्यों का पता होना चाहिये और उन वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के बाद कैसे सही तरीके से निवेशित किया जाये यह भी पता होना चाहिये। जिससे खर्चे अच्छे से चलते रहें और आप अपने मनपसंदीदा कार्य में सही तरीके से ध्यान लगा पायें।

    वित्तीय लक्ष्य एक ऐसी विषय वस्तु है जो कि सबके लिये अलग अलग हो सकती है, किसी के लिये १५ लाख भी शीघ्र सेवानिवृत्ति के लिये बहुत होगा और किसी के लिये १५  करोड़ भी कम होगा । तो शीघ्र सेवानिवृत्ति की उम्र तो वित्तीय लक्ष्य साफ़ होने पर ही निर्धारित की जा सकती है।

बताइये क्या आप मेरे नजरिये से सहमत हैं।

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वो १ मिनिट का दृश्य और उसके चेहरे का संतोष…

    वह बहुत तेजी से चावल खा रहा था, जिसमें शायद दाल और कुछ सब्जी मिली हुई थी, पीले रंग की पीतल की तश्तरी से बड़ा सा बर्तन था, उसके बाँहें जो कि साँवली नहीं नहीं काली ही थीं.. उसमें से मसल्स दिख रहे थे… गंदी मैली बनियान या शायद गंदे रंग की बनियान पहने हुआ.. और लुंगी को डबल कर मद्रासी श्टाईल में लपेट कर पहना हुआ था… चेहरे पर गजब का संतोष था.. समय शाम का था लगभग ६.३० बजे का.. चेहरे पर संतोष से ऐसा लग रहा था कि उसने आज जो भी काम किया है उससे वो संतुष्ट है और खुश है कि वह आज का कार्य पूरा कर सका। और यह तो शायद सभी ने महसूस किया होगा जिस दिन कार्य बराबर होता है तो भूख कुछ ज्यादा ही लगती है। दिमाग की किसी ग्रंथी का संबंध जरुर पेट से रहता है।
    यह दृश्य अपने कार्यालय से घर लौटते समय ऑटो से १ मिनिट से भी कम समय में हमने किसी घर में देखा, जो कि सड़क किनारे ही था। केवल १ मिनिट के दृश्य के लिये भी कभी कभी इंसान कितने ही दिन सोचने पर मजबूर हो जाता है।

शीघ्र सेवानिवृत्ति [क्यों ?] [Early Retirement Why ?]

शीघ्र सेवानिवृत्ति क्यों ? [Early Retirement Why ?]

    जब कार्य स्थल पर कठिनाईयाँ आने लगती हैं, तो बहुत से लोग इस स्थिती से पलायन करने के लिये शीघ्र सेवानिवृत्ति के लिये सोचने लगते हैं, परिवार का यह मानना होता है। परंतु आजकल की बदली हुई कार्य की परिस्थितियों को हमारे परिवार नहीं समझ पा रहे हैं , कि कितने दबाब में कार्य करना होता है, जब निजी कंपनियाँ ज्यादा रुपया देती हैं तो हरेक रुपये के एवज में निचोड़ कर काम भी लेती हैं। परिवार को लगता है कि हमारा पुत्र ज्यादा रुपया कमाकर वैभवशाली जीवन निर्वाह कर सकता है, परंतु अगर हम उस पुत्र की मनोस्थिती समझें तो शायद उसकी कार्य करने की परिस्थितियों को समझने में असमर्थ होंगे। क्योंकि जो कार्य आजकल की पीढ़ी कर रही है, जैसे कर रही है वह परिवार के बुजुर्ग समझ ही नहीं सकते, क्योंकि उन्होंने वैश्विक तौर तरीकों से कभी कार्य ही नहीं किया है और न ही उतनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी क्षमताओं में कोई कमी थी, परंतु उन्हें उन कार्य परिस्थितियों का अंदाजा ही नहीं है।

    शीघ्र सेवानिवृत्ति एक ऐसा विषयवस्तु और जीवनचर्या है जो कि आज के युवा को बहुत पसंद आ रहा है। शीघ्र सेवानिवृत्ति क्यों लिया जाये ? और इसके बाद करें क्या ? ये सब सवाल होते हैं, हमारे परिवार के बड़े बुजुर्गों के, जिनकी सोच को रुढिवादी बोला जा सकता है, परंतु बेकार नहीं, क्योंकि उन्हें जिंदगी का अनुभव होता है और सोच परिपक्व होती है। हाँ वो हमारे इस शीघ्र सेवानिवृत्ति के निर्णय से एकदम सहमत तो नहीं होंगे, परंतु उन्हें बदली हुई परिस्थितियों को समझाया जा सकता है।

    कितने लोग नौकरी या व्यापार अपनी खुशी से करते हैं और कितने लोग इसे मजबूरी से करते हैं, करना कुछ चाहते हैं परंतु कुछ ओर ही कर रहे होते हैं। जैसे किसी की इच्छा तो वैज्ञानिक बनने की होती है परंतु बन जाते हैं पत्रकार, या बैंकर या कुछ ओर । बस इस प्रकार से केवल अपने जीवन यापन के लिये जिस भी क्षैत्र में मौका मिल जाता है उसी में कार्य करने लगते हैं, फ़िर भले ही मन मारकर कार्य कर रहे होते हैं।

नौकरी या व्यापार क्यों करते हैं ?

    नौकरी या व्यापार करने का मुख्य उद्देश्य होता है, “पैसा कमाना”। और भी उद्देश्य होते हैं जो कि इस प्रकार हो सकते हैं – समाज में अपनी पहचान बनाना, अपनी प्रतिभा से सबको कायल करना, वैभवशाली जीवन शैली को जीना, अपने को संतुष्ट करना, और भी बहुत कुछ।

आखिर कब तक करें –

    जैसी जीवनशैली से आप संतुष्ट हों और उस जीवनशैली में ही मजे में जीवन जी सकें और अपने बच्चों और निर्भर सदस्यों का भविष्य निखार सकें।

    परंपरागत तौर पर ५५ से ६५ वर्ष तक की उम्र सेवानिवृत्ति की मानी जाती है, क्योंकि उस समय आय का एकमात्र साधन घर का मुखिया ही होता था, या फ़िर आय कम होती थी। परंतु अब बदली हुई परिस्थितियों में आय भी बड़ी है, जीवन स्तर भी बड़ा है। पहले सेवानिवृत्ति पर जितना धन सेवानिवृत्त को मिलता था उससे कहीं ज्यादा धन तो आज की पीढ़ी ३५ वर्ष की उम्र में जमा कर लेती है। तो उस धन को निवेश कर आराम से शीघ्र सेवानिवृत्ति का मजा ले सकते हैं, परंतु कोई इस विषय पर नहीं सोचता है, और मशीनी तरीके से पूरी जिंदगी निकाल देते हैं।

    अगर जीवन यापन के लिये जरुरी रकम हमें मिलती रहे तो अपने रहन सहन और घर खर्च की चिंता के बगैर हम अपने मन पसंदीदा कार्य को कर सकते हैं।

    परंतु भविष्य के प्रति अनिंश्चिंत होकर बिना योजना के  वह कार्य करता रहता है। योजना बनाने से सुदृढ़ भविष्य का निर्माण कर सकते हैं, और अपने परिवार और समाज को सही दिशा में बड़ा सकते हैं। जितना समय हम ज्यादा रुपया कमाने में देंगे, उससे कहीं ज्यादा हम अपने परिवार और समाज के लिये समय देने की प्रतिबद्धता कर दे सकते हैं। और अपने राष्ट्र का एक उज्जवल भविष्य निर्माण कर सकते हैं।

पाठकों की राय अपेक्षित है —

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यूनियन कार्बाइड की जहरीली गैस में लोग अभी भी घुटकर मर रहे हैं ।

      कल खबर सुनी कि २५ वर्ष के बाद यूनियन कार्बाइड का फ़ैसला न्यायालय ने दे दिया है, वो २ दिसंबर की काली रात एकदम गहरी स्याह हो उठी जब इस जहरीली गैस ने भोपाल को अपने आगोश में ले लिया था, और आज फ़िर ऐसा लगा कि वापिस वही गैस पूरे देश में फ़ैल गई है, और जिनके पास दिल हैं वे सभी लोग घुटकर मरे जा रहे हैं। मेरा भारत महान, उसके नेता और न्यायपालिका महान !!!


    जहरीली गैस से मरे हुए और मरने वाले लोगों और घुट रहे लोगों को नम श्रद्धांजली।

झमाझम मानसून की बारिश, मुंबई में फ़्रेंच विन्डो के आनंद और छाता

    आज सुबह फ़िर एक नये सप्ताह की शुरुआत हुई, वो भी मानसून की बारिश के साथ, चारों ओर घनघोर बादल छाये हुए थे, और झमाझम बारिश हो रही थी। इसी बीच सुबह हम अपने बेटे को स्कूल बस पर छोड़ने गये तो वो जिद करने लगा कि छाता ले चलो, हमने उससे कहा कि छाते की जरुरत ही नहीं है, ज्यादा तेज बारिश नहीं है। बस हमने इतना कहा और बारिश जोरों की होने लगी, पहले तो पेड़ के नीचे शरण ली, पर बारिश कुछ ज्यादा ही झमाझम थी फ़िर हमने एक दुकान के नीचे शरण ली, जैसे ही बस आयी वैसे ही हम दौड़कर सड़क पर आ गये।

    मुंबई में पहली बारिश नहीं है, दो दिन पहले आधी रात को जबरद्स्त बारिश थी, समय तो हम देख नहीं पाये, पर यहाँ पर प्रचलित फ़्रेंच विन्डो के कारण प्रकृति के आनंद ले लेते हैं। सोते हुए अपने पर कुछ हवा के साथ बूँदे उड़कर आयीं, तो एकदम पता चल गया कि बारिश आ गई है, जल्दी से उठे और विन्डो के काँच बंदकर वापिस से सो लिये।

    आनंद बिल्कुल वैसा था जब अपने घर पर छत पर कभी कभार सो लिया करते थे, और रात को बारिश आ जाती थी, तो गद्दा तकिया चादर सब उठाकर भागते थे, घर में खटखटाते थे, किवाड़ खुलने पर पता चलता कि बारिश बंद हो गई है, तो फ़िर मन मारकर घर में ही सो जाते थे। यह सोचकर गुस्सा आता था कि बारिश को आना ही है तो जरा ज्यादा आये, हमारा बोरिया बिस्तर समेटने में इसको क्या मजा आता है।

    बिस्तर पर लेटे लेटे ही रात में तारे गिन लो, खुली हवा का आनंद लो, यह सब आनंद अपने छत पर सोने में आते थे, अब यही सब आनंद मुंबई के छोटे से फ़्लेट में भी आते हैं, बस अंतर यह है कि ऊपर छत रहती है, यही तो फ़्रेंच विन्डो के आनंद हैं।

    आज सुबह सुबह ही छाते की खोज हुई तो एक छाता अलमारी में लटका हुआ मिल गया, कि चलो अब तो मेरी सुध ली, फ़िर छाते को चेक किया गया, तो ठीक ठाक अवस्था में पाया गया। तय किया गया कि आज ही २ छाते ओर लाने होंगे, मानसून जो आ गया है।

    वैसे हमारी आदत है कि हम छाते का उपयोग कम से कम करते हैं, क्योंकि बारिश प्राकृतिक है और उसका आनंद न लिया तो बस फ़िर ?

    आजकल तो फ़िर भी छाते का उपयोग करने लगे हैं, नहीं तो पहले तो यह हालत थी कि हमारा रेनकोट डिक्की में ही पड़ा रहता था, और हम बारिश के आनंद लेते हुए घर पहुँचते थे [खामख्वाह में रेनकोट भीग जाता और फ़िर उसको सुखाने की जद्दोजहद में लगो] J

    आप सबको भी मानसून की शुभकामनाएँ और बिना छाता और रेनकोट के बारिश को प्राकृतिक रुप में महसूस करके देखें, आनंद आयेगा।

शीघ्र सेवानिवृत्ति क्यों ? कब ? और कैसे ? [Early Retirement why ? when ? and how ?]

    शीघ्र सेवानिवृत्ति एक ऐसा विषय है जो आजकल के युवाओं की पहली पसंद है, आज का युवा जल्दी से जल्दी अपनी वित्तीय स्थिती मजबूत कर अपने इच्छा अनुरुप कार्य करना चाहता है।

    हम अभी उज्जैन गये थे तो अपने मित्र से पूछा कि अगर आज वापिस उज्जैन आना हो और शीघ्र सेवानिवृत्ति का विचार हो तो कम से कम अपने पास कितना पैसा होना चाहिये। तो उसका एकदम से जबाब मिला १ करोड़ रुपया, हम फ़क्क उसका चेहरा देखते ही रह गये, और हम उससे उस १ करोड़ की गणना का गणित पूछने लगे तो वह गणित बताने में अक्षम रहा, और बोला कि ऐसा लगा कि अगर १ करोड़ हो तो जिंदगी अच्छी कटेगी। क्या आप भी ऐसा सोचते हैं ? और ये भी बतायें कि १ करोड़ को कैसे निवेश करेंगे ?



    शीघ्र सेवानिवृत्ति पर हमने अपने लेपटॉप पर बहुत कुछ लिख रखा है, पर इस पर मौत की काली स्क्रीन का साया है, हमें आशा है कि हम उसे जल्दी ही ठीक कर अपने लेख जो कि विन्डोज लाईव राईटर पर लिखे हैं, प्राप्त कर लेंगे। तब तक हम बात करते हैं शीघ्र सेवानिवृत्ति के लिये आवश्यक धन की, आगे हम विस्तृत चर्चा करेंगे कि शीघ्र सेवानिवृत्ति क्यों ? कब ? और कैसे ?

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माइक्रोसॉफ़्ट का बग “मौत की काली स्क्रीन” समाधान ढूँढ़ रहे हैं, Black Screen of Death

हमारा लेपटॉप – सोनी वायो, VGN-CR506E

 हमारा लेपटॉप फ़ँस गया Black Screen of Death के चुंगल में, उपाय ढूँढ़ रहे हैं। यह एक बग है जो कि माइक्रोसॉफ़्ट के OS  में होता है। इसमें लोगिन स्क्रीन के बाद काली स्क्रीन दिखाई देती है, और हमारा विस्टा कोई भी गतिविधी करने से मना कर देता है। जब कल अपना लेपटॉप खोला तो ये वाला बग आया हमारे OS में, अब गूगल पर अपने डेस्कटॉप में इसका समाधान ढ़ूँढ रहे हैं।

जितने भी समाधान बताये गये हैं, वह सब कर चुके या कोशिश कर रहे हैं, परंतु अभी तक सफ़लता नहीं मिली 
है –
१. Ctrl + Alt + Del बटन दबाकर टॉस्क मैनेजर में जाकर नये टॉस्क पर क्लिक कर iexplorer.exe करें तो यह शुरु हो जायेगा।
२. रजिस्ट्री में संपादन के लिये remove C:WINDOWSsystem32driversntndis.exe from
KEY_LOCAL_MACHINESOFTWAREMicrosoftWindows
NTCurrentVersionWinlogonShellexplorer.exe
C:WINDOWSsystem32driversntndis.exe
समस्या यह है कि किसी भी तरह से हम इस विस्टा को कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं, F8 दबाने के पश्चात सेफ़ मोड में भी नहीं आ रहा है, Last good configuration भी नहीं चल रहा है,  विन्डो पीई से अब USB से बेकअप ले रहे हैं, फ़िर देखते हैं कि क्या कर सकते हैं।
अभी कोशिश जारी है, क्योंकि उसमें विन्डोज लाईव राईटर में कुछ लेख हमने लिखे हुए हैं, उन्हें बचाना है। और कुछ महत्वपूर्ण फ़ाईलें भी हैं। खोज जारी है, और तो और हमारी विस्टा की रिकवरी डिस्क भी काम नहीं कर रही है, अब विस्टा को डाऊनलोड कर इंस्टाल करना होगा।
यहाँ हम इसके सवाल के जबाब के लिये घूम चुके हैं –