Category Archives: अनुभव
गूगल क्रोम ब्राऊजर का वेब स्टोर (Web Store from Google Chrome in Browser)
लिव-इन रिलेशनशिप मतलब बराबर का खर्चा
बिस्तर पर कैसे और किसके साथ नींद में होते हैं, नींद को कभी जाना है ?
प्रोड़क्टिव मेन अवर्स बर्बाद और आभिजात्य वर्ग की मानसिक मजदूरी
अभी दो दिनों से कार्यालय जा रहे हैं, नहीं तो घर से ही काम कर रहे थे। इन दो दिनों में आना जाना और कई लोगों से मिलना हुआ।
घर से काम करने में यह तो है कि घर पर परिवार को समय ज्यादा दे पाते हैं, परंतु काम करने में थोड़ी बहुत अड़चनें भी आती हैं, खैर हमेशा परिवार के साथ रहते हैं, और आने जाने का लगभग २ घंटे का समय भी बचता है, जो कि कहीं और निवेश कर दिया जाता है।
कल जब बस स्टॉप पर बस पकड़ने के लिये खड़े थे तो ऐसा लगा कि सदियाँ बीत गईं हैं सफ़र किये हुए, और बस का इंतजार और बस के इंतजार में खड़े लोग पता नहीं कितने सारे प्रोड़क्टिव मेन अवर्स बर्बाद हो रहे थे और हम कुछ कर नहीं सकते थे, केवल देख सकते थे। व परिवार को जो समय दिया जा सकता है, वह भी कम्यूटिंग में निकल जाता है।
कोई भाग रहा है कोई दौड़ रहा है, कोई मुस्करा रहा है कोई टेंशन में है, सबकी अपनी अपनी दुविधाएँ हैं तो सबके अपने अपने सुख दुख हैं।
रोजी रोटी जो न कराये वह कम है, एक लड़की अपने मित्र का एस.एम.एस. पढ़ पढ़कर दुखी हो रही है, उसके ब्वॉय फ़्रेंड ने एस.एम.एस. में कहा है कि मैं तुम्हारे लिये बहुत सारा समय निकाल सकता हूँ परंतु मेरी और भी प्रायोरिटीज हैं, प्लीज समझा करो और मुझसे ज्यादा एक्स्पेक्ट मत करो, मैं सोचने लगा कि वाह लड़के भी आजकल इतना साफ़ साफ़ मैसेज भेजने की हिम्मत रखते हैं।
नहीं तो हम तो सोचते थे कि केवल लड़कियाँ ही साफ़ साफ़ बोलती हैं 🙂 खैर जब लिफ़्ट के पास होते हैं तो सबके हाथों में मोबाईल देखते हैं, अधिकतर आई फ़ोन लिये दिखते हैं, तो अपने ऊपर कोफ़्त होती है कि अपन इतने आधुनिक क्यों ना हुए.. और जिनके पास ब्लैक बैरी है तो पता चल जाता है कि कंपनी ने दिया है कि बेटा २४ घंटे खाते पीते उठते जागते चलते फ़िरते काम करते रहो। इससे यह तो समझ में आ गया कि आई फ़ोन वाला वर्ग विलासिता भोगी हो सकता है और ब्लैक बैरी वाला अच्छे कपड़ों में मानसिक मजदूर।
अच्छा है कि अपन अभी इन दोनों वर्गों से दूर हैं, या भाग रहे हैं, पहले जब कंपनी लेपटॉप देती थी तो लगता था कि २४ घंटे मजदूरी के लिये दे रही है, परंतु धीरे धीरे अब समय बदल गया है और अब सबको ही लेपटॉप ही दिया जाता है, अब डेस्क्टॉप का जमाना लद गया।
खैर आभिजात्य वर्ग की मानसिक मजदूरी कितने लोग देख पाते होंगे पता नहीं, जो ब्लैकबैरी और लेपटॉप में उलझा रहता है।
माई फ़ाई वाई फ़ाई राऊटर डाटा कार्ड के लिये बेहतरीन उत्पाद (MiFi H1 wifi Router for Data Card review – an ultimate product)
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इंडियाप्लाजा की अच्छे ऑफ़रों पर घटिया सर्विसेस (Bad services on Great offers by Indiaplaza.com)
लगभग एक सप्ताह होने आया इंडियाप्लाजा से ईमेल पर एक ऑफ़र आया था, और ऑफ़र बहुत अच्छा लगा, मैंने सोचा कि इससे अच्छी डील और कहीं नहीं मिलेगी, तो फ़टाफ़ट ऑनलाईन ऑर्डर कर दिया।
इसके पहले भी कई अन्य साईटों पर ऑनलाईन ऑर्डर कर चुके हैं, तो उसका अनुभव पहले से ही था, उसके मुकाबले इंडियाप्लाजा के साथ खरीदारी का अनुभव बहुत ही खराब रहा।
जैसे ही हमने भुगतान किया एक नया पेज खुला जिस पर ट्रांजेक्शन रिफ़ेरेन्स नंबर दिया गया, यह तो अच्छा हुआ कि हमने उसे पीडीएफ़ बनाकर सहेज लिया, जो कि मैं अधिकतर ऑनलाईन ट्रांजेक्शन करने के बाद करता हूँ, और तब तक सहेज कर रखता हूँ जब तक कि समान मुझे मिल नहीं जाता है। इधर ट्रांजेक्शन पूरा हुआ नहीं कि हमने सोचा कि अब ईमेल से संपूर्ण जानकारी भेज दी गई होगी। परंतु कोई ईमेल इंडियाप्लाजा की तरफ़ से नहीं आया। हमने सोचा शायद थोड़ी देर बाद आयेगा, परंतु ईमेल न आना था और न ही आया ।
दो दिन पहले एक ईमेल इंडियाप्लाजा से ईमेल आया कि शिपिंग में देरी हो रही है और कल शिपिंग होगी, हमने सोचा कि चलो इंडियाप्लाजा वालों ने इतना तो ध्यान रखा कि देरी के लिये ईमेल लिख दिया। खैर अभी तक तो हमें समान नहीं मिला है और न ही कोई अन्य ईमेल देरी के लिये मिला है।
अगर किसी अन्य ऑनलाईन साईट पर ऑर्डर किया होता तो वे बिल के साथ साथ कूरियर का रिफ़रेन्स नंबर भी ईमेल कर देते हैं। जिससे आप कूरियर ऑनलाईन ट्रेक कर सकते हैं।
उम्मीद है कि एक दो दिन में समान मिल जाना चाहिये, आगे टिप्पणी में बताते हैं कि कब समान आता है।
बैंकों के अकाऊँट नंबर पोर्टेबिलिटी भारतीय रिजर्व बैंक के लिये आसान नहीं होगी (Bank Account Number Portability will not be easy task for RBI)
नोकिया का काईनेटिक फ़ोन जिसे मोड़ा भी जा सकता है (Twistable phone from Nokia Kinetic)
नोकिया ने काईनेटिक फ़ोन का प्रोटोटाईप तैयार किया, और यह हैंड गेजेट्स की दुनिया में बिल्कुल नई क्रांति है। इस फ़ोन को आगे और पीछे मोड़ा जा सकता है, कोनों से मोड़ा जा सकता है ।
नोकिया मोबाईल फ़ोन की दुनिया में लोगों को एक बेहतरीन तोहफ़ा देने जा रही है। जब ऐसा लग रहा था कि टेबलेट मोबाईल फ़ोन को बदलने जा रहे हैं, परंतु शायद नोकिया का काईनेटिक तकनीक मोबाईल डिवाईस को बचा ले।
नोकिया की यह तकनीक नई नहीं है, परंतु व्यवहारिक रूप से बाजार में लाने वाली पहली कंपनी नोकिया होगी। नोकिया की काईनेटिक तकनीक के पीछे तापानी जौकिनेन हैं। इस मोबाईल डिवाईस पर गेम खेलने का मजा ही कुछ और होगा, कि बीच से थोड़ा सा उछाला और कार झट से सड़क से उछल जाये, और क्या क्या फ़ीचर होंगे या आ सकते हैं, यह तो डिवाईस बाजार में आने पर ही पता चलेगा।
यहाँ एक झलक देखिये –
दीपपर्व दीपावली पहली बार अकेले दक्षिण में (My first Deepawali in South India)
दीपपर्व दीपावली पर मेरी तरफ़ से आपको और आपके परिवार को बहुत बहुत शुभकामनाएँ । उम्मीद है कि सबने बहुत ही हर्षोल्लास से दीप पर्व मनाया होगा ।
जिंदगी में पहली बार ऐसा हुआ है कि मैं अपने परिवार के साथ दीपावली त्यौहार नहीं मना पाया, थोड़ा नहीं बहुत बुरा लगा परंतु कुछ मजबूरियाँ ऐसी होती हैं जिनसे समझौता करना ही होता है। खैर फ़ोन एक अच्छा माध्यम है अब कि सबसे बात कर लो । खैर पहली बार अलग दीपावली मनाने पर अटपटा लगा। हमारे भाई जो नजदीक ही रहते हैं, वे भी आ गये थे।
दीपावली के पहले कवायद शुरू हुई पूजन सामग्री की, देखा तो पता चला कि यहाँ पूजन सामग्री का टोटा है, और किसी निश्चित स्थान पर ही मिलती है, खैर जैसे तैसे करके पूजन सामग्री का प्रबंध किया गया, फ़िर बारी आई बंधनवार के लिये फ़ूलों की, यहाँ गेंदे के फ़ूल प्रचुर मात्रा में बाजार में उपलब्ध नहीं थे और सारे हिन्दी भाषी लोग जो कि यहीं त्योहार मना रहे थे, फ़ूल ढूँढ़ने में लगे थे और फ़ूल मिले भी तो उसमें भी गजब की लूट थी, आम के पत्ते तक बिक रहे थे। यहाँ गेंदे के फ़ूल अमूमन बाजार में कम ही मिलते हैं, खैर जैसे तैसे करके गेंदे के फ़ूलों का प्रबंध किया गया, और दीपावली की पूजा की गई।
दक्षिण में नरकचतुर्दशी को माना जाता है, ये लोग दीपावली नहीं मनाते हैं, इसका कारण यह भी हो सकता है कि रावण को अपना भाई बंधु मानते हों, और रावण की पूजा करना भी इसका एक कारण हो सकता है। परंतु दशहरे पर रावण की पूजा तो विधि सम्मत तरीके से हमारे यहाँ भी की जाती है, क्योंकि रावण विद्वान था परंतु एक बुराई ने उसकी विद्वत्ता को धो दिया। और रावण बुराई का प्रतीक बन गया।
बेटेलाल को आतिशबाजी का बहुत शौक है, हमें भी है परंतु वक्त के साथ थोड़ा कम हो गया है। बेटेलाल ने खूब अनार, चकरी और फ़ुलझड़ियाँ से आतिशबाजी की और आनंदित हुए।
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