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शेयर बाज़ार सीखने की शुरूआत कहाँ से करें ?

शेयर बाज़ार सीखने की शुरूआत कहाँ से करें ?

हर कोई शेयर बाज़ार के बारे में जानना चाहता है, हम कहते हैं कि पहले आप शेयर बाज़ार को सीख लें समझ लें और फिर इस क्षैत्र में अपने आप को आज़माये, वरना तो ये सीखने की बहुत महँगी फ़ीस लेता है। जैसे आपको इंजीनियर बनना होता है तो आप 4 वर्ष उसकी पढ़ाई करते हो, डॉक्टर बनना हो तो 5 वर्ष और कुछ करना हो तो 3 वर्ष तो कॉलेज के स्नातक में पढ़ते ही हो। बस बिल्कुल वैसे ही शेयर बाज़ार को सीखने के लिये आपको समय देना होगा, यह भी एक स्किल है जिसे सीखने के लिये आपको कम से कम 2 से 3 वर्ष का समय देना चाहिये, वह भी रोज़ के कम से कम 4-5 घंटे।

इसी चक्कर में लोगों को पता ही नहीं होता है कि शेयर बाज़ार सीखने की शुरूआतें कैसे करें? हम किसी sequence में नहीं सीखे, जैसे जैसे चीजें आती गईं हम सीखते गये, आज तो फिर भी ऑनलाइन बहुत से study material उपलब्ध है, बताने वाले YouTube पर उपलब्ध हैं। बस आपके मन में सीखने की तमन्ना होनी चाहिये बाकी तो आगे वक्त बतायेगा, जब तक कि आप confidently 2-3 वर्ष सीख न लें, तब तक बेहतर है कि शेयर बाजार में हाथ न डालें, बस paper trade ही करें, ये काम बहुत boring होता है, क्योंकि इसमें emotion नहीं होता, जब आपका पैसा किसी deal में लगा होता है, तभी आपका emotion उसमें लगता है और आप बेहतर तरीके से सीखते हैं।

शेयर बाज़ार सीखने के लिये सबसे पहले तो आप concept पढ़ें, कि शेयर क्या होता है? क्यों होता है? कैसे होता है? फिर उसके structure को सीखें, बाजार कैसे काम करता है, Regulator का रोल क्या होता है? Corporate Actions को समझें, जैसे कि Merger, Demerget, Dividend, Bonus etc., और भी बहुत सी basic बातें होती हैं जैसे कि Face Value, Split etc. यहाँ एक बात बता दें कि अगर fundamental investor / trader बनना है तो Balance Sheet, Management Quality, P & L Statement, Cashflow वगैरह व सबसे महत्वपूर्ण खबरों को पढ़ना सीखें। वहीं अगर Technical Investor/ trader बनना है तो Chart पढ़ना आना चाहिये उसके लिये आप candle पढ़ना सीखें, chart पढ़ना तभी सीखेंगे, Moving Average, EMA, MACD, OI, VWAP, AVWAP, Bollinger Band, Super Trend जैसे इंडिकेटर भी पढ़ना सीखें।

उसके बाद इन Indicators से कैसे trade लेते हैं, यह सीखना बेहद जरूरी हैं, बहुत सारी pre-defined methods हैं, अगर आपको अपनी method बनानी है तो आप खुद भी बना सकते हैं, बस यह समझ लीजिये कि ज्ञान पाने के पथ लंबा है। जब एक बार ये बेसिक चीजें सीख लें, फिर उसके बाद आप FnO याने कि Future & Option जी जाने का plan करें। FnO में क्या और कैसे सीखें, इस पर अगली पोस्ट होगी।

आपका कोई प्रश्न हो तो आप कमेंट करके पूछ सकते हैं।

Praveen Tambe

कौन प्रवीण ताँबे

कौन प्रवीण ताँबे फ़िल्म हम परिवार के साथ देख रहे थे, तो उसमें एक समय ऐसा बताया गया है कि प्रवीण रणजी की प्रेक्टिस दिन में करते थे और परिवार चलाने के लिेये रात में बार में वैटर का काम करते थे। एक दिन वहाँ वे पत्रकार आते हैं जो उसे बिल्कुल पसंद नहीं करते हैं, तो प्रवीण को अपने वैटर होने पर बहुत ही शर्म महसूस होती है और वह बाद में रोता हुआ भी दिखाया है।


इस पर बेटेलाल का कहना था कि इसमें शर्म की क्या बात है, प्रवीण कोई चोरी तो कर नहीं रहा और न ही कोई भीख माँग रहा है, प्रवीण तो शान से अपने परिवार के लिये पैसा कमा रहा है, और ये सब सेक्रिफाईज वो केवल अपने रणजी खेलने के लिये कर रहा है, जब प्रवीण को यह पता है तो उसे शर्म किस बात की करनी चाहिये, यह समझ नहीं आया। शर्म तो उन पत्रकारों को अपने बर्ताव पर आनी चाहिये और उन्हें प्रवीण की इज़्ज़त करनी चाहिये थी।

फ़िल्म में बहुत सी ऐसी बातें हैं जिन्हें गौर से समझने की ज़रूरत है, व्यक्ति जो सोचता है कि वह केवल इसी में comfortable है तो वह ग़लत हो जाता है और सफलता नहीं मिलती, क्योंकि वह अपनी ख़ुद की प्रतिभा को ही नहीं पहचानता, जैसा कि प्रवीण के साथ हुआ, वह ख़ुद को मीडियम पैसा बॉलर समझता था, पर कोच ने उसकी प्रतिभा को पहचाना और कहा कि तुम लैग स्पिनर अच्छी करोगे, अपनी बॉलिंग बदलो, पहले प्रवीण ने कोच की बात नहीं मानी, पर जब ठोकर लगी तो प्रवीण ने नये जुनून से स्पिनर बॉलर की कला सीखी। यह अपने आप में बहुत बड़ी बात है, क्योंकि अपने आप में किसी एक समय के बाद बदलाव लाना वो भी बिल्कुल ABCD से बहुत मुश्किल होता है।

फ़िल्म बहुत अच्छी है, अगर न देखी हो तो ज़रूर देखें, अपने अंदर की कुछ कर गुजरने की आग कैसी होनी चाहिये, जुनून क्या होता है, यह देखने को मिलेगा। श्रैयस तलपा़ड़े का अभिनय ज़बरदस्त है, कई बार मेरी आँखों में आँसू आये, और उसके लिये उनका अभिनय ही ज़िम्मेदार है।

आपका मोबाईल लेने का अधिकार पुलिस के पास नहीं है

जी हाँ मैं भी इस समाचार को पढ़कर चौंका कि यह क्या बात हो रही है, कि आपका मोबाईल लेने का अधिकार पुलिस के पास नहीं है, बिल्कुल नहीं है, पर कहाँ ऐसा हो रहा है और क्यों ऐसा हो रहा है, यह जानने के लिये नम्मा बैंगलुरू के ट्विटर हैंडल पर ट्वीट था –

और वहाँ बैंगलोर पुलिस कमिश्नर ने न्यूज़ लॉंड्री की एक न्यूज़ पर ट्वीट किया था –

तो यहाँ पुलिस के लूटने के हैरतअंगेज़ क़िस्से समाचार में भी लिखे हैं और इस ट्वीट के रिप्लाई में भी कई लोगों ने बताया है कि पुलिस फ़ालतू में परेशान करके उनसे पैसे ऐंठने की कोशिश में रहती है, नहीं तो मार पिटाई तक पर उतर आते हैं।

अगर आप बैंगलोर में हैं तो इस तरह के पुलिस वालों से बचकर रहें, ये ऊपर के पुलिस अधिकार याने कि Top Cop केवल ट्विट करेंगे, पर आपके पास उस समय मदद के लिये कोई नहीं होगा, जब आपको पुलिस से बचाने के लिये किसी की मदद की जरूरत होगी। और तो और कोई एवीडेंस भी नहीं होगा। अपनी सुरक्षा अपने हाथ, पुलिस के हाथ नहीं।

बजाज फाईनेंस का Flexi OD Loan संभलकर लें

जिस कंपनी को देखो वही मेरे को लोन देने को पीछे पड़ा है।बजाज फाइनेंस वालों ने खूब परेशान किया, फिर हमने खूब परेशान किया, और एक एक शर्त को ईमेल पर लिखवाकर समझा, बेचारों को उसका जबाब देते पसीने आ गये, अब फोन नहीं करते, वो कहते हैं सर डॉक्यूमेंट दे दो तो लोन प्रोसेस करवा दें।इतना डिस्कशन किया कि बजाज फाइनेंस वालों ने सारे चार्जेस वगैरह सब फ्री कर दिए, ईमेल पर भी लिखकर दे दिया, अब हम कह रहे हैं, कि हमें तुम पर भरोसा नहीं, इसलिये अब यह लोन लेना ही नहीं।फिर एक फोन आया आज, सर बजाज फाइनेंस से बोल रहे हैं, हमने कहा दिया ईमेल पर सब कुछ है, पढ़ लो। अब सामने से कहा जाता है कोई बात नहीं टाटा कैपिटल से ले लो 😂😂हमने कहा चलो करो डिटेल ईमेल, फिर तुम्हारा भी प्रोडक्ट समझते हैं। 😂 (हमारा फ़ेसबुक स्टेटेस)

बजाज फ़ाइनेंस का यह Flexi OD Loan आपको आपके CIBIL Score के आधार पर मिलता है, मतलब कि यह एक प्रकार से Line of Credit होती है। परंतु यहाँ एक बहुत बड़ा कैच भी है कि बजाज फाईनेंस इस लोन के लिये आपसे लगभग 6,999 रूपये Flexi Charges, 4,999 Processing Charges, 5,000 Cibil Fitment Charges और एक इंश्योरेंस भी बेचते हैं। हमें बताया गया कि आपके लोन में केवल Flexi Charges ही लिया जायेगा, जो कि Cashback के रूप में return भी हो जायेगा। हमने कहा कि आप जब Cashback दे ही दोगे तो आप इस Flexi Charge को Exceptional Approval लेकर लगाईये ही मत। पर इसका कोई जबाब नहीं आया। खैर इसके बाद हर वर्ष आप इस Flexi OD Loan को उपयोग करें या न करें, आपको .25% AMC Charges के रूप में भी भरना होंगे। वैसे ब्याज दर 1.25% प्रति माह होता है, जो कि हमें बताया गया कि 1.12% होता है।

खैर हमने फिर Decide किया कि हम यह Flexi OD Loan नहीं लेंगे।फिर एक मित्र से बात हुई वे एक निजी बैंक के कोर बैंकिंग IT Team में हैं, तो बोले बिजनेस से पूछ कर बताते हैं, अब वे कह रहे हैं, यार ये किस प्रकार का लोन है बिजनेस ने हमारा फोन भी उठाना बंद कर दिया है। लो बताओ।

अगर आप भी कोई लोन ले रहे हैं, तो ठोक बजाकर सोच समझकर लोन लें।

आचार्यकुलम

बाबा रामदेव के स्कूल में एडमीशन

यह बात है वर्ष 2014 की जब भारतवर्ष में चुनावी बिगुल बजा हुआ था और बाबा रामदेव खुलेआम भाजपा का समर्थन कर रहे थे व वित्त के क्षैत्र में बहुत से ऐसे ऐसे बयान दे रहे थे, कि हमें भी आश्चर्य होता था कि ऐसा हो ही नहीं सकता और ये व्यक्ति जो कि इतने लोगों की सोच प्रभावित करता है कैसे कह सकता है कि अगर पेट्रोल 30-40 रूपये चाहिये तो भाजपा को जिताओ। इतना प्रचार किया था कि बताया नहीं जा सकता था, उस समय कई फ़ोरम में मैंने अपने विचार रखे तो लोगों ने मुझे पसंद नहीं किया। खैर हम तो इतना जानते हैं कि बाबा रामदेव को सरकार बनने के बाद ही संसद के सामने धरने पर बैठकर सरकार से माँग करनी चाहिये थी कि पेट्रोल 30-40 रूपये प्रति लीटर करो।

हुआ उसका बिल्कुल उलट अब हम 30-40 रूपये पेट्रोल के लिये प्रति लीटर ज़्यादा दे रहे हैं, अब जो बाबा रामदेव कह रहे हैं कि सरकार देश कैसे चलायेगी अगर पेट्रोल सस्ता हो जायेगा। यह बात हमने फ़रवरी 2014 में जब बाबा रामदेव के स्कूल में बेटेलाल का एडमीशन करने के दौरान उनके मैनेजमेंट को भी कही थी।

दरअसल हुआ यह था कि बाबा रामदेव ने हरिद्वार में नया स्कूल खोला था, जिसमें कि वेदों के साथ साथ अंग्रेज़ी में भी पढ़ाई होती है, हमने बैंगलोर में एडमीशन टेस्ट दिलवाया था, फिर सिलेक्शन होने पर कहा गया कि हरिद्वार में उनके स्कूल आचार्यकुलम में 7 दिन बच्चे को रहना होगा, और वे देखेंगे कि बच्चा वाक़ई उनके स्कूल के काबिल है या नहीं। तब हम हरिद्वार गये और बेटेलाल को 7 दिन के लिये स्कूल में छोड़ दिया। जब 7 दिन बाद हम वापिस लेने गये तो उनके आचार्य जी ने कहा कि हमने आपके बेटे की सबसे ज़्यादा अनुशंसा की है क्योंकि बालक मेधावी है। फिर पता चला कि अब अभिभावकों का मैनेजमेंट से साक्षात्कार होगा।

उस समय हमारा भारत के बाहर जाने का प्लान भी बन रहा था, हमसे पूछा कि भारत से बाहर क्यों जाना चाहते हैं। हमने कहा कौन बेहतर विकल्प नहीं अपनाना चाहेगा। फिर पूछा कि आप तो वित्त क्षैत्र से जुड़े हैं तो बताइये कि आप बाबा रामदेव के चुनावी मुद्दों में इकॉनोमिक्स के विचारों को कैसे देखते हैं, तो हमने बिना लाग लपेट के कह दिया कि बाबा रामदेव के विचार अपनी जगह और व्यवहारिक दुनिया में यह संभव नहीं। बाबा रामदेव जिन बातों को समझते नहीं क्यों उन पर अपने विचार रखते हैं। फिर हमसे पूछा गया कि अगर किसी कारण से बाबा रामदेव या स्कूल कहता है कि तत्काल ही 50-70 हज़ार रूपये जमा करवाइये बिना सवाल जबाब के, तो आप करवा पायेंगे। हमने कहा अगर यह रूपये हमारे बालक के किसी कार्य के लिये करवाये जायेंगे व हम उस कारण से पूर्ण रूप से संतुष्ट होंगे तो करवा देंगे।

फिर बाद में एडमीशन की लिस्ट जारी हुई तो हमारे बेटेलाल का नाम उसमें नहीं था, आचार्य जी आये और बोले कहीं कुछ गड़बड़ हुई है, मैं पता करके आता हूँ। वे पता करके आये बोले कि आपका बच्चा तो एडमीशन के लिये पास था, पर आप साक्षात्कार में फेल हो गये, आपने अपने विचार उचित दिशा में नहीं रखे। हम मन ही मन हँसे कि हम तो वैसे भी यहाँ एडमीशन करवाने वाले थे नहीं, पर कम से कम बाबा रामदेव के स्कूल और मैनेजमेंट के मन की खो़ट तो हमें पता चल गई।

आज भी यह क़िस्सा इसलिये लिख रहा हूँ कि जब एक पत्रकार ने पूछा था कि बाबाजी आपने कहा था कि पेट्रोल 30-40 रूपये हो जायेगा, तो बाबा रामदेव ने कहा तो क्या पूँछ पाड़ेगा मेरी।

Swing Trading Ideas

मेरी किताबें, पॉडकास्ट और Swing Trading Ideas

नववर्ष पर पहली ब्लॉग पोस्ट है, सोचा तो था कि जल्दी पोस्ट करेंगे, परंतु लगातार व्यस्तता के चलते यह रह ही गया। नववर्ष पर किताबें पढ़ने का प्रण लिया है, तो अभी तक हम नववर्ष में १० किताबें पढ़ चुके हैं –

नाम हैं –

  • Trading Nifty and BankNifty Options
  • टोपी शुक्ला
  • राहुल सांकृत्यायन विविध प्रसंग
  • Mastering Options Short Strangles Trading
  • How to find a Jackpot call in Option
  • More profit from Nifty options
  • Nifty BankNifty Interaday Options Buying Single Successful Strategy
  • Trend Trading with Nifty & Bank Nifty
  • The Secret of Trading Bank Nifty Future
  • Secret No Loss BankNifty Options Strategy

कुछ पॉडकास्ट भी सुने जिसमें सबसे बेहतरीन लगे 2 जो कि पढ़ाकू नितिन पॉडकास्ट से हैं

किताबों के सैकडों पन्नों से अपने काम की चीज कैसे निकाली जाये – Episode 22

बादशाहों के दरबार से निकली ‘किस्सागोई’ की दिलचस्प कहानी – Episode 20

आप ये गूगल करके सुन सकते हैं, किताबें हमने अमेजन किंडल पर पढ़ी हैं, व हमारे पास किंडल अनलिमिटेड सब्सक्रिप्शन है, तो आप वहाँ पर भी पढ़ सकते हैं।

आजकल मैं वीकली स्ट्रेटेजी बना रहा हूँ, स्विंग ट्रेडिंग की, देख लीजिये अगर समझ आये तो, नहीं तो कमेंट करके पूछ लीजियेगा –

हमारा विकास ज़बरदस्ती करवाया जा रहा है

बैंगलोर में सबसे ज़्यादा रोड टैक्स किसी भी वाहन पर भारत में भरना होता है।मतलब कई बार तो ऐसा लगता है कि इतना टैक्स लेने के बाद शायद यहाँ बेहतर सड़कें मिलेंगी पर ऐसा कुछ है नहीं, हाईवे पर लूट अलग है।जब तक कोई दमदार व्यक्ति किसी सड़के के लिये न कहे, तब तक यहाँ सड़कें नहीं बनतीं। हमें समुद्र बहुत ही पसंद है, पर उसके लिये हमें समुद्र किनारे नहीं जाना पड़ता, जब भी थोड़ी सी बारिश हो, तो बैंगलोर की सारी सड़कें ही समुद्र बन जाती हैं, और बिना पैसे खर्च किये ही मज़ा आ जाता है।

अब रही बात ज़बरदस्ती विकास की, तो जब सब ठीक चल रहा है तो आपका खर्चा नहीं होगा, जब समुद्र बनेगा तो आपकी गाड़ी फँसेगी, आपको गाड़ी निकलवानी पड़ेगी, गाड़ी ख़राब होगी तो मैकेनिक के पास ले जानी पड़ेगी, इस प्रकार से देखिये कितने लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोज़गार देने की महती योजना चल रही है।

अब बारिश ख़त्म हो गई तो बिल्कुल बारिश ख़त्म होने के पहले सड़कें दोनों तरफ़ से खोद दीं, चौराहों पर, मोड़ों पर भी सड़कें खोद दी गईं, अब सोचो मास्टर माईंड, लोग समझ ही न पाये, एक बारिश हुई और जो खोदने के बाद उसे दिखाने के लिये मिट्टी डाली थी, वह बड़ा गढ्ढा बन गया, कल कई दिनों बाद दीपावली पूजन सामग्री के लिये बाज़ार जाना हुआ, जैसे ही बाज़ार के लिये मुड़े, कार गढ्ढे में, फच्च की आवाज़ आई, एक्सीलरेटर मारने पर कार निकल गई, हमने मन में सोचा कि चलो बचे।

पर बात यहीं ख़त्म नहीं हुई, अब सड़क के दोनों और की खुदाई की परेशानी, बाज़ार है पर बाज़ार में पार्किंग नहीं, तो भई आप या तो सड़क पर गाड़ी खड़ी कर दो और शॉपिंग करो, या फिर चुपचाप गाड़ी घर ले जाओ, शॉपिंग अगले साल कर लेना। गाड़ी बीच सड़क पर खड़ी कर दो तो सफ़ेद वर्दीधारी आकर फट से स्लिप और चिपका के निकल जायेगा। और इसके बाद एक बात और कि सड़क पर ही बीचोंबीच नाले को साफ़ करने के लिये ढक्कन सड़के के ऊपर कम से कम एक फ़ीट ऊँचा करके लगा दिया है, अब अगर जगह न हो, और मजबूरी में गाड़ी उस पर से निकालनी पड़े, तो बस हो गया कार्यक्रम, याने कि ज़बरदस्ती दूसरों का विकास।

फिर गये पटाखे लेने, तो एक टंकी वाला मैदान है जहाँ तरह तरह के मेले लगते रहते हैं, वहाँ पर पटाखों की दुकानें लगी हैं। हमने सोचा चलो पटाखे ले लें, मैदान में जाने का रास्ता पहले समतल हुआ करता था, फिर लॉकडाऊन हुआ तो चढ्ढे वाले गिरोह के लोगों ने वहीं पर एक कमरा बनाकर, उस पर क़ब्ज़ा कर लिया और गेट भी लगा दिया, बीच में लगभग दो फ़ीट ऊँचा कर दिया, अब कल गये तो अंदाज़ा ही नहीं लगा, और बस गाड़ी चेसिस पर फँस ही गई थी, तो अंदर के लोगों ने कहा, मारो एक्सलेरेटर गाड़ी निकल जायेगी, आख़िर निकल गये। हमारी ही नहीं सबकी गाड़ियाँ फँस रही थीं।

जब डैमेज ही नहीं होगा तो आप क्यों ठीक करवाने जाओगे, इसलिये अब यह सब ज़बरदस्ती करवाया जा रहा है, आपको लगे कि गलती हमारी ही है, पर इसके पीछे की ज़बरदस्ती विकास की मंशा को समझना बेहद कठिन है। ऐसा ही कार्यक्रम कई अन्य क्षैत्रों में हो रही है।

पुनीत राजकुमार की असामयिक मृत्यु

कल कन्नड़ अभिनेता पुनीत राजकुमार की ह्रदयाघात से मृत्यु हो गई, उनकी उम्र केवल 46 वर्ष थी, मतलब कि बिल्कुल मेरी उम्र के थे। हालाँकि मैंने शायद उनकी एक ही फ़िल्म देखी थी, उनके भाई शिवा राजकुमार के साथ हमने बेटेलाल की एक फ़ोटो बैंगलोर एयरपोर्ट पर ली थी। कन्नड़ फ़िल्में न देखने के कारण हमें बहुत ज़्यादा कुछ पता नहीं हैं, परंतु एक बात देखी है कि दक्षिण भारत में अपने नेताओं के लिये ज़बरदस्त प्यार देखने को मिलता है, जिसकी मिसाल इसी बात से है कि कई अभिनेताओं व अभिनेत्रियों को राजगद्दी पर वर्षों तक बैठाये रखा।

कल जब बैंगलोर के फेसुबक पेज पर जहाँ कि पुनीत राजकुमार के बारे में जानकारी दी जा रही थी वहीँ कमेंट पढ़ रहा था, कई लोगों ने कमेंट में लिखा था कि वैक्सीन के बाद के साइड इफ़ेक्ट हैं, और वैक्सीन के बाद बहुत सी गंभीर बीमारियों का लोगों को सामना करना पड़ रहा है।वहीं मेरा मत भी यही है कि वैक्सीन लगने के बाद मेरे अपने ही कई परिचितों को मैंने खोया, इससे मैं कई दिनों तक टूटा रहा। वैक्सीन के इन साइड इफेक्टों की सरकार को या किसी स्वतंत्र एजेंसी को जाँच करनी चाहिये।

कल शाम को बाज़ार गये थे, तो वहाँ चौक पर पुनीत राजकुमार की फ़ोटो और कर्नाटक का झंडा शोक स्वरूप झुका रखा था। बैंगलोर में लगभग हर क्षैत्र में किसी एक चौक पर इवेंट के लिये जगह है, जहाँ लोकल लोग इकठ्ठे होकर कन्नड़ त्योहार मनाते हैं। वहीं आसपास अच्छे से सजाया भी जाता है। अब दो दिन बाद १ नवंबर को कर्नाटक राज्योत्सव है, जिसकी लगभग हर कंपनी में छुट्टी होती है उस दिन हर चौक पर सजाया जाता है, ऑटो टैक्सी पर फूलों की मालायें व उन पर कर्नाटक राज्य का झंडा लगाकर रैली भी निकालते हैं, साथ ही दिनभर ऐसे ही घूमते हैं। हमें भी अच्छा लगता है, क्योंकि इस तरह से त्योहारों को जब आनंददायक बनाया जायेगा, तब ही लोग इस तरह के इवेंट से जुड़ेंगे।

पुनीत राजकुमार की इस असामयिक मृत्यु पर हमें भी बहुत दुख हुआ, वे बहुत से ऐसे सामाजिक कार्यों में मदद करते थे, कई जगह चंदा देते थे, उनकी मदद से कई लोगों के जीवन चल रहे थे, वे अब अपने आपको अनाथ मान रहे हैं।

ज़िंदगी कितनी भी हो, छोटी या बड़ी बस उसका इंपेक्ट लोगों पर लंबे समय तक रहना चाहिये, वह भी अच्छे स्वरूप में, ऐसी कोशिश हर किसी को करनी चाहिये।

ब्लॉग लिखन में अनियमितता है तो टोका करें मित्रों

कल एक मित्र ने फेसबुक पर कहा कि आजकल फिर से ब्लॉग लिखना बंद कर दिया, दरअसल यह शिकायत बहुत से लोगों की है, मैं पहले अपने अनुभव या कुछ चिंतन मनन करता रहता था, लिख देता हूँ, पर यह सब आज नहीं हो पा रहा है। ऐसा नहीं कि प्रक्रिया स्थगित हो गई है, इसके पीछे केवल और केवल मेरी थोड़ा सा आलसीपन है। इस आलसीपन को भगाने के लिये मैंने अपने ट्रेड भी शेयर करना शुरू किया था, परंतु सुबह 9 से शाम 9 बजे तक कंप्यूटर में आँखें गढ़ाये इतनी थकान हो जाती है कि उसके बाद और उसके पहले कुछ भी कंप्यूटर पर करने की इच्छा ही नहीं होती।

ब्लॉग पर लिखना एक शांत दिमाग से होता है, जब तक दिमाग अशांत है लिखना मुश्किल हो जाता है, बहुत दिनों से कोशिश भी कर रहा हूँ कि अब नियमित रहूँ, परंतु केवल इसी चक्कर में ब्लॉग लेखन व साथ ही यूट्यूब चैनल पर भी कंटेंट नहीं डाल पा रहा हूँ, अब फिर से कोशिश करेंगे, वो एक कविता भी है कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।

आजकल दिमाग कहीं न कहीं किसी न किसी चक्रव्यूह को तोड़ने में ही फँसा रहता है, दिमाग भी इन जालों को समझ समझकर तोड़ने में थक तो जाता ही है। और ब्लॉग लिखना या कुछ भी अपने मन को लिखना हमेशा ही सुकून देता है, ऐसा लगता ही नहीं कि हम कोई काम कर रहे हैं, बल्कि यह थकान मिटाता है तथा अपने आपको ऊर्जा से भरने वाला भी होता है। कि हमने अपने मन की बात, दिल की बात कहीं लिख दी है, अब वो हर कोई पढ़ सकता है जो हमारे मानसिक तार से तार जोड़ पा रहा होगा।

आजकल सुबह ध्यान वापस से करने की कोशिश कर रहा हूँ, परंतु नहीं हो पा रहा है, कहीं सुना भी है पढ़ा भी है कि ध्यान पर अभ्यास निरंतर होना चाहिये, जो कि कम से कम रोज एक घंटा होना चाहिये, जब हमारे पास ध्यान का 10 हजार घंटों का अनुभव होगा, तब हम उचित रूप से ध्यान का लाभ ले पायेंगे, यह बरसों की साधना है, जिसे एक दिन, एक महीने या एक वर्ष में नहीं पाया जा सकता है। वैसे तो हर कार्य के लिये साधना की जरूरत होती है, कोई भी कार्य बेहद सरल नहीं होता है, जब तक किसी काम में हाथ न डालो तब तक सब सरल लगता है, जटिलतायें तो तभी पता चलती हैं जब उसक कार्य को करना शुरू करते हैं।

पहले भी लिखना बेहद आसान नहीं था, अब भी नहीं है, दिल की बात लिखने में ज्यादा समय नहीं लगता, टाईपिंग की रफ्तार बहुत बढ़िया है, बस मन होना चाहिये, जिसके लिये बहुत समय लगता है। कोशिश करेंगे कि सुबह थोड़ा समय निकालकर अब रोज ही कुछ न कुछ ब्लॉग लिखें। कोशिश यह भी करेंगे कि शाम को अपने शेयर बाजार के ट्रेड भी शेयर करें, यह हमारे लिये डायरी का काम भी करेगी, साथ ही कोई सीखना चाहेगा तो उसके लिये सीखने की कुछ सामग्री उपलब्ध होगी। विस्तार से ट्रेडिंग के बारे में उसकी मनोस्थिती के बारे में लिखना बोलना संभव नहीं, क्योंकि यह बहुत ही जटिल विषय है और शायद हम उसे अच्छे से लिखने में सक्षम नहीं हैं। क्योंकि यह विषय हमने अनुभव से सीखा है, कहीं किसी कक्षा में नहीं सिखाया गया, तो यह भी नहीं पता कि इस बारे में लिखना भी कैसे शुरू करें।

अंत में एक बात कहना चाहूँगा कि अगर ब्लॉग न लिख पायें तो जैसे भी हो टोका मारते रहें, फेसबुक पर मित्र हैं तो फेसबुक पर, ट्विटर पर हैं तो ट्विटर पर, या यहीं टिप्पणी पर, जब कहीं लिखा दिखता है कि मैं कुछ नहीं कर रहा हूँ, तो मेरे दिमाग के सेल एक्टिव होकर मुझसे वह काम करवा लेते हैं।

वैसे यह ब्लॉग पोस्ट सुबह 7 बजे छत पर ध्यान के बाद दरी पर बैठकर लिखी गई है।

पूर्वाग्रह होना अच्छा या बुरा

पूर्वाग्रह होना अच्छा या बुरा कैसा होता है, यह सभी लोग सोचते हैं क्योंकि यह एक बहुत अच्छी आदत नहीं, बल्कि बुरी आदत है। पहले अगर यह समझ लें कि पूर्वाग्रह क्या होता है तो बेहतर होगा, हम किसी के बारे में पहले से ही उसके आचरण, व्यवहार या कार्य के प्रति कोई भावना बना लें, वह पूर्वाग्रह कहलाता है। कई बार हम बिना मिले ही किसी के बारे में पढ़कर उसके बारे में सोच समझ लेते हैं, परंतु जब हम बात करते हैं, या मिलते हैं तो पूर्वाग्रह से ग्रसित होते हैं और कई बार हमारा पूर्वाग्रह गलत साबित होता है।

पूर्वाग्रह को हम घर में ही देख सकते हैं, अगर घर में दो बच्चे हैं एक अगर जल्दी समझ जाता है और ढंग से काम भी कर लेता है तो हम उसे होशियार की उपाधि दे देते हैं वहीं दूसरा बच्चा अगर उसी कार्य को देरी से समझकर करता है तो हमें उसे बेवकूफ या देर से समझनेवाले की उपाधि दे देते हैं। अगली बार कोई भी कार्य हो तो हम पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर पहले बच्चे को ही कहेंगे, जबकि हर व्यक्ति की अपनी विशेषता होती है, हो सकता है कि वह दूसरा बच्चा किसी ओर चीज में अच्छा हो जहाँ पहला बच्चा अच्छा न कर पाये।

पूर्वाग्रह हम लगभग हर रिश्ते में देख सकते हैं अपनी प्रोफेशनल लाईफ़ में भी देख सकते हैं, कई बार पूर्वाग्रह हम किसी की एक बात को पकड़कर बैठ जाते हैं और उसके आधार पर हम किसी भी व्यक्ति के साथ एक अजीब तरह का व्यवहार करने लगते हैं। यह भी तो हो सकता है कि जो आपको पूर्वाग्रह हो वह सही न हो, और उस व्यक्ति ने कार्य सीख लिया हो या फिर अपना व्यवहार ठीक कर लिया हो। परंतु हम मौक़ा ही नहीं देते, और हमेशा इस तरह के संवाद सुनने को मिलते हैं –

“मैंने तो पहले ही कहा था कि इसके बस की बात नहीं”

“मैंने तो पहले ही कहा था कि ये कुछ कर ही नहीं सकता”

“मुझे लगा ही था कि ये कुछ गड़बड़ कर सकता है”

“सोच ही रहा था कि अगर यह कार्य उसको देता तो सही प्रकार से हो जाता”

“काम देने के पहले ही लग रहा था कि तुम बहुत ढीले हो”

“तुम तो बेवकूफ हो बेवकूफ ही रहोगे, पता नहीं कब काम करना सीखोगे”

और भी पता नहीं क्या क्या संवाद हम अपने दैनिक जीवन में सुनते ही रहते हैं, कुछ संवाद शायद आपको अपनी याददाश्त में भी आ जायें और आप अपनी यादों में खो जायें।

कहने का मतलब केवल इतना ही है कि पूर्वाग्रह से ग्रसित न होकर हम एक बार ग़लत करने पर, उन्हें समझायें कि कैसे इस कार्य को अच्छे से कर सकते थे, या क्या गलती कर दी। और हमेशा ही दूसरा, तीसरा, चौथा …. मौक़ा देते रहें। नहीं तो सभी लोग वह कार्य कर ही नहीं पायेंगे, भले यह निजी जीवन की बात हो या प्रोफेशनल जीवन की।

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