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About Vivek Rastogi

मैं २००६ से हिन्दी ब्लॉगिंग कर रहा हूँ, और वित्त प्रबंधन मेरा प्रिय विषय है। मेरा एक यूट्यूब चैनल भी है जिसे आप https://youtube.com/financialbakwas देख सकते हैं।

क्या आपको पता है कि सभी अंग्रेजी अखबारों की वार्षिक सदस्यता भी आप ले सकते हैं… जैसे कि टाईम्स ऑफ़ इंडिया…(Yearly Subscription of English News papers… Do you know ???)

     क्या आपको पता है कि सभी अंग्रेजी अखबारों की वार्षिक सदस्यता भी आप ले सकते हैं, इसमें लगभग अंग्रेजी याने कि आंग्लभाषा के सभी अखबार शामिल हैं, जैसे मुंबई में ९०० रुपये में सालभर टाईम्स ऑफ़ इंडिया और मुंबई मिरर या ईकनोमिक टाईम्स आप ले सकते हैं, हिन्दुस्तान टाईम्स १९९ रुपये में सालभर पढ़ सकते हैंडी.एन.ए. ४५० रुपये में सालभर पढ़ सकते हैं।

    अगर आप यही अखबार बिना सदस्यता के साल भर पढ़ते हैं तो आपको लगभग दोगुने या उससे ज्यादा पैसे खर्च करने पढ़ते हैं, जैसे कि टाईम्स ऑफ़ इंडिया ४.५० रुपये का आता है, मुंबई मिरार या ईकनोमिक टाईम्स के साथ, तो इसके हिसाब से महीने का बिल हो जाता है १३५ रुपये और सालभर का लगभग १६२० रुपये, और पढ़ पायेंगे साल भर आप केवल टाईम्स ऑफ़ इंडिया। पर अगर सभी आंग्लभाषा के अखबारों की आप वार्षिक सदस्यता ले लेते हैं तो आप सारे अखबार पढ़ पाते हैं वो भी लगभग उतने ही रुपये में।

    इसके लिये अपने अखबार वाले से ही संपर्क करें क्योंकि इसके लिये किसी भी अखबार ने अलग से अभियान नहीं छेड़ा है और न ही इस बारे में सार्वजनिक किया जाता है, या यह भी हो सकता है कि यह हॉकर लोग अपने फ़ायदे के लिये इस तरह की स्कीम आम आदमी तक पहुंचाते ही न हों। अखबार वाला आपसे चेक मांगेगा जो कि देय होगा प्रकाशन कंपनी के नाम पर ही, और आपके पास आयेंगे कूपन्स कूरियर द्वारा, फ़िर बस आपको हर मास एक कूपन अपने हॉकर को देना है और वह अखबार आपको उपलब्ध करवाता रहेगा। बीच में आपके पास प्रकाशन कंपनी की ओर से फ़ोन भी आयेगा कि आपको अखबार मिल रहा है या नहीं।

    तो आज ही अपने हॉकर को पकड़िये और वार्षिक सदस्यता लीजिये अभी डी.एन.ए और हिन्दुस्तान टाईम्स की सदस्यता ली जा रही है। टाईम्स ऑफ़ इंडिया की सदस्यता शुरु होने वाली है।

भाग ४ – स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 4) स्वास्थय बीमा योजना चुनने के लिये कुछ सुझाव

सही स्वास्थ्य बीमा योजना चुनने के लिये कुछ सुझाव

जब आप स्वास्थ्य बीमा योजना ले रहे हैं, तो निम्न बातों का ध्यान रखें –

  • कीमतों और मिलने वाली सुविधाओं की तुलना कर लें। एक पॉलिसी की कीमत दूसरी से ३ गुना तक हो सकती है।

  • अगर आपका परिवार है, तो आप हमेशा फ़ैमिली फ़्लोटर प्लॉन ही लें। यह आपके लिये अधिक किफ़ायती भी होगा और परिवार के प्रत्येक सदस्य को ज्यादा राशि का कवरेज भी मिलेगा। इसके अलावा इसमें लचीलापन भी है कि परिवार का कोई भी सदस्य किसी भी अनुपात में इस फ़्लोटर योजना का उपयोग कर सकता है। यह ज्यादा अधिक मदद करता है आपकी, क्योंकि अधिकतर ज्यादातर मामलों में एक ही व्यक्ति गंभीर रुप से बीमार होता है, न कि पूरा परिवार।

  • योजना की शर्तों की तुलना जरुर करें जिससे आपको बाद में झटका नहीं लगे। एक दलाल (ब्रोकर) आपको ज्यादा अच्छी सलाह दे सकते हैं क्योंकि वे काफ़ी हद तक स्वतंत्र होते हैं।

  • कोई भी ऐसी कैशलेस योजना इस आधार पर न लें कि किसी पास के अस्पताल से उसका समझौता (टाईअप) है। बीमा कंपनियों के पैनल द्वारा सभी अच्छॆ अस्पतालों को शामिल किया जाता है। किसी एक शर्त के लिये नहीं, आप वही योजना देखिये जिसमें आपकी सारी आवश्यकताएँ पर्याप्त रुप से पूरी होती हों।

  • जिन अस्पतालों को आपकी बीमा कंपनियों द्वारा पैनल में शामिल किया गया है, तो सबसे पहले तो आपको सभी अस्पतालों के बारे में जानकारी लेना चाहिये कि किस अस्पताल की क्या विशेषज्ञता है। जिससे जब आपको जरुरत हो तब आप उस अस्पताल का उपयोग कर सकते हैं, बजाय सभी समय एक ही अस्पताल के जिसे आप उपयोग करते हैं।

  • हमेशा ध्यान रखें जब भी आप पॉलिसी एक ब्रोकर से खरीदें, तो उसका लायसेंस नंबर ले लें और आईआरडीए (IRDA) की वेबसाईट पर उसकी जानकारी देख लें और सुनिश्चित कर लें कि हाँ यह ब्रोकर वैध है। ये (ब्रोकर) दलाल स्वतंत्र होते हैं, इन्हें हर पॉलिसी बेचने पर कुछ भुगतान (दलाली) मिलता है, इसलिये ये लोग किसी एक पॉलिसी लेने के लिये आपको बाध्य नहीं करेंगे। दूसरी तरह अगर पॉलिसी बीमा कंपनी का एजेन्ट बेचता है तो उसके पास तो केवल उसी कंपनी की योजनाएँ होंगी और वह उनकी ही विशेषता बताकर अपने और कंपनी के हित के लिये वही पॉलिसी बेचने की कोशिश करेगा।

  • जब आप प्रस्ताव फ़ॉर्म में अपनी घोषणाएँ (declarations) भर रहे हों तो बिल्कुल सही एवं ठीक जानकारी दीजिये। यह सुनिश्चित करता है आपका भूगतान जब आपको वास्तव में इसके दावे की जरुरत होती है।

  • नियमित व्यायाम करें, और स्वास्थ्य भोजन की आदतों का पालन करें। अधिक धूम्रपान और मद्यपान से बचें। इससे आपकी प्रिमियम कम हो सकती है जब आप अपने स्वास्थ्य का जोखिम कवर ले रहे हों।

  • अगर आप पहले से ही किसी बीमारी से पीड़ित हैं, तो उसके लिये आवश्यक सावधानियाँ बरतें। हमेशा अपने आप को ऐसा ही दर्शायें कि मेरा बीमा नहीं है पर किया जा सकता है, जिससे आपको अपनी बुरी आदतों पर नियंत्रण करने में मदद मिलेगी और लंबे समय मॆं लाभ मिलेगा।

पहले की कड़ियाँ –

भाग १ – स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 1)
भाग २ – स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 2)
भाग ३ – स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 3)

पुल पर बहुत सारी लड़कियाँ खड़ी हुई थीं… सब की सब एक ही लड़्के की दीवानी थीं.. सोचो कि वह किस्मत वाला लड़का कौन था… [Guess who was the lucky guy ????]

एक नदी थी….

उसके ऊपर एक पुल बन रहा था…

पुल पर बहुत सारी लड़कियाँ खड़ी हुईं थीं..

सब की सब एक ही लड़के की दीवानी थीं…

सोचो कि वह किस्मत वाला लड़का कौन था…

…..

 

…..

 

 

…..

..

 

 

 

 

…..

अरे सोचो….. सोचो…..

 

 

….

 

…..

चलो यार …. मैं बताता हूँ…. उत्तर है

 

“किसना”

जो है अलबेला मद नैनों वाला …

जिसकी दीवानी ब्रज (BRIDGE) की हर बाला

वो किसना है…

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ब्रेड पिट और विद्या बालन की शादी के बाद बहुत सारे छात्र उनके घर पर जाते हैं क्यों …

..

..

..

??

??

क्योंकि अब उसका नाम हो गया है बिद्या पिट (विद्यापीठ)

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संता और बंता आपस में बातें कर रहे थे –

संता – “अगर मैं कॉफ़ी पी लेता हूँ, तो मुझे नींद नहीं आती है।”

बंता – “मेरे साथ तो बिल्कुल उल्टा है, अगर मैं सो जाता हूँ तो फ़िर मैं कॉफ़ी नहीं पी पाता हूँ।”

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Ganesh को Anesh किसने बनाया –

 

सोचो

 

 

सोचो

 

 

सोचो

 

चलो मैं बताता हूँ –

 

“कैलाश खेर ने”

 

तेरे नाम से “G” लूँ…..

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भाग ३ – स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 3)

स्वास्थ्य बीमा की आवश्यकता
    चिकित्सा व्यय इन दिनों आसमान को छू रहे हैं। डॉक्टर के साथ केवल एक बैठक में ही जहाँ आजकल ज्यादा रुपयों की आवश्यकता होती है, वहीं अगर कोई जटिल बीमारी हो गई तो उसके उपचार में खर्च करने के लिये आपको अपनी सारी बचत राशि जो कि आपने भविष्य के लिये बचाई है, खर्च हो सकती है।  स्वास्थ्य बीमा योजना आपको यह निश्चिंतता देती है कि बीमारी की स्थिती में आवश्यक उपचार अच्छे से मिल सके और आपकी जेब पर भार भी न आये। स्वास्थ्य बीमा होना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह समय पर  आपको अच्छी चिकित्सा सुविधा के लिये मदद करता है, और यह आपके जीवन और स्वास्थ्य में सुधार करता है। लंबी बीमारी की स्थिती में यह आर्थिक कठिनाईयों का जोखिम कवर करता है। कुछ सालों में समाज में स्वास्थ्य बीमा के लिये अच्छी जागरुकता आई है। खासतौर पर लगातार अनिश्चिततापूर्ण घटनाक्रमों ने और मुश्किल पैदा कर दी है जैसे कि हाल ही में हुए आतंकवादी हमले।

स्वास्थ्य बीमा के लाभ
    स्वास्थ्य लाभ सुविधाएँ आपकी ली गई योजना पर निर्भर करता है, और ये भी कि उस पॉलिसी में क्या क्या कवरेज है। यहाँ पर कुछ बुनियादी सुविधाओं की सूची है जो कि लगभग सभी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में मिलता है –
  • यह मदद करता है बेहतर भविष्य के लिये एक छोटी सी राशि खर्च कर जो कि प्रीमियम कहलाती है।

  • यह बड़ी वित्तीय खर्चे से आपकी रक्षा करता है, और खासकर तब वित्तीय रुप से टूटने से बचाता है जबकि महंगी चिकित्सा या बीमारी के बाद देखभाल की जरुरत होती है।

  • यह निश्चित रुप से बीमा से सुरक्षित होने की भावना प्रदान करता है।

  • यह परिवार के सदस्यों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है

  • यह अस्पताल और मेडिकल के बिलों को भी कवर करता है।

  • यह विकलांगता और कस्टोडियल बिल को भी कवर करता है।

  • आप इसकी प्रीमियम राशि के भुगतान का आयकर अधिनियम की धारा 80 D  के अंतर्गत लाभ ले सकते हैं।

  • सबसे अच्छी बात, आप स्वास्थ्य बीमा योजना का विकल्प ६० वर्ष की उम्र के बाद भी चुन सकते हैं।

पहले की कड़ियाँ –

भाग १ – स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 1)
भाग २ – स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 2)

भाग २ – स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 2)

चिकित्सा बीमा की श्रेणियाँ:

पिछले कुछ वर्षों में चिकित्सा खर्च कई गुना बढ़् गया है। इसलिये चिकित्सा बीमा लेना बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। और कौन सी योजना ली जाये यह बहुत ही कठिन हो गया है। यहाँ कुछ प्रकार के स्वास्थ्या बीमा है, जो कि इस प्रकार हैं –

. व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा
. सामूहिक चिकित्सा बीमा
. विशेष योजनाएँ

. व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा
इस प्रकार के स्वास्थय बीमा योजनाएँ व्यक्तिगत आधार पर चिकित्सा में व्यय होने वाली राशि से रक्षा और उसकी रक्षापूर्ती को प्रस्तावित करती हैं। सामुहिक बीमा योजनाओं से व्यक्तिगत बीमा योजनाओं के लिये प्रीमियम ज्यादा होती है ।

. सामूहिक चिकित्सा बीमा
इस प्रकार की चिकित्सा बीमा योजना एक नियोक्ता या सोसाइटी या संघ के माध्यम से आमतौर पर उपलब्ध होती है, जिसमें एक ही मुख्य पॉलिसी के अन्तर्गत व्यक्तियों के नाम लिखे रहते हैं, जिन्हें बीमा का लाभ देना है।

. विशेष योजनाएँ

इस प्रकार की योजनाएँ विशेष रुप से बुजुर्ग व्यक्तियों, सैन्य सेवाओं के दिग्गजों की आवश्यकता का ध्यान रखती हैं।

स्वास्थ्य बीमा के प्रकार –
स्वास्थ्य देखभाल में होने वाले खर्चों में हाल के दिनों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।  इससे उपभोक्ता को खुद को ही नहीं बल्कि अपने परिवार को भी बीमा सुरक्षा देनी चाहिये। जो कि भविष्य में होने वाले चिकित्सा खर्च और अन्य संबंधित आवाश्यकताओं को कवर करता है। बीमा की आवश्यकता पुरानी पीढ़ी के लोगों को ज्यादा है जो या तो सेवानिवृत्त हो चुके हैं या फ़िर निकट भविष्य में सेवानिवृत्त होने वाले है। हम बाजार में उपलब्ध चिकित्सा बीमा के प्रकार देखते है, जो इस प्रकार हैं –

. चिकित्सा बीमा (Mediclaim Insurance)
. गंभीर बीमारी बीमा (Critical Illness Insurance)

. चिकित्सा बीमा (Mediclaim Insurance)

यह आमतौर पर अस्पताल में भर्ती होने, शल्य चिकित्सा में होने वाले खर्च को कवर करता है जो कि तब होते हैं जब बीमा धारक को कोई बीमारी या शल्य चिकित्सा की जरुरत होती है। बाजार में विभिन्न प्रकार के चिकित्सा बीमा उत्पाद उपलब्ध हैं जैसे व्यक्तिगत चिकित्सा बीमा, सामूहिक चिकित्सा बीमा और विदेश चिकित्सा बीमा। इस प्रकार की स्वास्थ्य बीमा से किसी भी बीमारी से आप अस्पताल में होने वाले वास्तविक खर्च जो कि वास्तविकता में होते हैं, आपको बीमा कंपनियाँ अदा कर देती हैं, और यह सुविधा केवल गैर जीवन बीमा (जनरल बीमा कंपनियाँ) ही देती हैं। इस तरह की योजनाओं को मेडिक्लेम नाम से जाना जाता है। अन्य प्रकार के स्वास्थ्य बीमा दोनों जीवन बीमा और गैर जीवन बीमा कंपनियों द्वारा उप्लब्ध करवाया जाता है।

गंभीर बीमारी बीमा (Critical Illness Insurance)

गंभीर बीमार योजनाएँ व्यक्ति को बीमित करती हैं गंभीर बीमारियों के जोखिम से, जिसका बीमा सुनिश्चित समय पर प्रदान करना होता है उसके एवज में बीमा कंपनी व्यक्ति को गंभीर बीमारी होने के जोखिम का बीमा प्रदान करती है। यह बीमा आपको देता है आपको नगद राशि अगर आपको कोई भी गंभीर बीमारी अनपेक्षित रुप से आ घेरती है, जो गंभीर बीमारियाँ  इस बीमा में बीमित की गई हैं अगर कोई भी बीमारी उसमें से निकल जाती है तो बीमा कंपनी आपको तुरंत बीमा नगद दे देती हैं, जिसे आप अपने घर में होने वाले खर्च और उस गंभीर बीमारी के चिकित्सा खर्च में उपयोग कर सकते हैं।  कभी कभी गंभीर बीमारी आपके परिवार की जीवन शैली बदल देता है तो यह बीमा उस जोखिम से भी रक्षा करता है। किसी भी गंभीर बीमारी जो कि इस बीमा में कवर होती है, बीमारी के पता लगते ही कुछ ही दिनों में  इस तरह के स्वास्थ्य बीमा में बीमा धारक को बीमा की राशि एकमुश्त दे दी जाती है। आमतौर पर गंभीर बीमारियों की इस बीमा योजना में निम्न गंभीर बीमारियों को कवर किया जाता है –

  • Aorta graft surgery
  • कैंसर Cancer
  • Coronary artery bypass surgery
  • दिल का पहला दौरा First heart attack
  • गुर्दे का विफ़ल होना Kidney failure
  • प्रमुख अंग प्रत्यारोपण Major organ transplant
  • Multiple sclerosis
  • पक्षाघात Paralysis
  • Primary pulmonary arterial hypertension
  • आघात Stroke

कल सूर्यग्रहण था और ग्रहण का पहला प्रकोप हमारी शर्ट पर निकला, तो शायद हम बच लिये… “बांके बिहारी लाल की जय”

   कल सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण था, शायद वैसे जैसा कि महाभारत में हुआ था क्योंकि दोपहर को ही सन्ध्याकाल जैसी स्थिती निर्मित हो गई थी।

   हम ग्रहण काल में घर से निकले ऑफ़िस जाने के लिये और बड़े इत्मिनान से ऑटो को हाथ देकर रोकने लगे। कई ऑटो रुके पर कोई उस तरफ़ जाने को तैयार ही नहीं था (ये तो रोज की बात है ), एक ऑटोवाले ने सहमति दी तो हम जैसे ही उसमें बैठने लगे पता नहीं कैसे हमारी शर्ट की ऊपरी जेब ऑटो के मीटर में उलझ कर फ़ट गयी, और हम हतप्रभ से अपनी शर्ट को देखने लगे।

   वैसे भी मन तो शंकालू ही होता है सोचा कि चलो ग्रहण की शुरुआत हो चुकी है अपने ऊपर अब बेटा दिनभर के लिये तैयार हो जाओ, पता नहीं दिन कैसा जाने वाला है। फ़िर क्या था ऑटो से उतरे वापिस घर आये और शर्ट बदल कर वापस चल दिये। क्योंकि अपनी तो पहले की हिस्ट्री भी खराब है ग्रहण के दिनों की, हाँ यह पहला सूर्य ग्रहण था और अभी तक जितने भी बड़े बदलाव या नुक्सान हुए थे वो चंद्र ग्रहण से हुए थे। हो सकता है कि हम खुद ही उस समय लापरवाह हो गये हों और हमारी शर्ट फ़ट गयी हो।

   पर हाँ दिनभर काफ़ी अच्छा गया, और तो और जिन कार्यों के न होने की उम्मीद थी वे कार्य भी हो गये। लगता है कि शनि शर्ट पर ही था। 🙂

   यह तो सब जीवन में चलता ही रहता है, और जीवन इन्हीं उतार-चढ़ाव का नाम है, इनके बिना जीवन अधूरा है।

   पर फ़िर भी मन में यह तसल्ली रही कि चलो इस बार ग्रहण से अपन बच लिये, कोई नई समस्या या जिंदगी में नई पेचिदगियाँ नहीं आईं और सब मस्त रहा। सब मुरलीवाले की माया है। इसलिये हम तो हमेशा “बांके बिहारी लाल की जय” कह लेते हैं।

भाग १ – स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 1)

    स्वास्थ्य बीमा जो कि मेडीक्लेम या चिकित्सा बीमा के नाम से ज्यादा जाना जाता है। यह बीमा कंपनी और बीमा धारक के बीच एक प्रकार का अनुबंध होता है। आकस्मिक चिकित्सा की स्थिती में यह आपकी और आपके परिवार की आर्थिक रुप से सुरक्षा करता है। इसमें किसी किसी योजना में स्थायी अपंगता और लंबी चिकित्सा की जरुरतें भी शामिल होती हैं। मेडिक्लेम में आपको हर वर्ष प्रीमियम अदा करना होता है, जिसके एवज में आप पाते हैं बीमा कंपनी का वायदा, जितनी भी राशि आपकी खर्च होती है, उसे क्लेम के रुप में वापिस देने के लिये। स्वास्थ्य बीमा भारतीय बाजार में नया है और उपभोक्ताओं को धीरे धीरे इसका पता चल रहा है। उपभोक्ता को स्वास्थ्य बीमा का उद्देश्य पता होना चहिये और बीमा कंपनियाँ चिकित्सा में खर्च की गई राशि को बीमित करती हैं। आमतौर पर स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में अपंगता, लंबी चिकित्सा, या अस्पताल में भर्ती होना शामिल होता है। यह बीमा सरकारी कंपनियों के माध्यम से भी उपलब्ध है और् निजी बीमा कंपनियाँ भी यह सुविधा देती है।

    स्वास्थ्या बीमा दोनों प्रकार से लिया जा सकता है व्यक्तिगत और समूह में (कंपनी अपने कर्मचारियों के लिये बीमा कवर दे सकती है)। प्रत्येक मामले में या तो वो समूह हो या फ़िर व्यक्तिगत हो, बीमा प्रीमियम का भुगतान आयकर बचाने के लिये और खुद को किसी अप्रत्याशित चिकित्सा सेवा की स्थिती में होने वाले खर्च से बचाता है। हालांकि व्यक्तिगत पॉलिसियँ, समूह पॉलिसी से मह्ँगी होती है। खुद बीमा धारक ही व्यक्तिगत पॉलिसी का मालिक होता है। जबकि सामूहिक प्लॉन्स में कंपनियाँ  इसे प्रायोजित करती हैं और इसमें अपने कर्मचारियों को पंजीकृत करती हैं। अगर आपके पास सामूहिक बीमा है तो व्यक्तिगत स्वास्थ्या बीमा लेने की जरुरत ही नहीं होती है। कई लोग जो कि कोई बीमा नही खरीद पाते हैं या किसी वजह से बीमा नहीं करवा पाते हैं उन्हें सामूहिक योजना का अच्छा लाभ होता है।

    स्वास्थ्य व्यय के कुल जोखिम का आकलन कर अपनी वित्तीय संरचना को अच्छे से विकसित कर सकते हैं,  मासिक या वार्षिक प्रीमियम भरने के लिये यह आपको महत्वपूर्ण दिशा देगा। और वह प्रीमियम राशि हर वर्ष आपके पास होगी जिससे आप अपने बीम कंपनी से यह सुविधा ले पायेंगे और अपने को व अपने परिवार को स्वास्थ्य बीमा से बीमित कर पायेंगे। इस सुविधा को केन्द्रीय संगठन  जैसे कि सरकारी एजेन्सी, निजी व्यवसायी या लाभ के लिये कार्य न करने वाली इकाई द्वारा प्रशासित किया जाता है। उस व्यक्ति को या बीमा धारक द्वारा बीमा कंपनी को नियमित शुल्क का भुगतान किया जाता है, जिसे प्रीमियम के रुप में जाना जाता है। इसके फ़लस्वरुप बीमा कंपनियाँ सभी या कुछ चिकित्सा खर्च जब भी बीमित को जरुरत होगी, भुगतान कर देगी, जब बीमित अगर घायल हो गया हो या बीमार हो जाता है या फ़िर अस्पताल में भर्ती होता है। तब बीमाधारक को चिकित्सा खर्च की कोई चिंता नहीं होती है।

गूगल की चैट विन्डो की अनुवाद सेवा में अब आंग्ल भाषा से हिन्दी में अनुवाद भी उपलब्ध है..

मैंने अभी कुछ दिन पहले एक पोस्ट लिखी थी क्या आपने गूगल की इस अनुवाद सेवा के बारे में सुना है, देखिये….

अब इसमें आंग्ल भाषा से हिन्दी का बोट भी जुड़ गया है जिससे आपको कोई भी अन्य विन्डो खोलना ही नहीं पड़ेगी जब भी किसी शब्द का हिन्दी में अर्थ चाहिये सीधे चैट कीजिये और हिन्दी में अर्थ पाईये। इस बोट का एड्रेस है – [email protected]

en2hi

जल्दी से यह जोड़ लीजिये अपने जीमेल में और किसी भी शब्द का अनुवाद आप करवा पायेंगे केवल एक चैटिंग विन्डो से।

शायद सारे चिट्ठाचर्चा वाले चर्चाकार नाराज हैं…. इसीलिये तो हमारे पोस्ट की लिंक नहीं दी जाती है… चलो छोड़ो… पर क्या करें आज लिख ही दिया दिल नहीं माना तो

    हम बहुत दिनों से देख रहे हैं कि सारे चिट्ठाचर्चा वाले चर्चाकार शायद हमसे नाराज हैं क्यों, क्योंकि हमें लगता है कि सब हमसे नाराज हैं, क्योंकि हमारे ब्लॉग की लिंक ही नहीं दी जा रही है। हमें लगता है कि यह हमें नहीं कहना चाहिये पर फ़िर भी आज पता नहीं क्यों फ़िर भी कह ही रहे हैं। हाँ भई हम कोई प्रसिद्ध ब्लॉगर तो नहीं फ़िर भी ब्लॉगर तो हैं, कुछ हमारे रोज के पाठक तो हैं ही जो कि हमें ब्लॉग लिखने के लिये प्रेरित करता है, अब देखते हैं कि आखिर हमें ये चर्चाकार कब तक इग्नोर करते हैं।

    ब्लॉगर भले ही उम्र में बढ़े होते हैं पर फ़िर भी हमेशा यही मन करता है कि हमारी चर्चा कहीं न कहीं हो, क्योंकि कहीं न कहीं मन बालसुलभ या हठी होता है। सोचा था कि कभी भी यह बात न बोलेंगे और चुपचाप ब्लॉगरी करते रहेंगे। पर पता नहीं आज जब विन्डोज लाईव राईटर खोला ब्लॉग लिखने के लिये तो अपने आप ही कीबोर्ड पर ऊँगलियाँ चलने लगीं और यह सब लिख दिया।