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About Vivek Rastogi

मैं २००६ से हिन्दी ब्लॉगिंग कर रहा हूँ, और वित्त प्रबंधन मेरा प्रिय विषय है। मेरा एक यूट्यूब चैनल भी है जिसे आप https://youtube.com/financialbakwas देख सकते हैं।

शादी के पहले के प्यार भरे खत (Love Letters) फ़्री और लंबी मोबाईल काल्स में खो गये

जब मेरी शादी पक्की हुई थी, उस समय मोबाईल तो आ गये थे पर इनकमिंग पर भी चार्ज था और आऊटगोइंग बहुत महंगी थी। उस समय तो घर पर लेंडलाईन से भी आऊटगोइंग करने पर ज्यादा चार्ज था और आमदनी कम।

मेरी शादी पक्की होने के छ: महीने बाद हुई थी पर फ़ोन महंगा पड़ता था। खत का सहारा लेकर अपने दिल की बात एक दूसरे को पहुँचाते थे और उस समय ग्रीटिंग कार्ड को साथ में भेजने का फ़ैशन था। घंटों तक खत लिखते और फ़िर घंटों तक कार्ड गैलेरी में जाकर कार्ड चुनते और अपने दिलदार को भेजते। हम उनके खत का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार करते थे और वो हमारे खत का। खत में अपने दिल के प्यार से भर देते और अपने दिलदार के खत को गुलाब के फ़ूल के साथ और कुछ अच्छे ग्रीटिंग कार्ड साथ में भेज देते। फ़िर वे खत हम बारबार पढ़कर कुछ नया पढ़ने की कोशिश करते थे।

आज की मोबाईल पीढ़ी खत के मिठास के बारे में क्या जाने वो तो बस दिन रात मोबाईल पर चिपके रहते हैं, और पल पल की जानकारी एक दूसरे से बांटते रहते हैं कि क्या कर रहे हो, ओफ़िस कैसे जा रहे हो, क्या खा रहे हो, क्या पी रहे हो इत्यादि इत्यादि। इन लोगों के पास इन यादों को सहेजने का कोई तरीका मौजूद नहीं है और हमारे पास आज भी वो यादें हमारे साथ हैं, जिसे कभी कभी हम आज भी पढ़ लेते हैं।

सीसी प्रॉक्सी (CCProxy) – प्रॉक्सी सर्वर सॉफ्टवेयर Windows के लिए

प्रॉक्सी सर्वर सीसी प्रॉक्सी उपयोग करने में आसान और इंटरनेट कनेक्शन साझा करने का शक्तिशाली साफ़्टवेयर है।

सीसी प्रॉक्सी ब्रॉडबैंड, डी.एस.एल. (DSL), डायल अप, ऑप्टिकल फाइबर, उपग्रह (satellite), ISDN एवं DDN कनेक्शन में समर्थन (support) करता हैं, यह आप के लैन(LAN) के भीतर कुशलतापूर्वक और आसानी से अपने खुद के प्रॉक्सी सर्वर और शेयर इंटरनेट को उपयोग करने में मदद करता है| सी.सी. प्रॉक्सी सर्वर एक HTTP, मेल, FTP, Socks, समाचार और Telnet प्रॉक्सी सर्वर के रूप में कार्य कर सकता है। इसकी सुविधाएँ हैं – सुचारु रुप से खातों का प्रबंधन, इंटरनेट का उपयोग नियंत्रण, बैंडविड्थ नियंत्रण, इंटरनेट वेब छानने, सामग्री छानना और समय पर नियंत्रण|
यह वेब कैशिंग, ऑनलाइन पहुँच निगरानी, कार्य उपयोग और बैंडविड्थ उपयोग के आँकड़े भी उपलब्ध करवाता है। सी.सी. प्रॉक्सी Win98, WinME, Winnt, Win2000, WinXP, Win2003 और Vista के साथ अच्छे से कार्य करता है।

प्रॉक्सी सर्वर CCProxy का पहला संस्करण जून 2000 में विकसित किया गया था।

यह शुरू में लैन में मॉडेम साझा करने के लिए तैयार किया गया था।

अगर एक लैन में किसी एक कंप्यूटर पर इंटरनेट का उपयोग कर सकते हैं तो लैन के भीतर सभी अन्य कंप्यूटरों पर इस प्रॉक्सी सर्वर सॉफ्टवेयर के द्वारा इंटरनेट का उपयोग कर सकते हैं. यह हार्डवेयर और इंटरनेट कनेक्शन के रुप में धन की बचत कर सकता है।

सी.सी. प्रॉक्सी वेब प्रॉक्सी सॉफ्टवेयर, के रूप भी कार्य कर सकता है। जिससे आप वेब पन्नों, डाउनलोड फ़ाइलें और भेजने और IE, फ़ायरफ़ॉक्स, नेटस्केप वेब ब्राउज़र के माध्यम से ब्राउज़ करने के लिए सक्षम बनाता है और वेब कैशिंग फ़ंक्शन से.सर्फिंग गति बढ़ा सकते हैं।

सी.सी. प्रॉक्सी (CCProxy) लैन पर इंटरनेट का उपयोग को नियंत्रित करने के लिए कई तरीकों से शक्तिशाली प्रबंधन कार्य करता है। जो कि आईपी पता, आईपी रेंज, मैक पता, उपयोगकर्ता नाम / पासवर्ड और समूह हैं।
वेब फ़िल्टरिंग और सामग्री फ़िल्टर फ़ंक्शन से आप क्लाइंट्स का उपयोग कुछ सीमित वेबसाईटों तक कर सकते हैं, यह आपके कर्मचारियों को अपने काम पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगा है और बच्चे अनुपयुक्त स्थलों की यात्रा करने में असमर्थ रहें यह सुनिश्चित करने के लिए आपको मदद मिलेगी। समय अनुसूची फ़ंक्शन उपयोगकर्ताओं ‘ऑनलाइन समय को नियंत्रित करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

क्लाइंट के लोगिन और ऑनलाइन उपयोग पर निगरानी में और इंटरनेट गतिविधियों को रिकार्ड करने में मदद करेगा।

अधिक जानकारी के लिये यहां तड़का लगाइये।

श्रवण कुमार और दिल्ली की मिट्टी का कमाल

आज ताऊ के ब्लाग पर कलयुगी श्रवण पढ़ा तो एक वाक्या याद आ गया दिल्ली में श्रवण कुमार का।

दिल्ली वाले कृपया बुरा न मानें वैसे मैं भी नार्थ इंडियन हूँ और मुंबई में रहते हुए लगभग ४ साल पूर्ण हुए हैं।

दिल्ली में एक मित्र से वार्तालाप चल रहा था और हम सामाजिक मुद्दों पर बात कर रहे थे कि मुंबई और दिल्ली में क्या भिन्नता है। दिल्ली में कोई भी तबके का व्यापारी हो वो ग्राहक को लूटने का प्रयत्न करता है, जैसे आटो वाले, फ़लवाले, इलेक्ट्रानिक दुकानवाले इत्यादि। ऐसा नहीं है कि मुंबई में लूट नहीं है परंतु दिल्ली के मुकाबले तो बहुत कम है पर फ़िर भी लूट तो लूट ही है। फ़िर भी मुंबई का आम आदमी आत्म अनुशासित है पर दिल्ली का नहीं क्यों ??

साउथ इंडिया की श्रंखला का एक प्रसिद्ध होटल करोलबाग में है और वहाँ पर साउथ इंडियन आँख बंद करके जाते हैं और अगर कमरा खाली नहीं भी होता है तो घंटों तक खाली होने का इंतजार करते रहेंगे पर किसी और होटल में जाना पसंद नहीं करेंगे। क्योंकि उन्हें साउथ इंडियन होटल पर विश्वास है परंतु दिल्ली वालों पर नहीं और अगर तब भी को कमरा खाली नहीं होता है तो जो भी वहाँ आते हैं उन लोगों को वो साउथ इंडियन होटल वाले ही दूसरे होटल में कमरा आरक्षित करके देते हैं।

कहते हैं कि जब श्रवण कुमार अपने अंधे माता पिता को कंधे पर पालकी में ले जा रहे थे तो जैसे ही श्रवण कुमार का दिल्ली में आगमन हुआ उन्होंने अपने माता पिता से घुमाने का किराया मांगा तो उनकी माताजी ने कहा चल बेटा आगे चल तुम्हें हम आगे किराया दे देंगे और थोड़ी सी मिट्टी अपने हाथों में लेकर अपने पास रख ली। जब मथुरा पहुंचे तो श्रवण कुमार से उनकी माता ने कहा कि कितना किराया चाहिये तब श्रवण कुमार ने कहा कैसा किराया क्योंकि वो तो सब भूल गये थे। फ़िर वो मिट्टी को रखकर उनकी माता बोली अब इस पर खड़े हो और बताओ तो झट से फ़िर श्रवण कुमार ने फ़िर किराया मांगा। यह सब दिल्ली की मिट्टी का कमाल है।

ये कैसी शादी के बाद की आजादी, जो कुछ करना है वो पर्दे की पीछे करें, सार्वजनिक न करें।

अभी परसों ही में ट्रेन में यात्रा कर रहा था तो जिस केबिन में मेरी सीट थी, उस केबिन में एक परिवार जो कि नागपुर से सफ़र कर रहा था और उनका एक ६ साल का बेटा भी था। साइड लोअर व साइड अपर में एक नवविवाहित दंपत्ति थे। जो कि सबके सामने बड़ी ही अभद्र हरकतें कर रहे थे, खुलेआम एक दूसरे को चूम रहे थे और अश्लीलता की हरकतें कर रहे थे। परंतु बोले कौन ! क्योंकि कोई भी बोलना नहीं चाहता, मैं भी नहीं। क्योंकि इन लोगों को समझाने का कोई मतलब ही नहीं है।

जो परिवार मेरे पास बैठा था वो भी कनखियों से ये सब देख रहा था और बच्चे को अपने में बिजी रख रहे थे ताकि वो उनकी हरकतों पर ध्यान न दें परंतु वो बच्चा तो बड़ी गौर से वही सब देख रहा था और कुल मिलाकर वातावरण प्रदूषित हो रहा था। उस परिवार के सज्जन मुझसे बोले ये लोग क्यों थर्ड एसी में आये यही सब करना था तो सेकंड एसी में जाते कम से कम वहाँ पर्दा रहता है जो भी करते ये लोग उस पर्दे के पीछे कम से कम हमें तो दर्शक नहीं बनना पड़ता वो भी जबरदस्ती।

इस परिस्थिती ने वाकई यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि अगर आप शादी के बाद घूमने (हनीमून) जा रहे हो तो बाहर नैतिकता से रहें और जो कुछ करना है वो पर्दे की पीछे करें, सार्वजनिक न करें।

किसी भी सोफ़्टवेयर को पोर्टेबल कैसे बनाये और पेनड्राईव से सीधे चलायें। (How to convert any application portable and run from a USB drive)

पोर्टेबल उत्पाद मुझे बहुत ही अच्छे लगते हैं क्योंकि उन्हें संस्थापित (Installation) करने की जरुरत नहीं पड़ती है। ये उत्पाद आपके विन्डोज की रजिस्ट्री में दर्ज नहीं होते और सबसे बड़ी बात आप इन पोर्टेबल उत्पादों को अपने साथ पेनड्राईव पर ले जा सकते हैं। पोर्टेबल उत्पाद केवल पोर्टेबल चीजों के लिये नहीं आप इसे पीसी पर भी उपयोग कर सकते हैं, ओर जैसा मैंने पहले बताया है बिना संस्थापित किये। केवल हार्डडिस्क पर कापी कीजिये और चलाइये। बहुत सारे उत्पाद अपने पोर्टेबल रुप में उपलब्ध हैं, लेकिन सारे नहीं। इसलिये मैं आपको बताने जा रहा हूँ कि कैसे किसी भी सोफ़्ट्वेयर उत्पाद को पोर्टेबल उत्पाद में बदल सकते हैं। माइक्रोसोफ़्ट ऑफ़िस २००३ के साथ यह समझते हैं कि कैसे पोर्टेबल उत्पाद में बदला जाता है।


पोर्टेबल उत्पाद में बदलने के लिये हम लोग उपयोग करेंगे एक सोफ़्टवेयर जो कि वीएमवेयर थिन (VM Ware Thin) के नाम से जाना जाता है। वीएमवेयर थिन एक ऐसा सोफ़्टवेयर उत्पाद है जो कि किसी भी सोफ़्टवेयर को एक EXE फ़ाईल में बदल देगा जिसे आप बिना संस्थापन के सीधे चला सकते हैं और कहीं से भी किसी भी मीडिया से पेनड्राईव, सीडी, डीवीडी, हार्डडिस्क इत्यादि। यह एक वर्चुअल ओपरेटिंग उत्पाद बनाता है एवं वीएमवेयर थिन उत्पाद खुद की रजिस्ट्री और फ़ाईल सिस्टम उस EXE में शामिल कर लेता है।

वीएमवेयर थिन मे सब कुछ अच्छा है केवल इसके दाम को छोड़कर, इसका दाम है $8,187 (लगभग साढ़े चार लाख रुपये, पता नहीं उन्होंने क्या सोचकर इतने दाम रखे हैं!) । लेकिन वे उपलब्ध करवाते है एक पूर्ण उपयोगी उत्पाद ६० दिन के ट्रायल वर्शन पर, ओर यह डाउनलोड रिक्वेस्ट पर उपलब्ध है।

वीएमवेयर थिन को जरुरत होती है एक साफ़ पीसी, जिस पर फ़्रेश विन्डोज संस्थापित किया गया हो, ओर वो उत्पाद जिसे आप पोर्टेबल उत्पाद में बदलना चाहते हैं, संस्थापित हों। लेकिन चिंता करने की कोई बात नहीं है यह पुराने संस्थापित विन्डोज पर भी समान रुप से कार्य करता है। (EXE वायरस मुक्त हो इसलिये ये सुझाव दिया गया था)| मेरे पीसी पर माइक्रोसोफ़्ट ऑफ़िस उपलब्ध था जिसे मैंने इस प्रक्रिया को करने से पहले हटा दिया जो कि बिल्कुल ठीक काम कर रहा था। लेकिन इस बात का मैं कह नहीं सकता कि यह सभी उत्पादों के लिये ठीक होगा। इसके लिये निम्नलिखित तरीके को अपनायें –

१. वीएमवेयर थिन संस्थापित कर सेटअप केप्चर चलाइये। (वीएमवेयर थिन का मुख्य फ़ाईल) स्टार्ट पर क्लिक करें।

२. चुनिये सी ड्राइव (C Drive) एवं कोई अन्य ड्राइव जहाँ पर आप माइक्रोसोफ़्ट संस्थापित करना चाहते हैं, अगर आप
ऑफ़िस सी ड्राइव पर ही संस्थापित करना चाहते हैं तो केवल सी ड्राइव ही चुनिये।

३. प्री-इंस्टाल स्केन पर क्लिक करें और प्रोग्राम को चुनी हुई ड्राईव की पूरी स्केनिंग करने दें।

४. स्केनिंग पूरी होने के बाद ऑफ़िस को वापस से अपने पीसी पर संस्थापित कर लें, जैसे कि साधारणतया: करते हैं।

५. ऑफ़िस संस्थापित होने के बाद क्लिक करें पोस्ट-इंस्टाल स्केन को और फ़िर से इंतजार करें इस स्केन के खत्म होने का।

६. अब यह उत्पाद आप से पूछेगा कि कौन सी चलने वाली (executables) फ़ाईलों का पोर्टेबल उत्पाद बनाना है। दी गई
सूची में से चुन लीजिये व कन्टीनय़ू पर क्लिक करें।

७. अब आप से पूछा जायेगा कि इन फ़ाइलों को कहाँ पर स्टोर करना है।

८. जहाँ फ़ाईलों को आपने स्टोर किया है उस फ़ोल्डर को खोलकर बिल्ड.बेट (build.bat) चलाइये।

वीएमवेयर थिन अब पोर्टेबल फ़ाईल बनाकर उसी फ़ोल्डर में बिन नामक फ़ोल्डर बनाकर सेव कर देगा। बिन फ़ोल्डर में आपको exe ऑफ़िस की फ़ाईल मिल जायेंगी। इस फ़ोल्डर को आप अपनी पेनड्राईव पर कापी कर लीजिये और अपनी पेनड्राईव से सीधे ऑफ़िस चलाइये।

पोर्टेबल माइक्रोसोफ़्ट ऑफ़िस २००७ (Portable MS Office 2007)

आपकी पेनड्राईव के लिये अब लीजिये पोर्टेबल माइक्रोसोफ़्ट एन्टरप्राइज ऑफ़िस २००७। इसके लिये आपको ऑफ़िस २००७ का संस्थापन नहीं करना पड़ेगा, केवल .exe फ़ाइल से चल जायेगा।

इस पेनड्राईव (यू.एस.बी.) में निम्न सोफ़्टवेयर उपलब्ध हैं –

१. वर्ड २००७
२. एक्सेल २००७
३. पावरपाइंट २००७
४. ऑफ़िस पिक्चर मैनेजर
५. क्लिप ऑरगेनाइजर
६. ऑफ़िस डायगोनेसटिक २००७

आप यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं |

चेतावनी – इस Download साइट पर अश्लील (porn) विज्ञापन हैं, कृप्या ध्यान रखें। इससे मेरा व मेरे ब्लाग का कोई संबंध नहीं है।

दिल्ली को इन चरसियों से मुक्त करवाने के लिये कृप्या सहयोग करें और दिल्ली को सुँदर बनाने में योगदान दें।

मैं रोज आटो से करोलबाग से कनाटप्लेस अपने ओफ़िस जाता हूँ तो पंचकुइयां रोड और कनाटप्लेस की रोड जहाँ मिलती है, उसके थोड़े पहले ही चरसियों की भीड़ फ़ुटपाथ पर लगी रहती है। खुलेआम भारत की राजधानी दिल्ली में चरस का सेवन कर रहे हैं पर कोई भी किसी भी तरह की कार्यवाही करने को तैयार नहीं, कारण शायद यह कि उनसे कमाई नहीं हो सकती !!

वैसे तो रास्ते में बहुत सारी ओर भी चीजें पड़ती हैं रास्ते में, हनुमानजी का बहुत बड़ा मंदिर, थोड़ी ओर आगे जाने पर कबूतरों को दाने खिलाते लोग और कोने में श्मशानघाट और भी बहुत कुछ। पर बरबस ही निगाहें रुक जाती हैं चरसियों को देखकर जब कनाटप्लेस की रेडलाईट पर आटो रुकता है। ये लोग भिखारी, कचरा बीनने वाले जैसे लगते हैं, परंतु ये खुलेआम चरस का सेवन करते हुए दिख जायेंगे कानून का मजाक बनाते हुए। किसी भी कानून पालन करवाने वाले व्यक्ति को ये लोग नहीं दिखते ?

ये लोग वहाँ मैली कुचैली चादर ३-४ के झुँडों में ओढ़कर चरसपान करते रहते हैं और जैसा कि आटो वाले बताते हैं कि यही लोग रात के अँधेरे का फ़ायदा उठाकर लूटपाट भी करते हैं और पुलिस वाले इनको इसलिये पकड़ के नहीं ले जाते हैं कि इनसे उन्हें कोई भी (धन संबंधी) फ़ायदा नहीं होता है। उल्टा उनकी सेवा करना पड़ती है।

दिल्ली को इन चरसियों से मुक्त करवाने के लिये मेरा ब्लाग पढ़कर कोई बंधु जो यह अधिकार रखता हो या मीडिया में हो तो कृप्या सहयोग करें और दिल्ली को सुँदर बनाने में योगदान दें।

मन का ब्लागर होना बहुत जरुरी है ब्लाग लिखने के लिये, ब्लागर मन आखिर क्या चाहता है कुछ विश्लेषण

अब तो मेरा मन भी ब्लागर हो चला है, क्योंकि मन का ब्लागर होना बहुत जरुरी है ब्लाग लिखने के लिये, ब्लागर मन आखिर क्या चाहता है कुछ विश्लेषण –

१.आज कौन से नए विषय पर लिखा जाये कि पाठकों का असीम स्नेह मिले और ब्लागर मन की तड़पन को शांति मिल सके।
२.आसपास और अपनी जिंदगी में झांककर, घटी हुई घटनाओं को शब्दों के जादू से बुनकर अपनी जिंदगी के रंग सब को दिखा
दूँ।
३.साहित्यिक भाषा का उपयोग करुँ, जिससे ब्लागर मन के किसी कोने में बैठे साहित्यकार को दुनिया को दिखा सकूँ। (पहले
मैं कविताएँ लिखता था परंतु कार्य की व्यस्तता में सब खत्म हो गया।)
४.तंत्रजाल पर बहुत कुछ नया उपलब्ध है उसके बारे में खोजबीन कर अपने ब्लाग पर जानकारी प्रकाशित करुँ।
५.हिन्दी में अपने प्रोफ़ेशन के बारे में कुछ लिखूँ । ( लिखा था पर न ज्यादा हिट्स आये और न ही प्रतिक्रिया)
६.घरवाली ब्लाग लिखने पर काश झगड़ा न करे और यह भी सुनने को न मिले कि तुम मेरा समय चिठ्ठाकारी को दे देते हो।
(कई बार तो बड़े और तगड़े झगड़े हो चुके हैं। अब घरवाली को भी चिठ्ठाकारी के लिये राजी कर लिया है। अब वह भी जल्दी
ही चिठ्ठाजगत में प्रवेश करने वाली है।)
७.रिटायरमेंट के बाद फ़ुल टाईम ब्लागिंग करुँ।

भारत के नौजवानों को मेरा सलाम उनके जवानी से लबालब भरे खून के जोश को मेरा सलाम।

आखिरकार जवानी से लबालब भरे खून ने जोश दिखाया। कांग्रेस ने सपने में भी इतनी बढ़ी जीत का अहसास नहीं किया होगा पर जवानी से लबालब भरे खून ने जोश दिखाया और वो कर दिखाया जो शायद सपने में भी कोई नहीं सोच सकता था। कांग्रेस में युवा चेहरे ने कमाल दिखाया है २० साल बाद। २० साल बाद कांग्रेस में युवा चेहरा आया है और उसने राजनीति के मैदान में ऐसे पत्ते फ़ेंके जो बीजेपी समझ ही न पायी।