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About Vivek Rastogi

मैं २००६ से हिन्दी ब्लॉगिंग कर रहा हूँ, और वित्त प्रबंधन मेरा प्रिय विषय है। मेरा एक यूट्यूब चैनल भी है जिसे आप https://youtube.com/financialbakwas देख सकते हैं।

अगर मुख्यमंत्री का वरदहस्त है तो कोई क्या कर सकता है, न्याय की देवी भी अपनी आँख पर काली पट्टी बँधी होने का मातम मनायेगी|

आखिरकार सभरवाल सर के हत्यारे बेगुनाह साबित कर छुटवा लिये गये। भले ही उन्हें टी.वी. पर सर के साथ भद्दी भाषा में बात करते हुए दिखाया गया हो, जान से मारने की धमकी देते हुए दिखाया गया हो, हमारी पहुँच कहां तक है ये भी कहते हुए दिखाया गया हो। पर उनका कोई बाल भी बांका कर सकता है क्या, क्योंकि हमारे माननीय मुख्यमंत्री का वरदहस्त है उनके ऊपर।

टीस इसलिये उठी कि मैं भी उसी माधव महाविद्यालय में पढ़ा हूँ और इस गंदी राजनीति को बहुत पास से देखा है। जहां एक प्रोफ़ेसर दूसरे प्रोफ़ेसर के लिये षड़्यंत्र रचता है वो भी छात्र राजनीति के द्वारा। जिस दिन यह घटना हुई, ठीक उसके एक दिन पहले मैं रायपुर से भोपाल के लिये ट्रेन में था और अपने मित्रों को यही बता रहा था कि माधव महाविद्यालय में तो हरेक छात्र नेता है, और कोई भी कुछ भी कर सकता है, और अब चुनाव हैं कुछ भी हो सकता है। शायद किसी की जान भी जा सकती है शायद किसी प्रोफ़ेसर की भी क्योंकि वहां के छात्र बहुत ही उच्चश्रंखल हैं, उद्दंड हैं, जो कि वहीं के गुरुओं द्वारा अपना वर्चस्व बनाने के लिये बना दिये गये हैं। पर मुझे यह पता नहीं था कि जो मैं बोल रहा हूँ वही अगले सत्य होने वाला है। सभरवाल सर ऐसे नहीं थे और उन्हें चुनाव की देखरेख के लिये नियुक्त किया गया था और वे किसी के दबाब में नहीं आते थे, पहले तो छात्र नेताओं ने उन्हें हटवाने की बहुत कोशिश की परंतु कामयाब नहीं हो पाये तो उनकी हत्या कर डाली।

सारे सबूत होते हुए भी हत्यारे बेगुनाह छूट गये और कोई भी कुछ भी नहीं कर पाया। शायद उज्जैन की जनता ही इंसाफ़ करे, नहीं तो ये लोग अब भाजपा में किसी प्रतिष्ठित पद पर बैठा दिये जायेंगे और कोई भी कुछ भी नहीं कर पायेगा, और न्याय की देवी भी अपनी आँख पर काली पट्टी बँधी होने का मातम मनायेगी।

नया सोफ़्टवेयर एक दिन के लिये फ़्री – Giveaway of the day

giveawayoftheday.com एक ऐसी वेबसाईट है जो कि नया सोफ़्टवेयर एक दिन के लिये फ़्री में उपलब्ध करवाती है जब भी कोई नया सोफ़्टवॆयर बाजार में आता है और अगर उसका गठबंधन इस साईट से होता है तो २४ घंटे के लिये वह सोफ़्टवेयर फ़्री में डाउनलोड के लिये उपलब्ध होता है वह भी अपनी सम्पूर्ण विशेषताओं (Features) के साथ। साथ में उस सोफ़्टवेयर की पूरी समीक्षा भी उपलब्ध होती है। २४ घंटे बाद वह सोफ़्टवेयर ट्रायल वर्जन में उपलब्ध होगा। यह एक बहुत अच्छा प्रयास है इस वेब साईट के द्वारा।

इसका टिकर कोड अपने ब्लोग पर लगाकर ब्लागर इसका प्रचार भी कर सकते हैं।

मेरा नया ब्लोग “बैंकों के बारे में जानकारी”

मैंने एक नया ब्लोग शुरु किया है “बैंकों के बारे में जानकारी”।

मेरी कोशिश है कि आम जनता को बैंकों के बारे में उनका ज्ञानवर्धन कर सकूँ।

ओम भैया (ओम व्यास ओम) अब स्कूटर पर नहीं देखेंगे।

अक्सर ओम भैया (ओम व्यास ओम) फ़्रीगंज में सुबह अपने दफ़्तर जाते वक्त मामा पान पर मिल जाते थे अपनी सफ़ेद स्कूटर पर, पर अब ओम भाई कभी स्कूटर पर नहीं दिखेंगे यह उज्जैन के लिये अपूरणीय क्षति है, उनके छोटे भाई संजय व्यास मेरे अच्छे मित्रों में से हैं। भगवान शोकसंतप्त परिवार को इस गहन वेदना को सहन करने की शक्ति प्रदान करे।

नर्सरी और प्राइमरी स्कूल के बच्चों के लिए सबसे अच्छी पत्रिका “मेजिक पोट” (MagicPot)

यह बच्चों के लिये सबसे अच्छी पाक्षिक पत्रिका है। यह एक अद्भुत पत्रिका है जिससे मजे से ओर आसानी से विभिन्न प्रकार की गतिविधियों को सीख सकते हैं। विशेष रूप से नर्सरी और प्राइमरी स्कूल के बच्चों के लिए। इस पत्रिका में ऐसी बहुत सी गतिविधियाँ हैं जिससे बच्चे का दिमाग तेज होगा जैसे कि डॉट जोड़ना, रंग भरना, नैतिक कहानियाँ, महाकाव्य ओर भी बहुत कुछ। इसमें चित्र पहेलियाँ हैं जिसमें अंतर बताना है।


हर पहेली के नीचे मेजिकपोट में एक नोट दिया रहता है कि इस पहेली या अभ्यास से बच्चों को क्या लाभ है। यह पत्रिका रंगीन है ओर बच्चों के मन को जो जो भाता है वह सब कुछ इसमें हैं। पत्रिका में सबसे अच्छी चीज है, चित्रों के समूह में से एक अलग चित्र को बच्चों को चयन करने को देते हैं।


कुल मिलाकर बच्चों के लिये सबसे बेहतरीन पत्रिका, ज्यादा जानकारी के लिये यहाँ चटका लगाइये। यह हिन्दी में नहीं इंग्लिश में है अगर इसका हिन्दी वर्जन भी होता तो शायद इससे अच्छी कोई पत्रिका नहीं हो सकती थी।

तकनीकी छात्रों के जबाब ये कुछ भी कर सकते हैं… EXCLUSIVELY FOR ENGINEERING STUDENTS………

Ques: We know that 2/10=0.2

but

Prove that 2/10=2

Ans : Normal college students insist Question is “OUT of Syllabus”.

but

Engineering Students replied:

2=two,
10=ten.

therefore Two/Ten = Two/Ten = wo/en.

w=23,
o=15,
e=5,
n=14.

therefore

w+o=23+15=38
&
e+n=5+14=19

Therefore wo/en=38/19=2.

Hence Proved

FOR, Engineers “It doesn’t matter ans kya hai, they say ans kya lana he.”

आज पापाजी की बहुत याद आ रही है।

आज सुबह से पता नहीं क्यों अतीत में अपने जीवन को झांक रहा था और उस सबमें पापाजी ने क्या किया अपने परिवार और मेरे लिये पता नहीं क्यों यह सब विश्लेषण करने की कोशिश कर रहा था। पर मैं कोई बहुत बड़ा तत्वज्ञानी नहीं कि मैं उस विशाल ह्रदय पिता के कार्यों का विश्लेषण कर सकता, पर हाँ यह बात तो मैं बहुत ही अभिमान के साथ कह सकता हूँ कि आज जो कुछ भी मैं हूँ केवल अपने माता पिता के दिये गये संस्कारों के कारण हूँ। अगर संस्कार नहीं होते तो मैं शायद कहीं ओर होता जो मेरे करीबी ओर मेरे अपने बहुत अच्छे से जानते हैं, जब मैं अपनी राह भटक गया था। परंतु संस्कारों ने मुझे सही राह दिखाई और मुझे गर्त में जाने से बचा लिया।

बचपन की यादों में झांक रहा था तो देखा कि पापाजी सुबह जल्दी उठकर अपनी साईकिल लेकर बैंक के काम से दौरा करने चल दिये हैं उन दिनों में परिवहन की उतनी अच्छी व्यवस्था तो थी नहीं, तो उन्हें एक दिन में तकरीबन ३०-४० किलोमीटर साइकिल चलानी पड़ती थी, अगर कहीं दूर गाँव जाना होता था तो पहले बस के ऊपर साईकिल रखते और फ़िर जहां जिस गाँव में जाना होता वहां साईकिल लेकर चल देते थे। फ़िर देर रात थकेहारे कब में आते थे हमें तो पता ही नहीं चलता था क्योंकि उस समय कोई टी.वी. तो था नहीं, मैं तकरीबन शाम ७-८ बजे के आसपास सो जाता था। कभी कभी दौरा २-३ दिन का भी हो जाता था। बस बचपन का इतना ही मुझे याद है।

पापाजी अपने छह: भाई बहनों में सबसे बड़े हैं, और मैंने उनकी एक बात को और ध्यान से देखा कि जब भी चाचाजी, फ़ूफ़ाजी या कोई ओर घर पर आता वो उनके साथ थोड़ी ही देर समय बिताते और बाकी समय बाहर जाकर पेड़ पौधे के साथ या पानी की टंकी भरने में या कुछ ओर करने में अपने को व्यस्त रखते। वैसे तो सब समझदार हैं पर यह बात मेरे समझ में न आई, पर वक्त ने मुझे बता दिया कि पापाजी क्यों ऐसा करते हैं। बड़ों की इज्जत अपने हाथों में होती है, यही बात मैं उनकी इस बात से सीख पाया। ओर भी बहुत कुछ सीखने को बाकी है जो शायद ऐसे ही जिंदगी की पाठशाला में सीखने को मिलेगा।

यादें तो बहुत हैं पर कहने के लिये शब्द नहीं मिल रहे हैं जब भी शब्द मिलेंगे यादों को पिरोने के लिये वो यादें जरुर कलमबद्ध करुँगा। मुझे गर्व है मेरे पापाजी के ऊपर कि वो मेरे पापा हैं।

कम्प्यूटर पर पासवर्ड कैसे छुपाएँ, कीबोर्ड से लिखते समय । कोई देख नहीं पाये कि आप अपने मोनिटर पर क्या कर रहें और क्या सर्फ़िंग कर रहे हैं और ताऊ….

कम्प्यूटर पर पासवर्ड कैसे छुपाएँ, कीबोर्ड से लिखते समय ।

कोई देख नहीं पाये कि आप अपने मोनिटर पर क्या कर रहें और क्या सर्फ़िंग कर रहे हैं।

और ये सबसे उम्दा….

और ये सब ताऊ से देखते न बना और आँखें बंद कर लीं –