ऑफिस से छुट्टी तो सबको चाहिये होती है, पर कई बार बिना किसी कारण के भी छुट्टियाँ चाहिये होती हैं, जैसे कि कभी काम करने का मूड ही नहीं है, या फिर उस दिन आप उदास हैं, आपका घर में झगड़ा हो गया है और अब घरवालों को खुश करने के लिये अब उन्हें दिनभर बाहर घुमाने ले जाना है। ऑफिस से छुट्टी लेने अजीब कारण पर छुट्टी तो मिल ही जाती है, अगर अपने परिवार में गृहणी बीमार हो जाये तो भी हमें खुद ही काम करना होता है, तब भी बच्चों को भी सँभालना पड़ेगा, घर की साफ सफाई भी करना होगी तथा खाना भी बनाना होगा। ऐसी कई परिस्थितियों में Continue reading ऑफिस से छुट्टी लेने अजीब कारण, पर छुट्टी तो मिल ही जाती है
Zoom, स्काईप, वेबेक्स और टीम्स पर एक बातचीत
2011 में माइक्रोसॉफ्ट ने स्काईप को 8.5 बिलियन डॉलर में खरीदा था, उसी वर्ष zoom की शुरुआत हुई थी। सोचिये अगर 2011 में महामारी हुई होती तो, उस समय सभी लोग स्काईप का ही उपयोग कर रहे होते, पर अब सभी लोग zoom का उपयोग कर रहे हैं, इसका मुख्य कारण माइक्रोसॉफ्ट का स्काईप को ढंग से मैनेज न किया जाना रहा।
स्काईप व्यक्तिगत उपयोग के लिये उपयोग में नहीं लाया जाता, बल्कि कॉरपोरेट मेसेजिंग एप्प बनकर रह गया है। zoom ने इसी कमी का फायदा उठाया और अब वे कॉरपोरेट के लिये लाँच करने जा रहे हैं।
अभी zoom का समय है और हर किसी को zoom का उपयोग करते देखा जा सकता है, भले ही वह योगा क्लास हो या स्कूल क्लास या फिर दोस्तों के साथ बीयर की चीयर्स, zoom का इंटरफेस आम उपयोगकर्ता के लिये बहुत सरल है, जबकि लगभग हर महीने स्काईप में बदलाव होते रहते हैं।
स्काईप के पास इस बार का यह फायदा उठाने का बहुत बढ़िया मौका था, पर उन्होंने ये मौका खो दिया। zoom के ऊपर अब गूगल की नजर है, हो सकता है कि जल्दी ही यह गूगल का उत्पाद हो जाये।
माइक्रोसॉफ्ट का टीम्स Teams भी उपलब्ध है, परन्तु यह बहुत भारीभरकम एप्प है। कुल मिलाकर zoom ने बाजी मार ली है।
इस पर फ़ेसबुक पर बहुत से कमेंट भी आये जो कि पठनीय हैं –
Prakash Yadav ज़ूम आम लोगों के लिए है। जिन्हें सिर्फ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग चाहिए। टीम कॉर्पोरेट के लिए आल-इन-वन अप्प है।
Abhishek Tripathi मुझे zoom के बारे में कुछ दिनों पहले तक भी पता नहीं था, अभी आजकल सबको देख रहा हूँ Zoom का उपयोग करते हुए तो इसके बारे में जानकारी इकठ्ठा करी! इसके पहले lync use karte the फिर Skype कुछ दिन और फिर Teams. वैसे teams थोड़ा भारी है पर app सही है!
Vimal Rastogi Team and Skype captured corporate
Neeraj Rohilla Microsoft Teams will prevail for corporates. It has some good features. Better than WebEx or Zoom
Vivek Rastogi Neeraj Rohilla Yes Teams is superb.
दिनेशराय द्विवेदी गूगल का ड्यूओ बढ़िया काम कर रहा है।
Prashant Priyadarshi टीम्स का जिक्र करना जल्दबाजी होगी, उसे समय दिया जाना चाहिए। लेकिन ज़ूम को लेकर मेरा अनुभव यह है कि विश्व की कई कंपनियाँ इसका इस्तेमाल पहले ही कर रही थी। पिछले दो साल में दुनिया भर की कम से कम 200 क्लाइंटस के साथ हुई मीटिंग को इसका मानक बना रहा हूँ। स्काइप और वेबेक्स महंगा तो था ही साथ ही यूजर फ्रेंडली भी नहीं था ज़ूम के मुकाबले।
उस समय मेरे विचार से केवल स्काइप में ही वीडियो चैट का विकल्प था। याहू मैसेंजर में केवल ऑडियो चैट का विकल्प था। नेट की ज्यादा स्पीड न होने से स्काइप में हम लोग ऑडियो चैट ही करके आनन्द लेते थे। दूसरा कारण यह भी था कि डैस्कटॉप पर वैबकेम न होता था। लैपटॉप लेने के बाद और नेट की स्पीड कुछ सुधरने के बाद पहली बार वीडियो चैट की थी तो बड़ा अद्भुत लगा था।
वैसे उस जमाने में चैट वगैरह में मेरे असल जिन्दगी के कोई परिचित, मित्र, रिश्तेदार वगैरह न मिलते थे। तब लोगों के पास नेट क्या कम्प्यूटर भी न होता था। याहू मैसेंजर, स्काइप वगैरह पर ब्लॉगर दोस्तों के साथ ही बतियाते थे। अब तो दुनिया बदल गयी है, स्मार्टफोन ने घर-घर ये सब तकनीक पहुँचा दी।
बाकी दुनिया बदलती रहती है जी। कभी याहू मैसेंजर बादशाह था, उसके बाद गूगल टॉक का जमाना आया, आज व्हॉट्सएप का है, कल किसका होगा पता नहीं।
ऐसे ही आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जूम की धूम है। कल का पता नहीं।
बैंकनिफ़्टी में लालच
रोज़ सुबह ९ बजे से बाज़ार का पूरा विश्लेषण करके बैठ जाता हूँ, कि आज तो बैंक निफ़्टी में कोई ट्रेड करूँगा, अपना एक्सपर्टीज केवल बैंक निफ़्टी और निफ़्टी ऑप्शन्स पर है, और बैंकनिफ़्टी में जल्दी लालच करके थोड़ा बहुत कमाकर निकल लेना अपनी आदत है।
अपने व्हाट्सऐप स्टेटस पर करीबी मित्रों के लिये अपनी स्टडी भी शेयर करता हूँ, पर कई बार होता यह है कि ख़ुद ही ट्रेड नहीं कर पाता, कई बार मूड नहीं होता, कई बार नींद में होता हूँ, क्योंकि रात को देर से मीटिंग ख़त्म होती है, तो फिर नींद में ट्रेडिंग नहीं करता, लोग कहते हैं कि 9.15 से 9.30 के बीच मार्केट सैटल होने दो फिर बैंकनिफ्टी में ट्रेड उसके बाद करो, और बैंकनिफ्टी में मेरा पसंदीदा ट्रेड करने का समय ही यह 15 मिनिट है। सबकी अपनी अपनी स्टडी होती है, खैर आजकल स्टडी ठीकठाक सी ही है, बैंकनिफ्टी में 90% तक के ट्रेड में अच्छी खासी कमाई हो जाता है, स्टॉप लॉस भी कभी कभार ठुक ही जाता है।
अब चार्ट पढ़ने के लिये तो मैं अपने ब्रोकिंग एप्प कुछ एक स्पेशल पेड़ सर्विस वाले एप्प का ही इस्तेमाल करता हूँ, लोग 5 मिनिट का चार्ट बनाते हैं, मैं 1 मिनिट का चार्ट बनाता हूँ और अब कोशिश होती है कि अपना लाग टर्म 5 मिनिट का ही हो, कई बार तो मैं ट्रेड ख़रीद कर एकदम बेच भी देता हूँ, बाद में समय देखता हूँ तो पता चलता है कि मात्र 15-20 सेकंड में भी कई बार टार्गेट आ जाता है और ट्रेड हो जाती है।
लोग कहते हैं कि तुम ख़ुद के कॉल पर ही काम नहीं करते, मैं कहता हूँ कि मुझे बाज़ार थोड़ा बहुत समझ में ज़रूर आने लगा है, परंतु इसका मतलब यह तो नहीं कि अपनी कमाई का पैसा ऐसे ही जाने दूँ, पर हाँ मैं जब भी ट्रेड करता हूँ हैज करके करता हूँ, आजकल की वोलेटिलिटी में हैजिंग बहुत काम की है, दोनों तरफ़ कमाई होती है।
तभी तो दोस्तों को कहता हूँ कि भले मुझे सीखने में 20 वर्ष लगे, पर आप लोग ज़्यादा होशियार हो, आप लोग जल्दी सीख सकते हो, और अच्छी खासी कमाई भी कर सकते हैं। वह भी बहुत कम पैसे में याने कि 5 – 6000 से ही काम शुरू कर सकते हैं, पर हाँ पहले सीखने में बहुत मेहनत करना पड़ेगी, टीवी मत देखना, सब बेबकूफ बनायेंगे। पेपर ट्रेडिंग करना शुरू करो, बाज़ार में आ रही ख़बरों को पढ़ना शुरू करो, समझो कि कैसे और कहाँ इस ख़बर का असर होगा, मुझे यह चीज Kamal Sharma जी ने समझाई, उनका बहुत बहुत आभार है, वे मेरे गुरू हैं शेयर बाजार के मामलों में। शेयर बाजार को पढ़ना मुझे बोर नहीं लगता है, अब तो बिजनेस की न्यूज देखकर और मजा आता है, बैलेन्स शीट पढ़ना प्रिय शगल है, सेक्टर रिपोर्ट पढ़ना बहुत अच्छा लगता है, ट्विटर पर भी जानकारी भरी पड़ी है, एक से एक विशेषज्ञ लोग भरे पड़े हैं, बस अपने आप को फोकस करने की जरूरत है।
उच्चशिक्षा के नाम पर फ़ीस क्यों वसूली जाती है? क्या वे उम्र के साथ अमीर होते जाते हैं?
95% फ़ीसदी बच्चों को सरकार मुफ़्त शिक्षा देती है, मि़डडे मील के नाम पर खाना भी खिलाती है, इसके बाद भी इनमें से 10% भी कॉलेजों तक नहीं पहुँच पा रहे हैं, तो इस पर सोचा जाना बेहद ज़रूरी है, जिस देश में बच्चे मुफ़्त में भी प्राइमरी शिक्षा नहीं ले पाते, वहाँ उनसे उच्चशिक्षा के नाम पर फ़ीस क्यों वसूली जाती है? क्या वे उम्र के साथ अमीर होते जाते हैं?
मिडिल तक शिक्षा इतनी महँगी नहीं है कि अभिभावक उस का खर्च न उठा पायें, अधिकांश प्राइमरी, मिडिल स्कूलों की फ़ीस उन की पहुँच के भीतर है, लेकिन कॉलेज स्तर पर वे भारी भरकम खर्च नहीं उठा पाते हैं, तो ज़रूरी यह है कि उच्चशिक्षा सस्ती की जाये।
उच्चशिक्षा महँगा करने का उद्देश्य तो केवल यही लग रहा है कि सरकार क़तई नहीं चाहती और न ही इस मूड में हैं कि ज़्यादा से ज़्यादा लोग उच्चशिक्षित हों, क्योंकि सरकार नौकरियाँ भी पैदा नहीं कर पा रही है, तो ‘न रहेगा बांस न बजेगी बाँसुरी’।
एक महत्वपूर्ण बात यह है कि युवा पढ़ लिखकर समझदार हो जाता है, याने कि राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक तौर तरीक़ों पर वे खुद की सोच क़ायम कर पाते हैं, अपनी ख़ुद की राय या अपने विचार बना पाते हैं। चिंता की बात सरकार के लिये यह है कि युवाओं को उस बिंदु तक पहुँचने ही न दिया जाये कि जहाँ वे आकर सी विचारधारा के अनुयायी या ग़लत बातों का विरोध कर पायें।
ये जो बाहर के देश में रहने वाले लोग हैं जैसे कि जर्मनी, शिक्षा के क्षैत्र में विश्व में महत्वूपर्ण रखता है और दुनिया की बेहतरीन 250 यूनिवर्सिटीज में से 16 जर्मनी की हैं, जहाँ उच्चशिक्षा के लिेये न के बराबर फ़ीस ली जाती हैं, वहीं कई संस्थान तो ऐसे हैं जो बिल्कुल मुफ़्त में उच्चशिक्षा प्रदान करते हैं। वैसे ही नॉर्वे, फ़िनलैंड, स्वीडन, फ़्रांस, नार्डिक देश, आइसलैंड, यूरोपीय देश, चेक रिपब्लिक, इटली, अर्जेंटीना में तो पूर्णतः: मुफ़्त है।
अगर उच्चशिक्षा से इतनी ही समस्या है तो फिर प्राइमरी व मिडिल की मुफ़्त शिक्षा और मिडडे मील का नाटक भी बंद कर देना चाहिये।
दिल्ली पुलिस के पास दंगों से निपटने के लिये क्या बढ़िया रणनीति नहीं थी?
मुझे तो लगता था कि पुलिस कर पास दंगों से निपटने की बढ़िया रणनीति होती है, और समय समय और उन रणनीतियों का रिव्यू भी होता है, तो पुलिस को इस स्थिति को बहुत अच्छे से निपट लेना चाहिये था। वैश्विक पटल पर दिल्ली पुलिस भी अपने आपमें एक ब्रांड है।
मैं जब दिल्ली में था तब fm पर कई बार लय में सुना था, दिल्ली पुलिस दिल्ली पुलिस आपकी सुरक्षा में।
समझ ही नहीं आया, भरोसा भी न हुआ कि जिस दिल्ली पुलिस के पास राजधानी की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वे अपनी रणनीति में फेल हो गयी? सही बताऊँ तो मानने को दिल ही नहीं करता।
पुलिस के वे सारे वीडियो जो दिख रहे हैं, जिनमें वे दंगाईयो का साथ दे रहे हैं, दिल मानता ही नहीं कि वे पुलिस के लोग हैं। आख़िर पुलिस दंगाईयों का साथ कैसे दे सकती है? हो ही नहीं सकता, खैर यह भी जाँच का विषय है।
अब अगर कोर्ट को आकर दिल्ली पुलिस को कार्यवाही करने को कहा जा रहा है, तो भई सही बात तो यही अब लगती है कि दिल्ली पुलिस से बदला लेना है तो दिल्ली सरकार के अधीन कर दो, सारी दिल्ली पुलिस सुधर जायेगी। क्यों लोग दिल्ली सरकार को कोस रहे थे, जबकि सबको पता है दिल्ली पुलिस केन्द्र सरकार के अधीन है, और अंतत: गृह मंत्री को ही मामला अपने हाथ में लेना पड़ा, वह भी यह कहकर कि दिल्ली पुलिस व्यवस्था को ढंग से सँभाल नहीं पाई, यह ख़ुद दिल्ली पुलिस पर एक दाग़ है।
अगर ऐसी पुलिस के हाथों दिल्ली याने देश की राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था है तो खुद ही समझ जायें कि भारत सुरक्षित नहीं है, क्योंकि राजनैतिक सत्ता दिल्ली से ही चलती है, और लंबे दौर इस तरह के चलते रहे तो यही सब नासूर बनकर अर्थव्यवस्था पर गम्भीर संकट बनकर आयेंगे।
किसी को तो ठीक होना जरूरी है, कौन ठीक होगा यह तो भविष्य ही बतायेगा।
घी तेल में डूबा नाश्ता खाना आप भी खाते हैं, देखते हैं?
आजकल हम लोगों की ज़बान ज़्यादा ही ललचाने लगी है, हम घी तेल खाने पीने के मामले में बहुत ही ज़्यादा प्रयोगधर्मी हो गये हैं, हमें बहुत सी चीजें जो बाहर मिलती हैं वे घर में बनाना चाहते हैं। इस ललचाने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया है हमारे सोशल नेटवर्किंग ने जैसे कि फ़ेसबुक, यूट्यूब इत्यादि वेबसाइट्स ने। जब भी आप भारतीय व्यंजनों को बनाने जाते हैं या कैसे बनाते हैं, देखते हैं तो हमेशा ही आपको उसमें घी या तेल का अधिकतर उपयोग देखने को मिलता है। इतना घी या तेल हमारी सेहत के लिये अच्छा नहीं होता है, एक प्रकार से यह भी कह सकते हैं कि हम लोग घी और तेल के मामले में मानसिक बीमार हो चुके हैं।
यह सब अब कहने की बात है कि घी और तेल के बिना कुछ अच्छा नहीं लगता, लोग दरअसल यह नहीं जानते हैं कि तेल घी और मसाला दोनों अलग अलग चीजें हैं, मसाले अधिकतर प्राकृतिक हैं और तेल घी को परिष्कृत करके निकाला जाता है, तथा इनसे हमारा कोलोस्ट्रोल व ट्राईग्लिसराईड बढ़ता है, जो कि आगे चलकर ह्रदयाघात के लिये महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर आपको भी घी तेल वाला फोबिया है तो कोई आपको कुछ नहीं कर सकता है। घी तेल के बिना भी आप खाना बना सकते हैं, बढ़िया से मसाले डालिये, मसालों का टेस्ट ज़बरदस्त होता है, व बिना घी तेल के मसालों का स्वाद ज़्यादा अच्छा आता है।
मैं भी कई बार बहुत से वीडियो देखता हूँ कि कोई नई चीज कैसे बनायी जाये, परंतु जैसे ही शुरूआत में कोई भी रसोइया घी तेल से शुरूआत करता है, मैं वीडियो बंद कर देता हूँ, ठीक है पहले लोगों को पता नहीं था, पर कम से कम अब तो लोगों को इनके नुक़सान पता है, पहले लोगों की उम्र ५०-६० से ज़्यादा नहीं होती थी, अब ७०-८० तो साधारण है, पहले लोग बिना तकलीफ़ के ही अपनी उम्र पूरी कर भगवान के पास चले जाते थे, क्योंकि चिकित्सकीय सुविधायें सर्वसुलभ नहीं थीं, पर अब लोग लंबा जीते ज़रूर हैं, परंतु बहुत सी तकलीफ़ें झेलकर, क्योंकि अब एक से एक चिकित्सकीय सुविधायें उपलब्ध हैं व सर्वसुलभ हैं।
तेल में डूबा नाश्ता खाना अगर आप भी खाते हैं, देखते हैं तो यह अपने आपके लिये एक बहुत ही कठिन घड़ी है, फ़ैसला लेने के लिये, अगर आप अब भी फ़ैसला नहीं ले पाये तो ध्यान रखिये कभी फ़ैसला नहीं ले पायेंगे। फ़ास्ट फ़ूड भी अच्छा नहीं है, खाने के लिये फल और सब्ज़ियाँ हैं, कच्चा खाने की आदत डालिये, नहीं खाते बने तो उनका रस बनाकर पीने की कोशिश करें, कोशिश करें कि रस ताज़ा ही पी लें, और हाँ एक बात और ध्यान रख लें, कि जैसा आप अपनी मशीन याने कि पेट को देंगे वह उतनी ही कुशलता से काम करेगी। अपनी जीवनशैली बदलिये व स्वस्थ्य जीवनशैली की और अग्रसर होइये, जिससे आपका परिवार आपको हँसी ख़ुशी देख सके। याद रखिये एक व्यक्ति घर में बीमार होता है तो पूरा घर ही बीमार हो जाता है। ऐसी घड़ी न आने दें, कम से कम अपनी तरफ़ से यह कोशिश तो कर ही सकते हैं।
यातायात नियमों को तोड़ने पर वाहन का बीमा प्रीमियम बढ़ सकता है
चौंकिये मत कि यातायात नियमों को तोड़ने पर बीमा प्रीमियम बढ़ सकता है, इसकी शुरूआत दिल्ली से होने जा रही है, अगर आप दिल्ली में रहते हैं और यातायात नियमों का पालन नहीं करते हैं तो आपके वाहन का बीमा प्रीमियम बढ़ सकता है। हालांकि अभी इसे लागू होने में समय है, पर यह निश्चित हो गया है कि थर्ड पार्टी बीमा पर प्रीमियम बढ़ जायेगा।इसमें यातायात नियम तोड़ने पर नेगेटिव प्वॉइंट्स दिये जायेंगे और यही प्वाईंट्स बीमा कंपनियों को बढ़ी हुई प्रीमियम के लिये बुनियादी होगा।
अभी तक बीमा प्रीमियम वाहन के इंजिन केपेसिटी व वाहन के प्रकार पर निर्भर करती है, वहीं अगर आपने कोई भी क्लेम नहीं किया है तो आपको अपने वाहन के बीमा प्रीमियम पर आकर्षक छूट भी मिलेगी। यह पायलट प्रोजेक्ट दिल्ली से शुरू हो रहे है, फिर सभी राज्यों में लागू किया जायेगा। बीमा कंपनियाँ लंबे समय से वाहन के ड्राईवरों को बीमा प्रीमियम से जोड़ने के लिये लंबे समय से लड़ाई कर रही हैं।
अगर आपने यातायात नियमों को तोड़ा तो यह मत सोचियेगा कि केवल बढ़ी हुई बीमा प्रीमियम ही देना होगी, बीमा प्रीमियम तो बढ़ी हुई देनी ही होगी साथ ही यातायात पुलिस आपका चालान भी बनायेगी व वह चालान की राशि भी भरना होगी। तो यातायात नियमों को तोड़ना अब बहुत ही महँगा होने वाला है, गाड़ी धीरे धीरे आराम से चलाईये, सारे यातायात नियमों का पालन करिये, किसी एक यातायात की लाल बत्ती पर रुकना आपके बहुत से पैसे बचा सकता है, और उससे भी अधिक कीमती किसी व्यक्ति की जान बचा सकता है।
यह सब आम जनता को परेशान करने के लिये नहीं किया जा रहा है, बल्कि बढ़ती हुई दुर्घटनाओं को कम करने के लिये किया जा रहा है। आपके 5-10 मिनिट से कीमती किसी की जिंदगी है, वहीं अगर आप पैदल यात्री हैं तो आपको भी तेज आते वाहन के सामने केवल हाथ देकर सड़क पार नहीं करनी चाहिये, नहीं तो आप अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं और अपने परिवार को बहुत बड़ी विपत्ती में डाल रहे हैं, अगर आपका जीवन बीमा है तो आपका परिवार फिर भी किसी प्रकार आपके बिना जी लेगा, परंतु अगर आपने जीवन बीमा भी नहीं ले रखा है तब सोचिये कि अगर कमाने वाले आप अकेले हैं तो आपके परिवार का क्या होगा। आपकी क्षति कितनी भी बड़ी रकम पूरी नहीं कर सकती।
नियमों को तोड़ने के पहले केवल एक बार अपने परिवार को अपनी आँखों के सामने रखियेगा, आप कभी भी नियम नहीं तोड़ पायेंगे। ध्यान रखें चार पहिये के वाहन चलाते समय हमेशा ही सीट बैल्ट बाँधें और दो पहिया वाहनों को चलाते समय हमेशा ही हेलमेट लगायें।
एसिडिटी के इलाज के लिये
परसों दक्षिण भारतीय खाना खा लिया था, तो कल तक पेट ने जवाब दे रखा था, ऐसी भयंकर एसिडिटी हो रही थी, कि वह गैस तो हमें भी समझ नहीं आ रही थी, पर हमने एसिडिटी की कोई दवाई नहीं ली, रात में पंचसकार चूरण ले लिया और सो गये, हालांकि रात में भी तीन चार बार हाजत के लिये जाना पड़ा, पर फिर भी एसिडिटी ज्यादा कम नहीं हुई, और इस चक्कर में नींद पूरी नहीं हुई।
एसिडिटी के इलाज के लिये हमने फिर कल पूरे दिन कुछ खाया नहीं, केवल पानी पर रहे, जिससे पेट बिल्कुल ठीक हो गया, यह तो समझ आ गया कि अगर कहीं तकलीफ है तो शरीर को खाना नहीं चाहिये, बल्कि थोड़ा आराम चाहिये जिससे शरीर सिस्टम के लिये काम कर सके, और हम लोग दवाई लेकर सिस्टम को प्राकृतिक उपचार करने से रोक देते हैं, हम लोग दवाई इसलिये ले लेते हैं कि हमें ज्याादा तकलीफ का सामना न करना पड़े। पर हम अपने अंदरूनी सिस्टम के बारे में तनिक भी नहीं सोचते हैं व सिस्टम को दवाई पर दवाई देकर पेले रहते हैं। कायदे से हमें बुखार में भी पहले तीन दिन कोई दवाई नहीं लेना चाहिये व निर्जला उपवास करना चाहिये, वहीं आजकल डॉक्टर लोग कहते हैं कि खाओ नहीं तो कमजोरी आ जायेगी, सब सिस्टम डॉक्टरों ने उल्टा बना रखा है।
आयुर्वेद और रामचरित मानस को पढ़िये व समझिये अभी ये सब लोग उल्टा पुल्टा कर रहे हैं, जब दस बीस साल के बाद अमेरिका से यही चीज आयेगी, तो ये सब लोग यही फॉलो करने लगेंगे, नहीं तो डॉक्टरों की दुकान नहीं बंद हो जायेगी। हमें कम से कम एक बार पंद्रह दिन में निर्जला उपवास करना चाहिये, जिससे हमारा शरीर अपनी टूटफूट की मरम्मत खुद ही कर लेता है। पर इसे आजकल कोई समझना ही नहीं चाहता।
कल शाम तक पेट बिल्कुल चकाचक हो गया, हमने शाम को घर आकर खाना खा लिया, बस उसके बाद हमारी हालत खराब, हमें आने लगी बेहतरीन नींद, ऐसा नशा कि जैसे एकाध लीटर शराब पी ली हो, कुछ समझ ही न आये, शाम को आठ बजे सोने के बाद सीधे सुबह छ: बजे नींद खुली। सारी थकान और बीमारी खत्म, तो शरीर को बहत्तर घंटे तो बीमारी ठीक करने के लिये देने ही पड़ेंगे, जल्दीबाजी में दवाई न लें, नहीं तो शरीर अंदर से काम करना बंद कर देगा।
सोचा है कि रोज ही एक ब्लॉग लिखना है, और अब यह निरंतरता बनी रहनी चाहिये, अब देखते हैं कि यह निरंतरता कितने दिन बनी रहती है।
TATA Nexcon EV नयी कार के बारे में जानिये
आज टाटा मोटर्स TATA Motors ने अपनी नयी इलेट्रिक कार निक्सॉन ईवी Nexcon EV की कीमत बताई है, इसकी शुरूआत 13.99 लाख रूपये से होती है। एक बार की चार्जिंग में 30KWH (Units) लगती है, जिसमें यह 300 किमी चलेगी, मतलब कि लगभग 10 किमी प्रति यूनिट, अगर प्रति यूनिट की कीमत 7 रूपये होती है तो एक किमी की कीमत मात्र 70 पैसे आती है। एक बात और इलेकट्रिक कार पेट्रोल या डीजल कार से क्षमता में 5 गुना ज्यादा होती है। बैटरी की वारंटी 8 वर्ष की है या 1,60,000 किमी की है।
गुजरात में व्यापारियों के लिये 3 लाख रूपये की सब्सीडी है। 1.5 लाख रूपये की आयकर की छूट व्यक्तिगत खरीददारों के लिये है। यही नहीं अगर आप महाराष्ट्र में हैं तो आपको 1 लाख रूपये का फायदा सब्सीडी के रूप में होगा, व रोड टैक्स, आरटीओ भी महाराष्ट्र में नहीं भरनी होगी।
अगर 6KW का सोलर चार्जिंग स्टेशन आप लगा लेते हैं तो जिस जिस दिन सूर्य रहेगा, उस दिन आपकी कार मुफ्त में चार्जिंग होगी। मतलब कि लगभग 300 किमी मुफ्त में और पर्यावरण को कोई नुक्सान भी आप नहीं पहुँचायेंगे।
कोई गियर नहीं है, कोई धुआँ नहीं, न के बराबर आवाज और बहुत कम मैंटेनेन्स, इलेकट्रिक कार की सबसे बड़ी खासियत होती है कि परफॉर्मेंस में ये पेट्रोल व डीजल कारों से ज्यादा बेहतरीन होती हैं।
कोई भी जो नयी कार खरीदने की सोच रहे हैं, उन्हें निक्सॉन ईवी Nexcon EV को एक बार जरूर देखना चाहिये, अगर आप अपनी कार हर महीने 3,000 किमी चलाते हैं, तो इंधन की बचत से ही आपकी कार केवल 4-5 साल में मुफ्त हो जायेगी।
सबसे बड़ी बात कि आप पर्यावरण के लिये अपना अमूल्य सहयोग भी कर रहे हैं।
हाँ यह बात अलग है कि हर जगह भारत में अभी चार्जिंग स्टेशन नहीं मिलेंगे, परंतु निकट भविष्य में उम्मीद करनी चाहिये कि चार्जिंग स्टेशन जल्दी ही होंगे, और पेट्रोल पंपों से ज्यादा संख्या में होंगे।
चलते चलते एक बात और बताता चलूँ कि सरकार ने पिछले साल 2019 में जब इलेक्ट्रिक व्हीकल के लिये घोषणा करी थी (यह अलग बात है कि बाद में वापिस ले ली थी), तो उस समय भारत में कई शहरों के लिये चार्जिंग स्टेशन के लिये निविदा निकाली थी, कई लोगों ने निविदा की टेक्निकल स्पेसिफिकेशन पढ़ी और कई टाइअप किये, जब वे लोग चीन और कोरिया पहुंचे तो मैनुफैक्चरिंग कम्पनी वाले टेक्निकल स्पेसिफिकेशन देखकर हँस रहे थे, कि हम 40 वोल्ट पर 10 साल पहले चार्ज करते थे, जिसकी वायर मोटी थी और मेंटेनेंस भी ज्यादा था, अब तो 220 वोल्ट वाले चार्जिंग पॉइंट बनाते हैं, परफॉर्मेंस बहुत अच्छा है, और ये भी बोले कि 21 वीं सदी में क्यों 19 वीं सदी का समान लगाना है? उन लोगों ने काम करने से साफ मना कर दिया कि जिस सरकार का विजन ही साफ नहीं है, वे कुछ नहीं के सकते, और वाकई कुछ दिनों के बाद सरकार ने वह निविदा निरस्त कर दी। अब हालत यह है कि कोई भी मैन्युफैक्चरिंग कम्पनी भारत में अपना काम नहीं फैलाना चाहती, क्योंकि उन्हें सरकार के विजन पर भरोसा नहीं है।
आपको चार्जिंग प्वाईँट अपने घर पर ही फिक्स करवाने होंगे, और हाँ लंबी दूरी की यात्रा में यह इलेकट्रिक कार बहुत ज्यादा मदद नहीं करने वाली है।
इंडियाबुल्स शुभ एप्प (Indiabulls Shubh App)
इंडियाबुल्स शुभ एप्प (Indiabulls Shubh App)
शेयर बाजार में ट्रेडिंग और ब्रोकरेज
जब हम शेयर बाजार में ट्रेडिंग शुरू करते हैं तो हम सब नये रंगरूट रहते हैं और आगे बढ़ने के लिये हमें हमेशा ही किसी न किसी को गुरू बनाना पड़ता हैव शेयर बाजार की बारीकियों को सीखना पड़ता है। इस सीखने के शुरूआती दौर की बात करें या अनुभवी ट्रेडर की बात करें, ब्रोकरेज देना सभी को बहुत महँगा लगता है। एक समय था जब ब्रोकरेज डिलिवरी और ट्रेडिंग के लिये अलग अलग होता था, पर आज ऑनलाईन डिस्काऊँटेड ब्रोकरेज आने से सब कुछ बदल गया है। अब समय यह आ गया है कि हमें ऑनलाईन डिस्काऊँटेड ब्रोकरेज के 20रूपये एक कॉन्ट्रेक्ट पर देना महँगा लगने लगा है। तकनीकी की बात करें तो सभी ब्रोकरेज हाऊसेस के पास एक से बढ़कर एक तकनीक है। यहाँ ऑनलाईन डिस्काऊँटेड ब्रोकरेज के साथ समस्या यह है कि हमें वहाँ से फंडामेंटल और टेक्नीकल कोई जानकारी नहीं मिल पाती है और न ही हमें वे गाईड करते हैं। यह एक बहुत बड़ी समस्या बन चुकी है। इसके लिये आज हम इंडियाबुल्स शुभ के बारे में बात करेंगे।
ट्रेडर और मार्जिन
ट्रेडर की बात करें तो उनके साथ समस्या मार्जिन की आती है, हमेशा ही हर ट्रेडर के लिये पूरा मार्जिन ब्रोकरेज हाऊस के साथ रखना संभव नहीं हो पाता है, तो कई बार हम सोचते हैं कि काश कोई ऐसा ब्रोकर होता जो हमारे से थोड़ा बहुत चार्ज लेकर हमें मार्जिन दे देता तो हम बड़े ट्रेड कर पाते। ट्रेडर के लिये ब्रोकरेज भी बड़ी रकम होती है, साथ ही अगर आप इंटराडे में इक्विटी ट्रेडिंग करते हैं तब भी ब्रोकरेज बहुत मायने रखती है।
कैसे करें अपने ब्रोकरेज में बचत
मैंने इस पर बहुत रिसर्च किया और यह रिसर्च मैं आपको यहाँ बताने जा रहा हूँ, मैंने शुरू में ट्रेडिशनल ब्रोकरेज के जरिये काम करना शुरू किया था तब फ्यूचर और ऑप्शन में 120 रूपये ब्रोकरेज एक कॉन्ट्रेक्ट के लिये लगता था, फिर मैंने ऑनलाईन डिस्काऊँटेड ब्रोकरेज के जरिये काम करना शुरू किया तो मेरे ट्रेड ही एक दिन के इतने हो जाते हैं कि मेरा रोज का ही ब्रोकरेज 1000 रूपये के ऊपर हो जाता है।अब जिस ब्रोकर की बात मैं यहाँ करने जा रहा हूँ वे महीने के मात्र 1000 रूपये लेते हैं और आप अनलिमिटेड फ्यूचर और ऑप्शन या इक्विटी में ट्रेड कर सकते हैं।
इंडियाबुल्स शुभ (इंडियाबुल्स वेंचर्स)
ब्रोकरेज हाऊस का नाम है इंडियाबुल्स वेंचर्स जो कि बाजार में लीडिंग ब्रोकर हैं और इक्विटी, डेरिवेटिव, कमोडिटी और करंसी ट्रेडिंग की सुविधा प्रदान करते हैं। 7 लाख से ज्यादा लोग इंडियाबुल्स के साथ शेयर कारोबार में ट्रेडिंग करते हैं।
इंडियाबुल्स शुभ एप्प(Indiabulls Shubh App)और ब्रोकरेज की गणना
अभी हाल ही में इंडियाबुल्स ने शुभ एप्प लाँच किया है, और उसके साथ ही बहुत ही आकर्षक ब्रोकरेज प्लॉन भी बाजार में पहली बार दिये हैं, जैसा कि हमने अभी ब्रोकरेज की बात की तो आप अगर रोज के 5 ट्रेड करते हैं तो आपका ब्रोकरेज रोज का ही लगभग 300 रूपया हो जाता है, और महीने के 20 दिन का हिसाब लगायें तो लगभग 6000 रूपये हो जाता है। जबकि अगर आप इंडियाबुल्स शुभ एप्प से ट्रेड करते हैं तो आपको केवल महीने के 1000 रूपये ब्रोकरेज और जीएसटी के 180 रूपये मिलाकर 1180 रूपये ही देने हैं। तो आप केवल ब्रोकरेज में ही महीने के लगभग 5000 रूपये बचा सकते हैं। अगर आप ज्यादा ट्रेड करते हैं तो आप खुद ही अपने ब्रोकरेज की गणना कर लीजिये आपको अपनी ब्रोकरेज की बचत पता चल जायेगी। आप नीचे दी गये चित्र से ही ब्रोकरेज का अंदाजा लगा सकते हैं।
वैसे ही अगर आप ट्रेडिशनल ब्रोकर के जरिये अपने निवेश शेयर बाजार में करते हैं तो भी आप नीचे दिये गये चित्र से अपने लाभ को देख सकते हैं –
मार्जिन फंडिंग
वहीं अगर आप इक्विटी में अनलिमिटेड ट्रेडिंग प्लॉन देखें तो मार्जिन फंडिंग की सुविधा शून्य ब्याज के साथ आपको मिल जाती है, इंडियाबुल्स शुभ के विभिन्न मार्जिन फंडिंग प्लॉन आप नीचे देख सकते हैं –
एक महीने का प्लॉन फ्री याने कि बिल्कुल मुफ्त
सबसे अच्छी बात यह है कि जब भी आप इंडियाबुल्स शुभ में रजिस्टर करते हैं तो आपको पहले एक महीने का प्लॉन फ्री है, याने कि आपको प्लॉन की फीस एक महीने के बाद ही देनी है। रजिस्टर करने के लिये 500 रूपये की फीस है, जो कि लगभग सभी ब्रोकरेज हाऊस लेते हैं।
इंडियाबुल्स शुभ के साथ रजिस्टर होने का सबसे बड़ा फायदा है कि ऑनलाईन डिस्काऊँटेड ब्रोकरेज आपको रिसर्च प्रदान नहीं करते हैं, और ट्रेडिशनल ब्रोकर आपसे बहुत ज्यादा ब्रोकरेज लेते हैं, पर यहाँ आपको रिसर्च भी इंडियाबुल्स शुभ के द्वारा आपको दी जायेगी। अगर आप ट्रेडिंग या इक्विटी में नये हैं तो आप वेबसाईट पर जाकर शुभ एकेडमी पर सीख भी सकते हैं।
इंडियाबुल्स शुभ एप्प तकनीकी रूप से भी तेज
सबसे बड़ी समस्या ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर स्टेबिलिटी की होती है, कई बार एप्प क्रेश हो जाती है परंतु इंडियाबुल्स शुभ एप्प में आपको यह समस्या नहीं आयेगी और इंडियाबुल्स शुभ एप्प बहुत तेज चलती है जिससे आपको कभी भी ट्रेड करने में कोई असुविधा नहीं होगी।
इंडियाबुल्स शुभ एप्प डाऊनलोड कर लिजिये और आप केवल एप्प के जरिये ही केवल 10 मिनिट में अपने सारे दस्तावेज अपलोड करके अपना एकाऊँट खोल सकते हैं। गूगल एप्प स्टोर पर सर्च करिये IndiaBulls Shubh App और डाऊनलोड कर लीजिये।
एप्प पर कैसे अपना एकाऊँट खोलेंगे उसके लिये आप नीचे दिये गये वीडियो को देख सकते हैं –
https://youtu.be/bJgwzGFUFL8
ट्रेडिंग का अनुभव लेने के लिये आप नीचे दिये गये वीडियो को देख सकते हैं –
https://youtu.be/bJgwzGFUFL8
अगर आपको कोई प्रश्न है तो आप टिप्पणी करके पूछ सकते हैं।




