All posts by Vivek Rastogi
कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – १७
यहाँ संकेत किया है। इसके बाद जब अग्नि भी सहन न कर सकी तो उसे गंगा में तथा गंगा ने उसे सरकण्डों में डाल दिया। इस प्रकार स्कन्द की उत्पत्ति हुई। इसीलिये इसे पावकि, अग्निभू कहा जाता है।
स्पार्क चेवरलेट कार केवल १ लाख २० हजार रुपये में नैनों से भी सस्ती….
१ लाख २० हजार का डाउन पेमेंट कीजिये और कार अपने घर अपने नाम पर ले जाईये। बाकी की किश्तें ६० महीने में ६ हजार रुपये प्रतिमाह देते जाईये लेकिन फ़िर यह १ लाख २० हजार की कैसे पड़ी ? यही सोच रहे होंगे न आप !!
कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – १६
उसी प्रकार मेघ ने अपनी प्रेयसी गम्भीरा के जल रुपी वस्त्र को उसके नितम्बों से हटा दिया है। उसका कुछ भाग ही गम्भीरा के हाथ में रह गया है। इस प्रकार यहाँ कवि ने मेघ में नायक का, गम्भीरा में नायिका का, वानीर शाखा में हाथ का, जल में नील वस्त्र का और तट में नितम्ब का आरोप किया है। (गम्भीरा नाम की एक छोटी सी नदी, जो कि मालव देश में ही बहती है और क्षिप्रा की सहायक नदी है।)
घर में घरवाली के हाथ की जलेबी…..म्म्म्म़् और अपने हाथ के पोहे, आनंद ही कुछ और है….
कि हम से अच्छे पोहे कोई बना ही नहीं सकता है। 🙂
कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – १५
र, रतिक्रीड़ा कर थक कर सो जायेगी। उस दशा में तुम उसे विश्राम देना।
लगता है कि नवभारत टाइम्स ने न सुधरने की कसम खा रखी है या ये लोग हिन्दी को मजाक समझते हैं..
समाचार में “स्तिथि” लिखा है जब कि “स्थिति” होना चाहिये और आज भारत के क्रिकेट मैच जीतने पर मुख्य पृष्ठ पर फ़ोटो प्रकाशित किया है “विनिंग बोलिंग”, इसमें “आशिष नेहरा” लिखा है जबकि सही तरीके से पृष्ठ ९ खेल समाचार पर “आशीष नेहरा” लिखा गया है, एक बार नहीं कई बार लिखा गया है। अगर यह त्रुटि है तो इसके लिये जिम्मेदारी तय की जाना चाहिये। क्योंकि हिन्दी भाषियों के लिये मुंबई में और कोई विकल्प भी नहीं है।
कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – १४
पदार्थ के तीन भेद हैं – पशु, पाश और पति। अविद्या रुपी पाश से बद्ध जीवात्मा को पशु, पाश के समान बन्धन करने के कारण अविद्या को पाश तथा अविद्यापाश से मुक्त शिव को पति कहते हैं।
कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – १३
से है। कहीं-कहीं चण्डेश्वरस्य पाठ भी मिलता है। इसका अर्थ है – चण्डस्य ईश्वर: अर्थात चण़्उ नाम के गण स्वामी। यक्ष का मेघ से आग्रह है कि वह उज्जयिनी में स्थित शिव के महाकाल मन्दिर में अवश्य जाये। महाकाल को देखकर मुक्ति मिल जाती है, ऐसा भी प्रसिद्ध है –
ताऊ.इन पर मेरा याने कि विवेक रस्तोगी का साक्षात्कार आज दोपहर ठीक ३.३३ पर और एक छोटी सी बात
के उपर लिखने की सोच रहा हूँ। कोई जानकार व्यक्ति कृपया मुझे बतायें कि पुस्तक के कुछ अंश प्रकाशित करना कहीं किसी कॉपीराईट का उल्लंघन तो नहीं है और अगर है तो कृपया उसका रास्ता मुझे बतायें।