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एसिडिटी के इलाज के लिये

परसों दक्षिण भारतीय खाना खा लिया था, तो कल तक पेट ने जवाब दे रखा था, ऐसी भयंकर एसिडिटी हो रही थी, कि वह गैस तो हमें भी समझ नहीं आ रही थी, पर हमने एसिडिटी की कोई दवाई नहीं ली, रात में पंचसकार चूरण ले लिया और सो गये, हालांकि रात में भी तीन चार बार हाजत के लिये जाना पड़ा, पर फिर भी एसिडिटी ज्यादा कम नहीं हुई, और इस चक्कर में नींद पूरी नहीं हुई।

एसिडिटी के इलाज के लिये हमने फिर कल पूरे दिन कुछ खाया नहीं, केवल पानी पर रहे, जिससे पेट बिल्कुल ठीक हो गया, यह तो समझ आ गया कि अगर कहीं तकलीफ है तो शरीर को खाना नहीं चाहिये, बल्कि थोड़ा आराम चाहिये जिससे शरीर सिस्टम के लिये काम कर सके, और हम लोग दवाई लेकर सिस्टम को प्राकृतिक उपचार करने से रोक देते हैं, हम लोग दवाई इसलिये ले लेते हैं कि हमें ज्याादा तकलीफ का सामना न करना पड़े। पर हम अपने अंदरूनी सिस्टम के बारे में तनिक भी नहीं सोचते हैं व सिस्टम को दवाई पर दवाई देकर पेले रहते हैं। कायदे से हमें बुखार में भी पहले तीन दिन कोई दवाई नहीं लेना चाहिये व निर्जला उपवास करना चाहिये, वहीं आजकल डॉक्टर लोग कहते हैं कि खाओ नहीं तो कमजोरी आ जायेगी, सब सिस्टम डॉक्टरों ने उल्टा बना रखा है।

आयुर्वेद और रामचरित मानस को पढ़िये व समझिये अभी ये सब लोग उल्टा पुल्टा कर रहे हैं, जब दस बीस साल के बाद अमेरिका से यही चीज आयेगी, तो ये सब लोग यही फॉलो करने लगेंगे, नहीं तो डॉक्टरों की दुकान नहीं बंद हो जायेगी। हमें कम से कम एक बार पंद्रह दिन में निर्जला उपवास करना चाहिये, जिससे हमारा शरीर अपनी टूटफूट की मरम्मत खुद ही कर लेता है। पर इसे आजकल कोई समझना ही नहीं चाहता।

कल शाम तक पेट बिल्कुल चकाचक हो गया, हमने शाम को घर आकर खाना खा लिया, बस उसके बाद हमारी हालत खराब, हमें आने लगी बेहतरीन नींद, ऐसा नशा कि जैसे एकाध लीटर शराब पी ली हो, कुछ समझ ही न आये, शाम को आठ बजे सोने के बाद सीधे सुबह छ: बजे नींद खुली। सारी थकान और बीमारी खत्म, तो शरीर को बहत्तर घंटे तो बीमारी ठीक करने के लिये देने ही पड़ेंगे, जल्दीबाजी में दवाई न लें, नहीं तो शरीर अंदर से काम करना बंद कर देगा।

सोचा है कि रोज ही एक ब्लॉग लिखना है, और अब यह निरंतरता बनी रहनी चाहिये, अब देखते हैं कि यह निरंतरता कितने दिन बनी रहती है।

प्यार की बातें और नारी शक्ति

अभी कुछ दिन पहले मैं मुम्बई से बैगलोर फ्लाईट से वापिस आ रहा था, तो सिक्योरिटी के बाद अपने गेट पर फ्लाईट एनाऊँसमेंट का बैठकर इंतजार कर रहा था, तभी एक दिखने में वृद्ध परंतु चुस्त जोड़ा मेरे सामने आकर बैठा, उम्र लगभग 70 वर्ष के आसपास होगी। पति पत्नी दोनों के हाथ में एक एक बैग था, पत्नी को बैठाकर, अपने बैंग पत्नी के पास ही रखकर पति महोदय कहीं चले गये, और थोड़ी देर बाद एक अखबार लेकर वापिस आये।

जैसे ही पति महोदय वापिस पहुँचे, वैसे ही पत्नी उखड़ गईं, पिछले 50 वर्षों से देख रही हूँ, कि कहीं भी जाओ, मुझे समान के पास बैठाकर चौकीदार बनाकर टहलने निकल लेते हैं और पता नहीं कहाँ कहाँ क्या देखते रहते हैं, अरे हमको भी घूमने की इच्छा होती है, हम कौन से रोज रोज एयरपोर्ट पर आते हैं, आप अपना बैग साथ में लेकर जाया करो, देखो यहाँ कोई भी कहीं भी उठकर जाता है तो अपना बैग साथ में लेकर जाता है, मैं अपना बैग सँभाल रही हूँ, और अाप अपना बैग सँभालें, कोई बात हो तो मोबाईल तो है ही, फोन भी किया जा सकता है।

पत्नी महोदया अपना बैग उठाकर निकल लीं, और बेचार पति महोदय जो अखबार लेकर आये थे, वहीं अखबार पूरा खोलकर सबसे नजरें बचाने की कोशिश कर रहे थे, क्योंकि पत्नी महोदया न पति महोदय को इतनी तेज आवाज में यह सब बोला था, कि गेट के पास के कम से कम १०० लोग इस वाकये के गवाह बन चुके थे।

ऐसे ही हम लोग भी शायद कई बार जाने अनजाने में यही आदतें दोहराते हैं, तो हमें भी सुधर जाना चाहिये, नारी शक्ति की आवाज को कहीं भी नहीं दबाया जा सकता है, और बुलंद आवाज बुलंद दीवारों को भी गिरा सकती है। प्यार अपनी जगह और आजादी अपनी जगह।

#प्यार_की_बातें
#नारी_शक्ति

 

फेसबुक से कुछ स्टेटस –

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अध्यापाक – घर में नहीं हैं दाने और अम्मा चली भुनाने, इसको उदाहरण सहित समझाओ 

छात्र – प्रधानमंत्री जी भूटान की अर्थव्यवस्था सुधारेंगे।

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वैसे जी टीवी, रिपब्लिक टीवी, टाईम्स नाऊ, इंडिया टीवी और सुदर्शन टीवी को भी मर्ज कर देना चाहिये, जिससे कुछ कम बकवास होगी।

#RBI कहता है कि अपना पिन नंबर और ओटीपी किसी की को न बताएं। मैं तो कहता हूँ अपना सरप्लस और इमरजेंसी डिपॉज़िट भी किसी को नहीं बताना चाहिए

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सावधान, अगर आपके पास RBLबैंक के शेयर हैं तो अब भी बेच दें, वरना जब 2 अंकों में यस बैंक जैसा हाल हो, तब मत रोना, जिनका पैसा लगा था, वे अब इसमें से लगभग निकल ही लिये हैं, IPO ₹270 में आया था, अभी ₹327का भाव चल रहा है।
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डिस्क्लेमर- मैं सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार नहीं हूँ, इसलिये इस पर अमल लाने के पहले खुद विश्लेषण करें और अपने निवेश सलाहकार से सलाह जरूर कर लें।

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कुछ दिन पहले एक *बन्दी* आई थी जिसका नाम *नोटबन्दी* था

अब उसकी *बहन* आई है जिसका नाम *मंदी* है |

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हेज फंड्स ने सोने में $580 मिलियन की अभी खरीददारी की है, तो बस अब समझ लो कि बुरा समय आ ही गया है।

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अब अक्षय कुमार अपनी आने वाली फिल्म में 8%GDP के बारे में बतायेंगे।

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Jho Low पर लिखी गई किताब Billion dollar whaleपढ़नी शुरू की है, बन्दे के कारनामे शुरू के कुछ पन्नों पर पढ़कर ही उसके कौशल और बुद्धि की तारीफ ही निकल रही है, भले मलेशिया के प्रधानमंत्री का खास रहते उसने सारे स्कैम किये, किताब लगभग 12घन्टे में खत्म होगी, जल्दी ही पूरी खत्म करने का प्लॉन है, शातिर दिमाग कैसे चलाया गया, वह देखा जाये।

 

ब्लॉग में php का अपडेट, निवेश क्यों करना चाहिये वीडियो, पंजीर लड्डू और सरकारी बैंकें

जिन चीजों के बारे में जानकारी न हों वे बहुत सारा समय खा जाती हैं, पिछले सप्ताह से परेशान था कि php का नया वर्शन कैसे ब्लॉग के लिये अपडेट करना है, आज भी सुबह से ३ घंटे परेशान हो लिया, क्योंकि वर्डप्रेस का नया वर्शन php के अपडेट के बाद ही अपडेट होता, होस्टगेटर ने नया सॉफ्टवेयर बहुत ही साधारण वाला बना दिया, पर कहीं कोई जानकारी नहीं, खैर cpanel और blog में backup लेकर अपडेट कर ही दिया। अब अपनी वेबसाईट php 7.3 पर हैं।

इसी कारण से पिछले सप्ताह से कोई ब्लॉग भी पोस्ट नहीं कर पा रहे थे, अब कर पायेंगे। Continue reading ब्लॉग में php का अपडेट, निवेश क्यों करना चाहिये वीडियो, पंजीर लड्डू और सरकारी बैंकें

वित्तमंत्री का यू टर्न U Turn of Finance Minister

वित्तमंत्री के कल बजट के गड़बड़ी वाले फैसलों में U टर्न के बाद शेयर बाजार के विश्लेषक सोच रहे थे कि अब सोमवार से बाजार फिर तेजी में आयेगा, पर कल रात में ही ट्रम्प बाबा ने गेम कर दिया और अमेरिकी शेयर बाजार 3% नीचे आ गये, ट्रम्प ने अमेरिकी कंपनियों को कहा है कि अपना धंधा चीन से समेटो और किसी और देश में धंधा लगाओ।

वैसे भी ट्रम्प बाबा बहुत बड़े वाले हैं, अगर उनको चीन की वाट लगानी है तो अपनी खुद याने कि अमेरिका की इकॉनॉमी की वाट लगानी पड़ेगी, क्योंकि चीन ही डॉलर बांड का बहुत बड़ा निवेशक है, और तभी चीन की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा।

तो अब विश्व में जबरदस्त मंदी आने में बहुत देर नहीं है, क्योंकि अगर किसी को परेशान करना हो, वजूद मिटाना हो तो डॉलर हिलेगा, और डॉलर हिला तो सारे देश डांस करेंगे।

यहाँ बताता चलूँ कि कल डॉलर 72 रूपये को पार कर गया है, और बस अब जल्दी ही 75 भी पार कर जायेगा। आप सबको जबरदस्त विकास की बधाई

कुछ फेसबुक स्टेटस

ऐसा लग रहा है कि चिदम्बरम के अंदर जाते ही सरकार को अर्थव्यवस्था सही करने के आइडिया आने लगे हैं, चिदम्बरम को अंदर ही रखो जब तक अर्थव्यवस्था ठीक न हो जाये, अब बेचारे को डंडे के दम पर ही सही सरकार को बताना पड़ रहा है।

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तो अभी तो चौपहिया वाहन बनाने वाली सभी कंपनियों की वाट लगी पड़ी है, पर दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनियों की बिक्री में गिरावट नहीं है, और हाँ ध्यान रखिये बजाज ऑटो अब आने वाली तेजी में मुख्य भूमिका निभायेगा, हीरो मोटर्स भी है, पर बजाज ऑटो मार्केट लीडर है।

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हम रहते हैं स्वच्छ भारत में जहाँ गोबर या कुत्ते की टट्टी यहाँ वहाँ सर्वत्र मिल ही जाती है, कल MG Road पर घूम रहे थे, हम हमारी दोस्त मंडली के साथ थे, सामने से दो भद्र महिलायें आधुनिक वस्त्र धारण किये हुए थीं, और बातें करते हुए चल रही थीं, तथा साथ ही एक महिला फोन पर चलते हुए कुछ टाईप भी कर रही थीं, तभी बीच में गोबर मिल गया, साथ चल रही महिला मित्र ने रोका अरे संभल कर, तो फोन वाली महिला, जोर से हिन्दी में बोली, बाय गॉड केक कटने से बच गया।

हम सोच रहे थे कि हम ताली बजाकर जन्मदिन मुबारक थोड़े ही गाने वाले थे 😂😂😂😂

#MG_रोड_के_किस्से

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लो जी अब पता चला है कि लार्ड माउंटबेटन होमो था, तब भी नेहरू जी से बहुत पटती थी, आश्चर्य है। यह भी हो सकता है कि इसी ब्लैकमेल के चलते वो प्रधानमंत्री बने हों, FBI फाइल्स खोलो मोटा भाई, जबरदस्त मसाला मिला है।

अब जम्मू कश्मीर लेह लद्दाख में रोजगार पैदा करने की जरूरत

अनुच्छेद 370 खत्म और 35Aस्वत: खत्म, आजाद हुई हमारी ‘जन्नत’ इस हेडलाईन के साथ आज का समाचार पत्र आज सुबह मिला। वैसे तो कल ही सुगबुगाहट चल ही रही थी और जब सदन से यह ऐलान हो गया तो, बस दिल बागबाग हो गया, अच्छी खबर यह भी थी कि जम्मू कश्मीर से लद्दाख अलग कर दिया गया है व उन्हें अब अलग अलग केन्द्र शासित प्रदेश का दर्जा दे दिया गया है। पूरी घाटी में पिछले 2-3 दिनों से भारी मात्रा में सुरक्षा बल तैनात हैं और पूरी दुनिया से अलग थलग कर दिया गया है, जिससे कोई भी अलगाववादी ताकतें घाटी में आतंक न फैला सकें।

इस खबर के साथ ही सोशल मीडिया में बहुत से स्टेटस आने लगे कोई कहता कि अब तो जम्मू कश्मीर, लेह लद्दाख में जमीन खरीदेंगे, घर खरीदेंगे, अब घाटी की सुँदर लड़कियों से शादी भी कर सकते हैं इत्यादि। अभी तक जम्मू कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा था और करोड़ों रूपया भारत सरकार द्वारा बहाया जाता रहा है, जिसका कोई हिसाब किताब भी नहीं था, बस वह दो नंबर के जरिये कुछ राजनैतिक दलों और राजनैतिज्ञों की जेब में पहुँच जाता था। अब तक कोई भी विकास का कार्य नहीं हुआ और न ही कोई रोजगार पैदा हुए।

अब इस बात के आसार लग रहे हैं कि जम्मू कश्मीर में नये व्यवसाय लगेंगे, जिससे वहाँ रोजगार पैदा होंगे। जम्मू, श्रीनगर, लेह, लद्दाख इतनी प्यारी जगहें हैं, ये भारत के अपने खुद के स्विट्जरलेंड हैं, जहाँ हम चाहते हुए भी जाकर रह नहीं सकते हैं, जैसे यूरोप में कई बेहतरीन जगहों पर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सेंटर हैं, वैसे ही कुछ नये सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सेंटर खुलने चाहिये, जिससे IT वालों को भी भारत के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने का मौका मिले, साथ ही जब एक अच्छी नौकरी वहाँ शुरू होगी तो एक नौकरी से कम से कम 10रोजगार पैदा होते हैं, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सेंटर के लिये विशेष तरह के स्किल की जरूरत होती है, जो कि हो सकता है कि वहाँ के रहवासियों में अभी न हों, परंतु दैनिक जीवन के जरूरत वाले कई कार्यों के कारण वहाँ अन्य रोजगार पैदा होंगे।

जब जम्मू कश्मीर में रोजगार पैदा होंगे तो वहाँ के रहवासी, अलगाववादियों की बातों में नहीं आयेंगे और वे खुद ही अच्छे बुरे में फर्क पैदा कर पायेंगे, व 100 रूपये में पत्थर फेंकने को तैयार नहीं होंगे, साथ ही आतंकवादियों को समर्थन अपने आप ही कमी आ जायेगी। इस सबसे सबसे बड़ा अंतर भारत के खजाने पर पड़ने वाला बड़ा बोझ कम हो जायेगा। विश्व के पर्यटन मानचित्र पर जम्मू कश्मीर हीरे की तरह चमकेगा। रोजगार पैदा होने से सबसे बड़ा फायदा होगा कि पाकिस्तान पर जबरदस्त दबाब होगा, साथ ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लोगों द्वारा भी पाकिस्तानी सरकार पर इसी तरह के व्यवसाय को स्थापित करने का दबाब होगा, अगर पाकिस्तानी सरकार द्वारा यह नहीं किया जाता है तो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लोग भारत में विलय होने के लिये दबाब बनायेंगे और जन आंदेलन की शुरूआत होगी।

अब केवल जम्मू कश्मीर लेह लद्दाख में एक अच्छी बेहतर नीति की जरूरत है, जिससे हम वैश्विक पटल पर भारत की छवि को अच्छे से दिखा सकें व गर्व से कह सकें कि अखण्डता पुनप्रतिष्ठित हुई।

किताबें पढ़ना छोड़ो ऑडियोबुक सुनना शुरू करें

मेरी आदत बचपन से ही किताबें पढ़ने की थी, पापाजी शासकीय वाचनालय से हर सप्ताह ही दो तीन किताबें लाते थे और उनको पढ़ने के बाद फिर दूसरे सप्ताह वापिस से दे तीन किताबें घर में होती थीं, इस तरह से घर में हर महीने ही लगभग बारह से पंद्रह किताबें पढ़ी जाती थीं, और यही मुख्य कारण रहा मुझे किताबें पढ़ने का चस्का लगना का। लगभग सभी की आदत किताब पढ़ने की होती है किताबों में कहानियां लेख उपन्यास सब कुछ आता है जो कि मनोरंजन के लिए पढ़ी जाती हैं। 

किताब पढ़ने के लिए बहुत सारा समय हमें निकालना पड़ता है और कई बार हम किताब पढ़ते पढ़ते कुछ और सोचने लगते हैं कई बार शब्द बड़े बड़े होकर दिखने लगते हैं, तो कई बार शब्द दिखने ही बंद हो जाते हैं। पहले मैं बहुत किताबें पढ़ता था, अमेजॉन से फ्लिपकार्ट से बहुत सारी किताबें खरीदी और पढ़ीं,फिर किताबों के अंबार से परेशान हो गया और किंडल खरीद लिया। फिर किंडल पर किताबें पढ़ने लगा। किंडल एक आधुनिक यंत्र है, जिस पर किताबें पढ़ी जा सकती हैं और बहुत सारी किताबें एक साथ रखी जा सकती हैं तो उससे मेरी किताबें रखने की समस्या का समाधान तो हो गया, लेकिन कुछ सुविधायें भी मिलने लगीं जैसे कि अगर किसी शब्द का मतलब मुझे समझ में नहीं आ रहा है तो मैं उस पर क्लिक करके रखूँगा, तो उसका मतलब किंडल मुझे बता देगा तो इससे यह मुझे और ज्यादा सुविधाजनक लगने लगा। 

लेकिन सारी समस्या समय की थी कि इतना समय कहाँ से निकाला जाए कि रोज ही किताबों को पढ़ पाऊँ, फिर मैंने अमेजॉन ऑडिबल का सब्सक्रिप्शन लिया लेकिन वहाँ समस्या यह थी कि वहां पर हिंदी की किताबें कम हैं और अंग्रेजी की ज्यादा और हम ठहरे हिंदी मातृभाषा वाले। फिर हमने स्टोरी टेल एप्प का नाम सुना तो स्टोरी टेल में बहुत सी किताबें हिंदी ऑडियो बुक के रूप में उपलब्ध हैं। हमने पहले1 महीने का ट्रायल लिया और फिर उसके बाद में 1 महीने के लिए अब ₹299 का भुगतान कर रहे हैं और किताबों को सुन रहे हैं। तो किताबों को सुनने के लिए समय बहुत सारा निकल आता है। मैं लगभग रोज ही एक घंटा घूमने जाता हूँ, तो एक घंटा आराम से साथ में किताबें भी सुनता रहता हूँ। ऑफिस आने-जाने के समय में भी किताबें सुन लेता हूँ, तो इससे मुझे लगभग रोज 3 से 4 घंटे का समय किताबों को सुनने का मिल जाता है कई किताबें और कहानियां मुफ्त में भी उपलब्ध हैं, जिन्हें की पॉडकास्ट में सुना जा सकता है तो उसके लिए आपको गूगल पॉडकास्ट एप्प फोन में इंस्टॉल करना होगा और हिंदी कहानियों का पॉडकास्ट ढूँढना होगा इसके ऊपर मैं एक अलग से ब्लॉग लिखूँगा, जिसमें मैं पॉडकास्ट की खूबियों के बारे में बात करूँगा।

बस किताबों को सुनते वक्त आपको यह ध्यान रखना है कि अगर आप कहीं और व्यस्त हैं तो किताबों को सुनना रोक दें, नहीं तो कुछ हिस्सा कहानी को छूट जाता है, अगर किताब सुनते सुनते ही कुछ सोचने के लिये, ठहरने के लिये समय चाहिये तो अपनी किताब को थोड़ा रोक दें, क्योंकि यह स्वाभाविक प्रक्रिया है, जब भी हम किताब पढ़ते हैं तब भी हम उसे अपने से संबद्ध करके कुछ न कुछ सोचते ही हैं, या कोई नया प्लान बनाने लगते हैं। केवल किताब ग्रहण करने का माध्यम बदला है, पर प्रक्रिया तो वही चलेगी।आप भी देखिये कि अगर आपको किताबें सुनना अच्छा लगे। बस असुविधा यह है कि अभी ऑडियोबुक के तौर पर बहुत बड़ी संख्या में किताबें उपलब्ध नहीं हैं, पर उम्मीद है कि जल्दी ही बहुत सी किताबें ऑडियोबुक के तौर पर भी बाजार में आने लगेंगी, जैसे की अभी नई किताब आई थी ‘ओघड़’, लेखक ने ही इस किताब की ऑडियोबुक में आवाज दी है, तो यह किताब और भी जबरदस्त बन गई है।

आयकर भरते हम सरकारी बंधुआ मजदूर

इस बार जब आयकर विभाग का रिटर्न भरने की प्रक्रिया में था, तो भरा गया आयकर देखकर बहुत कोफ्त हुई, कमाते हम साल भर के 12महीने हैं, सरकार का उस कमाई में कोई योगदान नहीं, न हमें अच्छी पढ़ाई दी, न हमें अच्छे रोजगार के अवसर दिये। हम जैसे तैसे संघर्ष करके यहाँ तक पहुँचे। अब जब आयकर का हिसाब लगाकर देखते हैं तो पता चलता है कि हम अपने लिये केवल 9 माह कमाते हैं, और बाकी के 3 महीने यानि कि जनवरी से मार्च तक सरकारी बंधुआ मजदूर हैं। क्योंकि हमारी 3महीने की कमाई सरकार आयकर के रूप में हमसे ले लेती है। न देने का कोई ऑप्शन भी नहीं है, कि सरकार कहे, हम ये सुविधायें नहीं दे पा रहे हैं तो आपको आयकर भरने की जरूरत नहीं है।

हर कोई सरकारी बंधुआ मजदूर है, भले 1 दिन का हो या 4-5महीने का, कोई एक दिन की कमाई का आयकर चुका रहा है तो कोई 4-5 माह की कमाई का आयकर चुका रहा है। मैं भी मन लगाकर अब 9 महीने ही काम कर पाता हूँ, बाकी के 3 महीने अनमने मन से काम करता हूँ, क्योंकि यह कमाई मैं अपने और अपने घरवालों के लिये नहीं बल्कि सरकार के लिये कर रहा हूँ। दुखी तो हर कोई है, परंतु हर कोई लिख नहीं पाता।

आयकर के साथ ही जमाने भर के सेसलगा दिये जाते हैं, अभी स्वास्थ्य और शिक्षा के लिये 4%का कर लगाया गया है, तो भी हमें न स्वास्थ्य की सुविधायें हैं न शिक्षा की सुविधायें हैं, अगर हमें स्वास्थ्य और शिक्षा सरकार नहीं दे सकती है तो कम से कम हमें उतनी रकम की छूट आयकर में मिलनी ही चाहिये, जितनी हम इन मदों में खर्च कर रहे हैं। अगर हम निजी क्षेत्र से स्वास्थ्य और शिक्षा लेते हैं तो भी सरकार हमसे उस पर GSTवसूल करती है, इस तरह से अगर सही हिसाब लगाया जाये तो व्यक्ति अपनी आय का कम से कम 50-60% कमाई का हिस्सा किसी न किसी तरह के कर देने में ही खर्च कर देता है।

सरकारी नौकरी वाले चाकरों के तो हाल ओर भी बुरे हैं, वे तो अपने मौलिक अधिकार का भी उपयोग नहीं कर सकते, कोई भी सरकारी नौकरी वाला अपनी अभिव्यक्ति का स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उपयोग नहीं कर पाता है, अगर कोई अपने मौलिक अधिकार का प्रयोग करता भी है तो उसे इसकी कीमत नौकरी की आँच से चुकानी पड़ती है, साथ ही कई अन्य नुक्सान भी हो सकते हैं।

भले कोई आयकर देता हो या न परंतु आप कोई भी समान खरीदें उस पर कोई न कोई टैक्स तो जरूर देते हैं, हर कोई सरकारी बंधुआ मजदूर है, भले ही आप सेवानिवृत्त हो जायें और कमाई के हिस्से पर जीवनभर आयकर भी दें, फिर उस कमाई में से बचत से हो रही ब्याज की आय पर भी आयकर दें, तो जब तक जिंदा हैं, तब तक आयकर तो देना ही है। इस तरह से मुझे तो कई बार लगता है कि हम केवल कुछ दिन या महीनों के ही बंधुआ मजदूर नहीं हैं बल्कि जीवन भर हम बंधुआ मजदूरी ही कर रहे हैं।

लेखन और ब्लॉगिंग

पता है लिखना बहुतों के लिये बहुत दुश्कर कार्य होता है, और बहुतों के लिये बहुत ही आसान, कुछ लोग तो जब भी लिखना चाहते हैं, लिख ही लेते हैं, और वहीं कुछ लोगों को लिखने के लिये बहुत जोर लगाना पड़ता है, अंग्रेजी में कहे गये शब्द राईटर्स ब्लॉक को भी कई लोग आजकल उपयोग करने लगे हैं। मेरा तो खैर मानना यह है कि जब शब्द अंदर से निकलते हैं, आप तभी लिख सकते हैं, नहीं तो लिखना नामुमकिन ही है।

लेखन भी कई प्रकार के होते हैं, कोई लेख अच्छा लिख सकता है तो कोई कहानी, नाटक या उपन्यास, अब अपनी विधा के महारती होते हैं, बस जैसे जैसे लिखते जाते हैं तो उस विधा में उनका अनुभव गहराता जाता है और उसे लिखना उनके लिये बाँयें हाथ का खेल हो जाता है, दूसरे लोग सोचते ही रहते हैं कि यह लेखक कैसे इतना गहरा लिख लेता होगा, पर सही बताऊँ तो शायद लेखक भी इस सवाल का जवाब न दे पाये।

कुछ लोग अपने आपको लिखते हैं तो कुछ लोग अनुभव लिखते हैं, और वहीं कुछ लोग दूसरों को लिख देते हैं। मैं पता नहीं कैसे कहाँ कब से लिखने लगा, मुझे अब लिखना अच्छा लगता है, बचपन से ही टेपरिकॉर्डर पर कवितायें सुनते हुए बड़ा हुआ और फिर महाविद्यालयीन काल में कुछ कविताओं, नाटकों और रचनात्मक लेखन ने शायद मुझे लेखन के लिये प्रोत्साहित किया। परंतु असली लेखन तो मेरा ब्लॉगिंग से शुरू हुआ, जब ब्लॉग आये तो मैंने फिर से लिखना शुरू किया, पता नहीं लेखन में वो धार तब भी थी या नहीं, यही बात आज भी सोचता हूँ कि वह लेखन की धार आज भी है या नहीं।

पहले सीधे कम्पयूटर पर लिखा नहीं जाता था, तो पहले कॉपी पर लिखता था और फिर कम्प्यूटर पर टाईप करता था, परंतु धीरे धीरे आदत ऐसी बनी कि अब सीधे ही कीबोर्ड से लिखने में आनंद आने लगा और आदत भी पड़ गई, अब कागज पर लिखना बहुत कम हो गया है, अब तो लिखने के लिये टाईप करना भी जरूरी नहीं है, मोबाईल में बोलकर लिखा जा सकता है, वहीं अब तो लेपटॉप में भी बोलकर लिखा जा सकता है, और सबसे बड़ी बात इसके लिये किसी प्रोग्राम को पहले की तरह ट्रेंड नहीं करना पड़ता है, अब तो प्रोग्राम ट्रेंड होते हैं और बढ़िया से टाईप करते हैं।

अब जिस विषय पर अच्छी पकड़ होती है, खासकर वित्त पर, उसमें तो मैं कई लेख केवल बोलकर ही लिख लेता हूँ, परंतु जैसे यह ब्लॉग लिख रहा हूँ तो इसे तो मुझे टाईप ही करना पड़ रहा है, क्योंकि यह भावनायें सीधे दिल से निकल रही हैं, यह लिखने के लिये मुझे कुछ सोचना नहीं पड़ रहा है, यहाँ तो बस उँगलियाँ अपने आप ही लिखे जा रही हैं। आप भी कैसे लिख पाते हैं, इस पर टिप्पणी करके जरूर बताईयेगा। हालांकि यह जरूर बता दूँ कि ब्लॉगर लेखक नहीं होता है, केवल ब्ल़ॉगर ही होता है, और मैं भी अपने आपको लेखक नहीं ब्लॉगर ही मानता हूँ, लेखन एक अलग विधा है और ब्लॉगिंग एक अलग विधा है।

फेसबुकवीरों को पाक से युद्ध चाहिये

आज कई फेसबुकवीरों को भद्दे वाक्य कहते सुन रहा हूँ, कि तुम तो कुत्तों की मौत मरोगे, कीड़े की मौत मरोगे, कांग्रेसी हो, अरे भई सबका अपना मत है। भले आप कितना चाहो पर सीमा पर लड़ाई करने की अपनी एक क्वालिफिकेशन है, जो तुम्हारे पास नहीं है, तुम्हारी क्वालीफिकेशन नहीं होने के कारण ही तो तुम जो हो, वही काम कर रहे हो।

ये बंदूकें बहुत रोमांच पैदा करती हैं, जब २४ घंटे ३६५ दिन जब सैनिक बिना थके अपनी ड्यूटी करता है, तो वे सारे हालात उस सैनिक को ही पता होते हैं। कुर्सी पर टिककर ८ घंटे बैठ नहीं सकते, औऱ चले हैं सीमा पार युद्ध करने की बात करने।

सैनिकों को तपाकर सीमा पर लड़ाई के लिये तैयार किया जाता है, यह मैंने सीधे NCC के आर्मी अटैचमैंट कैंप में देखा था, ग्रेनेडियर्स के साथ बहुत कुछ सीखऩे का मौका मिला था। इन फेसबुक वीरों को ग्रेनेडियर्स क्या होता है औऱ उनकी रेजीमेंट ने कितने परमवीर चक्र जीते हैं, क्यों उनको इतने परमवीर चक्र मिले, ये सब पता नहीं होगा।

बस इनको तो उचकने से मतलब है, युद्ध उन्माद है, और हर क्षैत्र में तबाही लाता है, केवल एक दिन का युद्ध पूरे राष्ट्र को दस वर्ष पीछे ले जाता है। सोशल मीडिया के दौर में यह देखने को मिल रहा है कि जनता सरकार के ऊपर युद्ध थोपना चाह रही है। और उस युद्ध से न पाकिस्तान खत्म होगा न नेस्तनाबूद होगा, केवल दोनों पक्षों का भारी नुक्सान होगा, औऱ चीन चुपचाप नहीं बैठा रहेगा, उसका भारी निवेश पाकिस्तान में है व हम भी चीन से एक सीमा पर सामना करते हैं।

उऩ्माद में मत आईय़े, बहकाने में न आईय़े, अपनी अक्ल लगाईये, सरकार और सेना को अपना काम करने दीजिये। आपसी संबंध मधुर रखिये। यह पोस्ट केवल इसलिये लिखी गई है कि आप अपने दोस्तों से युद्ध न करिये, क्योंकि आपको सीमा पर लड़ाई का मौका नहीं मिल रहा है।

अमेरिका का व्यापार जो अब बाहर जा रहा है केवल H1B वीजा न देने के कारण

दुनिया में बहुत कुछ बदल रहा है, पर उस बदलाव का लोगों को अहसास ही नहीं होता है, जो जोर शोर से बाहर आता है, केवल वही पता चलता है।
 
ट्रम्प ने H1B के लिये बहुत सी सख्तियाँ की हैं, तो असर सीधे उनके व्यापार पर दिखाई दे रहा है। अमेरिका के नंबर एक बैंक के पास काम करने के लिये तकनीकी और विषय विशेषज्ञ लोगों की भयंकर कमी है, और जो हैं वे काम को सँभाल नहीं पा रहे हैं। कंपनियों या बैंकों का मुख्य काम होता है व्यापार बढ़ाना और उनके मालिक लोग यह सुनिश्चित भी करते हैं।

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