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About Vivek Rastogi

मैं २००६ से हिन्दी ब्लॉगिंग कर रहा हूँ, और वित्त प्रबंधन मेरा प्रिय विषय है। मेरा एक यूट्यूब चैनल भी है जिसे आप https://youtube.com/financialbakwas देख सकते हैं।

कभी आपकी भी इच्छा होती है कि अगर यह मेल हिन्दी में होती तो बात ही कुछ और थी, जीमेल के ट्रांसलिशन टूल से अब यह भी संभव है किसी भी भाषा में अनुवाद करॆं…

मैं कई बार मेल पढ़ता हूँ तो आंग्ल भाषा के कुछ शब्दों का अर्थ समझ में नहीं आता है तो फ़िर अलग से विन्डो खोलकर या तो गूगल ट्रांसलेशन सेवा में जाना पड़ता है या फ़िर शब्दकोश में। पर अब हमारी इस समस्या का समाधान गूगल ने जीमेल में ही एक लैब फ़ीचर से दे दिया है, किसी भी भाषा से किसी भी भाषा में अनुवाद। देखिये कैसे होता है यह –

१. मेरे पास आंग्लभाषा में मेल आया –

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यहाँ पर जो गोला बना हुआ आपको दिख रहा है English to Hindi और उसके आगे लिखा है View Translated Message बस इस पर क्लिक कीजिये और हिन्दी में मेल का अनुवाद आ जाता है।

२. अनुवादित मेल देखिये –

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अगर आप यहाँ पर वापस से आंग्लभाषा में मेल चाहते हैं तो View original message पर क्लिक करें, मेल आंग्लभाषा में उपलब्ध होगा।

३. इस अनुवाद सेवा के फ़ीचर को शुरु कैसे करें –

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जीमेल की विन्डो में सीधी तरफ़ कोने में Settings के पास हरे रंग का जो जार दिखाई दे रहा है यह है जीमेल लेब का बटन उस पर क्ल्कि करें और फ़िर आपको बहुत सारे लेब फ़ीचर्स दिखाई देंगे, अनुवाद सेवा को शुरु करने के लिये निम्न लेब फ़ीचर को Enable करें और सबसे नीचे जाकर Save Changes पर क्लिक करें।

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तो पढ़ते रहिये अपनी भाषा में मेल।

टर्म इंश्योरेन्स क्या होता है.. भाग ६ (What is Term Insurance…) Part 6

जब टर्म जीवन बीमा योजना का चुनाव करें तो इन बातों का ध्यान रखना चाहिये –

१. सबसे पहले यह समझ लेना चाहिये कि टर्म जीवन बीमा योजना क्या होती है, इसके क्या लाभ होते हैं, यह कैसे कार्य करती है वगैरहा।

२. सभी जीवन बीमा कंपनियाँ एक जैसी नहीं होती हैं सबकी वित्तीय स्थिती अलग अलग होती हैं, जिस भी कंपनी का जीवन बीमा लेने जा रहे हैं पहले बाजार में उसकी वित्तीय स्थिती का आकलन कर लें, उसकी बाजार में प्रतिष्ठा कैसी है, वह किस समूह से ताल्लुक रखती है इत्यादि।

३.  आम जीवन बीमा से टर्म जीवन बीमा बहुत सस्ता होता है। यह सस्ता इसलिये होता है कि ये योजनाएँ इस तरह से तैयार की गई हैं कि आप एक निश्चित अवधि के लिये ही बीमित होते हैं। अगर आप अपनी पूरी जिंदगी अपने जीवन का बीमा चाहते हैं और भुलक्कड़ हैं तो टर्म जीवन बीमा योजना आपके लिये नहीं है, आप साधारण जीवन बीमा ही लें।

४. टर्म जीवन बीमा योजना बहुत बढ़िया है अगर आप अपने परिवार और घर के लिए मृत्यु के बाद की सुरक्षा चाहते हैं। अगर आप के पास गृह ऋण है तो आप केवल ऋण राशि का भी टर्म जीवन बीमा करवा सकते हैं। जिससे अगर समय के पहले गृह स्वामी की मौत की स्थिती में बीमित के परिवार को अपना घर नहीं गँवाना पड़ेगा। बीमा कंपनी बीमित की मौत की स्थिती में पूरा गृह ऋण चुका देगी।

५. हमेशा ऐसी योजना देखे जिसमें नवीनीकरण की गारंटी हो, मतलब कि अगर भविष्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या अगर हो जाये तो बीमा कंपनी नवीनीकरण के लिये इंकार न कर दे। अगर आप इस तरह की गारंटीकृत नवीनीकरण वाली योजना खरीदते हैं तो अगर भाविष्य में स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर भी आपका बीमा नवीनीकरण किया जा सकेगा।

६. परिवर्तनीय योजनाओं वाला जीवन बीमा खरीदें, अगर भविष्य में कोई और अच्छी योजना आती है तो आप अपनी इस जीवन बीमा योजना को उस योजना के लिये स्विच कर पायें, अगर किसी टर्म जीवन बीमा योजना में यह सुविधा उपलब्ध होती है तो वही लेना चाहिये, नहीं तो आपको वही योजना पूरी बीमा अवधि  रखनी होगी।

पतंगबाजी की हमारी कुछ पुरानी यादें, और धागा को सूतकर मांझा बनाना जिसे धार में गुँडे कहते हैं… मकर संक्रांति की याद में… अपना बचपन..

कल अपने ऑफ़िस जाते समय बीच में मलाड़ में एक पतंग की सजी हुई दुकान दिख गई, एक नजर में तो हमारा मन ललचा गया पतंग देखकर, और साथ में मांझा और चकरी भी था।

images तो बस हमें अपने पुराने दिन याद आ गये जब नौकरी की कोई चिंता नहीं थी, अपने स्कूल में पढ़ते थे और मजे में दिनभर पतंग उडाते थे। तब हम लोग राजा भोज की नगरी धार में रहते थे, जहाँ पर विवादित भोजशाला भी है, एक समय था जब धारा में  दंगे होना तो आम बात थी।

हम रहते थे गुरुनानक मार्ग पर बिल्कुल वैंकट बिहारी के मंदिर के पीछे, और् हमारे मोहल्ले के लगभग सभी लोग वहीं से पतंगबाजी करते थे। मकर संक्रांति के पहले से पतंगबाजी की तैयारी जोरशोर से शुरु हो जाती थी, हमारे पास भी एक बड़ा लकड़ी का चकरा था, जो कि हमने स्पेशली बनवाया था।

पतंगबाजी की तैयारी शुरु होती थी मांझा सूतने से, धार में मांझे को गुंडा कहा जाता है, धागा सूतने की प्रक्रिया भी कम दिलचस्प नहीं होती थी, बहुत मेहनत लगती है धागा सूतने में, ये बरेली वाला मांझा भी कहाँ लगता, हमारे सूते हुए मांझे के सामने।

मांझा सूतने की तैयारी शुरु होती थी काँच पीसने से, घर की पुरानी ट्यूबलाईट और् बल्ब के काँच को सावधानी से तोड़कर एक बड़े कपड़े में रखकर्, उसकी पोटली बनाकर् उसे कूट लेते थे जिससे वो काँच के टुकड़े छोटे छोटे हो जायें, और हाथ में भी न लगें,  फ़िर अपने लोहे के मूसल में कूटकर काँच को और बारीक कर लिया जाता था, फ़िर काँच को साड़ी के कपड़े से छानकर उसे अलग रख लेते थे। यह तो पहली चीज तैयार हो गई मांझा सूतने की।

अब और सामग्री होती थी, सरेस, रंग, छोटे छोटे कॉटन के कपड़े और एक छेद वाली डंडी।

सरेस को उबालकर उसमें रंग मिला दो और उसे एक बर्तन में कर लो, बर्तन खराब ही लें क्योंकि बर्तन सरेस डालने के बाद अच्छा नहीं रह जाता है। मांझा और चिकना करना हो तो साबुदाना भी डाल सकते हैं, सामग्री तैयार हो चुकी है, अब धागे और काँच के साथ तैयार हो जाते थे, धागा सूतने के लिये।

पीछे धागे की गिट्टी को इस प्रकार पकड़ा जाता है कि धागा आसानी से तेजी से निकले, फ़िर धागे को उस छेद वाली डंडी में से निकाल कर जो कि सरेस के बर्तन में डुबा कर रखी जाती है, और अब वो कॉटन के कपड़े को तह कर के उसके बीच में काँच भरकर उसे अपनी दो ऊँगलियों से पकड़ लें ध्यान रहे कि धागा इसके बीच में से जाना चाहिये, और अगर ज्यादा पतंग काटनी हो तो उसके बाद थोड़ी दूरी पर ही वापिस से एक और काँच चाला कपड़ा किसी को पकड़ा दें और फ़िर अपनी चकरी में लपेटते जायें। इससे काँच धागे में चिपकता जायेगा रंग के साथ जिससे आप ज्यादा पतंग काट पायेंगे।

ये तो धागा सूत लिया और् अब ये मांझे में बदल गया अभी तो ये गीला है, अब इसे किसी दूसरी चकरी में लपेट लें धीरे धीरे जिससे ये सूख जाये और ये प्रक्रिया तब तक दोहरायें जब तक कि मांझा पूरी तरह से सूख नहीं जाये।

बस फ़िर क्या है मांझा तैयार और पतंगें काटने को तैयार हो जाईये, वैसे हम मांझा इतना कांच वाला सूतते थे कि किसी पतंग को टिकने नहीं देते थे और अपने आसपास का आसमान साफ़ कर देते थे, कांच ज्यादा होता था हमारे गुंडों में इसलिये हमने कभी भी मांझा अपनी ऊँगलियों से नहीं पकड़ा और सीधे चकरी से ही पतंग उडाते थे,  उस समय अपना लोगों में बहुत डर था और् जब हम पतंग उड़ाने जाते थे तो आसपास वाले अपनी पतंगे उतार लेते थे। और आज भी हम सीधे चकरी से ही पतंग उड़ाते हैं, इससे फ़ायदा यह है कि किसी दूसरे पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है कि कोई अपनी चकरी पकड़े और हम हाथ से उड़ायें।

संक्रांति पर तो लगभग हर छत पर रेडियो, टेप, डेक, माईक और बड़े बड़े स्पीकर लगाकर लोग दूसरे की पतंग काटने पर "काटा हैं" या अपनी पतंग कटने पर "कटवाई है" चिल्लाते थे। और जोर जोर से गाने बजते थे, सारे आसमान में पतंगे ही पतंगे दिखती थीं।

सुबह पतंग उड़ाने जाते थे तो घर तो तभी लौटते थे जब शाम को पतंग दिखनी बंद हो जाती थी, या फ़िर हमारे माताजी या पिताजी में से कोई एक डंडा लेकर आता दिखता था।

इतनी ऊँची पतंग उड़ाते थे कि शाम को पतंग उतारने की हिम्मत ही नहीं होती थी, इसलिये अपने हाथ से धागा तोड़कर या तो किसी को दे देते थे या फ़िर वहीं कहीं बाँधकर घर चले जाते थे।

बहुत मधुर यादें हैं पतंगबाजी की, ऐसा लगा कि यह पोस्ट लिखते लिखते मैं अपने पुराने दिनों में चला गया। आप भी अपने पतंगबाजी के अनुभव बताईयेगा जरुर।

टर्म इंश्योरेन्स क्या होता है.. भाग ५ (What is Term Insurance…) Part 5

टर्म जीवन बीमा योजना की कमियाँ –

१. आयु के साथ प्रीमियम भी बड़ जाती है।

२. अस्थायी सुरक्षा ।

१. आयु के साथ प्रीमियम भी बड़ जाती है।

टर्म जीवन बीमा योजना  में बीमा धारक को ज्यादा प्रीमियम अदा करना होती है, जैसे जैसे उसकी उम्र ज्यादा होती है, इसीलिये यह योजना जितनी जल्दी हो सके ले लेना चाहिये। और ज्यादा उम्र में टर्म जीवन बीमा योजना लेने पर परेशानी हो सकती है कि आप हर वर्ष ज्यादा प्रीमियम अदा न कर पायें। इसके साथ ही बीमा धारक को अपनी कुछ और भी प्रतिबद्धताएँ पूरी करनी हो या फ़िर अप्रत्याशित रुप से भी धन की जरुरत पड़ सकती है। इसलिये सस्ती प्रीमियम केवल एक मिथक है ज्यादा उम्र वाले व्यक्तियों के लिये क्योंकि हो सकता है कि व्यक्ति इतनी प्रीमियम देने में सक्षम ही न हो वो भी हर वर्ष।

२. अस्थायी सुरक्षा –

टर्म जीवन बीमा योजना में बीमा धारक को स्थायी जीवन बीमा योजना जैसी सुरक्षा नहीं है, यह जीवन बीमा मृत्यु का जोखिम केवल बीमा अवधि के लिये ही कवर करती है। इस टर्म जीवन बीमा योजना में अगर बीमा धारक समय पर अपना बीमे का नवीनीकरण नहीं करवा पाया और फ़िर उसे नई टर्म जीवन बीमा योजना महँगी प्रीमियम पर खरीदनी पड़ेगी। और अगर बीमा धारक की मृत्यु उस बीमित अवधि में नहीं होती है तो बीमा कंपनी प्रीमियम का भरा हुआ पैसा वापिस नहीं करेगी।

इस तरह के बीमा बहुत अच्छे होते हैं, विशेषकर तब जब बीमा धारक प्रीमियम के लिये उस बड़ी राशि का इंतजाम न कर पाये पर उसे बड़े बीमा की बहुत ज्यादा जरुरत होती है। टर्म बीमा योजना के लिये कोई उपयुक्त समय नहीं होता है, वह १, ५, १० या १५ और ३० साल तक के लिये हो सकता है। बीमा धारक को उसकी बीमा अवधि चुननी होती है जितने भी समय के लिये वो बीमित रहकर अपने परिवार को सुरक्षा प्रदान करना चाहता है।

टर्म इंश्योरेन्स क्या होता है.. भाग ४ (What is Term Insurance…) Part 4

टर्म जीवन बीमा के फ़ायदे सामान्य बीमा से ज्यादा हैं।

टर्म जीवन बीमा के के निम्नलिखित फ़ायदे हैं –

१. ऋण को खत्म करने में मदद करता है

२. लचीली अवधि

३. सस्ती

४. निवेश

५. विशेष आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिये उपयुक्त एवं संतोषजनक

१. ऋण को खत्म करने में मदद करता है –

आमतौर पर ऋण लम्बी अवधि में देय होते हैं। जब एक बीमा धारक कार या घर या अन्य किसी चल या अचल संपत्ती के लिये ऋण लेता है तो उसके लिये  ऋण को एक निश्चित अवधि में चुकाने की जिम्मेदारी होती है । इससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि सावधि ऋण को चुकाने के लिये उसके आश्रितों के पास पर्याप्त नगद होगा, बीमा धारक की अप्रत्याशित मौत अगर उस बीमा अवधि में  हो जाती है तो उसके आश्रितों को डरने वाली बात नहीं है बीमा कंपनी उस ऋण को चुका देगी।

२. लचीली अवधि –

केवल यही एक इस तरह की जीवन बीमा योजना है जिसमें कि बीमा धारक एक वर्ष जैसी छोटी अवधि के लिये भी बीमा करवा सकता है। इस प्रकार के बीमे से बीमा धारक को समुचित योजना बनाने और भुगतान करने के लायक आवश्यक राशि की योजना बनाने में सहायता भी मिलती है। इस लचीलेपन के अभाव में बीमा धारक कंपनी के निर्धारित समय सीमा की बीमा अवधि को मानने के लिये मजबूर होगा।

३. सस्ती –

हालांकि टर्म बीमा के प्रीमियम पिछले सालों में बहुत बड़ गये हैं फ़िर भी यह अन्य योजनाओं से बहुत सस्ती हैं। सस्ती टर्म जीवन बीमा योजना का मतलब यह नहीं है कि उपभोक्ता को कम लाभ या कम गुणवत्ता मिलेगी। यह योजना उपभोक्ताओं की प्रारंभिक अवधि में अन्य किसी योजना में अधिक प्रीमियम भुगतान में करने से बचाता है और पैसे बचाने में मदद करता है। इसके विपरीत जब बीमा की प्रीमियम बड़ती है तो बीमा धारक बचायी गई राशि द्वारा उस प्रीमियम का भुगतान कर सकता है। इसी बीच जो भी राशि पहले बचायी है उस पर उसे ब्याज भी अर्जित हो जाता है। इससे व्यक्ति कम प्रीमियम में ज्यादा राशि का बीमा पा सकता है जो कि सस्ता होता है।

४. निवेश –

अन्य किसी जीवन बीमा योजना से तुलना करेंगे तो पायेंगे कि टर्म बीमा जीवन योजना की लागत बहुत सस्ती है। इससे आप अपनी बची हुई राशि को कहीं किसी और अच्छी जगह निवेश कर सकते हैं। इसका मतलब यह है कि आप अपनी राशि का निवेश खुद कर रहे हैं, इसके लिये आप बीमा कंपनी के ऊपर निर्भर नहीं हैं। बीमा कंपनियाँ आमतौर पर बीमा धारक की राशि  निवेश में बहुत ही सुरक्षित और प्राचीन  तरीके अपनाती हैं, तो टर्म जीवन बीमा योजना का चयन करने से आप अपनी बची हुई राशि के साथ अपनी मर्जी से निवेश करने के लिये स्वतंत्र हैं।

५. विशेष आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिये उपयुक्त एवं संतोषजनक –

टर्म जीवन बीमा योजना केवल ऋण की अदायगी को बीमित करने के लिये ही नहीं बल्कि और भी आवश्यकताओं के लिये उपयोगी है। मान लीजिये एक व्यक्ति घर बनाना चाहता है या अपने बच्चे के बड़े होने पर उसे महँगी पढ़ाई कराना चाहता है तो उस अवधि के लिये वह टर्म जीवन बीमा योजना लेकर आम प्रीमियम से बची हुई राशि को लंबी अवधि के लिये निवेश कर सकता है। इससे भविष्य में किसी भी मुश्किल से बचने में आसानी होती है।

टर्म इंश्योरेन्स क्या होता है.. भाग ३ (What is Term Insurance…) Part 3

सिंगल प्रीमियम टर्म पॉलिसी

सिंगल प्रीमियम टर्म पॉलिसी के अंतर्गत एक मुश्त प्रीमियम का भुगतान करना होता है। इस पॉलिसी के अंतर्गत पूर्वनिर्धारित अवधि के लिये जीवन का जोखिम कवर किया जाता है। केवल एक बार प्रीमियम भर देने से आपको प्रीमियम का भूगतान हर वर्ष नहीं करना पड़ता है और हर वर्ष आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ता है, केवल एक बार प्रीमियम भरो और भूल जाओ, ये आपके जीवन का जोखिम पूर्वनिर्धारित अवधि के लिये कवर करता है। नियमित रुप से प्रीमियम भरने वाले प्लॉन से इस प्लॉन की प्रीमियम ज्यादा जरुर है क्योंकि केवल एक बार प्रीमियम देना है, जबकि नियमित प्रीमियम प्लॉन्स में यह हर वर्ष  देना होती है।

नियमित प्रीमियम टर्म पॉलिसी

नियमित प्रीमियम टर्म पॉलिसी आपको वार्षिक आधार पर प्रीमियम भुगतान करने का विकल्प प्रदान करता है, अगर आप एक साथ ज्यादा बड़ा प्रीमियम भूगतान करने के इच्छुक नहीं है तो यह प्लॉन ले सकते हैं। आपको हर वर्ष बीमा अवधि के अंत तक  प्रीमियम भरनी होगी।

प्रीमियम की वापसी के साथ टर्म पॉलिसी

आमतौर पर टर्म योजनाओं में अगर बीमा धारक को बीमा अवधि में कुछ नहीं होता है तो उसे कुछ भी रिटर्न नहीं मिलता है। आपने जो भी प्रीमियम भरी है वह नहीं मिलेगी। पर इस प्लॉन में आप वो प्रीमियम राशि प्राप्त कर सकते हैं जो कि आपने भरी हैं, जो कि बिना ब्याज के भी हो सकता है और ब्याज के साथ भी। इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अगर बीमा धारक जीवित रहता है तो उसने जितनी भी प्रीमियम भरी है, वह बीमा अवधि समाप्त होने के बाद परिपक्वता पर मिल जाती है, इसमें बीमा धारक को भरी गई प्रीमियम का नुकसान नहीं उठाना पड़ता है। लेकिन इसकी प्रीमियम नियमित प्रीमियम टर्म पॉलिसी से ज्यादा होती है।

टर्म पॉलिसी जो ऋण भी कवर करती हो

यह पॉलिसी खास उन लोगों के लिये बनायी गई है जिन लोगों ने गृह ऋण ले रखा है। बीमा राशि बकाया ऋण राशि के बराबर होगी। और यह धीरे धीरे उसी अनुपात में घटती जाती है, जैसे जैसे ऋण का भूगतान होता जाता है। यहाँ पर प्रीमियम की गणना बिल्कुल वैसे ही होती है जैसे कि गृह ॠण की मासिक किस्त की गणना। और यह पूरी बीमा अवधि में एक समान रहती है। इस पॉलिसी का लाभ यह है कि यह परिवार को बीमा धारक की मृत्यु के समय अतिरिक्त सुरक्षा देता है, बीमा धारक की मृत्यु की स्थिती में परिवार को इतने भारी ऋण का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।

व्यक्ति को भगवान का वरदान और व्यक्ति की सांसारिक चाहत से भगवान भी परेशान… पर फ़िर भी दे दी वो चाहत – कैसे देखिये.. एक रोचक किस्सा…

एक आदमी मुंबई के समुद्र तट के किनारे अपनी हार्ले डेविडसन बुलेट पर चला जा रहा था तभी अचानक आकाश में बादल छा गये और गूँजती हुई आवाज में भगवान बोले, “तुम मेरे प्रति बहुत ईमानदार रहे हो और तुमने मेरी बहुत पूजा की है, मैं तुम्हें एक वरदान देना चाहता हूँ, मांगो..”

उसने झट से बुलेट रोकी और बोला “यहाँ से हवाई द्वीप तक के लिये एक पुल बना दो” तो जब भी मेरी इच्छा होगी मैं अपनी बुलेट से जा सकता हूँ। भगवान बोले – “तुम्हारी इच्छा भौतिकतावादी है, जरा सोचो इस पुल को बनाने में कितनी भारी चुनौतियाँ हैं, फ़िर इसके लिये समुद्र की तह से कांक्रीट और इस्पात के पिलर बनाने होंगे, और कई प्राकृतिक संसाधन तो लगभग समाप्त ही हो जायेंगे। मैं यह कर सकता हूँ लेकिन मेरे लिये बहुत कठिन है तुम्हारी यह सांसारिक बात पूर्ण करना, और बहुत कठिन होगा मेरे लिये इसका औचित्य बताना। तुम सोचने के लिये थोड़ा और समय लो संभवत: इससे मानव जाति की मदद हो पायेगी।”

उस आदमी ने बहुत देर तक सोचा और फ़िर अंत में उसने कहा “भगवान, मैं और सभी पुरुष महिलाओं को समझ सकें; मैं जानना चाहता हूँ कि वो अपने अंदर कैसा महसूस करती हैं, वो क्या सोचती हैं जब वे मेरे सामने चुप होती हैं, वो रोती क्यों हैं, उनका क्या मतलब होता है जब वे कहती हैं “कुछ गलत नहीं है”, जब भी मैं उनकी मदद करने की कोशिश करता हूँ तो मुझे गलत क्यों समझती हैं और मेरी शिकायत क्यों करती हैं, और मैं औरत को वास्तव में कैसे सही मायने में खुश रख सकता हूँ…”

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भगवान ने कहा, “तुम्हें दो लेन का पुल चाहिये या चार लेन का ?”

टर्म इंश्योरेन्स क्या होता है.. भाग २ (What is Term Insurance…) Part 2

    जीवन बीमा की शब्दावली में, एन्डोमेन्ट प्लान्स को “लाभ के साथ योजना” कहा जाता है। वे व्यक्तियों के जीवन को सुरक्षित करते हैं अगर कुछ हो जाता है, और अगर उस व्यक्ति को बीमा अवधिकाल के बाद जीवित रहता है तो उसे परिपक्वता राशि (Maturity Amount) मिल जाता है। और अगर बीमाधारक व्यक्ति की मौत बीमा अवधिकाल में ही हो जाती है तो उसके नॉमिनी को बीमा राशि और जितना भी निवेश किया गया है बोनस के साथ दे दिया जाता है। और अगर व्यक्ति अपने बीमा के अवधिकाल के बाद भी जीवित रहता है तो वह बीमा राशि और उस पर प्राप्त लाभ या बोनस परिपक्वता राशि के तौर पर पाता है।

    जीवन बीमा अपने आप में एक शक्तिशाली बीमा है जो कि आपको अनपेक्षित जोखिम से बचाता है और आपकी अनुपस्थिती में होनेवाली परेशानी से बचाता है। इसे एक बचत के तौर पर भी देख सकते हैं, जिससे आपके बच्चों की शिक्षा, शादी, पेंशन, सेवानिवृत्ति के लाभ या किसी अन्य उद्देश्य को पूरा कर सकते हैं। टर्म बीमा खरीदने के पहले आपको इन कारकों पर विचार करना चाहिये –

1. पर्याप्त बीमा राशि

2. राईडर लाभ

3. आप जिस बीमा कंपनी से बीमा खरीदने जा रहे हैं उनका क्लेम दावा का इतिहास

4. प्रतिस्पर्धी बीमा मूल्य

5. प्रशासनिक लागत.

टर्म बीमा पॉलिसियों के प्रकार –

टर्म बीमा पॉलिसी को विभिन्न प्रकार में वर्गीकृत किया जा सकता है, जिसमें कुछ प्रमुख नीचे दिये गये हैं ;

· सिंगल प्रीमियम टर्म पॉलिसी

· नियमित प्रीमियम टर्म पॉलिसी

· प्रीमियम की वापसी के साथ टर्म पॉलिसी

· टर्म पॉलिसी जो ऋण भी कवर करती हो

3 idiots ( मुंबई लोकल के कैटल क्लास में एक विचारात्मक एवं रोचक वार्तालाप.. ) अतिथि पोस्ट

लेखक अपूर्व रस्तोगी मेरे छोटे भाई हैं और अभी ही उन्होंने अपना बी.टेक. (इलेक्ट्रानिक्स एन्ड इन्स्ट्रूमेन्टेशन) में किया है, और मरीन इंजीनियरिंग का कोर्स किया है, और अब मुँबई में नौकरी की तलाश कर रहे हैं। आजकल नौकरी की तलाश के साथ साथ वे इस्कॉन में गीता का सात दिन का कोर्स कर रहे हैं।

ये विचित्र घटना मेरे साथ मुंबई की लोकल ट्रेन मे हुई । समय था रात के १० बजे । मेरे बाई ओर दो सज्जन बैठे हुए थे  । और मेरे दाई ओर एक वृद्ध पुरुष बडे चाव से बिस्कुट का आनंद ले रहे थे । जो दो लोग मेरे बाई तरफ़ बैठे हुए थे उन्मे से एक सज्जन कहते हैं आजकल सर्दी मे भी बहुत गर्मी हो रही हैं, मैं अभी पूना से आ रहा हूँ और वहाँ भी बहुत गर्मी है इस बार । तो इस पर दूसरे सज्जन उनसे कहते है पर पूना में तो अच्छी ठंड पड़ती है भई, तो इस बार क्या हो गया । सज्जन का उत्तर आया “’ग्लोबल वार्मिंग’  मैने हाल ही मै एक फ़िल्म देखी जिसमे दिखाया गया है कि आने वाले समय मे इस धरती पर से सब कुछ समाप्त हो जायेगा, सिर्फ़ एक टापू बचता है अफ़्रीका मे” । मैने बडी उतसुकता भरी नजरों से उनकी तरफ़ मुड़ के देखा और सुनने लगा ।

पहले सज्जन (जो की एक मुस्लिम धर्म के अधेड उम्र के व्यक्ति हैं) कहते है “ये सब इंसान का ही करा- धरा है।  आज इंसान ने इतनी तरक्की कर ली है कि वो  अपने नैतिक मुल्यों एवं जिम्मेदरियों को  भूल चुका है। आज इंसान तभी अल्लाह को याद करता है जब उस पर कोई मुसीबत/परेशानी हो या उसे किसी चीज कि सख्त जरुरत हो। पर वो भूल जाता है कि अल्लाह सब देख रहा है, वो आपके हर कर्म का हिसाब रखता है, चाहे आप कहीं भी छुप जाये उसकी नजरो से नही बच सकते। आज लोग हज़ारो/ लाखों रुपया खर्चा करके हज़ को जाते है, पर किसी की मदद करने से कतराते है। पहले कोई भी व्यक्ति हमारे दर पे आता था, हम उसका हालचाल पूछ्ते थे, हो सके तो उसकी मदद भी कर देते थे , परंतु आज कोई अपने पडोसी से वास्त्ता नही रखता, बाहर के आदमी को तो भूल ही जाओ। अगर सड़क पर कोई दुर्घटना हो जाये तो लोग भीड़ का हिस्सा तो बन जाते हैं , पर कोई मदद को आगे नही आता।”

दूसरे सज्जन ( जो कि लगभग उन्ही कि उम्र के मराठी हिंदू हैं) कहते है “आप सच कह रहे है आज कल के लोग समझना ही नही चाहते हैं इस बात को।”

वृद्ध पुरुष जो मेरी दाईं ओर बैठे थे, अपना बिस्कुट का पैकिट समाप्त करने के बाद बोले “आजकल लोगों का अपने आप पर नियंत्रण नहीं है। वो अपने दौलत के नशे में चूर हो कर दूसरो का मजाक उडा रहा है। उदाहरण के तौर पर आप “विधु विनोद चोपड़आ” को ही ले लीजिये, एक दिन पहले खुद मीडिया के सामने खडे होकर बदतमीजी से बात करते है और जब उनहे लगता है कि मीडिया उन्हें या उनकी फ़िल्म की छवि को हानि पहुँचा सकती है तो चुपचाप आकर माफ़ी भी मांग ली। उनकी इस पब्लिसिटी स्टंट के कारण वो लेखक ’चेतन भगत’ अपने ही काम के लिये सम्मानित नही किया जा रहा है। हम सब लोग जानते है कि फ़िल्मी दुनिया कितना बडा छ्लावा है। आजकल ये लोग छोटी से छोटी बात को जनता के सामने इस तरह से रखते है ताकि इन की मार्केट वैल्यू बढ़ सके, ये कुछ भी करेंगे बस जनता इनकी तरफ़ खीची चली आये। ” “इसी तरह ’डीजीपी राठोड़’ को ले लीजिये ।” (उनकी बात पूरी भी नहीं हो पाई थी कि पीछे से पहले सज्जन बोले 

“पुलिस वालों की तो बात ही मत कीजिये जनाब। उनसे बडा रिश्वतखोर कोई नहीं। एक काम के लिये किसी को कैसे चक्कर लगवाने हैं ये कोई उनसे सीखे । एक हवलदार से लेकर ऊपर तक सभी भ्रष्ट हो चुके हैं। ये जितने भी बडे अफ़सर पकड़े जाते हैं  उनमें से कितनो को सजा हुई है आज तक। सब पैसे ले देकर मामला रफ़ा दफ़ा कर देते हैं। आज कल तो जज भी खरीद लिये जाते हैं, जनता जाये तो जाये कहाँ।”

तभी वो मराठी सज्जन बोलते हैं “हर जगह कुछ अच्छे लोग होते हैं और कुछ बुरे पर हमारे यहां भ्रष्टाचार बहुत तेजी से अपनी जड़े फ़ैला रहा है। पर हम लोग ये क्यों नही सोचते कि ऐसा होता क्यों है। क्या आपको पता है कि एक हवलदार की कितनी पगार है ४ हजार, ५ हजार ज्यादा से ज्यादा ६ हजार और इसमें हम चाहते है कि वो अपने परिवार का सारा गुजारा करे और लोगो के सारे काम भी पूरी ईमानदारी से करे। अरे उन लोगो से ज्यादा तो वो वेटर कमा लेता है, जो बार में काम करता है, जब लोग उसे टिप देते हैं तब तो कोई उससे ये नही पूछ्ता कि वो रिश्वत क्यों ले रहा है, पर लोग उसे खुशी खुशी पैसा देते है।” “क्यो हम इस समाज मे रहकर भी लोगो में  भेदभाव करना नही भूलते ?” “क्या होगा अगर हम पुलिस वालों की पगार बढ़ा दें तो ?” (कहीं न कहीं तो हम भी यही सोचते हैं।)

उनके इस प्रश्न के संदर्भ मे वो वृद्ध पुरुष मुस्करा के बोलते है कि “क्या आप जानते हो कि उनहे पगार कहाँ से मिलती है, हम जो टैक्स जमा करते है उससे, अगर आज की तारीख में हम इतना सारा पैसा सिर्फ़ टैक्स मे ही दे देंगे तो आदमी खुद कैसे खायेगा ?” “पैसा तो उन नेताओं से लेना चाहिये जो इसे स्विस बैंकों के लॉकरों मे दबाये बैठे हैं।”

तो क्या ये तीन लोग सही मायनो मे idiots हैं। क्या इन के द्वारा की गई मांगे गलत हैं?क्या आजकल लोगो मे ईमानदारी और जिम्मेदारी विलुप्त नहीं होती जा रही है ? सोचिये और इसकी गहराई को समझिये कि हम अपने आने वाली पीढ़ी को क्या दे रहे हैं ?                                          

“एक बेह्तर आज या अंधकार में डूबा कल”